सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये : सूची-I – सूची-II A. किशनगढ़ – i. साहिबदीन B. बीकानेर – ii. निहालचंद C. मेवाड़ – iii. अली रज़ा D. मारवाड़ – iv. शिवदास कूट :
- (1)A-ii, B-iv, C-i, D-iii
- (2)A-ii, B-iii, C-i, D-iv
- (3)A-ii, B-iii, C-iv, D-i
- (4)A-ii, B-i, C-iii, D-iv
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), A-ii, B-iii, C-i, D-iv.
A-ii, किशनगढ़ – निहालचंद। NCERT की कक्षा XII की पुस्तक ‘एन इंट्रोडक्शन टू इंडियन आर्ट, भाग II’ निहालचंद को सावंत सिंह का सबसे प्रसिद्ध कलाकार बताती है, जिन्होंने 1735 से 1757 के बीच उनके लिए काम किया। राधा के रूप में बणी-ठणी का उनका चित्र राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में है।
B-iii, बीकानेर – अली रज़ा। NCERT दर्ज करती है कि बीकानेर के करण सिंह ने दिल्ली के उस्ताद चित्रकार अली रज़ा को नियुक्त किया, जिनकी लगभग 1650 की सबसे पुरानी कृति बीकानेर शैली की शुरुआत मानी जाती है।
C-i, मेवाड़ – साहिबदीन। जगत सिंह प्रथम (1628–1652) के शासनकाल में साहिबदीन ने रागमाला (1628), भागवत पुराण (1648) और रामायण के युद्ध काण्ड (1652) के चित्र बनाए।
D-iv, मारवाड़ – शिवदास। यह कुंजी वाले कूट का चौथा युग्म है। मारवाड़ की राजधानी जोधपुर थी, और NCERT जोधपुर चित्रकला का अंतिम चरण महाराजा मान सिंह के शासनकाल (1803–1843) में रखती है।
हर विकल्प A-ii से शुरू होता है, इसलिए B और C निर्णय करते हैं: B-iii से विकल्प (2) और (3) बचते हैं, और C-i से विकल्प (1) और (2)। केवल विकल्प (2), A-ii, B-iii, C-i, D-iv, दोनों जाँचों में टिकता है।
याद रखने की बात: निहालचंद–किशनगढ़, अली रज़ा–बीकानेर, साहिबदीन–मेवाड़, शिवदास–मारवाड़।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-ii, B-iv, C-i, D-iii — यह कूट किशनगढ़ और मेवाड़ को सही रखता है, पर शेष दोनों को आपस में बदल देता है — बीकानेर को शिवदास से और मारवाड़ को अली रज़ा से जोड़ता है।
अली रज़ा बीकानेर के हैं, जहाँ NCERT के अनुसार करण सिंह ने उन्हें नियुक्त किया। शिवदास वह चित्रकार हैं जिन्हें कुंजी वाला कूट मारवाड़ से जोड़ता है, जिसकी राजधानी जोधपुर थी।
- (3)A-ii, B-iii, C-iv, D-i — किशनगढ़ और बीकानेर सही हैं, पर यह कूट मेवाड़ को शिवदास से और मारवाड़ को साहिबदीन से जोड़ता है।
साहिबदीन जगत सिंह प्रथम के शासनकाल के मेवाड़ी उस्ताद हैं: NCERT उनकी 1628 की रागमाला की पुष्पिका उद्धृत करती है, जिसमें राणा जगत सिंह, उदयपुर और ‘चितारा साहिवदीन’ का नाम है। कुंजी वाला कूट शिवदास को मारवाड़ से जोड़ता है।
- (4)A-ii, B-i, C-iii, D-iv — किशनगढ़ और मारवाड़ सही हैं, पर यह कूट अली रज़ा को मेवाड़ और साहिबदीन को बीकानेर भेज देता है।
मेवाड़ वाला युग्म नहीं टिकता: अली रज़ा दिल्ली से बीकानेर के करण सिंह के लिए काम करने आए थे। NCERT बीकानेर में रुकनुद्दीन के चित्रकारों में भी एक साहिबदीन का नाम देती है, जो मेवाड़ी उस्ताद के नामराशि हैं, इसलिए इस कूट को खारिज करने वाला युग्म मेवाड़–अली रज़ा है।
अवधारणा
राजस्थानी चित्रकला दरबारी शैलियों के समूह के रूप में विकसित हुई। कोई शैली प्रायः उस दरबार के नाम से जानी जाती है जिसने उसे संरक्षण दिया, और उसकी शैली में उस दरबार की रुचि, मुगलों से उसके संबंध और उसका धार्मिक झुकाव झलकता है।
चित्रकारों को शैलियों से अभिलेखों और पुष्पिकाओं के आधार पर जोड़ा जाता है। NCERT द्वारा उद्धृत साहिबदीन की 1628 की रागमाला की पुष्पिका में राणा जगत सिंह, उदयपुर और चित्रकार का नाम है।
