निम्न में से कौन सा युग्म गलत मेलित है ?
- (1)रामदेवजी – रामदेवरा
- (2)मल्लीनाथजी – गागरोण
- (3)तेजाजी – खड़नाल
- (4)पाबूजी – कोलू
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), मल्लीनाथजी – गागरोण.
प्रश्न गलत मेलित युग्म पूछता है। तीन युग्म किसी लोक देवता को उसके अपने गाँव से जोड़ते हैं; एक नहीं जोड़ता।
रामदेवजी – रामदेवरा सही है। बाड़मेर ज़िला गज़ेटियर (1962) कहता है कि रामदेवजी जैसलमेर ज़िले में पोकरण के निकट रामदेवरा (रुणीचा) गाँव के थे।
तेजाजी – खड़नाल सही है। नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975) तेजा को खड़नाल का जाट बताता है, जिनकी मृत्यु मवेशी चुराने वाले मेरों से लड़ाई के बाद साँप के काटने से हुई।
पाबूजी – कोलू सही है। द एपिक ऑफ़ पाबूजी (1991) के लेखक जॉन डी. स्मिथ लिखते हैं कि पाबूजी मरुस्थल के गाँव कोलू में रहते थे, जहाँ उनके एकमात्र सुविख्यात पारम्परिक मंदिर हैं।
मल्लीनाथजी – गागरोण गलत है। बाड़मेर गज़ेटियर मल्लीनाथ का मंदिर बालोतरा के निकट लूणी के किनारे तिलवाड़ा में बताता है, जहाँ उनके सम्मान में हर वर्ष बड़ा मेला भरता है।
इम्पीरियल गज़ेटियर (1908) के अनुसार गागरोण झालरापाटन के निकट आहू और काली सिंध नदियों के संगम पर स्थित एक दुर्ग है। गलत मेलित युग्म विकल्प (2), मल्लीनाथजी – गागरोण, है।
याद रखने की बात: रामदेव–रामदेवरा (रुणीचा), तेजा–खड़नाल, पाबू–कोलू, मल्लीनाथ–तिलवाड़ा।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)रामदेवजी – रामदेवरा — यह युग्म सही है, इसलिए गलत मेलित युग्म नहीं हो सकता। बाड़मेर गज़ेटियर कहता है कि रामदेवजी पोकरण के निकट रामदेवरा (रुणीचा) के थे।
राजस्थान पर्यटन रामदेवरा मंदिर को जोधपुर–जैसलमेर मार्ग पर पोकरण से 12 किमी दूर बताता है और कहता है कि यह बाबा रामदेवजी का चिर-विश्राम स्थल है। रामदेवजी – रामदेवरा सही सुमेलित युग्म पूछने वाले प्रश्न का उत्तर हो सकता है।
- (3)तेजाजी – खड़नाल — यह युग्म सही है। नागौर गज़ेटियर तेजा को मूंडवा से 16 किमी पश्चिम में स्थित खड़नाल का जाट बताता है, और कहता है कि परबतसर का पशु मेला हर वर्ष उनकी मृत्यु की स्मृति में भरता है।
यानी खड़नाल तेजाजी का गाँव है, जबकि परबतसर वह स्थान है जहाँ उनकी स्मृति में मेला भरता है। तेजाजी – खड़नाल सही सुमेलित युग्म पूछने वाले प्रश्न का उत्तर हो सकता है।
- (4)पाबूजी – कोलू — यह युग्म सही है। जॉन डी. स्मिथ लिखते हैं कि राठौड़ राजपूत राजकुमार पाबूजी मरुस्थल के गाँव कोलू में रहते थे, जहाँ उनके एकमात्र सुविख्यात पारम्परिक मंदिर हैं।
उनकी गाथा भोपे गाते हैं, जो प्रायः चित्रित कपड़े, पड़, के सामने प्रस्तुति देने वाले गायक-पुजारी हैं। पाबूजी – कोलू सही सुमेलित युग्म पूछने वाले प्रश्न का उत्तर हो सकता है।
अवधारणा
विकल्पों के चारों व्यक्ति राजस्थान में लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं। नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975) दर्ज करता है कि वहाँ के अधिकांश जाट चाँदी का एक ताबीज़ पहनते थे, जिसमें रामदेवजी, पाबूजी या तेजाजी घोड़े पर सवार दिखाए जाते थे।
बाड़मेर गज़ेटियर मल्लीनाथ को मालाणी का प्रसिद्ध राठौड़ सरदार कहता है। उसके अनुसार उनकी मृत्यु 1399 में हुई, वे इस क्षेत्र के पहले सरदार थे जिन्होंने रावल की उपाधि ली, और लोककथाएँ उन्हें दैवी शक्तियों से युक्त बताती हैं।
