कालीसिंध सुपर ताप बिजली स्टेशन अवस्थित है
- (1)बारां
- (2)झालावाड़
- (3)डूंगरपुर
- (4)बाँसवाड़ा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), झालावाड़.
कालीसिंध सुपर ताप विद्युत परियोजना झालावाड़ जिले में है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUN) का संग्रहीत परियोजना-पृष्ठ इसका स्थल झालरापाटन तहसील के निमोदा, उण्डल, मोतीपुरा, सिंघारिया और देवरी गाँवों में, झालावाड़ नगर से लगभग 12 किमी दूर, बताता है।
यह परियोजना कोयला-आधारित है, जिसकी क्षमता 600 MW की दो इकाइयों में कुल 1,200 MW है। RVUN का पृष्ठ इसके जल का स्रोत भँवरासी गाँव के पास कालीसिंध नदी पर बना बाँध बताता है।
इस स्टेशन का नाम उसी नदी पर है। उसी RVUN पृष्ठ के अनुसार कालीसिंध बिन्दा के पास मध्य प्रदेश से राजस्थान में प्रवेश करती है और कोटा जिले में नानेरा के पास चम्बल में मिलती है।
राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2022-23 कालीसिंध की 800 MW की इकाई-3 को, छबड़ा की इकाइयों 7 और 8 के साथ, उस समय प्रक्रियाधीन नई कोयला-आधारित ताप इकाइयों में गिनाती है।
कालीसिंध ताप परियोजना झालावाड़ में है; छबड़ा ताप परियोजना पड़ोसी बारां में।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)बारां — बारां में एक अलग कोयला-आधारित संयंत्र है — छबड़ा ताप विद्युत संयंत्र, छबड़ा तहसील के चौकी मोतीपुरा में, जैसा इसकी विकिपीडिया प्रविष्टि RVUN का हवाला देकर दर्ज करती है।
बारां और झालावाड़ हाड़ौती के पड़ोसी जिले हैं और दोनों में एक-एक ताप संयंत्र है, इसलिए केवल क्षेत्र से यह तय नहीं होता कि कौन-सा संयंत्र कहाँ है।
- (3)डूंगरपुर — डूंगरपुर सुदूर दक्षिण में, माही और सोम के बेसिन में है। RVUN के अनुसार स्टेशन को जल देने वाली कालीसिंध नदी का जलग्रहण क्षेत्र झालावाड़ और कोटा जिलों में है।
परियोजना के स्थल-गाँव झालावाड़ की झालरापाटन तहसील में हैं, डूंगरपुर में नहीं।
- (4)बाँसवाड़ा — बाँसवाड़ा की माही परियोजना एक जल-विद्युत स्थल है: बाँसवाड़ा जिला गजेटियर बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के लिए बिजली बनाने हेतु नियोजित एक जल-विद्युत चैनल का वर्णन करता है, और RVUN की संग्रहीत वेबसाइट माही को अपने जल-विद्युत संयंत्रों में गिनाती है। वह कोयला-आधारित ताप स्टेशन नहीं है।
RVUN के अनुसार कालीसिंध स्टेशन के जल का स्रोत कालीसिंध नदी पर बना बाँध है।
अवधारणा
राजस्थान कई प्रकार के स्रोतों से बिजली लेता है। उसकी आर्थिक समीक्षा 2022-23 मुख्य स्रोतों के रूप में ताप, जल-विद्युत, पवन, बायोमास, कैप्टिव, अंतर-राज्यीय साझेदारी और परमाणु विद्युत परियोजनाओं के नाम देती है।
RVUN की संग्रहीत वेबसाइट कोटा, सूरतगढ़, गिरल, छबड़ा और कालीसिंध को अपने ताप संयंत्रों में, और माही को जल-विद्युत संयंत्रों में गिनाती है।
कालीसिंध परियोजना कोयला-आधारित है: 600 MW की दो इकाइयों में 1,200 MW, झालावाड़ जिले की झालरापाटन तहसील के एक स्थल पर; RVUN के अनुसार इसके जल का स्रोत भँवरासी के पास कालीसिंध पर बना बाँध है।
इसका कोयला छत्तीसगढ़ के उन कैप्टिव कोयला ब्लॉकों से आना था जो कोयला मंत्रालय ने RVUN को आवंटित किए।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "ऊर्जा संसाधन– परम्परागत एवं गैर–परम्परागत" शामिल है। ताप विद्युत स्टेशन और उनके जिले इसी शीर्षक के अंतर्गत आते हैं।
