स्तूपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. ‘स्तूप’ शब्द एक वास्तुशिल्प शब्द है और इसका अर्थ है वह चीज जो कि संचय के माध्यम से बनाई हो । B. मृतकों की स्मृति में ‘स्तूप’ बनाने की प्रथा बौद्धकाल से पूर्व की थी ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), A और B दोनों सत्य हैं ।
कथन A सत्य है। राधाकुमुद मुखर्जी की 'हिन्दू सिविलाइज़ेशन' (1957) स्तूप का शाब्दिक अर्थ 'ऊपर उठाई गई चीज़', यानी टीला, बताती है और कहती है कि यह अवशेषों वाले टीले के लिए बौद्ध वास्तुशिल्प शब्द के रूप में प्रयुक्त होने लगा।
बी. एम. बरुआ की 'बरहुत' दर्ज करती है कि पालि शब्द थूप का अर्थ 'शंकु के आकार का ढेर', 'राशि' या 'टीला' है, और उसका क्रिया-रूप थूपीकत का अर्थ 'ढेर लगाया हुआ' है। स्तूप मिट्टी या ईंट का ढेर लगाकर बनाया गया टीला है।
कथन B सत्य है। वी. एस. अग्रवाल लिखते हैं कि स्तूप, जो अब मुख्यतः बौद्ध धर्म से जुड़ा माना जाता है, 'बहुत पहले उत्पन्न हुआ था'।
ए. एच. लॉन्गहर्स्ट की 'द स्टोरी ऑफ़ द स्तूप' (1936) समाधि-टीले (टम्युलस) को बौद्ध स्तूप का आदिरूप कहती है और बताती है कि ऐसे टीले भारत में बौद्ध धर्म के आगमन से बहुत पहले मौजूद थे।
अग्रवाल जिस रूप में महापरिनिब्बान सुत्तन्त का उद्धरण देते हैं, उसमें स्वयं बुद्ध का निर्देश है कि तथागत के लिए चार राहों के संगम पर वैसा ही स्तूप बने जैसा चक्रवर्ती राजा के लिए बनाया जाता है।
दोनों कथन सही हैं, इसलिए उत्तर विकल्प (3) है: A और B दोनों सत्य हैं ।
याद रखने की बात: स्तूप = ढेर लगाकर बना टीला, और मृतकों पर स्मृति-टीले बौद्ध धर्म से पुराने हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)केवल A सत्य है । — विकल्प (1) कथन B को अस्वीकार करता है, जबकि B सत्य है। अग्रवाल कहते हैं कि स्तूप बौद्ध धर्म से 'बहुत पहले उत्पन्न हुआ था', और लॉन्गहर्स्ट इसका मूल उन समाधि-टीलों में देखते हैं जो भारत में बुद्ध से बहुत पहले मौजूद थे।
केवल A सत्य है तब ठीक बैठता जब B स्मृति-स्तूप को बौद्ध आविष्कार बताता।
- (2)केवल B सत्य है । — विकल्प (2) कथन A को अस्वीकार करता है, जबकि A सत्य है। मुखर्जी इसका शाब्दिक अर्थ 'ऊपर उठाई गई चीज़', यानी टीला, देते हैं और स्तूप को बौद्ध वास्तुशिल्प शब्द कहते हैं; बरुआ पालि थूप का अर्थ ढेर, राशि या टीला बताते हैं।
केवल B सत्य है तभी ठीक बैठता जब स्तूप शब्द का अर्थ ढेर लगाकर बने टीले के अलावा कुछ और होता।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं । — दोनों कथन स्रोतों से मेल खाते हैं: शब्द का अर्थ ढेर लगाकर बना टीला है और यह वास्तुशिल्प शब्द के रूप में प्रयुक्त होता है (मुखर्जी, बरुआ), और मृतकों पर स्मृति-टीले बौद्ध धर्म से पहले के हैं (लॉन्गहर्स्ट, अग्रवाल)।
दोनों असत्य के लिए आवश्यक होता कि स्तूप न ढेर लगाकर बना टीला हो, न बौद्ध धर्म से पुराना।
अवधारणा
स्तूप एक टीला है, प्रायः अर्धगोलाकार, जो अवशेषों के ऊपर या किसी पवित्र स्थान को चिह्नित करने के लिए बनाया जाता है। बरुआ दिखाते हैं कि पालि पिटक में स्तूप पहले एक अन्त्येष्टि स्मारक के रूप में आता है, जिसमें चिता से एकत्र अवशेष रखे जाते हैं।
लॉन्गहर्स्ट अवशेषों वाले स्तूपों, जिन्हें धातुगर्भ (सिंहली में दागब) कहा जाता है, को उन स्तूपों से अलग करते हैं जिनमें कोई अवशेष नहीं था और जो केवल बुद्ध के जीवन की घटनाओं की स्मृति में बने।
