निम्न में से किसकी सिफारिश पर राजस्थान में राजप्रमुख के पद को समाप्त कर राज्यपाल की व्यवस्था की गई ?
- (1)राज्य विधान सभा
- (2)संविधान सभा
- (3)राज्य पुनर्गठन आयोग
- (4)राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), राज्य पुनर्गठन आयोग.
राज्य पुनर्गठन आयोग — सैयद फ़ज़ल अली, हृदयनाथ कुंजरू और के. एम. पणिक्कर — भारत सरकार के 29 दिसम्बर 1953 के संकल्प द्वारा गठित हुआ, और इसकी रिपोर्ट 30 सितम्बर 1955 की तिथि की है।
तब राजस्थान भाग ख का राज्य था, जिसका प्रमुख राजप्रमुख होता था। रिपोर्ट ने पाया कि भाग ख राज्यों में राजप्रमुखों की भूमिका कमोबेश भाग क राज्यों के राज्यपालों जैसी ही थी — दोनों संवैधानिक प्रमुख थे।
फिर भी रिपोर्ट ने इस पद के विरुद्ध विचार किया। उसने दर्ज किया कि जनमत का बड़ा वर्ग इसके बने रहने को नापसंद करता था, और यह कि सामान्यतः किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख उसी राज्य का निवासी नहीं होना चाहिए।
पैरा 244 का निष्कर्ष था कि यह संस्था समाप्त कर दी जाए। रिपोर्ट के सारांश ने उद्देश्य साफ़ रखा: अनुच्छेद 371 हटाकर और राजप्रमुख की संस्था समाप्त करके भाग ख राज्यों को भाग क राज्यों के समान बनाया जा सकता है।
सातवें संशोधन ने 1 नवम्बर 1956 से यह परिवर्तन लागू किया, जिस दिन राजस्थान के पहले राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह ने पदभार संभाला।
सिफ़ारिश: राज्य पुनर्गठन आयोग (1955)। कानून: सातवाँ संशोधन (1956)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)राज्य विधान सभा — राजप्रमुख का पद भाग ख राज्यों के लिए संविधान की योजना का हिस्सा था, इसलिए कोई राज्य विधान सभा उसे समाप्त नहीं कर सकती थी। इस परिवर्तन के लिए संसद द्वारा संविधान का संशोधन आवश्यक था — सातवाँ संशोधन, 1956।
उस संशोधन के पीछे की सिफ़ारिश राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट से आई, राजस्थान विधान सभा से नहीं।
- (2)संविधान सभा — संविधान सभा ने वह संविधान बनाया जिसने भाग क, ख और ग की श्रेणियाँ बनाईं, जिनमें राजस्थान जैसे भाग ख राज्यों के प्रमुख राजप्रमुख थे।
इस पद को समाप्त करने का प्रस्ताव वर्षों बाद, 30 सितम्बर 1955 की राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट में आया।
- (4)राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग — भाग ख राज्यों और उनके राजप्रमुखों की स्थिति पर राज्य पुनर्गठन आयोग ने विचार किया, अपनी रिपोर्ट के उस भाग में जो संघ की घटक इकाइयों के मूल स्वरूप से संबंधित है।
प्रशासनिक सुधार आयोग शासन के संचालन की समीक्षा करता है; राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल रखने की सिफ़ारिश राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट में है।
अवधारणा
संविधान लागू होने पर राज्यों को भाग क, ख और ग में रखा गया। भाग ख के राज्य देशी रियासतों से बने थे, और उनका प्रमुख राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त राज्यपाल के बजाय राष्ट्रपति द्वारा मान्यता-प्राप्त राजप्रमुख होता था।
राजस्थान भाग ख का राज्य था। Legislative Bodies in India का राजस्थान अभिलेख महाराजा सवाई मानसिंह को 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक राजप्रमुख दर्ज करता है।
राज्य पुनर्गठन आयोग ने भाग क और भाग ख के भेद को समाप्त करने की सिफ़ारिश की: भाग ख राज्यों पर अनुच्छेद 371 का केन्द्रीय नियंत्रण हटाया जाए और राजप्रमुख का पद समाप्त किया जाए। सातवें संशोधन ने 1 नवम्बर 1956 से यह वर्गीकरण और यह पद, दोनों समाप्त कर दिए।
उस दिन से राजस्थान में राज्यपाल हुआ। राजभवन के अभिलेख में गुरुमुख निहाल सिंह 1 नवम्बर 1956 से 15 अप्रैल 1962 तक राज्यपाल दर्ज हैं।
RPSC का प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम "राज्य की राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय" को सूचीबद्ध करता है। इसके इतिहास वाले खंड में "राजस्थान का एकीकरण" शामिल है।
राजप्रमुख से राज्यपाल तक का परिवर्तन वह स्थान है जहाँ ये दोनों पंक्तियाँ मिलती हैं: अंतिम राजप्रमुख ने 31 अक्टूबर 1956 को पद छोड़ा और पहले राज्यपाल ने अगले दिन पदभार संभाला।
