संविधान के अनुच्छेद 217(1) के अनुसार, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति किसके परामर्श उपरांत करेगा ?
- (1)राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, भारत के महान्यायवादी तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
- (2)राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति ।
- (3)संघ के कानून एवं न्याय मंत्री तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
- (4)भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान के राज्यपाल ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति ।
अनुच्छेद 217(1) उपबंध करता है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करेगा।
संविधान का आधिकारिक पाठ इसके परामर्श वाले शब्द एक पाद-टिप्पणी में देता है। उनके अनुसार नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्य के राज्यपाल और, मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न न्यायाधीश की नियुक्ति की दशा में, उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श के बाद होती है।
इस तरह राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश के लिए तीन परामर्शदाता बनते हैं: भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राजस्थान के राज्यपाल और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति। विकल्प (2) इन्हीं तीनों का नाम, अलग क्रम में, लेता है।
तीसरा परामर्शदाता केवल मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न न्यायाधीशों के लिए जुड़ता है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के लिए यह खंड भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्यपाल का नाम लेता है।
संविधान का आधिकारिक पाठ यह भी दर्ज करता है कि 99वें संशोधन, 2014 ने इस परामर्श के स्थान पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफ़ारिश रखी थी, और उच्चतम न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2015 के अपने निर्णय में वह संशोधन रद्द कर दिया।
मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न न्यायाधीश: भारत के मुख्य न्यायमूर्ति + राज्यपाल + उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति, भारत के महान्यायवादी तथा राजस्थान के राज्यपाल । — भारत के महान्यायवादी अनुच्छेद 217(1) के अंतर्गत परामर्शदाता नहीं हैं। अनुच्छेद 76 के अंतर्गत महान्यायवादी भारत सरकार को विधिक विषयों पर सलाह देने वाला विधि अधिकारी है, उन विषयों पर जो राष्ट्रपति उसे सौंपे।
इस सूची में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति भी छूट गए हैं, जिनका नाम अनुच्छेद 217(1) सबसे पहले लेता है।
- (3)संघ के कानून एवं न्याय मंत्री तथा राजस्थान के राज्यपाल । — अनुच्छेद 217(1) संघ के कानून एवं न्याय मंत्री का नाम नहीं लेता। इसके परामर्शदाता हैं भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्यपाल और, अन्य न्यायाधीशों के लिए, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति।
यह विकल्प राज्यपाल को तो रखता है, पर दोनों न्यायिक परामर्शदाताओं को छोड़ देता है।
- (4)भारत के मुख्य न्यायमूर्ति तथा राजस्थान के राज्यपाल । — ये दोनों — भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्यपाल — उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति के परामर्शदाता हैं।
यहाँ बात मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न न्यायाधीश की है। ऐसे न्यायाधीश के लिए अनुच्छेद 217(1) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को भी जोड़ता है, इसलिए यह सूची एक नाम कम है।
अवधारणा
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदावधि से संबंधित है। न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है, और वह 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है; 15वें संशोधन, 1963 ने यह आयु 60 से बढ़ाई।
न्यायाधीश राष्ट्रपति को लिखकर पद त्याग सकता है, और उसे केवल उसी रीति से हटाया जा सकता है जो अनुच्छेद 124(4) में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के लिए दी गई है।
पद ग्रहण करने से पहले उच्च न्यायालय का न्यायाधीश राज्य के राज्यपाल, या राज्यपाल द्वारा नियुक्त व्यक्ति, के समक्ष शपथ लेता या प्रतिज्ञान करता है (अनुच्छेद 219)।
राजस्थान उच्च न्यायालय का अपना इतिहास 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में इसका उद्घाटन दर्ज करता है। जोधपुर इसकी प्रधान पीठ है, और जयपुर में एक स्थायी न्यायपीठ 8 दिसम्बर 1976 के राष्ट्रपति आदेश द्वारा स्थापित हुई।
RPSC का प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम "राज्य की राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय" को सूचीबद्ध करता है।
उच्च न्यायालय राज्य की सबसे ऊँची अदालत है, पर इसके न्यायाधीशों की नियुक्ति संघ के माध्यम से होती है: राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्य के राज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श के बाद नियुक्ति करता है।
उच्च न्यायालय के इतिहास के अनुसार, 29 अगस्त 1949 को राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह की अध्यक्षता में हुए उद्घाटन में न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा ने ग्यारह अन्य न्यायाधीशों के साथ मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में शपथ ली।
अनुच्छेद 217(1) के पाठ का भी अपना इतिहास है। 99वें संशोधन अधिनियम, 2014 द्वारा 13 अप्रैल 2015 से प्रतिस्थापित इसका NJAC वाला पाठ आधिकारिक पाठ में इस पाद-टिप्पणी के साथ दिखाया गया है कि उच्चतम न्यायालय ने 2015 में यह संशोधन रद्द कर दिया।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 217(1): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है।
- मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न उच्च न्यायालय न्यायाधीश के लिए परामर्शदाता हैं: भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्य के राज्यपाल और उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति।
- 99वें संशोधन, 2014 (NJAC) ने अनुच्छेद 217(1) बदला; उच्चतम न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2015 के निर्णय में संशोधन रद्द कर दिया।
- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है; 15वें संशोधन, 1963 ने आयु 60 से बढ़ाई।
- राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ; जयपुर में स्थायी न्यायपीठ 8 दिसम्बर 1976 के आदेश से बनी।
अनुच्छेद 219 के अंतर्गत शपथ राज्यपाल या राज्यपाल द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष ली जाती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उच्च न्यायालय के अपने मुख्य न्यायमूर्ति को छोड़ देना। भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्यपाल की जोड़ी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति की सूची है, अन्य न्यायाधीशों की नहीं।
- कार्यपालिका के विधि अधिकारियों को जोड़ देना। अनुच्छेद 217(1) में न महान्यायवादी का नाम है, न संघ के कानून मंत्री का।
- अनुच्छेद 217(1) में छपे NJAC वाले पाठ को लागू नियम मान लेना। आधिकारिक पाठ दर्ज करता है कि 99वाँ संशोधन 16 अक्टूबर 2015 को रद्द कर दिया गया।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति से पहले राष्ट्रपति किससे परामर्श करता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश किस आयु तक पद पर रहता है, शपथ किसके समक्ष ली जाती है, या राजस्थान उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ कहाँ है ?
- (a)जयपुर
- (b)जोधपुर
- (c)उदयपुर
- (d)बीकानेर
उत्तर(2) — उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ और जोधपुर इसकी प्रधान पीठ है। जयपुर (1) में 1976 के आदेश के अंतर्गत स्थायी न्यायपीठ है। उदयपुर (3) और बीकानेर (4) में 1949–50 में उच्च न्यायालय की बैठकें होती थीं, जो 22 मई 1950 से बंद हो गईं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 217(1) के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति से पहले राष्ट्रपति परामर्श करता है
- (a)भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्य के राज्यपाल से
- (b)भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्यपाल और राज्य के मुख्यमंत्री से
- (c)राज्य के राज्यपाल और संघ के कानून एवं न्याय मंत्री से
- (d)केवल भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से
उत्तर(1) — मुख्य न्यायमूर्ति के लिए अनुच्छेद 217(1) भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्य के राज्यपाल का नाम लेता है। मुख्यमंत्री (2) और संघ के कानून मंत्री (3) का नाम नहीं है। विकल्प (4) राज्यपाल को छोड़ देता है।