वे लिखते हैं कि सबसे प्रारम्भिक स्तूप अपने बौद्ध-पूर्व आदिरूपों जैसे ही ईंटों से बने, कम ऊँचाई वाले गोल टीले थे; बाद के स्तूप अपने आधार के अनुपात में ऊँचे होते गए।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "प्राचीन भारत में कला एवं वास्तु।" शामिल है।
स्तूप का आकार समय के साथ बदला। लॉन्गहर्स्ट सबसे पुराने उदाहरणों में से एक, पिपरहवा के ईंटों के स्तूप को लगभग 22 फुट ऊँचा और 116 फुट चौड़े आधार वाला बताते हैं, और बाद के साँची स्तूप को 54 फुट ऊँचा और 120 फुट चौड़े आधार वाला।
भरहुत और साँची में स्तूप के चारों ओर की वेदिकाओं और तोरणों पर उभरी हुई मूर्तिकला है; अग्रवाल इन दोनों महास्तूपों को अपने क्षेत्र की संस्कृति, समाज, धर्म और कला का महाकाव्यात्मक अभिलेख कहते हैं।
मुख्य तथ्य
- मुखर्जी स्तूप का शाब्दिक अर्थ 'ऊपर उठाई गई चीज़', यानी टीला, बताते हैं, जो अवशेषों वाले टीले के लिए बौद्ध वास्तुशिल्प शब्द बना।
- बरुआ के अनुसार पालि थूप का अर्थ शंकु के आकार का ढेर, राशि या टीला है, और थूपीकत का अर्थ 'ढेर लगाया हुआ' है।
- लॉन्गहर्स्ट (1936) समाधि-टीले को स्तूप का आदिरूप कहते हैं और बताते हैं कि ऐसे टीले भारत में बौद्ध धर्म से बहुत पहले मौजूद थे।
- महापरिनिब्बान सुत्तन्त में बुद्ध चार राहों के संगम पर वैसा स्तूप बनाने को कहते हैं जैसा चक्रवर्ती राजा के लिए बनता है।
- लॉन्गहर्स्ट पिपरहवा स्तूप को लगभग 22 फुट ऊँचा और 116 फुट चौड़ा, और साँची स्तूप को 54 फुट ऊँचा और 120 फुट चौड़ा बताते हैं।
स्रोत: मुखर्जी, हिन्दू सिविलाइज़ेशन; बरुआ, बरहुत; लॉन्गहर्स्ट, द स्टोरी ऑफ़ द स्तूप; अग्रवाल, स्टडीज़ इन इंडियन आर्ट।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- स्तूप को बौद्ध आविष्कार मान लेना: स्मृति-टीले इससे पुराने हैं, और बौद्ध धर्म ने इस रूप को अपनाकर विकसित किया।
- स्तूप और चैत्य-गृह को मिलाना: स्तूप एक ठोस टीला है, जबकि चैत्य-गृह एक भवन है जिसके अर्धवृत्ताकार छोर में स्तूप हो सकता है।
- शब्द का दूसरा अर्थ भूल जाना: बरुआ बताते हैं कि ऋग्वेद और बाद के ग्रन्थों में स्तूप का अर्थ बालों की शिखा (चोटी) है; ढेर लगाकर बने टीले वाला अर्थ वही है जिसका वर्णन कथन A करता है।
कोई प्रश्न किसी स्मारक के नाम, उद्भव या प्रयोजन पर कथन देकर पूछ सकता है कि कौन-से सत्य हैं, या यह पूछ सकता है कि कोई विशेष स्तूप किस राजवंश की कला का उदाहरण है।
कोई प्रश्न स्तूप के भाग, जैसे वेदिका और तोरण, भी पूछ सकता है, या यह कि अवशेष-स्तूप में क्या रखा जाता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संस्कृत 'स्तूप' के समकक्ष पालि शब्द 'थूप' का शाब्दिक अर्थ है —
- (a)ढेर या टीला
- (b)गुफा-कक्ष
- (c)स्तम्भ
- (d)प्रवेश-द्वार
उत्तर(1) — बरुआ दर्ज करते हैं कि थूप का अर्थ शंकु के आकार का ढेर, राशि या टीला है। विकल्प (2) चैत्य-गृह का वर्णन है, विकल्प (3) स्तम्भ का, और विकल्प (4) तोरण का, जिसे लॉन्गहर्स्ट प्रवेश-द्वारों का संस्कृत नाम बताते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
महापरिनिब्बान सुत्तन्त में बुद्ध आनन्द से कहते हैं कि तथागत का स्तूप कहाँ बनाया जाए?
- (a)चार राहों के संगम पर
- (b)किसी विहार के भीतर
- (c)किसी नदी के तट पर
- (d)बोधि वृक्ष के नीचे
उत्तर(1) — अग्रवाल यह निर्देश उद्धृत करते हैं: चार राहों के संगम पर, जैसा चक्रवर्ती राजा के लिए होता है। बरुआ भी बताते हैं कि अवशेषों वाले स्तूप वहाँ बनने थे जहाँ चार राहें मिलती हों। विकल्प (2), (3) और (4) में वह स्थान नहीं है जिसका नाम दिया गया है।