कन्हैया लाल मित्तल, मांगीलाल बाव्या और मकबूल आलम निम्नलिखित किस प्रजा मण्डल आन्दोलन से सम्बद्ध थे ?
- (1)झालावाड़ राज्य प्रजा मण्डल
- (2)बाँसवाड़ा राज्य प्रजा मण्डल
- (3)बूंदी राज्य प्रजा परिषद्
- (4)करौली राज्य प्रजा मण्डल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), झालावाड़ राज्य प्रजा मण्डल।
तीन में से दो नाम झालावाड़ की ओर ले जाते हैं। बी.एल. पानगड़िया की ‘राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम’ दर्ज करती है कि झालावाड़ में 1947 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल बना, जिसके प्रधानमंत्री स्वयं शासक, महाराजा हरिश्चन्द्र, थे।
पानगड़िया उस मंत्रिमंडल में प्रजा मण्डल के दो प्रतिनिधियों के नाम देते हैं: कन्हैयालाल मित्तल और मांगीलाल भव्य (प्रश्न में बाव्या)।
झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर (1964) इस प्रजा मण्डल की जड़ बालगोविंद तिवारी द्वारा संगठित युवकों की संस्था मित्र मंडल में बताता है। बाद में उसे राजनीतिक प्रजा मण्डल में बदल दिया गया, जो गज़ेटियर के अनुसार राज्य में लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनवाने में सफल रहा।
याद रखने की बात: कन्हैयालाल मित्तल और मांगीलाल भव्य: झालावाड़ की लोकप्रिय सरकार में प्रजा मण्डल के मंत्री।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)बाँसवाड़ा राज्य प्रजा मण्डल — बाँसवाड़ा का प्रजा मण्डल दूसरे नामों से जुड़ा है। पानगड़िया लिखते हैं कि 1943 में भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी बम्बई से आए और धूलजी भाई भावसार, मणिशंकर जानी, चिमनलाल मालोत, मोतीलाल जड़िया आदि के साथ इसकी स्थापना की।
वे आगे बताते हैं कि 1948 के आरंभ में राज्य ने प्रजा मण्डल की माँग स्वीकार की और त्रिवेदी को मुख्यमंत्री बनाया।
- (3)बूंदी राज्य प्रजा परिषद् — पानगड़िया बूंदी की 1944 की संस्था को बूंदी राज्य लोक परिषद् कहते हैं, जिसकी स्थापना हरिमोहन माथुर के नेतृत्व में हुई, और ब्रजसुन्दर शर्मा उसके महामंत्री बने।
इसकी कहानी झालावाड़ से उलटी दिशा में चलती है: जब महाराव ने 1946 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल की घोषणा की, तो परिषद् ने उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।
- (4)करौली राज्य प्रजा मण्डल — पानगड़िया के अनुसार करौली के प्रजा मण्डल की स्थापना अप्रैल 1939 में मुंशी त्रिलोकचन्द माथुर ने की, जब वे सितंबर 1938 में वहाँ कांग्रेस की शाखा स्थापित कर चुके थे।
माथुर की मृत्यु के बाद 1946 में चिरंजीलाल शर्मा ने इसकी बागडोर संभाली, और बाद में वे मत्स्य संघ के मंत्रिमंडल में करौली की ओर से रहे।
अवधारणा
प्रजा मण्डल देशी रियासतों की जनता के संगठन थे, जो अपने शासकों पर नागरिक अधिकारों और उत्तरदायी शासन के लिए दबाव डालते थे।
एकीकरण से पहले के अंतिम वर्षों में कुछ शासकों ने लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनाए, जिनमें प्रजा मण्डल के सदस्य लिए गए। झालावाड़ ने ऐसा किया: पानगड़िया स्वयं शासक को प्रधानमंत्री बताते हैं, जबकि झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर कहता है कि वे उसके सदस्यों में से एक बने।
झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर आगे बताता है कि शासक बाद में भारतीय विदेश सेवा में गए और झालावाड़ से राजस्थान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "20वीं शताब्दी में जनजाति तथा किसान आन्दोलन, 20वीं शताब्दी के दौरान विभिन्न देशी रियासतों में प्रजामण्डल आन्दोलन। राजस्थान का एकीकरण।" सूचीबद्ध है।
झालावाड़ के लोकप्रिय मंत्रिमंडल के वर्ष पर स्रोत भिन्न हैं: झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर 1946 देता है, और पानगड़िया 1947।
इसके बाद झालावाड़ दस राज्यों के पहले राजस्थान संघ में शामिल हुआ, जिसका उद्घाटन गज़ेटियर के अनुसार एन.वी. गाडगिल ने 25 मार्च 1948 को किया, और जिसकी राजधानी कोटा थी।
