निम्न में से कौन सा विकल्प सही सुमेलित नहीं है ?
- (1)पृथ्वीराज रासो – चंदरबरदाई
- (2)बीसलदेव रासो – नरपति
- (3)खुमाण रासो – करणीदान
- (4)शत्रुसाल रासो – डूंगरसिंह
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), खुमाण रासो – करणीदान.
प्रश्न वह युग्म पूछता है जो सही सुमेलित नहीं है। खुमाण रासो – करणीदान वही युग्म है: खुमाण रासो दलपत विजय की रचना है।
गंगा राम गर्ग का ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ वर्ल्ड हिन्दी लिटरेचर’ (1985) दलपत को इसका रचनाकार बताता है। जैन मुनि शांति विजय से दीक्षा लेने के बाद उनका नाम दौलत विजय हो गया। गर्ग इस काव्य को लगभग 1712 का बताते हैं।
करणीदान, कविया करणीदान (1693–1783) हैं, जो जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के दरबारी कवि थे। उनकी रचना ‘सूरज प्रकाश’ 1730 में गुजरात के सूबेदार सरबुलंद ख़ाँ के विरुद्ध अभय सिंह द्वारा लड़े गए अहमदाबाद के युद्ध का वर्णन करती है।
शेष तीन युग्म सही हैं। पृथ्वीराज रासो चंदरबरदाई की, बीसलदेव रासो नरपति नाल्ह की, और शत्रुसाल रासो बूंदी के राव राजा शत्रुसाल के आश्रित डूंगरसी (डूंगरसिंह) की रचना मानी जाती है।
याद रखने की बात: खुमाण रासो दलपत विजय की है; करणीदान ने ‘सूरज प्रकाश’ लिखा।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)पृथ्वीराज रासो – चंदरबरदाई — यह युग्म सही है, इसलिए 'सही सुमेलित नहीं' वाले प्रश्न का उत्तर नहीं है। गर्ग चंदरबरदाई को पृथ्वीराज चौहान का मंत्री और दरबारी कवि तथा पृथ्वीराज रासो का रचनाकार बताते हैं।
यह पाठ समय के साथ बढ़ता गया: ‘हिस्टोरिकल बायोग्राफ़ी इन इंडियन लिटरेचर’ (सं. एस.पी. सेन, 1979) का एक अध्याय लगभग 1,400 छंदों से लेकर लगभग 40,000 छंदों तक के पाठ-रूपों का उल्लेख करता है। इससे सुमेलित होने वाला नाम चंदरबरदाई है।
- (2)बीसलदेव रासो – नरपति — यह युग्म सही है। बीसलदेव रासो नरपति नाल्ह की रचना है, और इसका नायक बीसलदेव (वीसलदेव) विग्रहराज नाम का एक चौहान शासक है।
जी.एच. ओझा ने उसकी पहचान विग्रहराज तृतीय से की, जबकि गर्ग उन विद्वानों का उल्लेख करते हैं जो नरपति को विग्रहराज चतुर्थ से जोड़ते हैं। काव्य की तिथि भी विवादित है, इसलिए किसी वर्ष के बजाय रचनाकार, नरपति नाल्ह, को याद रखें।
- (4)शत्रुसाल रासो – डूंगरसिंह — यह युग्म सही है। गर्ग डूंगरसी को बूंदी के राव राजा शत्रुसाल के आश्रित कवि और शत्रुसाल रासो के रचनाकार के रूप में दर्ज करते हैं, जो उनके आश्रयदाता की वीरता पर काव्य है। सेन का ग्रंथ रचनाकार का नाम डूंगरसिंह देता है।
इसलिए शत्रुसाल रासो डूंगरसी की रचना है, जिसके नायक बूंदी के शत्रुसाल हैं।
अवधारणा
रासो राजस्थानी (डिंगल) और आरंभिक हिन्दी का एक कथात्मक काव्य है, जो किसी शासक के युद्धों, विवाहों और वीरता का गुणगान करता है। कई रासो अपने कवि के बजाय अपने नायक के नाम पर हैं।
शीर्षकों को रचनाकारों से सुमेलित करते समय यह बात मायने रखती है। खुमाण रासो का शीर्षक मेवाड़ के खुम्माण से, शत्रुसाल रासो का बूंदी के शत्रुसाल से, और बीसलदेव रासो का वीसलदेव से है; शीर्षक नायक का नाम देता है, रचनाकार का नहीं।
