किस राजनीतिक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने संविधान सभा को भंग कर उसका पुनर्निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर करने को कहा था ?
- (1)हिंदू महासभा
- (2)समाजवादी दल
- (3)स्वराज दल
- (4)मुस्लिम लीग
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), समाजवादी दल.
संविधान सभा को जनता ने सीधे नहीं चुना था। 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत इसके प्रांतीय सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं ने चुने थे, और वे विधान सभाएँ स्वयं सीमित मताधिकार पर चुनी गई थीं।
समाजवादी 1930 के दशक के मध्य से कांग्रेस के भीतर कांग्रेस समाजवादियों के रूप में काम करते रहे थे, और 1948 के आरंभ में अलग होकर उन्होंने एक अलग दल बनाया। वे संविधान सभा से बाहर रहे थे, और 1947 में उनके कुछ नेताओं को सभा में लाने का प्रयास विफल रहा।
मई 1948 तक दल का रुख और कड़ा हो गया। ग्रैनविल ऑस्टिन लिखते हैं कि 24–26 मई 1948 को बेलगाम में समाजवादी दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक प्रस्ताव ने सभा को भंग करने और वयस्क मताधिकार के आधार पर उसके पुनर्निर्वाचन की माँग की।
यह माँग वैधता का प्रश्न थी: समाजवादियों का तर्क था कि अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए विधायकों द्वारा चुनी गई संस्था की जगह हर वयस्क द्वारा चुनी गई संस्था आनी चाहिए। सभा चलती रही, और वयस्क मताधिकार उसी संविधान से आया जिसे उसने बनाया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)हिंदू महासभा — संविधान सभा में हिंदू महासभा का कोई आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं था। ऑस्टिन के अनुसार इस अनुपस्थिति का विशेष अर्थ नहीं था; वे यह भी बताते हैं कि महासभा के सदस्य दूसरे समर्थन से सभा में मौजूद थे — एम. आर. जयकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कांग्रेस के टिकट पर आए थे।
इसने सभा को भंग कर वयस्क मताधिकार पर पुनर्निर्वाचन की माँग नहीं की; वह प्रस्ताव समाजवादी दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का था।
- (3)स्वराज दल — स्वराज दल एक अलग दौर का है। चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में इसकी स्थापना की, ताकि भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत बनी विधान परिषदों के चुनाव लड़े जा सकें और उनके भीतर रहकर सरकार का विरोध किया जा सके।
दिसंबर 1946 में संविधान सभा की बैठक होने तक यह कोई शक्ति नहीं रह गया था, इसलिए 1948 में सभा के पुनर्निर्वाचन की माँग करने वाला दल यह नहीं हो सकता।
- (4)मुस्लिम लीग — 1946 में जिन्ना ने कैबिनेट मिशन योजना पर लीग की स्वीकृति वापस ले ली और लीग के प्रतिनिधियों से संविधान सभा का बहिष्कार करने को कहा। ऑस्टिन लिखते हैं कि लीग ने बहिष्कार कभी वापस नहीं लिया; लीग के जो प्रतिनिधि सभा में आए, वे केवल वही थे जो विभाजन के बाद भारत में रह गए।
उसका विरोध स्वयं सभा से था, और उसने दूर रहकर जवाब दिया — वयस्क मताधिकार पर पुनर्निर्वाचन माँगकर नहीं। वह माँग 1948 में समाजवादी दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने की थी।
अवधारणा
भारत की संविधान सभा अप्रत्यक्ष रूप से चुनी गई संस्था थी। 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत प्रांतों के सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा चुने गए, और देशी रियासतों को अपनी अलग सीटें दी गईं।
प्रांतीय विधान सभाएँ 1946 के आरंभ में भारत शासन अधिनियम, 1935 के सीमित मताधिकार पर चुनी गई थीं, जिसमें कर, संपत्ति और शैक्षिक योग्यताएँ थीं। संविधान निर्माताओं को चुनने में अधिकांश वयस्क भारतीयों की कोई सीधी भूमिका नहीं थी।
इस कमी की आलोचना हुई। इसका सबसे तीखा संगठित रूप समाजवादी दल से आया, जिसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मई 1948 में प्रस्ताव पारित किया कि सभा भंग हो और वयस्क मताधिकार पर फिर से चुनी जाए। सभा बनी रही और उसने संविधान पूरा किया।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में संविधान सभा "भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली" के अंतर्गत आती है। इस पर प्रश्न उसकी संरचना और निर्वाचन की विधि, उसके अधिवेशनों और समितियों, या उसकी आलोचनाओं की परख कर सकते हैं।
