लोक सभा के अध्यक्ष की शक्तियों के बारे में निम्न में से कौन से कथन सही हैं ? नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये : (i) लोक सभा अध्यक्ष संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हैं । (ii) जब एक वित्त विधेयक को निचले सदन से उच्च सदन को भेजा जाता है तो अध्यक्ष द्वारा उस विधेयक को वित्त विधेयक के तौर पर प्रमाणपत्र दिया जाता है । (iii) जब अध्यक्ष को हटाये जाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब अध्यक्ष ना तो अध्यक्षता करेंगे और ना ही कार्यवाहियों में भाग लेंगे । (iv) मतों की समानता के अलावा, अध्यक्ष सदन में मतदान नहीं करते । कूट :
- (1)केवल (i) और (iii)
- (2)केवल (i) और (ii)
- (3)केवल (i), (ii) और (iv)
- (4)केवल (i), (ii) और (iii)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), केवल (i), (ii) और (iv).
(i) सही। अनुच्छेद 118(4): दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में लोक सभा का अध्यक्ष पीठासीन होता है।
(ii) सही — पर हिन्दी पाठ का एक शब्द ध्यान से पढ़िए। कथन "वित्त विधेयक" कहता है, जबकि प्रश्नपत्र के अंग्रेज़ी पाठ में यहाँ धन विधेयक (Money Bill) है। अनुच्छेद 110(4) के अनुसार राज्य सभा को भेजे जाने वाले और राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले हर धन विधेयक पर अध्यक्ष का हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र होता है कि वह धन विधेयक है।
संविधान के हिन्दी पाठ में "वित्त विधेयक" अनुच्छेद 117 के विधेयकों का नाम है, धन विधेयक का नहीं।
पुस्तिका का निर्देश 12 ऐसे अंतर का निपटारा करता है: हिन्दी और अंग्रेज़ी पाठ में किसी अस्पष्टता या त्रुटि पर अंग्रेज़ी पाठ मानक माना जाएगा। इसलिए कथन (ii) अंग्रेज़ी पाठ के अर्थ में, यानी धन विधेयक के रूप में, पढ़ा जाता है।
(iii) गलत। अनुच्छेद 96(1) अध्यक्ष को उसे हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन रहने तक अध्यक्षता करने से रोकता है। पर अनुच्छेद 96(2) उसे कार्यवाही में बोलने और अन्य प्रकार से भाग लेने का अधिकार देता है — इसलिए "ना ही कार्यवाहियों में भाग लेंगे" गलत है।
(iv) सामान्य नियम के रूप में सही। अनुच्छेद 100(1): अध्यक्ष प्रथमतः मत नहीं देता, पर मत बराबर होने पर उसके पास निर्णायक मत होता है।
सही कथन (i), (ii) और (iv) से उत्तर बनता है केवल (i), (ii) और (iv)। हटाने की कार्यवाही अध्यक्ष की सामान्य स्थिति उलट देती है: वह अध्यक्षता नहीं कर सकता, पर बोल सकता है, भाग ले सकता है और प्रथमतः मत दे सकता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)केवल (i) और (iii) — इसमें कथन (iii) शामिल है, जो गलत है। अनुच्छेद 96(2) के अंतर्गत अध्यक्ष को अपने हटाए जाने के प्रस्ताव की कार्यवाही में बोलने और अन्य प्रकार से भाग लेने का अधिकार है; वह केवल पीठासीन नहीं रह सकता।
इसमें दो सही कथन भी छूट जाते हैं: (ii), अनुच्छेद 110(4) के अंतर्गत धन विधेयक का प्रमाणपत्र, और (iv), अनुच्छेद 100(1) के अंतर्गत निर्णायक मत।
- (2)केवल (i) और (ii) — इसमें कथन (iv) छूट जाता है, जो अनुच्छेद 100(1) के अंतर्गत अध्यक्ष के निर्णायक मत का वर्णन करता है: प्रथमतः मत नहीं, मत बराबर होने पर निर्णायक मत।
अनुच्छेद 96(2) एक विशेष स्थिति बनाता है — हटाने की कार्यवाही के दौरान वह प्रथमतः मत दे सकता है, पर मत बराबर होने पर नहीं। यह अपवाद कथन में दिए गए सामान्य नियम को निरस्त नहीं करता, और RPSC की कुंजी (iv) को सही मानती है।
- (4)केवल (i), (ii) और (iii) — यह सही कथन (iv) की जगह गलत कथन (iii) रख देता है। अध्यक्ष को हटाने की कार्यवाही से बाहर नहीं रखा जाता: अनुच्छेद 96(2) उसे बोलने, भाग लेने और प्रथमतः मत देने देता है, यद्यपि वह पीठासीन नहीं हो सकता।
अनुच्छेद 100(1) के अंतर्गत निर्णायक मत वाला कथन (iv) ही कूट में होना चाहिए।
अवधारणा
अध्यक्ष लोक सभा की अध्यक्षता करता है और उसके पास कई ऐसी शक्तियाँ हैं जो संविधान नाम लेकर देता है।
अध्यक्ष दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में पीठासीन होता है (अनुच्छेद 118(4)), कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय करता है (अनुच्छेद 110(3)) और उसे प्रमाणित करता है (अनुच्छेद 110(4)), और केवल बराबर मत होने पर मत देता है (अनुच्छेद 100(1))।
अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 14 दिन की सूचना के बाद सदन के तत्कालीन सभी सदस्यों का बहुमत चाहिए (अनुच्छेद 94(ग))। जब तक यह विचाराधीन हो, अनुच्छेद 96 उसे पीठासीन होने से रोकता है, पर बोलने, भाग लेने और प्रथमतः मत देने देता है — बराबर मत होने पर नहीं।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भारतीय राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत संसद शामिल है। इस प्रश्न की शक्तियाँ कुछ ही अनुच्छेदों से आती हैं — 96, 100, 110 और 118 — और अध्यक्ष का निर्वाचन तथा हटाया जाना अनुच्छेद 93 और 94 में है।
हटाने वाले उपबंध को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है, क्योंकि यह एक साथ तीन नियम बदलता है: अध्यक्ष पीठासीन नहीं हो सकता, भाग ले सकता है, और बराबर मत की जगह प्रथमतः मत देता है।
अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठकें विरले होती हैं। परीक्षा की तिथि तक तीन हुई थीं — 1961 (दहेज प्रतिषेध विधेयक), 1978 (बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक) और 2002 (आतंकवाद निवारण विधेयक) — और इनकी अध्यक्षता अध्यक्ष करता है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 118(4): दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में लोक सभा का अध्यक्ष पीठासीन होता है।
- अनुच्छेद 110(3) कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर अध्यक्ष के निर्णय को अंतिम बनाता है; अनुच्छेद 110(4) उस पर अध्यक्ष का प्रमाणपत्र अनिवार्य करता है।
- अनुच्छेद 100(1): अध्यक्ष प्रथमतः मत नहीं देता, पर मत बराबर होने पर उसके पास निर्णायक मत होता है।
- अनुच्छेद 96: अपने हटाए जाने के प्रस्ताव के दौरान अध्यक्ष पीठासीन नहीं हो सकता, पर बोल सकता है, भाग ले सकता है और प्रथमतः मत दे सकता है।
- फरवरी 2025 तक अनुच्छेद 108 के अंतर्गत तीन बार संयुक्त बैठक हुई थी — 1961, 1978 और 2002 में।
सही कथन (i), (ii) और (iv) से विकल्प (3) बनता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- "अध्यक्षता नहीं कर सकता" का अर्थ "भाग नहीं ले सकता" नहीं है। हटाने की कार्यवाही में अध्यक्ष केवल पीठासीन रहने का अधिकार खोता है; वह बोल सकता है, भाग ले सकता है और मत दे सकता है।
- हटाने के दौरान मतदान का नियम उलट जाता है: सामान्यतः केवल बराबर मत होने पर निर्णायक मत; हटाने के प्रस्ताव पर प्रथमतः मत, पर बराबर मत होने पर नहीं।
- राज्य सभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता; लोक सभा का अध्यक्ष करता है।
- धन विधेयक (अनुच्छेद 110) और वित्त विधेयक (अनुच्छेद 117) अलग-अलग वर्ग हैं। अनुच्छेद 110(4) के अंतर्गत अध्यक्ष का प्रमाणपत्र धन विधेयक पर होता है।
एक रूप अध्यक्ष की शक्तियों को क्रमांकित कथनों में देकर पूछता है कि कौन-से सही हैं, जिनमें से एक कथन किसी प्रतिबंध को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है, जैसा यहाँ है।
दूसरा रूप पूछता है कि संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है, या धन विधेयक पर किसका प्रमाणपत्र होता है।
तीसरा रूप मतदान, हटाए जाने और अध्यक्षता के आधार पर अध्यक्ष की तुलना राज्य सभा के सभापति से करता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जब लोक सभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब अध्यक्ष:
- (a)पीठासीन हो सकता है और प्रथमतः मत दे सकता है
- (b)को सदन से अनुपस्थित रहना होगा
- (c)पीठासीन नहीं हो सकता, पर बोल सकता है, भाग ले सकता है और प्रथमतः मत दे सकता है
- (d)पीठासीन नहीं हो सकता, और केवल मत बराबर होने पर मत दे सकता है
उत्तर(3) — अनुच्छेद 96 अध्यक्ष को पीठासीन होने से रोकता है, पर बोलने, भाग लेने और प्रथमतः मत देने देता है। विकल्प (1) गलत है, क्योंकि वह पीठासीन नहीं हो सकता। विकल्प (2) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 96(1) उसके उपस्थित रहने की स्थिति मानकर चलता है और 96(2) उसे भाग लेने देता है। विकल्प (4) नियम को उलट देता है: वह प्रथमतः मत दे सकता है, बराबर मत होने पर नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
- (a)भारत का राष्ट्रपति
- (b)राज्य सभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति
- (c)लोक सभा का अध्यक्ष
- (d)राज्य सभा का वरिष्ठतम सदस्य
उत्तर(3) — अनुच्छेद 118(4) के अनुसार संयुक्त बैठक में लोक सभा का अध्यक्ष पीठासीन होता है।विकल्प (1) गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करता है, पर उसकी अध्यक्षता नहीं करता। विकल्प (2) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 118(4) में राज्य सभा के सभापति का नाम नहीं है। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पीठासीन होने वाला व्यक्ति अनुच्छेद 118(3) के अंतर्गत बने नियमों से तय होता है, राज्य सभा में वरिष्ठता से नहीं।