राजस्थान राज्य का प्रथम राजप्रमुख किसे नियुक्त किया गया ?
- (1)महाराजा उम्मेद सिंह, जोधपुर
- (2)महाराजा करणी सिंह, बीकानेर
- (3)महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय, जयपुर
- (4)महाराणा भगवत सिंह, उदयपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय, जयपुर.
भारत सरकार का व्हाइट पेपर ऑन इंडियन स्टेट्स (भारतीय रियासतों पर श्वेत पत्र, संशोधित संस्करण, 1950) उस संघ का वर्णन करता है जो जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर के पूर्व राजस्थान संघ में मिलने से बना। वह कहता है कि जयपुर के वर्तमान शासक इस संघ के प्रथम राजप्रमुख हैं और आजीवन पद पर रहेंगे।
उस संघ का उद्घाटन 30 मार्च 1949 को हुआ। श्वेत पत्र के परिशिष्ट में उसका विलय-पत्र छपा है, जिसे महाराजाधिराज सवाई सर मानसिंहजी बहादुर ने संयुक्त राज्य राजस्थान के राजप्रमुख के रूप में निष्पादित किया।
श्वेत पत्र मार्च 1948 के पहले संघ को भी संयुक्त राज्य राजस्थान कहता है, और 1948 के संघों के अपने राजप्रमुख थे: विकिपीडिया मार्च 1948 के लिए कोटा के महाराव का, और श्वेत पत्र अप्रैल 1948 के लिए मेवाड़ के महाराणा का नाम देता है। इनमें से कोई शासक विकल्पों में नहीं है।
1949 के संघ के प्रथम राजप्रमुख विकल्प (3), महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय, जयपुर, थे।
याद रखने की बात: 30 मार्च 1949 का संघ: जयपुर के मान सिंह द्वितीय प्रथम राजप्रमुख, मेवाड़ के शासक महाराजप्रमुख; 1948 के लिए श्वेत पत्र कोटा के शासक को मार्च के संघ का प्रथम अध्यक्ष और मेवाड़ के महाराणा को अप्रैल के संघ का राजप्रमुख बताता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)महाराजा उम्मेद सिंह, जोधपुर — उम्मेद सिंह यह पद धारण नहीं कर सकते थे। जोधपुर ज़िला गज़ेटियर (1979) कहता है कि उनकी मृत्यु जून 1947 में, राजस्थान का कोई भी संघ बनने से पहले, हुई और हनुवन्त सिंह उनके उत्तराधिकारी बने।
गज़ेटियर कहता है कि उम्मेद भवन महल उनके शासनकाल में बना और उनके नाम पर है। महाराजा उम्मेद सिंह, जोधपुर उस शासक वाले प्रश्न का उत्तर हैं जिनके नाम पर जोधपुर का उम्मेद भवन है।
- (2)महाराजा करणी सिंह, बीकानेर — करणी सिंह 1949 में अभी शासक नहीं बने थे। चूरू ज़िला गज़ेटियर (1970) कहता है कि 1943 में महाराजा सादुल सिंह गंगा सिंह के उत्तराधिकारी बने, और विकिपीडिया करणी सिंह का बीकानेर के महाराजा के रूप में शासन 1950 से बताता है।
महाराजा करणी सिंह, बीकानेर बीकानेर में सादुल सिंह के उत्तराधिकारी वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
- (4)महाराणा भगवत सिंह, उदयपुर — 1948–49 में मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह थे। श्वेत पत्र कहता है कि अप्रैल 1948 में मेवाड़ के मिलने पर उसके महाराणा को आजीवन राजप्रमुख होना था, और विकिपीडिया भूपाल सिंह को यह पद 18 अप्रैल 1948 से देता है। 1949 के संघ ने मेवाड़ के शासक को इसके स्थान पर महाराजप्रमुख बनाया।
विकिपीडिया कहता है कि भगवत सिंह 4 जुलाई 1955 को भूपाल सिंह के उत्तराधिकारी बने। महाराणा भगवत सिंह, उदयपुर उदयपुर में भूपाल सिंह के उत्तराधिकारी वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
अवधारणा
श्वेत पत्र कहता है कि राजपूताना की रियासतों का एकीकरण तीन चरणों में पूरा हुआ। पहले, दक्षिण-पूर्व की नौ छोटी रियासतों ने राजस्थान संघ बनाया, जिसका उद्घाटन 25 मार्च 1948 को हुआ; श्वेत पत्र का 1948 का संस्करण कहता है कि कोटा के शासक को इसका प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित माना गया।
मेवाड़ के मिलने पर प्रसंविदा बदली गई: मेवाड़ के महाराणा आजीवन राजप्रमुख और कोटा के महाराव वरिष्ठ उप-राजप्रमुख बने। जवाहरलाल नेहरू ने 18 अप्रैल 1948 को इस दूसरे संघ का उद्घाटन किया।
