निम्न में से किस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा उनके नन्हें शिशुओं (0 से 6 माह) के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार करने के लिये गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव और स्तनपान की अवधि के दौरान उपयुक्त पद्धतियों, देख–रेख एवं सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना है ?
- (1)प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- (2)इन्दिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना
- (3)मिशन वात्सल्य योजना
- (4)पालनहार योजना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना.
प्रश्न में दिया गया उद्देश्य वही है जो राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2022-23 इस योजना के लिए बताती है: गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और उनके 0-6 माह के शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति सुधारने के लिए गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव और स्तनपान की अवधि में उपयुक्त पद्धतियों, देख-रेख एवं सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना।
दो बातें इसे अलग पहचान देती हैं: गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव और स्तनपान की पूरी अवधि, और 0-6 माह के शिशु।
समीक्षा 2022-23, जिसके PMMVY आँकड़े नवम्बर 2022 तक के हैं, आगे बताती है कि लाभार्थी को 5,000 रुपये तीन किस्तों (1,000, 2,000 और 2,000 रुपये) में सीधे बैंक या डाकघर खाते में दिए जाते हैं। यह योजना प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) है।
किस्तों की संख्या पर स्रोत अलग-अलग हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) के मिशन शक्ति दिशानिर्देश, जो 14 जुलाई 2022 को राज्यों को भेजे गए, PMMVY 2.0 में पहले बच्चे के लिए 5,000 रुपये दो किस्तों (3,000 और 2,000 रुपये) में तय करते हैं।
जिस महिला को PMMVY 1.0 में केवल पहली किस्त मिल चुकी थी, वह तीन किस्तों वाले पुराने मानदंडों पर ही रहती है।
याद रखने योग्य बात: PMMVY गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान और 0-6 माह के शिशुओं से जुड़ी है; IGMPY जन्म के समय कम वजन और 3 वर्ष तक के बच्चों से।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)इन्दिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना — समीक्षा राजस्थान की इन्दिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना (IGMPY) का मुख्य उद्देश्य अलग बताती है: गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और 3 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करके जन्म के समय कम वजन और दुर्बलता की घटनाएँ कम करना।
यह 19 नवम्बर 2020 को प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर और बारां में शुरू हुई; समीक्षा के अनुसार 2022-23 में यह राज्य के सभी 33 जिलों में लागू थी। यह दूसरे बच्चे के जन्म पर पाँच चरणों में 6,000 रुपये देती है।
- (3)मिशन वात्सल्य योजना — मिशन वात्सल्य बाल संरक्षण से जुड़ा है, मातृ पोषण से नहीं। समीक्षा इसे बाल संरक्षण सेवाएँ बताती है, एक समग्र योजना जिसका लक्ष्य बच्चों के लिए सुरक्षात्मक वातावरण बनाना है।
यह कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को वैधानिक और सहायक सेवाएँ देता है, और राजस्थान में यह बाल अधिकारिता विभाग के पास है।
- (4)पालनहार योजना — पालनहार राजस्थान की नकद हस्तांतरण योजना है, जो अनाथ और कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की देखभाल के लिए है, जैसे वे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है या माता-पिता आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। ऐसे बच्चे का पालन-पोषण करने वाला व्यक्ति "पालनहार" कहलाता है।
समीक्षा के अनुसार आंगनबाड़ी में नामांकित 0-6 वर्ष के अनाथ बच्चे को 1,500 रुपये मासिक और स्कूल जाने वाले 6-18 वर्ष के अनाथ बच्चे को 2,500 रुपये मासिक मिलते हैं।
अवधारणा
मातृत्व लाभ गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को दिया जाने वाला नकद भुगतान है। PMMVY 2.0 में MoWCD पहली किस्त (3,000 रुपये) को गर्भावस्था के पंजीकरण और कम से कम एक प्रसव-पूर्व जाँच से, और दूसरी किस्त (2,000 रुपये) को जन्म के पंजीकरण और बच्चे के टीकों के पहले चक्र से जोड़ता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 4 हर गर्भवती महिला और धात्री माता को, केन्द्रीय योजनाओं के अधीन, स्थानीय आंगनबाड़ी के माध्यम से निःशुल्क भोजन और कम से कम 6,000 रुपये के मातृत्व लाभ का अधिकार देती है।
नियमित सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम की नौकरी वाली, या किसी अन्य कानून के अंतर्गत ऐसा ही लाभ पाने वाली महिलाएँ नकद लाभ से बाहर हैं। मिशन शक्ति दिशानिर्देशों के अनुसार PMMVY इसी धारा के अंतर्गत लागू है, और संस्थागत प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के प्रोत्साहन के साथ महिला को औसतन 6,000 रुपये मिलते हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता" के अंतर्गत "कमजोर वर्गों के लिए प्रावधान", और "राजस्थान की अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "राज्य सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाएँ" शामिल हैं, जिनके वर्गों में महिलाएँ और बच्चे भी हैं।
