चन्द्रभागा मेला प्रतिवर्ष कार्तिक मास में कहाँ आयोजित होता है ?
- (1)बूंदी
- (2)बाँसवाड़ा
- (3)डूंगरपुर
- (4)झालरापाटन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), झालरापाटन.
मेले का नाम चन्द्रभागा नामक एक छोटी नदी से है। झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर (1964) कहता है कि यह कालीसिंध में मिलने से पहले झालरापाटन तहसील में केवल सात मील बहती है, और कार्तिक पूर्णिमा को झालरापाटन के निकट चन्द्रावती में हज़ारों लोग इसमें स्नान करते हैं।
यही गज़ेटियर चन्द्रभागा कार्तिक मेले को झालरापाटन का पशु मेला बताता है। यह उस धार्मिक मेले के साथ पड़ता है जो कार्तिक के अंतिम दिन की रात चन्द्रभागा के तट पर भरता है।
राजस्थान पर्यटन का झालावाड़ पृष्ठ भी चन्द्रभागा मेला कार्तिक मास में झालावाड़ से लगभग छह किलोमीटर दूर झालरापाटन में बताता है। मेला विकल्प (4), झालरापाटन, में आयोजित होता है।
याद रखने की बात: चन्द्रभागा मेला = झालरापाटन, कार्तिक में: चन्द्रभागा में पवित्र स्नान और पशु मेला।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)बूंदी — बूंदी में भी कार्तिक का एक मेला है, पर यह नहीं। बूंदी ज़िला गज़ेटियर (1964) केशोरायपाटन में सात दिन चलने वाले कार्तिक पूर्णिमा मेले का उल्लेख करता है।
वही गज़ेटियर बूंदी के दो तीज मेलों का वर्णन करता है, एक श्रावण शुक्ल तृतीया को और एक भादवा की तृतीया को। बूंदी अपने तीज मेलों वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (2)बाँसवाड़ा — झालावाड़ गज़ेटियर के अनुसार चन्द्रभागा कालीसिंध में मिलने से पहले झालरापाटन तहसील में केवल सात मील बहती है, इसलिए इसका मेला झालरापाटन में है।
बाँसवाड़ा ज़िला गज़ेटियर (1974) वहाँ के अन्य मेलों का वर्णन करता है, जैसे बोरीगामा गाँव के घोटिया आम्बा मंदिर में चैत्र बदी 15 को भरने वाला मेला। बाँसवाड़ा घोटिया आम्बा मेले वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (3)डूंगरपुर — चन्द्रभागा मेला झालरापाटन का है, जहाँ झालावाड़ गज़ेटियर नदी और उसका कार्तिक मेला, दोनों बताता है।
डूंगरपुर ज़िला गज़ेटियर (1974) बेणेश्वर मेले का वर्णन करता है, जो हर वर्ष माघ शुक्ल एकादशी से माघ पूर्णिमा तक माही और सोम के संगम पर भरता है; यह मुख्यतः जनजातीय मेला है जिसमें भीलों की प्रधानता रहती है। डूंगरपुर बेणेश्वर मेले वाले प्रश्न का उत्तर है।
अवधारणा
झालरापाटन में एक स्नान-पर्व और एक पशु-बाज़ार साथ-साथ पड़ते हैं। झालावाड़ गज़ेटियर कहता है कि कार्तिक का पशु मेला चन्द्रभागा पर रात के मेले के साथ पड़ता है, और बिक्री के लिए गायें, बैल, भैंसें, घोड़े और ऊँट लाए जाते हैं।
यह मेला कम से कम उन्नीसवीं शताब्दी से चला आ रहा है। गज़ेटियर कैप्टन एच. बी. एबट की 1885 की बंदोबस्त रिपोर्ट उद्धृत करता है, जो झालरापाटन के दो बड़े पशु मेले दर्ज करती है: एक अक्टूबर में चन्द्रभागा पर, जहाँ लगभग 7,000 पशु बिके, और एक अप्रैल में।
स्नान का स्थान, चन्द्रावती, झालरापाटन के निकट एक प्राचीन स्थल है, जहाँ चन्द्रभागा के बाएँ तट पर एक पुराने नगर के खंडहर हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "राजस्थान में सामाजिक जीवन : मेले एवं त्योहार; सामाजिक रीति–रिवाज तथा परम्पराये; वेशभूषा एवं आभूषण।" सूचीबद्ध है।
