अरब यात्री सुलेमान ने किस प्रतिहार राजा के शासनकाल में भारत की यात्रा की ?
- (1)नागभट्ट द्वितीय
- (2)नागभट्ट प्रथम
- (3)वत्सराज
- (4)भोज प्रथम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), भोज प्रथम।
सुलेमान से जुड़ा अरब विवरण 851 ई. का है, जो प्रतिहार राजा भोज प्रथम (मिहिर भोज) के शासनकाल के भीतर पड़ता है। ‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल’, खंड 4 (‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’) भोज की ज्ञात तिथियाँ 836 ई. और 882 ई. देता है, यानी 46 वर्ष से अधिक का शासन।
वह खंड स्रोत को दो तरह से व्यक्त करता है। एक अध्याय सुलेमान को 851 ई. में भारत आने वाला बताता है; प्रतिहारों वाला अध्याय इसे 851 ई. में रचित और सामान्यतः सुलेमान को आरोपित विवरण कहता है, और एक पाद-टिप्पणी बताती है कि कुछ विद्वानों को संदेह है कि इसे उन्होंने लिखा।
विवरण जुज़्र के राजा का वर्णन करता है। वह खंड कहता है कि जुज़्र गुर्जर के लिए प्रयुक्त है, इसलिए विवरण को भोज के संदर्भ में माना जा सकता है। आर.एस. त्रिपाठी की ‘हिस्ट्री ऑफ़ कन्नौज’ भी विद्वानों द्वारा की गई यही पहचान, कन्नौज के प्रतिहार शासक के साथ, दर्ज करती है।
सुलेमान का राजा बड़ी सेनाएँ रखता है, किसी भी भारतीय राजा से उत्तम घुड़सवार सेना रखता है, अरबों का शत्रु है, और ऐसे देश पर शासन करता है जो भारत में किसी भी अन्य देश से अधिक चोरों-डाकुओं से सुरक्षित है।
याद रखने की बात: सुलेमान, 851 ई., जुज़्र का राजा = प्रतिहार भोज प्रथम।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)नागभट्ट द्वितीय — नागभट्ट द्वितीय भोज प्रथम के दादा थे, और उनका शासन 851 ई. से पहले समाप्त हो गया था। ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ उनकी मृत्यु 833 ई. में बताने के लिए प्रभावक-चरित का हवाला देता है, साथ ही उस अंश पर संदेह के कारण भी बताता है।
नागभट्ट द्वितीय वे प्रतिहार राजा हैं जिन्होंने चक्रायुध को हराया, जिसे बंगाल के धर्मपाल ने कन्नौज की गद्दी पर बैठाया था, और संभवतः कन्नौज पर अधिकार किया।
- (2)नागभट्ट प्रथम — नागभट्ट प्रथम 8वीं शताब्दी के हैं, सुलेमान के विवरण से एक शताब्दी पहले के। ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ उनके राज्यारोहण को 730 ई. के कुछ वर्षों के भीतर, और उनके शासन को संभवतः 756 ई. तक रखता है।
वे वह प्रतिहार हैं जिन्होंने अरब आक्रमणों का प्रतिरोध किया; ग्वालियर अभिलेख कहता है कि उन्होंने शक्तिशाली म्लेच्छ राजा की बड़ी सेनाओं को कुचल दिया।
- (3)वत्सराज — वत्सराज ने 8वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शासन किया: ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ के अनुसार वे 778 ई. तक गद्दी पर थे, और यह खंड उन्हें 783 ई. में अवंति का राजा मानता है। यह 851 के विवरण से काफ़ी पहले है।
वत्सराज वह प्रतिहार हैं जिन्हें राष्ट्रकूट राजा ध्रुव ने हराया और राजपूताना के मरुस्थल के पीछे हटने को विवश किया।
अवधारणा
गुर्जर-प्रतिहार 8वीं शताब्दी में पश्चिमी भारत में उभरे और बाद में कन्नौज से शासन करने लगे। अरब लेखकों ने उनके राज्य को ‘गुर्जर’ से बने नाम जुज़्र या जुर्ज़ कहा।
विकल्पों के चार राजा, क्रम से: नागभट्ट प्रथम, वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय और भोज प्रथम। उस खंड की सूची नागभट्ट प्रथम और वत्सराज के बीच कक्कुक और देवराज को, और नागभट्ट द्वितीय और भोज के बीच रामभद्र को रखती है।
‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ के अनुसार भोज को मिहिर, आदिवराह और प्रभास के नाम से भी जाना जाता था।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ–गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कच्छावा।" सूचीबद्ध है।