अंत में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर के मिलने से 30 मार्च 1949 को संयुक्त राज्य राजस्थान बना, जिसमें जयपुर के शासक राजप्रमुख और मेवाड़ के शासक महाराजप्रमुख थे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "राजस्थान का एकीकरण।" सूचीबद्ध है।
राजप्रमुख पूर्व देशी रियासतों के किसी संघ का प्रमुख होता था। श्वेत पत्र बताता है कि संविधान ने ऐसे संघ के राजप्रमुख, मंत्रिपरिषद् और विधानमंडल को वही कार्य दिए जो प्रांतों में उनके समकक्षों के थे।
यह पद टिका नहीं। विकिपीडिया मान सिंह द्वितीय का राजप्रमुख कार्यकाल 31 अक्टूबर 1956 को समाप्त बताता है, और कहता है कि उस वर्ष राज्यों के पुनर्गठन के साथ यह पद समाप्त कर दिया गया।
मुख्य तथ्य
- व्हाइट पेपर ऑन इंडियन स्टेट्स (1950): 30 मार्च 1949 को उद्घाटित संघ के प्रथम राजप्रमुख, आजीवन, जयपुर के तत्कालीन शासक थे।
- जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को पूर्व राजस्थान संघ से जोड़ने वाले विस्तृत संयुक्त राज्य राजस्थान का उद्घाटन 30 मार्च 1949 को हुआ।
- श्वेत पत्र के अनुसार उसी संघ ने मेवाड़ के शासक को आजीवन महाराजप्रमुख नियुक्त किया।
- नेहरू द्वारा 18 अप्रैल 1948 को उद्घाटित दूसरे राजस्थान संघ में मेवाड़ के महाराणा राजप्रमुख थे।
- दक्षिण-पूर्व की नौ रियासतों के पहले राजस्थान संघ का उद्घाटन 25 मार्च 1948 को हुआ; विकिपीडिया कोटा के महाराव भीम सिंह द्वितीय को उसका राजप्रमुख बताता है।
1949 के संघ के प्रथम राजप्रमुख: मान सिंह द्वितीय, विकल्प (3)। स्रोत: व्हाइट पेपर ऑन इंडियन स्टेट्स (1948 और 1950 संस्करण); कोटा के लिए विकिपीडिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहले के राजप्रमुखों को छोड़ देना: विकिपीडिया मार्च 1948 के संघ के लिए कोटा के महाराव का, और श्वेत पत्र अप्रैल 1948 के लिए मेवाड़ के महाराणा का नाम देता है; श्वेत पत्र के प्रथम राजप्रमुख जयपुर के शासक हैं, जो 1949 के संघ के थे।
- राजप्रमुख और महाराजप्रमुख को मिला देना: 1949 में मेवाड़ के शासक को महाराजप्रमुख की अलग आजीवन उपाधि मिली।
- तिथियाँ जाँचे बिना किसी प्रसिद्ध शासक को चुन लेना: जोधपुर के उम्मेद सिंह की मृत्यु जून 1947 में हो चुकी थी, और भगवत सिंह 1955 में जाकर महाराणा बने।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि राजस्थान के एकीकरण के किसी चरण में राजप्रमुख या महाराजप्रमुख कौन बना, या चरणों की तिथियाँ क्रम से पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी चरण में मुख्यमंत्री या राज्यपाल कौन था।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
30 मार्च 1949 को उद्घाटित संयुक्त राज्य राजस्थान में किस शासक को आजीवन महाराजप्रमुख नियुक्त किया गया?
- (a)जयपुर के शासक
- (b)मेवाड़ के शासक
- (c)बीकानेर के शासक
- (d)कोटा के महाराव
उत्तर(2) — श्वेत पत्र मेवाड़ के शासक की महाराजप्रमुख के रूप में आजीवन नियुक्ति को उस संघ की एक विशेष बात बताता है। विकल्प (1) उसके प्रथम राजप्रमुख थे; विकल्प (4) अप्रैल 1948 के संघ के वरिष्ठ उप-राजप्रमुख थे; श्वेत पत्र विकल्प (3) को यह पद नहीं देता। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जिस दूसरे राजस्थान संघ में मेवाड़ शामिल हुआ, उसका उद्घाटन किस तिथि को हुआ?
- (a)25 मार्च 1948
- (b)18 अप्रैल 1948
- (c)30 मार्च 1949
- (d)1 नवम्बर 1956
उत्तर(2) — श्वेत पत्र कहता है कि जवाहरलाल नेहरू ने 18 अप्रैल 1948 को दूसरे राजस्थान संघ का उद्घाटन किया। विकल्प (1) पहले राजस्थान संघ की तिथि है और विकल्प (3) उस विस्तृत संघ की, जिसमें जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर मिले; विकल्प (4) श्वेत पत्र में किसी संघ के उद्घाटन की तिथि नहीं है।