सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिये : सूची-I (जिला) – सूची-II (नदी) A. उदयपुर – i. साबी तथा रूपारेल B. बूँदी – ii. गम्भीरी तथा पार्वती C. भरतपुर – iii. सोम तथा जाखम D. अलवर – iv. कुराल कूट :
- (1)A-iii, B-iv, C-i, D-ii
- (2)A-iv, B-iii, C-ii, D-i
- (3)A-i, B-iii, C-ii, D-iv
- (4)A-iii, B-iv, C-ii, D-i
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), A-iii, B-iv, C-ii, D-i.
रूपारेल अलवर जिले के थानागाजी की उदयनाथ पहाड़ियों से निकलती है। साबी की दाहिने किनारे की कई सहायक नदियाँ अलवर की पहाड़ियों से निकलती हैं, और राजस्थान के हाइड्रोजियोलॉजिकल एटलस (2013) ने साबी बेसिन का लगभग 64% भाग तत्कालीन अलवर जिले में बताया। इसलिए D-i: अलवर – साबी तथा रूपारेल।
सोम और जाखम पहाड़ी दक्षिण के माही तंत्र की नदियाँ हैं, और उसी एटलस में राजस्थान के माही बेसिन का सबसे बड़ा भाग उदयपुर जिले में था। इसलिए A-iii: उदयपुर – सोम तथा जाखम।
गम्भीर (गम्भीरी) और पार्वती यमुना की ओर बहने वाली पूर्वी नदियाँ हैं। गम्भीर भरतपुर जिले से होकर बहती है, और उसकी सहायक पार्वती मुख्यतः धौलपुर का जल बहाती है, जो 1982 तक भरतपुर जिले का भाग था। इसलिए C-ii: भरतपुर – गम्भीरी तथा पार्वती।
बचता है B-iv: बूँदी – कुराल। बूँदी जिला गजेटियर कुराल को मेज की एक मुख्य सहायक नदी बताता है; मेज बूँदी का जल बहाकर चम्बल में मिलती है। पूरा कूट A-iii, B-iv, C-ii, D-i है।
D-i और A-iii अकेले ही विकल्प (1), (2) और (3) को हटा देते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-iii, B-iv, C-i, D-ii — A और B सही हैं, पर C और D आपस में बदल दिए गए हैं: भरतपुर को साबी तथा रूपारेल, और अलवर को गम्भीरी तथा पार्वती मिलती है।
यह अदला-बदली सही लग सकती है, क्योंकि रूपारेल भरतपुर जिले में समाप्त होती है। पर वह अलवर से निकलती है, और 2013 के एटलस ने उसके जलग्रहण क्षेत्र का लगभग 71% और साबी के जलग्रहण क्षेत्र का लगभग 64% भाग अलवर जिले में बताया। साबी तथा रूपारेल अलवर का युग्म हैं।
- (2)A-iv, B-iii, C-ii, D-i — C और D सही हैं, पर A और B आपस में बदल दिए गए हैं: उदयपुर को कुराल, और बूँदी को सोम तथा जाखम मिलती है।
सोम और जाखम दक्षिण के माही तंत्र की नदियाँ हैं, जो माही की ओर बहती हैं। बूँदी दक्षिण-पूर्व के हाड़ौती क्षेत्र में, चम्बल तंत्र में है, और इस सूची में उसकी नदी कुराल है।
- (3)A-i, B-iii, C-ii, D-iv — केवल C सही है। यह कूट साबी तथा रूपारेल को उदयपुर, सोम तथा जाखम को बूँदी, और कुराल को अलवर भेज देता है।
इनमें से हर युग्म नदी को राज्य के गलत भाग में रख देता है। साबी और रूपारेल उत्तर-पूर्वी राजस्थान में अलवर की पहाड़ियों का जल बहाती हैं; सोम और जाखम दक्षिण का; कुराल बूँदी की है। चार में से तीन युग्म गलत जगह हैं।
अवधारणा
राजस्थान की नदियाँ तीन दिशाओं में बहती हैं। सोम और जाखम जैसी सहायक नदियों वाली माही गुजरात से होकर अरब सागर में जाती है; लूनी भी अरब सागर की ओर बहती है और कच्छ के रण में समाप्त होती है।
चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ, तथा पूर्व की गम्भीर और उसकी सहायक पार्वती, यमुना बेसिन की हैं और इसलिए बंगाल की खाड़ी में जल पहुँचाती हैं।
कुछ नदियाँ समुद्र तक नहीं पहुँचतीं। उदाहरण के लिए रूपारेल भरतपुर शहर के आसपास के गर्त में समाप्त होती है।
एक नदी कई जिलों से गुजर सकती है, और उसका जलग्रहण क्षेत्र प्रायः किसी एक जिले में केंद्रित होता है — 2013 के हाइड्रोजियोलॉजिकल एटलस में रूपारेल का लगभग 71% अलवर में, और पार्वती का लगभग 83% धौलपुर में था।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "प्रमुख नदियाँ एवं झीलें" शामिल है। हर नदी को मानचित्र पर रखना — वह कहाँ से निकलती है, किन जिलों का जल बहाती है, किस तंत्र में मिलती है — इसी शीर्षक का विषय है।