प्रतिहारों की जड़ें राजस्थान में हैं: नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975) नागभट्ट प्रथम को भीनमाल का प्रतिहार शासक कहता है। वह डीडवाना के पास दौलतपुरा में मिले भोज प्रथम के शासनकाल के एक ताम्रपत्र का भी उल्लेख करता है, जो दिखाता है कि उनके समय यह क्षेत्र अब भी प्रतिहारों के अधिकार में था।
‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ सुलेमान का वर्णन पूरा उद्धृत करता है और उसे भोज के शासन पर एक रोचक टिप्पणी कहता है।
मुख्य तथ्य
- 851 ई. का एक अरब विवरण, जो सामान्यतः सुलेमान को आरोपित किया जाता है, जुज़्र के राजा का वर्णन करता है, जिसकी पहचान प्रतिहार राजा भोज प्रथम से की जाती है।
- ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ भोज प्रथम की ज्ञात तिथियाँ 836 ई. और 882 ई. देता है, यानी 46 वर्ष से अधिक का शासन।
- सुलेमान कहते हैं कि किसी अन्य भारतीय राजा के पास इतनी उत्तम घुड़सवार सेना नहीं थी, और भारत का कोई देश चोरों-डाकुओं से इससे अधिक सुरक्षित नहीं था।
- भोज प्रथम के दादा नागभट्ट द्वितीय की मृत्यु प्रभावक-चरित के अनुसार 833 ई. में हुई, जिस अंश को ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ सावधानी से लेता है।
- भोज प्रथम के शासनकाल का एक ताम्रपत्र डीडवाना के पास दौलतपुरा में मिला (नागौर ज़िला गज़ेटियर)।
तिथियाँ ‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल’, खंड 4 के अनुसार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कन्नौज के चक्रायुध को हराने वाले राजा को चुन लेना: वे नागभट्ट द्वितीय थे, जिनका शासन 833 में, 851 के विवरण से पहले, समाप्त हो गया।
- दो भोजों को मिला देना: यहाँ भोज प्रथम 9वीं शताब्दी के प्रतिहार मिहिर भोज हैं, बाद के परमार भोज नहीं।
- जुज़्र को भारत से असंबद्ध कोई स्थान-नाम समझ लेना: ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’ इसे गुर्जर, यानी प्रतिहार राज्य, पढ़ता है।
कोई प्रश्न किसी विदेशी यात्री या विवरण का नाम देकर पूछ सकता है कि उस समय कौन-सा राजा शासन कर रहा था।
कोई प्रश्न प्रतिहार राजाओं का क्रम भी पूछ सकता है, या हर राजा को अरब युद्धों, ध्रुव के आक्रमण या कन्नौज पर अधिकार जैसी किसी घटना से सुमेलित करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित प्रतिहार शासकों को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए : A. भोज प्रथम B. नागभट्ट प्रथम C. नागभट्ट द्वितीय D. वत्सराज कूट :
- (a)B, D, C, A
- (b)B, C, D, A
- (c)D, B, C, A
- (d)B, D, A, C
उत्तर(1) — नागभट्ट प्रथम (लगभग 730–756), वत्सराज (778 तक गद्दी पर), नागभट्ट द्वितीय (मृत्यु लगभग 833), भोज प्रथम (ज्ञात तिथियाँ 836 और 882)। विकल्प (2) नागभट्ट द्वितीय को वत्सराज से पहले रखता है; विकल्प (3) वत्सराज को नागभट्ट प्रथम से पहले रखता है; विकल्प (4) भोज प्रथम को उनके दादा से पहले रखता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस प्रतिहार शासक को राष्ट्रकूट राजा ध्रुव ने हराया और राजपूताना के मरुस्थल में पीछे हटने को विवश किया ?
- (a)नागभट्ट प्रथम
- (b)वत्सराज
- (c)नागभट्ट द्वितीय
- (d)भोज प्रथम
उत्तर(2) — ‘द एज ऑफ़ इम्पीरियल कन्नौज’, राष्ट्रकूट अभिलेखों के हवाले से, कहता है कि ध्रुव ने वत्सराज को कुचल दिया, जिन्होंने अपने और आक्रमणकारियों के बीच राजपूताना का मरुस्थल रख लिया। विकल्प (1) ने अरबों का प्रतिरोध किया; विकल्प (3) ने चक्रायुध को हराया; विकल्प (4) सुलेमान के विवरण के राजा हैं।