नथमल जी की हवेली अवस्थित है
- (1)बाड़मेर
- (2)बीकानेर
- (3)जोधपुर
- (4)जैसलमेर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), जैसलमेर.
नथमल जी की हवेली जैसलमेर में है। राजस्थान पर्यटन का जैसलमेर पृष्ठ इसका वर्णन शहर की दो अन्य हवेलियों, सालिम सिंह की हवेली और पटवों की हवेली, के साथ करता है।
वही पृष्ठ बताता है कि नथमल जी की हवेली 19वीं शताब्दी में दो वास्तुकार भाइयों ने बनाई। उन्होंने भवन पर दो ओर से काम किया, और परिणाम एक सममित निर्माण है।
इसकी सजावट में लघुचित्र शैली के चित्र हैं, और पीले बलुआ पत्थर में तराशे गए विशाल हाथी।
यह हवेली उस पुराने शहर का हिस्सा है जिसकी पहचान जैसलमेर किला है, जिसे सोनार किला भी कहा जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार किले में दुकानें, होटल और प्राचीन हवेलियाँ हैं, जिनमें पीढ़ियाँ आज भी रहती हैं।
नथमल जी, सालिम सिंह और पटवों — तीन हवेलियाँ, एक शहर: जैसलमेर।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)बाड़मेर — बाड़मेर वह शहर है जिसके निकट किराडू मंदिर हैं। राजस्थान पर्यटन इन्हें बाड़मेर से लगभग 35 किमी दूर बताता है: सोलंकी शैली के पाँच मंदिर, शिव को समर्पित, जिनमें वह सोमेश्वर मंदिर का विशेष उल्लेख करता है।
वही पृष्ठ बाड़मेर किले के निर्माण का श्रेय 1552 ई. में रावत भीमा को देता है। नथमल जी की हवेली का वर्णन जैसलमेर पृष्ठ पर है, बाड़मेर पृष्ठ पर नहीं।
- (2)बीकानेर — बीकानेर की अपनी हवेलियाँ हैं, पर एक अलग समूह: रामपुरिया हवेलियों का समूह, जिसे राजस्थान पर्यटन शहर का सबसे प्रसिद्ध हवेली-समूह बताता है। ये दुलमेरा (लाल) पत्थर से बनी हैं।
बीकानेर का किला जूनागढ़ है, जिसे 1588 ई. में राजा रायसिंह ने बनवाया। पीले बलुआ पत्थर के हाथियों वाली नथमल जी की हवेली जैसलमेर में है।
- (3)जोधपुर — जोधपुर का किला मेहरानगढ़ किला है, जिसे राजस्थान पर्यटन शहर के क्षितिज से 125 मीटर ऊपर एक पहाड़ी से उठता हुआ बताता है। महाराजा सरदार सिंह द्वारा बनवाया गया घंटाघर जोधपुर का एक और प्रमुख स्थल है।
जोधपुर और जैसलमेर दोनों ही किलों और पुराने इलाकों वाले पश्चिमी राजस्थान के शहर हैं, पर नथमल जी की हवेली जैसलमेर में है।
अवधारणा
हवेली एक बड़ा नगर-आवास है। राजस्थान पर्यटन बीकानेर की हवेलियों को अभिजात वर्ग के घर कहता है और उनके भाग गिनाता है: झरोखे, प्रवेश-द्वार, जालीदार खिड़कियाँ, दीवानखाने और तहखाने।
राजस्थान पर्यटन का जैसलमेर पृष्ठ तीन हवेलियों का नाम लेकर वर्णन करता है। नथमल जी की हवेली 19वीं शताब्दी में दो ओर से काम करने वाले दो वास्तुकार भाइयों ने बनाई। पाँच-मंज़िला पटवों की हवेली को जैसलमेर की सबसे बड़ी और सबसे बारीक नक्काशी वाली हवेलियों में गिना गया है।
सालिम सिंह की हवेली 18वीं शताब्दी के पूर्वार्ध की है, और इसकी मेहराबदार छत मोर के आकार में तराशे गए टोड़ों (ब्रैकेट) पर टिकी है। पृष्ठ एक किंवदंती दर्ज करता है कि इसमें कभी लकड़ी की दो और मंज़िलें थीं, जिन्हें महाराजा ने गिरवाने का आदेश दिया।
इन वर्णनों में पत्थर अलग है: नथमल जी की हवेली के हाथी पीले बलुआ पत्थर के हैं, जबकि बीकानेर की रामपुरिया हवेलियाँ लाल दुलमेरा पत्थर की हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "राजस्थान की वास्तु परम्परा– मंदिर, किले, महल एवं मानव निर्मित जलीय संरचनाएँ" शामिल है। उस पंक्ति में हवेलियों का नाम नहीं है; वे उसी निर्मित विरासत का आवासीय पक्ष हैं।
