एक मूलधन का 2/3 भाग 10% प्रति वर्ष चक्रवृद्धि ब्याज की दर पर बैंक में जमा किया जाता है और शेष बचे मूलधन को 15% प्रति वर्ष सरल ब्याज की दर पर डाकघर में जमा किया जाता है । यदि चक्रवृद्धि ब्याज और सरल ब्याज में दो वर्षों के बाद अन्तर ₹ 480 हो, तो कुल मूलधन बराबर है –
- (1)₹ 16,000
- (2)₹ 12,000
- (3)₹ 10,000
- (4)₹ 8,000
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), ₹ 12,000.
मान लें कुल मूलधन P है। दो अलग-अलग भागों पर दो अलग नियमों से ब्याज मिलता है, इसलिए हर भाग का ब्याज अलग से निकाला जाता है।
चरण 1 — मूलधन को बाँटें।
बैंक वाला भाग = 2P/3
डाकघर वाला भाग = P − 2P/3 = P/3
चरण 2 — बैंक वाले भाग पर 10% प्रति वर्ष की दर से 2 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज।
मिश्रधन गुणक = 1.1 × 1.1 = 1.21
चक्रवृद्धि ब्याज = 2P/3 × (1.21 − 1) = 2P/3 × 0.21 = 0.14P
चरण 3 — डाकघर वाले भाग पर 15% प्रति वर्ष की दर से 2 वर्ष का सरल ब्याज।
सरल ब्याज = P/3 × 15 × 2 ÷ 100 = P/3 × 0.30 = 0.10P
चरण 4 — घटाएँ।
चक्रवृद्धि ब्याज − सरल ब्याज = 0.14P − 0.10P = 0.04P
चरण 5 — ₹ 480 के बराबर रखें।
0.04P = 480
P = 480 ÷ 0.04 = ₹ 12,000
जाँच: बैंक में ₹ 8,000 जमा होते हैं, जिन पर 8,000 × 0.21 = ₹ 1,680 ब्याज मिलता है। डाकघर में ₹ 4,000 जमा होते हैं, जिन पर 4,000 × 0.15 × 2 = ₹ 1,200 ब्याज मिलता है। अंतर 1,680 − 1,200 = ₹ 480 है।
याद रखने की बात: जब दो भागों पर अलग-अलग दरों से ब्याज मिले, तो पहले हर ब्याज को P के अंश के रूप में निकालें, फिर घटाएँ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)₹ 16,000 — P = ₹ 16,000 लेने पर बैंक वाला भाग ₹ 32,000/3 होता है और उस पर 0.14 × 16,000 = ₹ 2,240 ब्याज मिलता है। डाकघर वाले भाग पर 0.10 × 16,000 = ₹ 1,600 ब्याज मिलता है।
अंतर ₹ 640 है, ₹ 480 नहीं। चूँकि अंतर हमेशा 0.04P होता है, ₹ 480 का अंतर P को ₹ 12,000 पर तय कर देता है।
- (3)₹ 10,000 — P = ₹ 10,000 लेने पर चक्रवृद्धि ब्याज 0.14 × 10,000 = ₹ 1,400 और सरल ब्याज 0.10 × 10,000 = ₹ 1,000 होता है।
अंतर ₹ 400 है, जो ₹ 480 से कम है। अंतर 0.04P केवल P = ₹ 12,000 होने पर ₹ 480 के बराबर होता है।
- (4)₹ 8,000 — कुल मूलधन ₹ 12,000 होने पर ₹ 8,000 बैंक में जमा की गई राशि है (₹ 12,000 का दो-तिहाई), कुल मूलधन नहीं।
₹ 8,000 को कुल मूलधन मानने पर चक्रवृद्धि ब्याज = ₹ 1,120 और सरल ब्याज = ₹ 800 आता है, यानी अंतर ₹ 320, ₹ 480 नहीं।
अवधारणा
सरल ब्याज केवल मूल मूलधन पर लगता है: सरल ब्याज = P × R × T ÷ 100। 15% की दर से 2 वर्षों में यह मूलधन का 30% जोड़ता है।
चक्रवृद्धि ब्याज में हर वर्ष का ब्याज अगले वर्ष का ब्याज निकालने से पहले मूलधन में जोड़ दिया जाता है। T वर्षों में मिश्रधन = P × (1 + R/100)ᵀ और चक्रवृद्धि ब्याज = मिश्रधन − P।
10% की दर से 2 वर्षों के लिए 1.1 × 1.1 = 1.21, इसलिए चक्रवृद्धि ब्याज मूलधन का 21% है। सरल ब्याज से अतिरिक्त 1% पहले वर्ष के ब्याज पर लगा 10% ब्याज है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "तार्किक विवेचन एवं मानसिक योग्यता" के अंतर्गत "आधारभूत संख्यात्मक दक्षता" में "साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज" शामिल है, और उसके साथ "अनुपात–समानुपात तथा साझा" और "प्रतिशत" भी।