स्मिथ बताते हैं कि पाबूजी की कथा का सबसे पुराना ज्ञात रूप सत्रहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में सक्रिय मुंहता नैणसी की ख्यात में है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "धार्मिक जीवन : धार्मिक समुदाय, राजस्थान में संत एवं सम्प्रदाय। राजस्थान के लोक देवी–देवता।" सूचीबद्ध है।
ये देवता गाँवों और मेलों से जुड़े हैं। बाड़मेर गज़ेटियर कहता है कि तिलवाड़ा का पशु मेला चैत्र में भरता है और नियमित मेले के रूप में इसे पहली बार 1593 में मोटा राजा उदयसिंह ने लगवाया।
गागरोण के अपने संबंध हैं। झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर (1964) वहाँ संत मिट्ठे साहब के उर्स, और उसके निकट एक रामानंदी मठ, पीपाजी का मठ, दर्ज करता है, जिसे एक अभिलेख गागरोण के राजा पीपाजी से जोड़ता है।
मुख्य तथ्य
- बाड़मेर ज़िला गज़ेटियर (1962): रामदेवजी पोकरण के निकट रामदेवरा (रुणीचा) गाँव के थे।
- नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975): तेजा मूंडवा से 16 किमी पश्चिम में स्थित खड़नाल के जाट थे; परबतसर का पशु मेला हर वर्ष उनकी मृत्यु की स्मृति में भरता है।
- जॉन डी. स्मिथ: पाबूजी मरुस्थल के गाँव कोलू में रहते थे, जहाँ उनके एकमात्र सुविख्यात पारम्परिक मंदिर हैं।
- बाड़मेर ज़िला गज़ेटियर: मल्लीनाथ का एक मंदिर बालोतरा के निकट लूणी के दाहिने तट पर तिलवाड़ा में है; मल्लीनाथ की मृत्यु 1399 में हुई।
- इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया (1908): गागरोण आहू और काली सिंध नदियों के संगम पर स्थित एक दुर्ग और गाँव है।
गलत मेलित: मल्लीनाथजी – गागरोण, विकल्प (2)। स्रोत: बाड़मेर (1962) और नागौर (1975) गज़ेटियर; जॉन डी. स्मिथ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'गलत मेलित' को 'सही मेलित' पढ़ लेना: यहाँ तीन युग्म सही हैं, और उत्तर वह एक युग्म है जो सही नहीं है।
- शासक होने के कारण मल्लीनाथ को किसी प्रसिद्ध दुर्ग से जोड़ देना: बाड़मेर गज़ेटियर उन्हें मालाणी का राठौड़ सरदार कहता है और उनका मंदिर तिलवाड़ा में बताता है।
- देवता के गाँव और उसके मेले के स्थान को मिला देना: तेजाजी खड़नाल के थे, पर उनकी स्मृति का पशु मेला परबतसर में भरता है।
कोई प्रश्न लोक देवताओं को स्थानों के साथ सूचीबद्ध करके पूछ सकता है कि कौन सा युग्म गलत मेलित है, या किसी देवता का नाम देकर उसका गाँव पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी देवता की स्मृति में मेला कहाँ भरता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बाड़मेर ज़िला गज़ेटियर के अनुसार मल्लीनाथजी के सम्मान में हर वर्ष बड़ा मेला किस स्थान पर भरता है?
- (a)तिलवाड़ा
- (b)परबतसर
- (c)रामदेवरा
- (d)कोलू
उत्तर(1) — बाड़मेर गज़ेटियर कहता है कि मल्लीनाथजी तिलवाड़ा में पूजे जाते हैं, जहाँ उनके सम्मान में हर वर्ष बड़ा मेला भरता है। विकल्प (2) में तेजाजी की स्मृति में पशु मेला भरता है, विकल्प (3) बाबा रामदेवजी का विश्राम स्थल है, और विकल्प (4) पाबूजी का गाँव है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
खड़नाल गाँव किस लोक देवता से संबंधित है?
- (a)पाबूजी
- (b)तेजाजी
- (c)रामदेवजी
- (d)मल्लीनाथजी
उत्तर(2) — नागौर गज़ेटियर तेजा को खड़नाल का जाट बताता है। विकल्प (1) कोलू से, विकल्प (3) रामदेवरा से, और विकल्प (4) तिलवाड़ा से जुड़े हैं।