मुख्य तथ्य
- पानगड़िया: झालावाड़ का लोकप्रिय मंत्रिमंडल 1947 में बना, जिसके प्रधानमंत्री महाराजा हरिश्चन्द्र थे।
- पानगड़िया: कन्हैयालाल मित्तल और मांगीलाल भव्य प्रजा मण्डल की ओर से उस मंत्रिमंडल में शामिल हुए।
- झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर लोकप्रिय मंत्रिमंडल को 1946 का बताता है और प्रजा मण्डल की जड़ बालगोविंद तिवारी के मित्र मंडल में बताता है।
- करौली प्रजा मण्डल: अप्रैल 1939 में मुंशी त्रिलोकचन्द माथुर द्वारा स्थापित (पानगड़िया)।
- बाँसवाड़ा प्रजा मण्डल: 1943 में भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी आदि द्वारा स्थापित; बूंदी राज्य लोक परिषद्: 1944, हरिमोहन माथुर के नेतृत्व में (पानगड़िया)।
पानगड़िया बूंदी की संस्था को लोक परिषद् कहते हैं; प्रश्न का विकल्प (3) उसे प्रजा परिषद् कहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केवल साझा इतिहास के आधार पर नामों को किसी राज्य से जोड़ देना: बूंदी और झालावाड़ दोनों 1948 में पहले राजस्थान संघ में शामिल हुए, पर मित्तल और भव्य झालावाड़ के मंत्रिमंडल से जुड़े हैं।
- यह मान लेना कि हर प्रजा मण्डल अपने शासक के मंत्रिमंडल में शामिल हुआ: पानगड़िया के अनुसार बूंदी की लोक परिषद् ने 1946 में शामिल होने से इनकार किया।
- झालावाड़ के लोकप्रिय मंत्रिमंडल का एक ही वर्ष तय कर लेना: झालावाड़ ज़िला गज़ेटियर 1946 देता है और पानगड़िया 1947।
कोई प्रश्न कुछ नेताओं के नाम देकर पूछ सकता है कि वे किस राज्य के प्रजा मण्डल से सम्बद्ध थे।
कोई प्रश्न प्रजा मण्डलों को उनके संस्थापकों और स्थापना-वर्षों से सुमेलित भी करवा सकता है, या पूछ सकता है कि किस राज्य के शासक ने स्वयं लोकप्रिय मंत्रिमंडल का नेतृत्व किया।
संबंधित PYQ
मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री शोभाराम के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. उन्होंने असहयोग आन्दोलन के दौरान वकालत छोड़ी । B. वे हीरालाल शास्त्री के मंत्रिमण्डल में सदस्य रहे ।
- (1) केवल A सत्य है ।
- (2) केवल B सत्य है ।
- (3) A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4) A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर(2)
मिलता-जुलता विचार: प्रजा मण्डल के नेताओं का सरकार में आना। वह प्रश्न मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री शोभाराम के सम्बन्ध में दो कथन परखता है (RPSC की कुंजी: केवल B सत्य है, कि वे हीरालाल शास्त्री के मंत्रिमण्डल में सदस्य रहे); यह प्रश्न पूछता है कि कन्हैया लाल मित्तल, मांगीलाल बाव्या और मकबूल आलम किस राज्य के प्रजा मण्डल से सम्बद्ध थे।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अप्रैल 1939 में करौली प्रजा मण्डल की स्थापना किसने की ?
- (a)मुंशी त्रिलोकचन्द माथुर
- (b)चिरंजीलाल शर्मा
- (c)हरिमोहन माथुर
- (d)भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी
उत्तर(1) — पानगड़िया लिखते हैं कि मुंशी त्रिलोकचन्द माथुर ने अप्रैल 1939 में करौली प्रजा मण्डल की स्थापना की। विकल्प (2) ने 1946 में इसकी बागडोर संभाली; विकल्प (3) ने बूंदी की लोक परिषद् का नेतृत्व किया; विकल्प (4) ने बाँसवाड़ा के प्रजा मण्डल की स्थापना की। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : A. झालावाड़ में राज्य के राजस्थान संघ में शामिल होने से पहले प्रजा मण्डल के प्रतिनिधियों सहित एक लोकप्रिय मंत्रिमंडल बना। B. बूंदी राज्य लोक परिषद् 1946 में बूंदी के महाराव द्वारा घोषित लोकप्रिय मंत्रिमंडल में शामिल हुई। सही विकल्प चुनिए :
- (a)केवल A सही है।
- (b)केवल B सही है।
- (c)A और B दोनों सही हैं।
- (d)न तो A और न ही B सही है।
उत्तर(1) — A सही है: झालावाड़ का लोकप्रिय मंत्रिमंडल (गज़ेटियर में 1946, पानगड़िया में 1947) 25 मार्च 1948 के राजस्थान संघ से पहले बना। B गलत है: पानगड़िया के अनुसार परिषद् ने शामिल होने से इनकार किया। इसलिए विकल्प (2), (3) और (4) गलत हैं।