एक ही मूलधन और एक ही दर पर 2 वर्षों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज − सरल ब्याज = P × (R/100)²। यह शॉर्टकट एक मूलधन और एक दर पर ही लागू होता है।
जब राशि दो योजनाओं में बाँटी जाती है, तो पहले मूलधन को दिए गए अनुपात में बाँटा जाता है और हर भाग के ब्याज को कुल मूलधन के हिस्से के रूप में लिखा जाता है। यहाँ बैंक जमा किए गए हर रुपये पर 0.21 और डाकघर 0.30 देता है, पर बैंक में दोगुनी राशि जमा है।
मुख्य तथ्य
- सरल ब्याज: सरल ब्याज = P × R × T ÷ 100।
- वार्षिक संयोजित चक्रवृद्धि ब्याज: मिश्रधन = P × (1 + R/100)ᵀ; चक्रवृद्धि ब्याज = मिश्रधन − P।
- 10% वार्षिक दर पर वार्षिक संयोजन के साथ 2 वर्षों का चक्रवृद्धि ब्याज = मूलधन का 21%।
- एक मूलधन पर एक दर से 2 वर्षों के लिए, चक्रवृद्धि ब्याज − सरल ब्याज = P × (R/100)²।
- यहाँ अंतर 0.14P − 0.10P = 0.04P = ₹ 480 है, इसलिए P = ₹ 12,000 (बैंक में ₹ 8,000, डाकघर में ₹ 4,000)।
P के रूप में: चक्रवृद्धि ब्याज = 0.14P, सरल ब्याज = 0.10P, अंतर = 0.04P।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यहाँ चक्रवृद्धि ब्याज − सरल ब्याज = P(R/100)² लगा देना। वह सूत्र एक मूलधन और एक दर पर लागू होता है; यह प्रश्न राशि को बाँटता है और 10% चक्रवृद्धि की तुलना 15% सरल ब्याज से करता है।
- 10% पर 2 वर्षों के चक्रवृद्धि ब्याज को 20% मान लेना। चक्रवृद्धि से 21% आता है, क्योंकि दूसरे वर्ष में पहले वर्ष के प्रति रुपये ₹ 0.10 ब्याज पर भी ब्याज मिलता है।
- कुल के बजाय किसी एक भाग पर रुक जाना। ₹ 8,000 बैंक जमा है और ₹ 4,000 डाकघर जमा; प्रश्न कुल मूलधन पूछता है।
कोई प्रश्न एक राशि को चक्रवृद्धि ब्याज वाली योजना और सरल ब्याज वाली योजना में बाँट सकता है और दोनों ब्याजों का अंतर दे सकता है।
कोई प्रश्न एक ही राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज और सरल ब्याज का अंतर देकर मूलधन या दर भी पूछ सकता है, या संयोजन को अर्धवार्षिक कर सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
₹ 4,200 पर 10% प्रति वर्ष की दर से 2 वर्ष का सरल ब्याज किसी अन्य राशि पर 10% प्रति वर्ष की दर से 2 वर्ष के चक्रवृद्धि ब्याज (वार्षिक संयोजित) के बराबर है। वह अन्य राशि है –
- (a)₹ 4,000
- (b)₹ 4,200
- (c)₹ 3,800
- (d)₹ 4,410
उत्तर(1) — सरल ब्याज = 4,200 × 10 × 2 ÷ 100 = ₹ 840। x पर 10% से 2 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज = 0.21x, इसलिए 0.21x = 840 और x = ₹ 4,000। विकल्प (2) पर चक्रवृद्धि ब्याज ₹ 882, विकल्प (3) पर ₹ 798 और विकल्प (4) पर ₹ 926.10 होगा। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
₹ 20,000 की राशि को दो बराबर भागों में बाँटा गया। एक भाग पर 10% प्रति वर्ष चक्रवृद्धि ब्याज (वार्षिक संयोजित) और दूसरे पर 10% प्रति वर्ष सरल ब्याज मिलता है, दोनों 2 वर्षों के लिए। दोनों ब्याजों का अंतर क्या है?
- (a)₹ 200
- (b)₹ 100
- (c)₹ 210
- (d)₹ 50
उत्तर(2) — हर भाग ₹ 10,000 है। चक्रवृद्धि ब्याज = 10,000 × 0.21 = ₹ 2,100; सरल ब्याज = 10,000 × 0.20 = ₹ 2,000; अंतर = ₹ 100। विकल्प (1) P(R/100)² को पूरे ₹ 20,000 पर लगाता है, जबकि चक्रवृद्धि ब्याज केवल आधे भाग पर मिलता है; विकल्प (3) और (4) 2,100 − 2,000 के बराबर नहीं हैं।