निम्नांकित में से किस आयोग ने अन्तर–राज्य परिषद् के स्थान अन्तर–सरकार परिषद् स्थापित करने की अनुशंसा की थी ?
- (1)राजमन्नार आयोग
- (2)पूंछी आयोग
- (3)प्रशासनिक सुधार आयोग, 1969
- (4)सरकारिया आयोग
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), सरकारिया आयोग.
न्यायमूर्ति आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता वाला केन्द्र-राज्य संबंध आयोग गृह मंत्रालय की 9 जून 1983 की अधिसूचना द्वारा गठित हुआ। इसके अन्य सदस्य बी. शिवरामन और डॉ. एस. आर. सेन थे, और इसने जनवरी 1988 में रिपोर्ट दी।
अन्तर-राज्य परिषद् सचिवालय आयोग की जो अनुशंसा उद्धृत करता है, उसका आशय है: अनुच्छेद 263 के अंतर्गत एक स्थायी अन्तर-राज्य परिषद् स्थापित की जानी चाहिए, जिसे अन्तर-सरकार परिषद् (IGC) कहा जाए।
IGC को अनुच्छेद 263 के खंड (ख) और (ग) के कर्तव्य, सामाजिक-आर्थिक योजना और विकास को छोड़कर, सौंपे जाने थे। आयोग ने यह भी कहा कि परिषद् को राज्यों के बीच विवादों की जाँच करने और उन पर सलाह देने की शक्ति नहीं दी जानी चाहिए।
भारत सरकार ने अन्तर-राज्य परिषद् स्थापित करने की अनुशंसा स्वीकार की, और 28 मई 1990 के राष्ट्रपति आदेश ने इसे स्थापित किया।
अन्तर-सरकार परिषद् — अनुच्छेद 263 के अंतर्गत स्थायी परिषद् के लिए सरकारिया आयोग का दिया हुआ नाम।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)राजमन्नार आयोग — राजमन्नार समिति (यहाँ राजमन्नार आयोग छपा है) तमिलनाडु सरकार की समिति थी, संघ का आयोग नहीं। इसे 1969 में मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के कार्यकाल में, पी. वी. राजमन्नार की अध्यक्षता में, राज्य स्वायत्तता और केन्द्र-राज्य संबंधों के अध्ययन के लिए नियुक्त किया गया था।
परिषद् की उत्पत्ति के अपने विवरण में अन्तर-राज्य परिषद् सचिवालय अन्तर-सरकार परिषद् के प्रस्ताव का श्रेय सरकारिया आयोग को देता है।
- (2)पूंछी आयोग — भारत के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति मदन मोहन पूंछी की अध्यक्षता वाला पूंछी आयोग 27 अप्रैल 2007 को गठित हुआ और इसने 30 मार्च 2010 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की — अन्तर-राज्य परिषद् की स्थापना के दो दशक बाद।
इसने मौजूदा अन्तर-राज्य परिषद् को सशक्त बनाने की अनुशंसा की: राज्यों से परामर्श के बाद तय की गई कार्यसूची पर वर्ष में कम से कम तीन बार बैठक, और अपने निर्णयों पर आगे की कार्रवाई की शक्ति।
- (3)प्रशासनिक सुधार आयोग, 1969 — पहला प्रशासनिक सुधार आयोग 5 जनवरी 1966 को गठित हुआ, जिसके अध्यक्ष पहले मोरारजी देसाई और बाद में के. हनुमंतैया रहे। इसकी 13वीं रिपोर्ट केन्द्र-राज्य संबंधों पर थी।
इसने राष्ट्रीय विकास परिषद् और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन जैसे निकायों के स्थान पर अनुच्छेद 263(ख) और (ग) के अंतर्गत एक अन्तर-राज्य परिषद् की अनुशंसा की। उस प्रस्ताव में नाम अन्तर-राज्य परिषद् था, अन्तर-सरकार परिषद् नहीं।
अवधारणा
अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को, जब इससे लोकहित की पूर्ति हो, आदेश द्वारा एक परिषद् स्थापित करने देता है। परिषद् को ये कर्तव्य सौंपे जा सकते हैं: (क) राज्यों के बीच विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना, (ख) साझा हित के विषयों का अन्वेषण और उन पर चर्चा करना, या (ग) नीति और कार्रवाई के बेहतर समन्वय के लिए सिफ़ारिशें करना।
संविधान स्वयं परिषद् नहीं बनाता; राष्ट्रपति का आदेश बनाता है। सरकारिया आयोग ने एक स्थायी परिषद् का प्रस्ताव रखा, जिसे उसने अन्तर-सरकार परिषद् कहा, और जिसके कर्तव्य केवल खंड (ख) और (ग) के अंतर्गत हों।
