निम्नलिखित सूची-P (CAG) को सूची-R (अनुच्छेद) के साथ सुमेलित कीजिए : सूची-P – सूची-R A. CAG की नियुक्ति – I. अनुच्छेद 148 B. CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ – II. अनुच्छेद 151 C. संघ के खातों का प्रपत्र – III. अनुच्छेद 149 D. ऑडिट रिपोर्ट – IV. अनुच्छेद 150 सही विकल्प चुनें ।
- (1)A-I, B-III, C-IV, D-II
- (2)A-II, B-III, C-I, D-IV
- (3)A-III, B-I, C-IV, D-II
- (4)A-II, B-III, C-IV, D-I
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), A-I, B-III, C-IV, D-II.
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का संविधान के भाग V में अपना अध्याय है, अनुच्छेद 148 से 151, और ये चारों अनुच्छेद सूची-P के क्रम में ही चलते हैं।
A. CAG की नियुक्ति अनुच्छेद 148 (I) है। CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है, और उसे उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिनसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को।
B. CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ अनुच्छेद 149 (III) है: संघ, राज्यों और अन्य निकायों के लेखाओं के संबंध में CAG वे कर्तव्य करता है और वे शक्तियाँ प्रयोग करता है जो संसद द्वारा बनाई गई विधि विहित करे।
C. संघ के खातों का प्रपत्र अनुच्छेद 150 (IV) है: संघ और राज्यों के लेखे उस प्रपत्र में रखे जाते हैं जो राष्ट्रपति CAG की सलाह पर विहित करे।
D. ऑडिट रिपोर्ट अनुच्छेद 151 (II) है: संघ के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदन राष्ट्रपति को जाते हैं, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है।
इस तरह क्रम A-I, B-III, C-IV, D-II बनता है। अनुच्छेद 148, 149, 150 और 151 का क्रम है: नियुक्ति, कर्तव्य, खातों का प्रपत्र, ऑडिट रिपोर्ट।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)A-II, B-III, C-I, D-IV — यहाँ केवल B-III सही है: अनुच्छेद 149 कर्तव्य और शक्तियाँ है।
यह कूट नियुक्ति को अनुच्छेद 151 (ऑडिट रिपोर्ट) पर, खातों के प्रपत्र को अनुच्छेद 148 (नियुक्ति) पर और ऑडिट रिपोर्ट को अनुच्छेद 150 (खातों का प्रपत्र) पर रखता है — तीन गलत युग्म।
- (3)A-III, B-I, C-IV, D-II — यह कूट C और D सही रखता है — खातों का प्रपत्र अनुच्छेद 150 पर, ऑडिट रिपोर्ट अनुच्छेद 151 पर — पर A और B की अदला-बदली कर देता है।
नियुक्ति अनुच्छेद 148 है, 149 नहीं; कर्तव्य और शक्तियाँ अनुच्छेद 149 है, 148 नहीं।
- (4)A-II, B-III, C-IV, D-I — यह कूट B और C सही रखता है — कर्तव्य अनुच्छेद 149 पर, खातों का प्रपत्र अनुच्छेद 150 पर — पर A और D की अदला-बदली कर देता है।
नियुक्ति अनुच्छेद 148 है, 151 नहीं; ऑडिट रिपोर्ट अनुच्छेद 151 है, 148 नहीं।
अवधारणा
CAG सरकार के दोनों स्तरों पर लोक लेखाओं की लेखापरीक्षा करता है। अनुच्छेद 148 इस पद की स्वतंत्रता सुरक्षित करता है: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जाना, पद छोड़ने के बाद संघ या किसी राज्य के अधीन कोई और पद नहीं, और प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि पर भारित।
अनुच्छेद 149 कर्तव्यों और शक्तियों का ब्योरा संसद द्वारा बनाई गई विधि पर छोड़ता है। जब तक संसद ऐसा उपबंध न करे, यह अनुच्छेद वे कर्तव्य और शक्तियाँ जारी रखता है जो संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के महालेखापरीक्षक के पास थीं।
अनुच्छेद 150 में दो बार संशोधन हुआ है। 42वें संशोधन ने 1 अप्रैल 1977 से यह अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया, और 44वें संशोधन ने 20 जून 1979 से यह बदलाव किया कि प्रपत्र CAG से परामर्श के बाद नहीं, बल्कि CAG की सलाह पर विहित हो।
अनुच्छेद 151 संघ के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और किसी राज्य के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदन राज्यपाल को भेजता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारतीय राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत सूचीबद्ध निकायों में "नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक" का नाम है।
