निम्नलिखित में से वो कौन सा विषय है जिस पर 31 दिसम्बर, 2023 को वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वित्त आयोग अपनी सिफारिश नहीं करेगा ?
- (1)संविधान के अध्याय I भाग XII के तहत संघ और राज्यों के बीच विभाजित किए जाने या किए जा सकने वाले करों के निवल आगमों का वितरण ।
- (2)वे सिद्धांत जो भारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व के सहायता अनुदान को नियंत्रित करते हैं ।
- (3)पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय ।
- (4)जलवायु प्रबंधन पहल के वित्त–पोषण पर वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), जलवायु प्रबंधन पहल के वित्त–पोषण पर वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा ।
31 दिसम्बर 2023 की अधिसूचना से गठित वित्त आयोग सोलहवाँ वित्त आयोग है, जिसके अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया हैं।
इसके विचारार्थ विषयों में तीन विषय ऐसे हैं जिन पर आयोग सिफारिश करेगा। ये संविधान के अनुच्छेद 280(3) के खंड (a), (b), (bb) और (c) के कर्तव्यों को दोहराते हैं: केंद्रीय करों का बँटवारा, राज्यों को सहायता अनुदान, और पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति।
विकल्प (1), (2) और (3) इन्हीं तीन विषयों की शब्दावली को संक्षिप्त रूप में दोहराते हैं। इसलिए इन तीनों पर आयोग सिफारिश करता है।
जिस विषय पर वह सिफारिश नहीं करेगा, वह विकल्प (4) है: जलवायु प्रबंधन पहल के वित्त–पोषण पर वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा । विचारार्थ विषयों में समीक्षा का एक खंड है, पर वह आपदा प्रबंधन के बारे में है।
उस खंड के अनुसार आयोग आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित निधियों के संदर्भ में आपदा प्रबंधन पहलों के वित्त-पोषण की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर सकता है, और उन पर उचित सिफारिशें कर सकता है।
एक शब्द का बदलाव — आपदा की जगह जलवायु — एक वास्तविक दायित्व को ऐसे दायित्व में बदल देता है जो विचारार्थ विषयों में है ही नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)संविधान के अध्याय I भाग XII के तहत संघ और राज्यों के बीच विभाजित किए जाने या किए जा सकने वाले करों के निवल आगमों का वितरण । — यह विचारार्थ विषयों का पहला विषय है, जो अनुच्छेद 280(3)(a) से लिया गया है। यह संघ और राज्यों के बीच केंद्रीय करों का बँटवारा (ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण) है, और विचारार्थ विषय इसके साथ उस हिस्से का राज्यों के बीच आवंटन भी जोड़ते हैं।
आयोग इस पर सिफारिश करता है, इसलिए यह उस प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता जो पूछता है कि वह किस विषय पर सिफारिश नहीं करेगा।
- (2)वे सिद्धांत जो भारत की संचित निधि से राज्यों के राजस्व के सहायता अनुदान को नियंत्रित करते हैं । — यह विचारार्थ विषयों का दूसरा विषय है, अनुच्छेद 280(3)(b) से। इसमें राज्यों को सहायता अनुदान के सिद्धांत आते हैं, और विचारार्थ विषय इसमें संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत राज्यों को दी जाने वाली राशियाँ भी जोड़ते हैं।
यह हर वित्त आयोग की मुख्य सिफारिशों में से है, इसलिए यह छोड़ा गया विषय नहीं है।
- (3)पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय । — यह विचारार्थ विषयों का तीसरा विषय है। यह पंचायतों के लिए अनुच्छेद 280(3)(bb) और नगरपालिकाओं के लिए खंड (c) से आता है, जिन्हें संविधान (73वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 और संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 ने जोड़ा।
ये उपाय राज्य के वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर सुझाए जाते हैं। यह एक वास्तविक दायित्व है, इसलिए यह उत्तर नहीं है।
अवधारणा
वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत एक संवैधानिक निकाय है। राष्ट्रपति हर पाँचवें वर्ष या उससे पहले इसका गठन करता है, जिसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं।
अनुच्छेद 280(3) इसके कर्तव्य तय करता है: साझा किए जाने वाले केंद्रीय करों के निवल आगमों का संघ और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपस में बँटवारा; राज्यों को सहायता अनुदान के सिद्धांत; और पंचायतों व नगरपालिकाओं के लिए राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय।