चन्द्रावती क्षेत्र के मंदिर-इतिहास का भी हिस्सा है। झालावाड़ गज़ेटियर वहाँ के एक मंदिर का वर्णन करता है जो अब शीतलेश्वर महादेव कहलाता है, और जिसे वि.सं. 746 (689 ई.) के राजा दुर्गगण के एक अभिलेख में चन्द्रमौलि कहा गया है।
गज़ेटियर ज़िले के पशु मेलों में झालरापाटन के ही चन्द्रभागा कार्तिक मेले और गोमती सागर बैसाखी मेले के नाम देता है।
मुख्य तथ्य
- झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर (1964): चन्द्रभागा खंडिया के निकट कालीसिंध में मिलने से पहले झालरापाटन तहसील में सात मील बहती है।
- गज़ेटियर के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को झालरापाटन के निकट चन्द्रावती में हज़ारों लोग चन्द्रभागा में स्नान करते हैं।
- चन्द्रभागा कार्तिक पशु मेला उस मेले के साथ पड़ता है जो कार्तिक के अंतिम दिन की रात नदी के तट पर भरता है।
- कैप्टन एच. बी. एबट की 1885 की बंदोबस्त रिपोर्ट ने झालरापाटन में चन्द्रभागा पर अक्टूबर के मेले में लगभग 7,000 पशुओं की बिक्री दर्ज की।
- राजस्थान पर्यटन चन्द्रभागा मेला कार्तिक (अक्टूबर–नवम्बर) में झालावाड़ से लगभग छह किलोमीटर दूर झालरापाटन में बताता है।
चन्द्रभागा मेला: झालरापाटन, विकल्प (4)। स्रोत: झालावाड़, बूंदी (1964) और बाँसवाड़ा, डूंगरपुर (1974) ज़िला गज़ेटियर।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बूंदी में भी कार्तिक मेला होने के कारण बूंदी चुन लेना: उसका कार्तिक पूर्णिमा मेला केशोरायपाटन में है, जबकि चन्द्रभागा मेला झालरापाटन में है।
- झालरापाटन को झालावाड़ नगर समझ लेना: राजस्थान पर्यटन मेला झालावाड़ से लगभग छह किलोमीटर दूर झालरापाटन में बताता है।
- झालरापाटन के दो पशु मेलों को मिला देना: चन्द्रभागा मेला कार्तिक में है, गोमती सागर मेला बैसाख में।
कोई प्रश्न किसी मेले का नाम देकर पूछ सकता है कि वह कहाँ या किस मास में भरता है, या कई मेलों का उनके स्थानों से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई मेला किस नदी के किनारे भरता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बेणेश्वर मेला किन नदियों के संगम पर भरता है?
- (a)माही और सोम
- (b)चम्बल और काली सिंध
- (c)चन्द्रभागा और कालीसिंध
- (d)बनास और बेड़च
उत्तर(1) — डूंगरपुर ज़िला गज़ेटियर बेणेश्वर मेला माही और सोम के संगम पर बताता है। विकल्प (3) वह स्थान है जहाँ झालरापाटन तहसील में खंडिया के निकट चन्द्रभागा समाप्त होती है; विकल्प (2) और (4) वह संगम नहीं हैं जिसका गज़ेटियर नाम लेता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर के अनुसार झालरापाटन का चन्द्रभागा पशु मेला किस मास में भरता है?
- (a)बैसाख
- (b)कार्तिक
- (c)चैत्र
- (d)माघ
उत्तर(2) — गज़ेटियर इसे चन्द्रभागा कार्तिक मेला कहता है, जो कार्तिक के अंतिम दिन की रात के मेले के साथ भरता है। विकल्प (1) झालरापाटन के गोमती सागर मेले का मास है; विकल्प (3) और (4) वह मास नहीं हैं जो गज़ेटियर बताता है।