यह प्रश्न अंतिम समूह में आता है। यह आसान हो जाता है यदि 1946–48 के दलों को उनके रुख से अलग-अलग पहचाना जाए: सभा में कांग्रेस का प्रभुत्व था, मुस्लिम लीग ने उसका बहिष्कार किया, समाजवादी बाहर रहे और पुनर्निर्वाचन माँगा, और हिंदू महासभा का कोई आधिकारिक समूह नहीं था।
यह विषय अनुच्छेद 326 से जुड़ता है, जिसके अंतर्गत लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होते हैं।
मुख्य तथ्य
- कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अंतर्गत संविधान सभा के प्रांतीय सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा चुने गए।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई; मुस्लिम लीग ने उसका बहिष्कार किया।
- समाजवादी 1948 के आरंभ में कांग्रेस से अलग हुए और एक अलग समाजवादी दल बनाया।
- समाजवादी दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रस्ताव (बेलगाम, 24–26 मई 1948) ने सभा को भंग कर वयस्क मताधिकार पर पुनर्निर्वाचन की माँग की।
- अनुच्छेद 326 लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर कराने का उपबंध करता है।
बाहर रहना, बहिष्कार करना और पुनर्निर्वाचन माँगना तीन अलग रुख हैं; वयस्क मताधिकार पर पुनर्निर्वाचन की माँग केवल समाजवादियों ने की।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सभा से बाहर रहना उसके पुनर्निर्वाचन की माँग करने के समान नहीं है। कई समूहों की कोई आधिकारिक उपस्थिति नहीं थी; प्रश्न पूछता है कि किस दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सभा भंग करने की माँग पारित की।
- मुस्लिम लीग ने भी सभा का विरोध किया, पर बहिष्कार करके — वयस्क मताधिकार पर उसके पुनर्निर्वाचन की माँग करके नहीं।
- स्वराज दल संवैधानिक राजनीति वाला उत्तर लगता है, पर वह 1923 का है और 1919 के अधिनियम के अंतर्गत परिषद-प्रवेश से जुड़ा है, यानी सभा की बैठक से दो दशक पहले का।
एक रूप किसी दल या नेता का रुख बताता है — किसने सभा का बहिष्कार किया, किसने पुनर्निर्वाचन माँगा, कौन बाहर रहा — और संगठन का नाम पूछता है।
दूसरा रूप सभा के स्वरूप पर कथन देता है, जैसे वह वयस्क मताधिकार पर आधारित थी या प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई थी, और पूछता है कि कौन-से कथन सही हैं।
तीसरा रूप तिथियों और अधिवेशनों की परख करता है, दिसंबर 1946 की पहली बैठक से जनवरी 1950 के अंतिम अधिवेशन तक।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अंतर्गत संविधान सभा में प्रांतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य किसके द्वारा चुने गए थे?
- (a)वयस्क मताधिकार पर प्रत्यक्ष निर्वाचन
- (b)प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्य
- (c)गवर्नर-जनरल द्वारा नामांकन
- (d)केंद्रीय विधान सभा के सदस्य
उत्तर(2) — प्रांतीय सदस्यों को प्रांतीय विधान सभाओं ने चुना। विकल्प (1) वह है जिसकी माँग समाजवादी दल ने की थी, जो हुआ वह नहीं। विकल्प (3) गलत है, क्योंकि गवर्नर-जनरल ने प्रांतीय सदस्यों को नामांकित नहीं किया। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं के माध्यम से हुआ, केंद्रीय विधानमंडल के माध्यम से नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विधान परिषदों के चुनाव लड़ने के लिए 1923 में स्थापित स्वराज दल किसने बनाया था?
- (a)चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू
- (b)जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया
- (c)बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट
- (d)वल्लभभाई पटेल और राजेन्द्र प्रसाद
उत्तर(1) — सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने परिषदों में प्रवेश के लिए स्वराज दल की स्थापना की। विकल्प (2) में 1948 में बने समाजवादी दल के नेता हैं। विकल्प (3) में 1916 की दो होमरूल लीगों के नेता हैं। विकल्प (4) में दो 'अपरिवर्तनवादी' नेता हैं, जिन्होंने 1922–23 में परिषद-प्रवेश का विरोध किया।