राजस्थान पर्यटन नथमल जी की हवेली के लिए तीन विवरण देता है: स्थान (जैसलमेर), निर्माता (दो वास्तुकार भाई) और काल (19वीं शताब्दी)।
बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर और जैसलमेर सभी पश्चिमी राजस्थान के शहर हैं, और हर एक में किला है। क्षेत्र से स्थान तय नहीं होता; स्मारक का अपना शहर तय करता है।
उसी शहर का जैसलमेर किला विश्व धरोहर स्थल है, और राजस्थान पर्यटन उसके भीतर के जैन मंदिरों को 12वीं और 15वीं शताब्दी का बताता है।
मुख्य तथ्य
- नथमल जी की हवेली जैसलमेर में है; राजस्थान पर्यटन के अनुसार इसे 19वीं शताब्दी में दो वास्तुकार भाइयों ने बनाया।
- भाइयों ने हवेली पर दो ओर से काम किया; इसकी सजावट में लघुचित्र शैली के चित्र और पीले बलुआ पत्थर में तराशे गए हाथी हैं।
- जैसलमेर की पटवों की हवेली पाँच-मंज़िला भवन है, जिसे शहर की सबसे बड़ी और सबसे बारीक नक्काशी वाली हवेलियों में गिना गया है।
- जैसलमेर की सालिम सिंह की हवेली 18वीं शताब्दी के पूर्वार्ध की है; मोर के आकार के टोड़े इसकी मेहराबदार छत को थामते हैं।
- राजस्थान पर्यटन लाल दुलमेरा पत्थर से बने रामपुरिया समूह को बीकानेर की हवेलियों का सबसे प्रसिद्ध समूह बताता है।
वर्णन राजस्थान पर्यटन (tourism.rajasthan.gov.in) के शहर-पृष्ठों से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नक्काशी वाली हर हवेली को जैसलमेर की मान लेना। बीकानेर का अपना समूह है — लाल पत्थर की रामपुरिया हवेलियाँ।
- जैसलमेर की तीन हवेलियों को आपस में मिला देना: नथमल जी (19वीं शताब्दी, दो भाई), सालिम सिंह (18वीं शताब्दी का पूर्वार्ध, मोर के आकार के टोड़े), पटवों (पाँच मंज़िलें)।
- स्मारक के बजाय क्षेत्र के आधार पर चुनना। बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर भी किलों वाले पश्चिमी राजस्थान के शहर हैं।
कोई प्रश्न किसी हवेली, किले या मंदिर का नाम देकर उसका शहर या जिला पूछ सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न स्मारकों को स्थानों के साथ सूचीबद्ध करके गलत सुमेलित युग्म भी पूछ सकता है, या किसी हवेली का निर्माता या शताब्दी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जैसलमेर की कौन-सी हवेली 18वीं शताब्दी के पूर्वार्ध की है और उसकी मेहराबदार छत मोर के आकार में तराशे गए टोड़ों पर टिकी है ?
- (a)नथमल जी की हवेली
- (b)सालिम सिंह की हवेली
- (c)पटवों की हवेली
- (d)रामपुरिया हवेली
उत्तर(2) — राजस्थान पर्यटन सालिम सिंह की हवेली को 18वीं शताब्दी के पूर्वार्ध की बताता है और उसके मोर के आकार के टोड़ों का वर्णन करता है। नथमल जी की हवेली (1) 19वीं शताब्दी में दो वास्तुकार भाइयों ने बनाई। पटवों की हवेली (3) पाँच-मंज़िला हवेली है। रामपुरिया हवेली (4) बीकानेर में है, जैसलमेर में नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रामपुरिया हवेलियों का समूह अवस्थित है
- (a)जैसलमेर
- (b)बीकानेर
- (c)जोधपुर
- (d)बाड़मेर
उत्तर(2) — राजस्थान पर्यटन लाल दुलमेरा पत्थर से बने रामपुरिया समूह को बीकानेर में बताता है। जैसलमेर (1) में नथमल जी, पटवों और सालिम सिंह की हवेलियाँ हैं। जोधपुर (3) मेहरानगढ़ किले का शहर है। बाड़मेर (4) वह शहर है जिसके निकट किराडू मंदिर हैं।