केन्द्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना निम्नलिखित में से किस समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर हुयी थी ?
- (1)संथानम समिति
- (2)केलकर समिति
- (3)स्वर्ण सिंह समिति
- (4)बक्शी टेकचंद समिति
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), संथानम समिति.
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की स्थापना भारत सरकार के 11 फरवरी 1964 के संकल्प द्वारा हुई। वह संकल्प के. संथानम की अध्यक्षता वाली भ्रष्टाचार निवारण संबंधी समिति — यानी संथानम समिति — की सिफारिशों पर आधारित था।
आरंभ में CVC कानून से नहीं, कार्यपालिका के संकल्प से बना निकाय था। हवाला मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद 1998 के एक अध्यादेश ने इसे सांविधिक दर्जा दिया।
फिर केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003, 11 सितम्बर 2003 को लागू हुआ। इसके अंतर्गत आयोग में एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं।
इसलिए CVC की स्थापना के पीछे की समिति संथानम समिति है; बाद के अध्यादेश और अधिनियम ने उसका कानूनी आधार बदला, उसका मूल नहीं।
जोड़ियाँ याद रखिए: संथानम समिति → CVC (1964); स्वर्ण सिंह समिति → मूल कर्तव्य (1976)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)केलकर समिति — विजय केलकर ने सतर्कता से नहीं, आर्थिक नीति से जुड़े निकायों की अध्यक्षता की। इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सुधार पर 2002 के कार्यबल और अवसंरचना के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर पुनर्विचार के लिए 2015 की समिति शामिल हैं।
केलकर को काका कालेलकर से न मिलाएँ, जिन्होंने 1953 में नियुक्त प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्षता की थी। इन दोनों में से कोई CVC से नहीं जुड़ा।
- (3)स्वर्ण सिंह समिति — 1976 की स्वर्ण सिंह समिति एक दूसरे प्रश्न का उत्तर है: उसने संविधान में मूल कर्तव्य जोड़ने की सिफारिश की।
42वें संशोधन, 1976 ने भाग IVA और अनुच्छेद 51A जोड़कर ऐसा किया। यह समिति 1964 में CVC की स्थापना के बारह वर्ष बाद आई, इसलिए उसकी स्थापना का आधार नहीं हो सकती।
- (4)बक्शी टेकचंद समिति — बक्शी टेकचंद ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 और विशेष पुलिस स्थापना की समीक्षा के लिए 1949 में बनी समिति की अध्यक्षता की। उस समिति ने भ्रष्टाचार के मामले देखने वाले पुलिस निकाय को परखा, इसलिए यह विकल्प आकर्षक लग सकता है।
उन्होंने पेटेंट जाँच समिति (1948–50) की भी अध्यक्षता की। इनमें से किसी निकाय ने CVC की सिफारिश नहीं की; CVC की स्थापना 1964 में संथानम समिति की सिफारिशों पर हुई।
अवधारणा
केन्द्रीय सतर्कता आयोग संघ की शीर्ष सतर्कता संस्था है। यह केंद्र सरकार के निकायों में सतर्कता मामलों पर सलाह देता है, और केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) का पर्यवेक्षण करता है।
यह बहु-सदस्यीय निकाय है: एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त।
राष्ट्रपति इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोक सभा में विपक्ष के नेता की समिति की सिफारिश पर करता है। हर सदस्य चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रहता है।
CVC एक सांविधिक निकाय है, संवैधानिक नहीं।
पाठ्यक्रम का शीर्षक "भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली" सीधे "केन्द्रीय सतर्कता आयोग" का नाम लेता है। CVC उन कई भारतीय संस्थाओं में से है जिनकी शुरुआत किसी समिति के प्रतिवेदन से हुई — यहाँ भ्रष्टाचार निवारण पर संथानम समिति।
इसी विषय का राजस्थान पक्ष राज्य का अपना भ्रष्टाचार-विरोधी तंत्र है, जिसमें राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अंतर्गत लोकायुक्त शामिल है; पाठ्यक्रम इसे "लोकायुक्त" नाम से सूचीबद्ध करता है।
संस्थाओं का कानूनी मूल अलग-अलग होता है — संकल्प, अध्यादेश, अधिनियम या संविधान संशोधन। CVC 1964 के संकल्प से 1998 के अध्यादेश और फिर 2003 के अधिनियम तक पहुँचा।
स्वर्ण सिंह समिति मूल कर्तव्यों से जुड़ती है, जो इसी शीर्षक के अंतर्गत एक अलग विषय है।
मुख्य तथ्य
- CVC की स्थापना संथानम समिति की सिफारिशों पर भारत सरकार के 11 फरवरी 1964 के संकल्प द्वारा हुई।
- 1998 के एक अध्यादेश ने CVC को सांविधिक दर्जा दिया; केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003, 11 सितम्बर 2003 को लागू हुआ।
- CVC में एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं।
- इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोक सभा में विपक्ष के नेता की सिफारिश पर करता है।
- स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने मूल कर्तव्यों की सिफारिश की, जिन्हें 42वें संशोधन ने अनुच्छेद 51A के रूप में जोड़ा।
इनमें से केवल संथानम समिति की सिफारिशों से CVC बना।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केलकर और कालेलकर मिलते-जुलते नाम हैं। विजय केलकर की समितियाँ कर और अवसंरचना नीति पर थीं; काका कालेलकर ने प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्षता की।
- भ्रष्टाचार-विरोधी ऐसा नाम चुन लेना जो किसी और परिणाम से जुड़ा है। बक्शी टेकचंद की समिति ने विशेष पुलिस स्थापना की जाँच की; CVC संथानम समिति से आया।
- स्थापना और सांविधिक दर्जे को मिला देना। CVC 1964 के संकल्प से बना; सांविधिक दर्जा 1998 के अध्यादेश और 2003 के अधिनियम से मिला।
समिति पर प्रश्न किसी संस्था, सुधार या संशोधन का नाम देकर पूछ सकता है कि किस समिति ने उसकी सिफारिश की, या समिति का नाम देकर उसका परिणाम पूछ सकता है।
इससे जुड़ा प्रश्न CVC की संरचना, उसके सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है, या वह सांविधिक निकाय कब बना, यह परख सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021, 2018 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
केन्द्रीय सतर्कता आयोग किस वर्ष के केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक निकाय बना?
- (a)1964
- (b)1998
- (c)2003
- (d)2013
उत्तर(3) — केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003, 11 सितम्बर 2003 को लागू हुआ। विकल्प (1), 1964, उस कार्यपालिका संकल्प का वर्ष है जिससे CVC बना। विकल्प (2), 1998, एक अध्यादेश का वर्ष है, अधिनियम का नहीं। विकल्प (4), 2013, लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम का वर्ष है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति की सिफारिश करने वाली समिति का सदस्य निम्नलिखित में से कौन है?
- (a)भारत का मुख्य न्यायाधीश
- (b)केंद्रीय गृह मंत्री
- (c)लोक सभा अध्यक्ष
- (d)मंत्रिमंडल सचिव
उत्तर(2) — समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोक सभा में विपक्ष का नेता होते हैं। भारत का मुख्य न्यायाधीश (1), लोक सभा अध्यक्ष (3) और मंत्रिमंडल सचिव (4) इसके सदस्य नहीं हैं।