नाम अलग-अलग दरबारों में दोहराए जा सकते हैं। NCERT मेवाड़ी उस्ताद के साथ-साथ बीकानेर में भी एक साहिबदीन का नाम देती है, इसलिए नाम जितना ही महत्व आश्रयदाता और तिथि का है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान की वास्तु परम्परा" के अंतर्गत "चित्रकला की विभिन्न शैलियाँ और हस्तशिल्प" सूचीबद्ध हैं।
NCERT मेवाड़, बूंदी, कोटा, जयपुर, बीकानेर, किशनगढ़, जोधपुर (मारवाड़), मालवा और सिरोही को उन रियासतों में गिनाती है जिनकी शैलियाँ मिलकर राजस्थानी चित्रकला बनाती हैं, मुख्यतः सोलहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ तक।
यहाँ के तीन चित्रकारों को NCERT नामित आश्रयदाताओं से जोड़ती है: अली रज़ा को बीकानेर में करण सिंह से, निहालचंद को किशनगढ़ में सावंत सिंह से और साहिबदीन को मेवाड़ में जगत सिंह प्रथम से। जोधपुर में NCERT शैली के अंतिम चरण को मान सिंह से जोड़ती है।
मुख्य तथ्य
- NCERT (कक्षा XII, ललित कला) के अनुसार निहालचंद ने 1735 से 1757 के बीच किशनगढ़ के सावंत सिंह के लिए काम किया।
- बीकानेर के करण सिंह ने दिल्ली के उस्ताद चित्रकार अली रज़ा को नियुक्त किया; वहाँ उनकी सबसे पुरानी कृति लगभग 1650 की है।
- साहिबदीन ने जगत सिंह प्रथम के अधीन मेवाड़ में चित्र बनाए, जिनमें रागमाला (1628) और रामायण का युद्ध काण्ड (1652) शामिल हैं।
- NCERT जोधपुर चित्रकला का अंतिम चरण महाराजा मान सिंह के शासनकाल (1803–1843) में रखती है, जिसमें रामायण (1804) और नाथ चरित (1824) जैसी चित्र-श्रृंखलाएँ हैं।
- NCERT के अनुसार अनूप सिंह के शासनकाल में बीकानेर के उस्ताद कलाकार रुकनुद्दीन थे, और उनकी कार्यशाला में इब्राहिम, नाथू, साहिबदीन और ईसा थे।
कूट: A-ii, B-iii, C-i, D-iv — विकल्प (2)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केवल चित्रकार के नाम से सुमेलित करना: NCERT मेवाड़ी उस्ताद के साथ बीकानेर में भी एक साहिबदीन दर्ज करती है, इसलिए आश्रयदाता और तिथि जाँचें।
- अली रज़ा को राजस्थान में जन्मा चित्रकार मान लेना: NCERT उन्हें दिल्ली का उस्ताद चित्रकार बताती है, जिन्हें बीकानेर में करण सिंह ने नियुक्त किया।
- राठौड़ रियासतें होने के कारण बीकानेर और मारवाड़ को मिला देना: हर चित्रकार को उसके दरबार से जोड़ें — अली रज़ा को करण सिंह के बीकानेर से और शिवदास को मारवाड़ से।
कोई प्रश्न शैलियों को चित्रकारों से सुमेलित करवा सकता है, किसी चित्रकार का नाम देकर शैली पूछ सकता है, या बणी-ठणी जैसी किसी प्रसिद्ध कृति का नाम देकर उसकी शैली या चित्रकार पूछ सकता है।
कोई प्रश्न किसी आश्रयदाता का नाम देकर यह भी पूछ सकता है कि किस चित्रकार ने उसके लिए काम किया।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बणी-ठणी के लिए प्रसिद्ध चित्रकार निहालचंद ने किशनगढ़ के किस शासक के लिए काम किया ?
- (a)किशन सिंह
- (b)राज सिंह
- (c)सावंत सिंह
- (d)मान सिंह
उत्तर(3) — NCERT के अनुसार निहालचंद ने 1735 से 1757 के बीच सावंत सिंह के लिए काम किया। विकल्प (1) ने 1609 में किशनगढ़ की स्थापना की; विकल्प (2) ने 1706–1748 तक शासन किया, जब यह शैली आकार ले रही थी; और विकल्प (4) 1658–1706 के किशनगढ़ शासक थे, निहालचंद के आश्रयदाता नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दिल्ली के उस्ताद चित्रकार अली रज़ा को किस शासक ने नियुक्त किया था ?
- (a)मेवाड़ के जगत सिंह प्रथम
- (b)बीकानेर के करण सिंह
- (c)किशनगढ़ के सावंत सिंह
- (d)जोधपुर के मान सिंह
उत्तर(2) — NCERT दर्ज करती है कि बीकानेर के करण सिंह ने अली रज़ा को नियुक्त किया, जिनकी लगभग 1650 की कृति से बीकानेर शैली की शुरुआत होती है। विकल्प (1) ने साहिबदीन को संरक्षण दिया, विकल्प (3) ने निहालचंद को, और विकल्प (4) वह शासक हैं जिनके शासनकाल में NCERT जोधपुर चित्रकला का अंतिम चरण रखती है।