खंड (3)(d) इसमें कोई भी ऐसा अन्य विषय जोड़ता है जो राष्ट्रपति सुदृढ़ वित्त के हित में आयोग को सौंपे। किसी आयोग के विचारार्थ विषयों में खंड (a) से (c) के अलावा भी विषय हो सकते हैं; सोलहवें आयोग के विषयों में आपदा प्रबंधन के वित्त-पोषण की समीक्षा शामिल है।
आयोग सिफारिश करता है; कौन-सी सिफारिश स्वीकार हो, यह केंद्र सरकार तय करती है।
वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत संवैधानिक निकाय है, और यह विषय पाठ्यक्रम के शीर्षक "भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली" के अंतर्गत आता है। हर आयोग अपने लिए अधिसूचित विचारार्थ विषयों पर भी काम करता है, जिनमें संवैधानिक कर्तव्यों के अलावा विषय जोड़े जा सकते हैं।
सोलहवाँ आयोग राजस्थान के लिए महत्त्वपूर्ण है: उसकी सिफारिशें स्वीकार होने पर 1 अप्रैल 2026 से पाँच वर्षों के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा और उसे मिलने वाले अनुदान तय करती हैं।
पंचायत और नगरपालिका वाला खंड राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों से भी जुड़ता है, जो राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करते हैं।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति हर पाँचवें वर्ष या उससे पहले वित्त आयोग का गठन करता है, जिसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 नवम्बर 2023 को सोलहवें वित्त आयोग के विचारार्थ विषय अनुमोदित किए; अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में आयोग का गठन 31 दिसम्बर 2023 को हुआ।
- विचारार्थ विषयों के अनुसार सोलहवें आयोग को 31 अक्टूबर 2025 तक प्रतिवेदन देना था, जो 1 अप्रैल 2026 से पाँच वर्षों की अवधि के लिए हो।
- समीक्षा का खंड आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित निधियों के संदर्भ में आपदा प्रबंधन पहलों के वित्त-पोषण से संबंधित है।
- 27 नवम्बर 2017 को गठित पंद्रहवें वित्त आयोग ने छह वर्षों, 2020-21 से 2025-26, के लिए सिफारिशें कीं।
पहली तीन पंक्तियाँ अनुच्छेद 280(3) से आती हैं; समीक्षा का खंड आपदा प्रबंधन का है, जलवायु प्रबंधन का नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकल्प (4) के "जलवायु प्रबंधन" को आपदा प्रबंधन पढ़ लेना। एक शब्द के बदलाव से वास्तविक खंड ऐसा खंड बन जाता है जो विचारार्थ विषयों में है ही नहीं।
- प्रश्न का "नहीं" छूट जाना। विकल्प (1), (2) और (3) तीनों वास्तविक दायित्व हैं; प्रश्न वह विषय पूछता है जिस पर आयोग सिफारिश नहीं करेगा।
- समीक्षा के खंड को अनुच्छेद 280(3) के खंड (a) से (c) के कर्तव्यों में से एक मान लेना। आपदा प्रबंधन का वित्त-पोषण इस आयोग के विचारार्थ विषयों में जोड़ा गया अतिरिक्त विषय है, कोई स्थायी संवैधानिक कर्तव्य नहीं।
वित्त आयोग पर प्रश्न उसके विचारार्थ विषयों को उद्धृत करके उनमें एक ब्योरा बदल सकता है — कोई शब्द, कोई तिथि या सिफारिशों की अवधि। वह यह भी पूछ सकता है कि कोई कर्तव्य किस अनुच्छेद या खंड से आता है।
प्रश्न यह भी परख सकता है कि आयोग का गठन कौन करता है, उसमें कितने सदस्य होते हैं, और कौन-सा आयोग किन वर्षों के लिए है।
संबंधित PYQ
UnlockIAS ने इस प्रश्न की तुलना अन्य RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न-पत्रों के प्रश्नों से की; कोई भी जोड़ने लायक मिलता-जुलता प्रश्न नहीं मिला।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशें पाँच वर्षों की जिस अवधि के लिए हैं, वह किस तिथि से शुरू होती है?
- (a)1 अप्रैल 2025
- (b)1 अप्रैल 2026
- (c)1 अप्रैल 2027
- (d)1 अप्रैल 2031
उत्तर(2) — विचारार्थ विषय अवधि को 1 अप्रैल 2026 से पाँच वर्ष तय करते हैं, क्योंकि पंद्रहवें आयोग की अवधि 2025-26 तक चलती है। विकल्प (1) पंद्रहवें आयोग की अवधि के भीतर पड़ता है। विकल्प (3) विचारार्थ विषयों की किसी बात से मेल नहीं खाता। विकल्प (4) सोलहवें आयोग के पाँच वर्ष पूरे होने के अगले दिन की तिथि है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 280(3) का कौन-सा खंड वित्त आयोग से नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपायों की सिफारिश की अपेक्षा करता है?
- (a)खंड (a)
- (b)खंड (b)
- (c)खंड (bb)
- (d)खंड (c)
उत्तर(4) — 74वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया खंड (c) नगरपालिकाओं से संबंधित है। विकल्प (3), खंड (bb), पंचायतों के लिए इसी तरह का खंड है। विकल्प (1), खंड (a), करों के बँटवारे से और विकल्प (2), खंड (b), सहायता अनुदान के सिद्धांतों से संबंधित है।