अन्तर-राज्य परिषद् 28 मई 1990 के राष्ट्रपति आदेश से स्थापित हुई। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं; सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधान सभा वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री, बिना विधान सभा वाले संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासक, और प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट छह संघ कैबिनेट मंत्री शामिल हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारतीय राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत "संघवाद, भारत में लोकतांत्रिक राजनीति, गठबंधन सरकारें, राष्ट्रीय एकीकरण" शामिल है। केन्द्र-राज्य परामर्श की संस्थाएँ संघवाद के अंतर्गत आती हैं।
यहाँ नामित चारों निकायों ने केन्द्र-राज्य संबंधों को अलग-अलग स्थानों से देखा: एक राज्य सरकार की समिति (राजमन्नार, 1969), प्रशासन पर संघ का एक आयोग (पहला प्रशासनिक सुधार आयोग, गठन 1966), और केन्द्र-राज्य संबंधों पर संघ के दो आयोग (सरकारिया, 1983–88; पूंछी, 2007–10)।
पहले प्रशासनिक सुधार आयोग, सरकारिया और पूंछी, तीनों ने अन्तर-राज्य परिषद् के बारे में लिखा, अलग-अलग शब्दों में। अन्तर-सरकार परिषद् नाम सरकारिया रिपोर्ट का है।
एक राज्य के रूप में राजस्थान अपने मुख्यमंत्री के माध्यम से भाग लेता है, जो अन्तर-राज्य परिषद् के सदस्य हैं।
मुख्य तथ्य
- सरकारिया आयोग गृह मंत्रालय की 9 जून 1983 की अधिसूचना द्वारा गठित हुआ और इसने जनवरी 1988 में रिपोर्ट दी।
- अन्तर-राज्य परिषद् सचिवालय के उद्धरण के अनुसार सरकारिया आयोग: अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अन्तर-सरकार परिषद् नाम की एक स्थायी अन्तर-राज्य परिषद् स्थापित हो।
- अन्तर-राज्य परिषद् 28 मई 1990 के राष्ट्रपति आदेश द्वारा स्थापित हुई; प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं।
- पूंछी आयोग 27 अप्रैल 2007 को गठित हुआ और इसने 30 मार्च 2010 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- 5 जनवरी 1966 को गठित पहले प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपनी 13वीं रिपोर्ट में केन्द्र-राज्य संबंधों पर विचार किया।
तिथियाँ अन्तर-राज्य परिषद् सचिवालय (interstatecouncil.gov.in) से; राजमन्नार समिति का वर्ष उसके अध्यक्ष की जीवनी से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहले प्रशासनिक सुधार आयोग को इसलिए चुन लेना कि उसने भी अन्तर-राज्य परिषद् का प्रस्ताव रखा था। अन्तर-सरकार परिषद् नाम सरकारिया रिपोर्ट से आता है।
- पूंछी आयोग को इसलिए चुन लेना कि उसने अन्तर-राज्य परिषद् के बारे में लिखा। उसने 2010 में रिपोर्ट दी, जब परिषद् पहले से मौजूद थी, और उसे सशक्त बनाने को कहा।
- राजमन्नार समिति को संघ का निकाय मान लेना। इसे तमिलनाडु सरकार ने नियुक्त किया था।
कोई प्रश्न कोई अनुशंसा बताकर पूछ सकता है कि वह किस आयोग ने की थी, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि अन्तर-राज्य परिषद् कब स्थापित हुई, उसका अध्यक्ष कौन है, या उसके कर्तव्य अनुच्छेद 263 के किन खंडों से लिए गए हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अन्तर-राज्य परिषद् की स्थापना करने वाला राष्ट्रपति आदेश किस वर्ष जारी हुआ ?
- (a)1983
- (b)1988
- (c)1990
- (d)2010
उत्तर(3) — राष्ट्रपति आदेश 28 मई 1990 का है। 1983 (1) सरकारिया आयोग के गठन का वर्ष है, 1988 (2) उसकी रिपोर्ट का, और 2010 (4) वह वर्ष है जब पूंछी आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अन्तर-राज्य परिषद् का अध्यक्ष कौन है ?
- (a)भारत का राष्ट्रपति
- (b)प्रधानमंत्री
- (c)केन्द्रीय गृह मंत्री
- (d)भारत का उपराष्ट्रपति
उत्तर(2) — 1990 के राष्ट्रपति आदेश के अंतर्गत प्रधानमंत्री परिषद् की अध्यक्षता करते हैं। राष्ट्रपति (1) अनुच्छेद 263 के अंतर्गत आदेश द्वारा ऐसी परिषद् स्थापित करता है, पर उसकी अध्यक्षता नहीं करता। केन्द्रीय गृह मंत्री (3) और उपराष्ट्रपति (4) इसके अध्यक्ष नहीं हैं।