आर्थिक समीक्षा 2022-23 राजस्थान के आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाएँ गिनाती है: पूरक पोषाहार, शाला-पूर्व शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भ सेवाएँ। वह बताती है कि IGMPY समेकित बाल विकास सेवाओं (ICDS) और राज्य के स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर चलती है।
केन्द्र और राज्य की योजनाएँ अलग-अलग चरण पर भुगतान करती हैं: PMMVY के 5,000 रुपये पहले बच्चे के लिए हैं, जबकि IGMPY दूसरे बच्चे के जन्म पर भुगतान करती है।
मुख्य तथ्य
- आर्थिक समीक्षा 2022-23: PMMVY का लक्ष्य माताओं और 0-6 माह के शिशुओं के लिए गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव और स्तनपान के दौरान उपयुक्त पद्धतियों, देख-रेख एवं सेवाओं को बढ़ावा देना है।
- समीक्षा PMMVY का भुगतान 5,000 रुपये तीन किस्तों (1,000, 2,000 और 2,000 रुपये) में बताती है, और 21,09,350 के लक्ष्य के सामने नवम्बर 2022 तक 19,59,437 लाभार्थी दर्ज करती है।
- MoWCD के मिशन शक्ति दिशानिर्देश (14 जुलाई 2022 का पत्र), PMMVY 2.0: पहले बच्चे के लिए 5,000 रुपये दो किस्तों में; दूसरा बच्चा बालिका हो तो 6,000 रुपये।
- मिशन शक्ति दिशानिर्देशों के अनुसार PMMVY राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 4 के अंतर्गत 1 जनवरी 2017 से लागू है।
- राजस्थान की IGMPY 19 नवम्बर 2020 को पाँच जिलों में शुरू हुई और समीक्षा के अनुसार 2022-23 में सभी 33 जिलों में थी; नवम्बर 2022 तक पाँच किस्तों के माध्यम से 71,735 लाभार्थियों को भुगतान हुआ।
स्रोत: आर्थिक समीक्षा 2022-23, राजस्थान सरकार, अध्याय 9 (अन्य सामाजिक सेवाएँ/कार्यक्रम)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दोनों मातृत्व योजनाएँ माताओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार की बात करती हैं। पहचान के संकेत अलग हैं: PMMVY गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव, स्तनपान और 0-6 माह के शिशुओं का नाम लेती है; IGMPY जन्म के समय कम वजन और 3 वर्ष तक के बच्चों का।
- किस्तों की संख्या स्रोत के अनुसार अलग है: आर्थिक समीक्षा 2022-23 (आँकड़े नवम्बर 2022 तक) PMMVY की तीन किस्तें बताती है, जबकि MoWCD के मिशन शक्ति दिशानिर्देश (14 जुलाई 2022) PMMVY 2.0 में पहले बच्चे के लिए दो किस्तें तय करते हैं।
- मिलते-जुलते नाम: मातृ वंदना केन्द्र की योजना है; मातृत्व पोषण राजस्थान की।
कोई प्रश्न किसी योजना का घोषित उद्देश्य देकर पूछ सकता है कि वह किस योजना का है।
कोई प्रश्न किसी योजना की लाभ राशि, किस्तों की संख्या, लक्षित वर्ग या आरंभ तिथि भी पूछ सकता है, या योजनाओं को उनके उद्देश्यों से सुमेलित करवा सकता है।
संबंधित PYQ
राजस्थान की मुख्यमन्त्री स्वनिधि योजना का उद्देश्य है
- (1) गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों का सशक्तिकरण
- (2) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के परिवारों का सशक्तिकरण
- (3) स्ट्रीट वेन्डर्स का सशक्तिकरण
- (4) गर्भवती व दुग्धपान कराने वाली महिलाओं का सशक्तिकरण
उत्तर(3)
वही ढाँचा: किसी योजना का उद्देश्य, जिसके विकल्पों में गर्भवती व दुग्धपान कराने वाली महिलाएँ भी हैं। वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान की मुख्यमन्त्री स्वनिधि योजना का उद्देश्य क्या है (RPSC की कुंजी: स्ट्रीट वेन्डर्स का सशक्तिकरण); यह प्रश्न उद्देश्य देकर योजना पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार, इन्दिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना का मुख्य उद्देश्य है
- (a)पालनहार के माध्यम से अनाथ बच्चों को मासिक सहायता देना
- (b)जन्म के समय कम वजन और दुर्बलता की घटनाएँ कम करना
- (c)कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए सुरक्षात्मक वातावरण बनाना
- (d)बालिकाओं और महिलाओं को निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन देना
उत्तर(2) — समीक्षा IGMPY का मुख्य उद्देश्य माताओं और 3 वर्ष तक के बच्चों का पोषण सुधारकर जन्म के समय कम वजन और दुर्बलता कम करना बताती है। विकल्प (1) पालनहार योजना, विकल्प (3) मिशन वात्सल्य और विकल्प (4) इंदिरा महिला शक्ति उड़ान योजना का वर्णन है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 4 के अंतर्गत हर गर्भवती महिला और धात्री माता, केन्द्रीय योजनाओं के अधीन, कम से कम कितने मातृत्व लाभ की हकदार है ?
- (a)5,000 रुपये
- (b)6,000 रुपये
- (c)10,000 रुपये
- (d)12,000 रुपये
उत्तर(2) — धारा 4(ख) केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित किस्तों में कम से कम 6,000 रुपये का मातृत्व लाभ तय करती है। विकल्प (1) पहले बच्चे के लिए PMMVY की राशि है। विकल्प (3) और (4) धारा 4 में नहीं हैं।