राज्य-स्वामित्व वाली और साझा क्षमता का अधिकांश भाग ताप संयंत्रों का है। आर्थिक समीक्षा 2022-23 की तालिका 5.1 राज्य-स्वामित्व वाली और साझा ताप क्षमता 2022-23 (नवम्बर 2022 तक) में 7,830 MW बताती है, जबकि जल-विद्युत की 1,017.29 MW।
ताप संयंत्र को कोयला, जल और स्थल चाहिए। RVUN दर्ज करता है कि केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की स्थल चयन समिति ने कालीसिंध परियोजना के लिए झालावाड़ के निमोदा क्षेत्र को तकनीकी-आर्थिक रूप से व्यवहार्य पाया।
मुख्य तथ्य
- कालीसिंध सुपर ताप विद्युत परियोजना: 1,200 MW (2 × 600 MW), कोयला-आधारित, झालावाड़ जिले की झालरापाटन तहसील में (RVUN)।
- इसका स्थल निमोदा, उण्डल, मोतीपुरा, सिंघारिया और देवरी गाँवों में है, झालावाड़ नगर से लगभग 12 किमी दूर।
- RVUN परियोजना के जल का स्रोत भँवरासी गाँव के पास कालीसिंध नदी पर बना बाँध बताता है।
- कालीसिंध नदी बिन्दा के पास मध्य प्रदेश से राजस्थान में प्रवेश करती है और कोटा जिले में नानेरा के पास चम्बल में मिलती है (RVUN)।
- राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2022-23 कालीसिंध की 800 MW की इकाई-3 को प्रक्रियाधीन नई कोयला-आधारित इकाइयों में गिनाती है।
कालीसिंध RVUN के संग्रहीत परियोजना-पृष्ठ से; छबड़ा RVUN का हवाला देने वाली उसकी विकिपीडिया प्रविष्टि से; माही बाँसवाड़ा जिला गजेटियर और RVUN की संग्रहीत संयंत्र-सूची से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मोतीपुरा दो बार आता है: झालावाड़ में कालीसिंध के स्थल-गाँवों में, और बारां में छबड़ा संयंत्र के गाँव चौकी मोतीपुरा में।
- बारां और झालावाड़ हाड़ौती के पड़ोसी जिले हैं, और दोनों में एक-एक ताप संयंत्र है। हर संयंत्र को उसके अपने जिले से जोड़िए।
- स्टेशन का नाम किसी जिले पर नहीं, एक नदी पर है। कालीसिंध झालावाड़ और कोटा से होकर बहती है; स्टेशन झालावाड़ में है।
कोई प्रश्न किसी बिजली स्टेशन का नाम देकर उसका जिला पूछ सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किस स्टेशन की प्रतिस्थापित क्षमता सर्वाधिक है, कोई संयंत्र कोयले, लिग्नाइट, गैस या जल में से किस पर चलता है, या राजस्थान अन्य राज्यों के साथ कौन-सी परियोजनाएँ साझा करता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018, 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान का छबड़ा ताप विद्युत संयंत्र किस जिले में स्थित है ?
- (a)बारां
- (b)झालावाड़
- (c)कोटा
- (d)बूँदी
उत्तर(1) — संयंत्र बारां जिले की छबड़ा तहसील के चौकी मोतीपुरा में है। विकल्प (2), झालावाड़, में कालीसिंध सुपर ताप विद्युत परियोजना है। विकल्प (3), कोटा, में RVUN की संयंत्र-सूची वाला कोटा ताप स्टेशन है। विकल्प (4), बूँदी, हाड़ौती का एक और जिला है, पर संयंत्र का स्थल नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कालीसिंध सुपर ताप विद्युत परियोजना के लिए जल किस नदी पर बने बाँध से लिया जाता है ?
- (a)कालीसिंध
- (b)चम्बल
- (c)माही
- (d)लूनी
उत्तर(1) — RVUN भँवरासी गाँव के पास कालीसिंध पर बने बाँध को स्रोत बताता है। विकल्प (2), चम्बल, वह नदी है जिसमें कालीसिंध नानेरा के पास मिलती है। विकल्प (3), माही, बाँसवाड़ा के माही बजाज सागर बाँध को जल देती है। विकल्प (4), लूनी, कच्छ की खाड़ी की ओर बहती है।