राजस्थान की छोटी नदियों को अपवाह तंत्र के अनुसार समूहित किया जा सकता है: दक्षिण में माही तंत्र, हाड़ौती में चम्बल तंत्र, पूर्व में यमुना की ओर बहने वाली गम्भीर और पार्वती, और रूपारेल जैसी आन्तरिक नदियाँ जो गर्तों में समाप्त हो जाती हैं।
जिलों की सीमाएँ भी बदलती हैं। धौलपुर 1982 में भरतपुर से अलग हुआ, और राजस्थान का जिला मानचित्र 2023 में दोबारा बनाया गया तथा दिसम्बर 2024 में संशोधित हुआ।
मुख्य तथ्य
- रूपारेल अलवर जिले के थानागाजी की उदयनाथ पहाड़ियों से निकलती है और भरतपुर शहर के आसपास के गर्त में समाप्त होती है।
- 2013 के हाइड्रोजियोलॉजिकल एटलस में राजस्थान के साबी बेसिन का लगभग 64% भाग अलवर जिले में था; यह नदी राज्य से निकलकर हरियाणा में जाती है।
- गम्भीर करौली और भरतपुर से होकर उत्तर प्रदेश में जाती है; पार्वती, जिसका बेसिन अधिकांशतः धौलपुर जिले में है, उसकी सहायक नदी है।
- 2013 के हाइड्रोजियोलॉजिकल एटलस में राजस्थान के माही बेसिन का सबसे बड़ा भाग, लगभग 33%, उदयपुर जिले में था; डूंगरपुर जिले में सोम माही की मुख्य सहायक नदी है।
- डूंगरपुर जिले का बेणेश्वर सोम और माही के संगम पर है; जाखम सोम की सहायक नदी है।
D-i और A-iii अकेले ही विकल्प (1), (2) और (3) को हटा देते हैं। बेसिन विवरण: Hydrogeological Atlas of Rajasthan (2013), नदी-बेसिन खण्ड।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- रूपारेल भरतपुर जिले में समाप्त होती है, पर वह अलवर से निकलती है, और 2013 के एटलस में उसका अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र वहीं था। नदी को केवल उसके समाप्ति-स्थल से नहीं, उसके मुख्य जिले से मिलाइए।
- पार्वती नाम साझा है: हाड़ौती की पार्वती चम्बल की सहायक है, जबकि पूर्व की पार्वती (पार्बती) गम्भीर की सहायक नदी है। एक अलग गम्भीरी चित्तौड़गढ़ के पास से भी बहती है।
- जिलों की सीमाएँ बदलती हैं। पूर्व की पार्वती आज मुख्यतः धौलपुर की नदी है, पर धौलपुर 1982 तक भरतपुर जिले का भाग था।
कोई प्रश्न जिलों को नदियों से सुमेलित करवा सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है। कोई प्रश्न नदियों को उनकी सहायक नदियों, बाँधों या संगमों से भी सुमेलित करवा सकता है।
कोई प्रश्न किसी नदी का उद्गम, मार्ग और सहायक नदियाँ बताकर उसका नाम पूछ सकता है। कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी त्रिवेणी संगम पर कौन-सी तीन नदियाँ मिलती हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2021 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की रूपारेल नदी किस जिले की पहाड़ियों से निकलती है?
- (a)अलवर
- (b)भरतपुर
- (c)जयपुर
- (d)सीकर
उत्तर(1) — रूपारेल अलवर के थानागाजी की उदयनाथ पहाड़ियों से निकलती है। विकल्प (2), भरतपुर, वह जिला है जहाँ वह भरतपुर शहर के आसपास के गर्त में समाप्त होती है। विकल्प (3) जयपुर और (4) सीकर में साबी के जलग्रहण क्षेत्र के भाग हैं, रूपारेल के नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पूर्वी राजस्थान में गम्भीर की सहायक नदी है?
- (a)पार्वती
- (b)कालीसिंध
- (c)सोम
- (d)लूनी
उत्तर(1) — पार्वती, जिसका बेसिन अधिकांशतः धौलपुर जिले में है, गम्भीर की सहायक नदी है। विकल्प (2), कालीसिंध, हाड़ौती क्षेत्र की चम्बल की सहायक नदी है। विकल्प (3), सोम, दक्षिण के माही तंत्र की है। विकल्प (4), लूनी, कच्छ के रण की ओर बहती है।