‘अचलदास खींची री वचनिका’ के लेखक हैं
- (1)गोपाल दान कविया
- (2)केसरी सिंह बारहठ
- (3)रामनाथ कविया
- (4)चारण शिवदास
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), चारण शिवदास.
गंगा राम गर्ग का एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ वर्ल्ड हिन्दी लिटरेचर (1985) अचलदास खींची री वचनिका को शिवदास गाडण की रचना बताता है। वह इसे डिंगल की कविता, तुकांत गद्य और पद्य में एक छोटी कथात्मक रचना, कहता है, जिसमें 119 पद्य और गद्य-खंड हैं।
गर्ग के अनुसार इसमें माण्डू के सुल्तान होशंग गोरी के गागरोणगढ़ के अचलदास खींची पर आक्रमण, अचलदास के प्राणांत तक युद्ध, और दुर्ग की स्त्रियों के जौहर का वर्णन है। वे कवि को अचलदास का समकालीन और सम्भवतः उनका दरबारी कवि बताते हैं।
साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर भी लेखक शिवदास गाडण बताता है और रचना को चारण काव्य कहता है। एस. पी. सेन की हिस्टोरिकल बायोग्राफ़ी इन इंडियन लिटरेचर (1979) इसे प्रसिद्ध वचनिकाओं में गिनाती है और लेखक शिवदास बताती है।
लेखक विकल्प (4), चारण शिवदास, हैं।
याद रखने की बात: अचलदास खींची री वचनिका = चारण कवि शिवदास गाडण, गागरोण के पतन पर।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)गोपाल दान कविया — गर्ग गोपाल दान कविया का काल 1815–85 बताते हैं, जो वचनिका में वर्णित गागरोण के घेरे से लगभग चार शताब्दी बाद है। उनका जन्म सीकर के निकट उदयपुरा में हुआ था।
गर्ग उन्हें कूर्मवंश की प्रशस्ति लावारासा के साथ शिखरवंशोत्पत्ति और कृष्ण-विलास का रचयिता बताते हैं। गोपाल दान कविया लावारासा के रचयिता हैं।
- (2)केसरी सिंह बारहठ — गर्ग केसरी सिंह बारहठ का काल 1872–1941 बताते हैं और उन्हें क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी कवि कहते हैं, इसलिए पंद्रहवीं शताब्दी के एक घेरे पर रची रचना उनकी नहीं हो सकती।
गर्ग कहते हैं कि मेवाड़ के महाराणा फतहसिंह को संबोधित 13 सोरठों, चेतावणी रा चूंगट्या, के कारण महाराणा 1903 के दिल्ली दरबार में नहीं गए। केसरी सिंह बारहठ चेतावणी रा चूंगट्या के रचयिता हैं।
- (3)रामनाथ कविया — गर्ग रामनाथ कविया का काल 1801–79 बताते हैं, जो वचनिका में वर्णित गागरोण के घेरे से लगभग चार शताब्दी बाद है। वे उन्हें कवयित्री समान बाई (1825–85) का पिता भी बताते हैं।
गर्ग उन्हें पाबूजी राठौड़ के कार्यों और मृत्यु पर 32 पद्यों वाले पाबूजी रा सोरठा और करुणा बावनी का रचयिता बताते हैं। रामनाथ कविया पाबूजी रा सोरठा के कवि हैं।
अवधारणा
वचनिका राजस्थानी रचना का एक रूप है, जिसमें तुकांत गद्य के साथ पद्य मिले रहते हैं। एस. पी. सेन का खंड एल. पी. तैस्सितोरी का मत उद्धृत करता है: हर वाक्यांश या वाक्य, छोटा हो या बड़ा, अगले से तुक मिलाता है, और बीच में दूहा और छप्पय कवित्त जैसे पद्य मिलाए जाते हैं।
सेन प्रसिद्ध वचनिकाओं की सूची देते हैं, जिनमें शिवदास की अचलदास खींची री वचनिका और खिड़िया जग्गा की रतनसिंह महेशदासोत की वचनिका हैं। वह परवर्ती रचना उज्जैन के युद्ध में रतनसिंह की मृत्यु का गौरवगान करती है; साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया उसे 1658 का बताता है।
साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया राजस्थानी ऐतिहासिक गद्य के नामों में ख्यात, बात और विगत के साथ वचनिका को गिनाता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "राजस्थानी भाषा का साहित्य एवं लोक साहित्य" सूचीबद्ध है।
यह रचना गागरोण के इतिहास का स्रोत भी है। ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया, खंड V (1970) होशंगशाह के घेरे की तिथि 13–27 सितम्बर 1423 बताती है और जौहर के बाद अचलदास की मृत्यु के लिए वचनिका का हवाला देती है।
इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया (1908) अलग तिथि देता है: उसके अनुसार राजा अचलदास के समय, लगभग 1428 में, गागरोण या तो मालवा के होशंगशाह ने जीत लिया या उसे सौंप दिया गया।
मुख्य तथ्य
- गर्ग (1985): अचलदास खींची री वचनिका शिवदास गाडण की डिंगल रचना है, जिसमें 119 पद्य और गद्य-खंड हैं।
- साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया रचना को लगभग 1425 की और युद्ध को 1423 का बताता है, और कहता है कि कवि ने जो देखा उसी का वर्णन किया।
- गर्ग रचना-काल बाद का, लगभग 1430–35, बताते हैं और शिवदास को अचलदास का समकालीन, सम्भवतः उनका दरबारी कवि, कहते हैं।
- ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया, खंड V होशंगशाह के गागरोण घेरे की तिथि 13–27 सितम्बर 1423 बताती है।
- एस. पी. सेन द्वारा उद्धृत तैस्सितोरी वचनिका को ऐसा गद्य बताते हैं जिसमें हर वाक्यांश या वाक्य अगले से तुक मिलाता है।
वचनिका के लेखक: शिवदास, विकल्प (4)। स्रोत: गर्ग, एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ वर्ल्ड हिन्दी लिटरेचर (1985)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नायक को लेखक मान लेना: अचलदास खींची गागरोण के वे शासक हैं जिन पर रचना है; इसे शिवदास गाडण ने लिखा।
- दो वचनिकाओं को मिला देना: रतनसिंह महेशदासोत और उज्जैन के युद्ध वाली वचनिका खिड़िया जग्गा की है, शिवदास की नहीं।
- गागरोण के पतन की एक ही तिथि तय कर देना: ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया सितम्बर 1423 देती है, इम्पीरियल गज़ेटियर (1908) लगभग 1428।
कोई प्रश्न किसी राजस्थानी रचना का नाम देकर उसका लेखक पूछ सकता है, या कई रचनाओं का उनके लेखकों से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई वीर-रचना किस शासक, दुर्ग या युद्ध का वर्णन करती है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अचलदास खींची री वचनिका किस दुर्ग पर हुए आक्रमण का वर्णन करती है?
- (a)रणथम्भौर
- (b)चित्तौड़
- (c)गागरोण
- (d)जालोर
उत्तर(3) — गर्ग कहते हैं कि रचना में सुल्तान होशंग के गागरोणगढ़ के अचलदास खींची पर आक्रमण और दुर्ग में हुए जौहर का वर्णन है। विकल्प (1), (2) और (4) वह दुर्ग नहीं हैं जिसका रचना वर्णन करती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
केसरी सिंह बारहठ की चेतावणी रा चूंगट्या किस शासक को संबोधित थी?
- (a)मेवाड़ के महाराणा फतहसिंह
- (b)बीकानेर के महाराजा गंगासिंह
- (c)जोधपुर के महाराजा उम्मेदसिंह
- (d)जयपुर के महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय
उत्तर(1) — गर्ग कहते हैं कि ये 13 सोरठे मेवाड़ के महाराणा फतहसिंह को संबोधित थे, जो इसके बाद 1903 के दिल्ली दरबार में नहीं गए। विकल्प (2), (3) और (4) वह व्यक्ति नहीं हैं जिसे गर्ग संबोधित शासक बताते हैं।