उसी रिपोर्ट ने राजस्थान का नक्शा भी गढ़ा। आयोग ने राजस्थान सरकार से सहमति जताई कि अजमेर, जो राजस्थान से घिरा एक-जिले वाला भाग ग राज्य था, राजस्थान में मिला दिया जाए।
सिफ़ारिश, संशोधन और नियुक्ति तीन अलग घटनाएँ हैं जिनकी तीन अलग तिथियाँ हैं: रिपोर्ट (30 सितम्बर 1955), सातवें संशोधन का प्रभावी होना (1 नवम्बर 1956), और पहले राज्यपाल की नियुक्ति व पदभार ग्रहण।
मुख्य तथ्य
- राज्य पुनर्गठन आयोग (फ़ज़ल अली, कुंजरू, पणिक्कर) 29 दिसम्बर 1953 को गठित हुआ और इसकी रिपोर्ट 30 सितम्बर 1955 की तिथि की है।
- रिपोर्ट का पैरा 244: आयोग ने सिफ़ारिश की कि राजप्रमुख की संस्था समाप्त कर दी जाए।
- सातवें संशोधन, 1956 ने 1 नवम्बर 1956 से राज्यों का भाग क/ख/ग वर्गीकरण, और उसके साथ राजप्रमुख का पद, समाप्त किया।
- महाराजा सवाई मानसिंह 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक राजस्थान के राजप्रमुख रहे।
- राजस्थान के पहले राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह 1 नवम्बर 1956 से 15 अप्रैल 1962 तक पद पर रहे।
तिथियाँ आयोग की रिपोर्ट, राजभवन राजस्थान और Legislative Bodies in India (राजस्थान) से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सिफ़ारिश करने वाले निकाय को संशोधन अधिनियम से मिला देना। राज्य पुनर्गठन आयोग ने सिफ़ारिश की; सातवें संशोधन ने उसे कानून बनाया।
- परिवर्तन का श्रेय राज्य विधान सभा को देना। यह पद संविधान पर आधारित था, इसलिए केवल संसद संशोधन द्वारा उसे समाप्त कर सकती थी।
- पहले राज्यपाल की तिथियाँ मिला देना। राजभवन 1 नवम्बर 1956 को वह दिन दर्ज करता है जब गुरुमुख निहाल सिंह ने पदभार संभाला; उनकी नियुक्ति की तिथि अलग से जाँचने का तथ्य है।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल रखने की सिफ़ारिश किस निकाय ने की, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किस संशोधन ने यह पद समाप्त किया, राजस्थान के पहले राज्यपाल कौन थे, या उन्होंने किस तिथि को पदभार संभाला।
संबंधित PYQ
राजस्थान के राज्यपाल के संबंध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है ?
- (1) राज्य पुनर्गठन आयोग की अनुशंसा के आधार पर राजप्रमुख के पद को समाप्त कर दिया गया ।
- (2) 7वें संविधान संशोधन से राजप्रमुख का पद समाप्त किया गया ।
- (3) गुरुमुख निहाल सिंह को 1 नवम्बर, 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया ।
- (4) हरिभाऊ किसनराव बागडे ने 31 जुलाई, 2024 को राजस्थान के राज्यपाल का पदभार संभाला ।
उत्तर(3)
वही परिवर्तन, चार कथनों के माध्यम से: RPSC की कुंजी राज्य पुनर्गठन आयोग की अनुशंसा और 7वें संविधान संशोधन वाले कथनों को सही मानती है, और इस कथन को सही नहीं मानती कि गुरुमुख निहाल सिंह को 1 नवम्बर, 1956 को राजस्थान का पहला राज्यपाल नियुक्त किया गया (विकल्प (3))। यह प्रश्न केवल यह पूछता है कि सिफ़ारिश किस निकाय ने की।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजप्रमुख का पद निम्नलिखित में से किसके द्वारा समाप्त किया गया ?
- (a)संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951
- (b)संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956
- (c)संविधान (छब्बीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971
- (d)संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976
उत्तर(2) — सातवें संशोधन ने 1 नवम्बर 1956 से यह पद समाप्त किया। 1951 का पहला संशोधन (1) अनुच्छेद 19 जैसे मूल अधिकारों से संबंधित था। 1971 का छब्बीसवाँ संशोधन (3) इस पद के समाप्त होने के बहुत बाद आया। 1976 के बयालीसवें संशोधन (4) ने अनुच्छेद 39A और 48A जैसे उपबंध जोड़े। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1956 में राज्यपाल का पद बनने से ठीक पहले राजस्थान के राजप्रमुख कौन थे ?
- (a)महाराजा सवाई मानसिंह
- (b)गुरुमुख निहाल सिंह
- (c)हीरालाल शास्त्री
- (d)मोहनलाल सुखाड़िया
उत्तर(1) — महाराजा सवाई मानसिंह 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक राजप्रमुख रहे। गुरुमुख निहाल सिंह (2) 1 नवम्बर 1956 से पहले राज्यपाल थे। हीरालाल शास्त्री (3) 1949 में वृहत् राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री थे, और मोहनलाल सुखाड़िया (4) 1956 में मुख्यमंत्री थे।