पृथ्वीराज रासो सहित कुछ रासो सदियों तक बढ़ते रहे, इसलिए विद्वानों में उनकी तिथियों और यहाँ तक कि उनके मूल पाठ पर भी मतभेद है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "भाषा एवं साहित्य" में "राजस्थानी भाषा का साहित्य एवं लोक साहित्य" सूचीबद्ध है। रासो परम्परा "प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ" से भी जुड़ती है।
इतिहासकार रासो का उपयोग सावधानी से करते हैं। सेन का ग्रंथ इन रासो को ऐतिहासिक से अधिक साहित्यिक महत्व का मानता है।
गर्ग लिखते हैं कि खुमाण रासो, जिसे कुछ साहित्य-इतिहासकारों ने हिन्दी साहित्य के आरंभिक काल में रखा था, वास्तव में 18वीं शताब्दी की रचना है।
मुख्य तथ्य
- खुमाण रासो दलपत विजय (दौलत विजय) की रचना है; गर्ग इसे लगभग 1712 का बताते हैं और इसकी अधूरी पांडुलिपि में 3,576 छंद दर्ज करते हैं।
- खुमाण रासो में बप्पा रावल से महाराणा राजसिंह तक मेवाड़ के शासकों का वर्णन है, और इसमें पद्मिनी–अलाउद्दीन प्रसंग भी है।
- जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के दरबारी कवि कविया करणीदान (1693–1783) ने 1730 के अहमदाबाद युद्ध पर ‘सूरज प्रकाश’ लिखा।
- बीसलदेव रासो नरपति नाल्ह की रचना है; जी.एच. ओझा ने इसके नायक की पहचान चौहान शासक विग्रहराज तृतीय से की।
- शत्रुसाल रासो बूंदी के राव राजा शत्रुसाल के आश्रित डूंगरसी (डूंगरसिंह) की रचना है।
स्रोत: जी.आर. गर्ग, ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ वर्ल्ड हिन्दी लिटरेचर’ (1985); एस.पी. सेन (सं.), ‘हिस्टोरिकल बायोग्राफ़ी इन इंडियन लिटरेचर’ (1979)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- शीर्षक को रचनाकार समझ लेना: खुमाण, बीसलदेव और शत्रुसाल अपने-अपने रासो के नायक हैं, कवि नहीं।
- करणीदान को खुमाण रासो से जोड़ देना: करणीदान जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के दरबारी कवि थे, और उनकी ‘सूरज प्रकाश’ अपने आश्रयदाता के अहमदाबाद युद्ध का वर्णन करती है।
- खुमाण रासो की तिथि उसके नायक से तय करना: कुछ विद्वानों ने दलपत को खुम्माण द्वितीय (शासन 813–43, गर्ग के अनुसार) का समकालीन माना, पर गर्ग काव्य को लगभग 1712 में रखते हैं।
कोई प्रश्न रासो–रचनाकार युग्मों की सूची देकर पूछ सकता है कि कौन-सा गलत है, कोई रासो देकर उसका रचनाकार पूछ सकता है, या किसी कवि का नाम देकर उसका आश्रयदाता पूछ सकता है।
कोई प्रश्न किसी रचना का नायक भी पूछ सकता है, जैसे वह शासक जिसका गुणगान शत्रुसाल रासो करता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1730 में लड़े गए अहमदाबाद के युद्ध का वर्णन करने वाली राजस्थानी काव्य-रचना ‘सूरज प्रकाश’ किसने लिखी ?
- (a)कविया करणीदान
- (b)दलपत विजय
- (c)नरपति नाल्ह
- (d)दुरसा आढ़ा
उत्तर(1) — जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के दरबारी कवि कविया करणीदान ने ‘सूरज प्रकाश’ लिखा। विकल्प (2) ने खुमाण रासो लिखा, विकल्प (3) ने बीसलदेव रासो, और विकल्प (4) को RPSC की 2013 की कुंजी में ‘किरतार बावनी’ से जोड़ा गया है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है ? (रासो – रचनाकार)
- (a)खुमाण रासो – चंदरबरदाई
- (b)सगत रासो – गिरधर आसिया
- (c)बीसलदेव रासो – डूंगरसी
- (d)पृथ्वीराज रासो – नरपति नाल्ह
उत्तर(2) — सेन का ग्रंथ गिरधर आसिया को सगत रासो का कवि बताता है। विकल्प (1) में दलपत विजय, विकल्प (3) में नरपति नाल्ह, और विकल्प (4) में चंदरबरदाई होने चाहिए।