CAG एक ही पद है जो सरकार के दो स्तरों के लिए काम करता है। अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत राजस्थान के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदन राजस्थान के राज्यपाल को प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उन्हें राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है।
चारों अनुच्छेद एक क्रम बनाते हैं: CAG कौन है, CAG क्या करता है, लेखे कैसे रखे जाते हैं, और प्रतिवेदन कहाँ जाते हैं।
अनुच्छेद 151(2) में पहले राजप्रमुख का भी नाम था। सातवें संशोधन ने 1 नवम्बर 1956 से, जब भाग ख राज्य समाप्त हुए, यह उल्लेख हटा दिया।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 148: CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है; उसे केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है।
- अनुच्छेद 148(4): पद छोड़ने के बाद CAG भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी और पद का पात्र नहीं होता।
- अनुच्छेद 149: संघ, राज्यों और अन्य निकायों के लेखाओं पर CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ संसद की विधि द्वारा विहित होती हैं।
- अनुच्छेद 150: संघ और राज्यों के लेखे उस प्रपत्र में रखे जाते हैं जो राष्ट्रपति CAG की सलाह पर विहित करे।
- अनुच्छेद 151: संघ के लेखाओं के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और राज्य के लेखाओं के प्रतिवेदन राज्यपाल को जाते हैं, विधान-मंडल के समक्ष रखे जाने के लिए।
सही कूट: A-I, B-III, C-IV, D-II — विकल्प (1)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- क्रम के बजाय अंदाज़े से मिलान करना। चारों अनुच्छेद इस क्रम में चलते हैं: 148 नियुक्ति, 149 कर्तव्य, 150 खातों का प्रपत्र, 151 ऑडिट रिपोर्ट।
- अनुच्छेद 148 और 149 की अदला-बदली, जैसी विकल्प (3) करता है। पद और उसकी नियुक्ति पहले आती है; कर्तव्य और शक्तियाँ बाद में।
- राज्य की ऑडिट रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज देना। अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत वे राज्यपाल को जाती हैं, जो उन्हें राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है।
कोई प्रश्न CAG से जुड़े विषयों को अनुच्छेद संख्याओं के सामने सूचीबद्ध करके सही कूट पूछ सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि CAG को कैसे हटाया जाता है, किसी राज्य के लेखाओं की ऑडिट रिपोर्ट किसे प्रस्तुत की जाती है, या खातों का प्रपत्र किसकी सलाह पर विहित होता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान के अनुच्छेद 151(2) के अंतर्गत किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाते हैं
- (a)राष्ट्रपति को
- (b)राज्य के राज्यपाल को
- (c)विधान सभा के अध्यक्ष को
- (d)राज्य के मुख्यमंत्री को
उत्तर(2) — अनुच्छेद 151(2) इन्हें राज्यपाल को भेजता है, जो इन्हें राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है। राष्ट्रपति (1) अनुच्छेद 151(1) के अंतर्गत संघ के लेखाओं के प्रतिवेदन पाता है। विधान सभा के अध्यक्ष (3) और मुख्यमंत्री (4) का अनुच्छेद 151 में नाम नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 150 के अनुसार संघ और राज्यों के लेखे ऐसे प्रपत्र में रखे जाते हैं जो
- (a)CAG राष्ट्रपति की सलाह पर विहित करे
- (b)राष्ट्रपति CAG की सलाह पर विहित करे
- (c)संसद विधि द्वारा विहित करे
- (d)वित्त आयोग अनुशंसित करे
उत्तर(2) — अनुच्छेद 150 के अनुसार प्रपत्र राष्ट्रपति CAG की सलाह पर विहित करता है। विकल्प (1) भूमिकाएँ उलट देता है। विकल्प (3) अनुच्छेद 149 का वर्णन है, जहाँ संसद की विधि CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ तय करती है। वित्त आयोग (4) की अनुच्छेद 150 में कोई भूमिका नहीं है।