जापानी इन्सेफेलाइटिस का कारक विषाणु मनुष्य शरीर के किस हिस्से को संक्रमित करता है?
- (1)त्वचा
- (2)लाल रुधिर कोशिकाएँ
- (3)मस्तिष्क
- (4)फेफड़े
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), मस्तिष्क.
इन्सेफेलाइटिस का अर्थ है मस्तिष्क की सूजन। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं निवारण केंद्र (CDC) के अनुसार जापानी इन्सेफेलाइटिस (JE) विषाणु से संक्रमित अधिकांश लोगों में कोई लक्षण नहीं होते या केवल हल्के लक्षण होते हैं, पर एक छोटे प्रतिशत में मस्तिष्क की सूजन (इन्सेफेलाइटिस) विकसित होती है।
WHO का JE तथ्य-पत्र (9 मई 2019) इस विषाणु को एशिया के कई देशों में विषाणुजनित इन्सेफेलाइटिस का मुख्य कारण बताता है। वह जिस गंभीर बीमारी का वर्णन करता है, वह तंत्रिका-संबंधी है: तेज़ बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, दिशाभ्रम, कोमा, दौरे और स्पास्टिक पक्षाघात।
इसलिए गंभीर मामलों में JE विषाणु शरीर के जिस हिस्से पर आक्रमण करता है, वह मस्तिष्क है।
याद रखने योग्य बात: इन्सेफेलाइटिस = मस्तिष्क की सूजन; JE मच्छर-जनित विषाणुजनित इन्सेफेलाइटिस है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)त्वचा — त्वचा केवल प्रवेश का स्थान है। WHO के अनुसार JE विषाणु संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से मनुष्यों तक पहुँचता है, इसलिए विषाणु काटने के स्थान पर त्वचा को पार करता है।
रोग स्वयं इन्सेफेलाइटिस है। WHO और CDC जिन चेतावनी संकेतों को गिनाते हैं, जैसे दिशाभ्रम, दौरे और कोमा, वे मस्तिष्क से आते हैं, त्वचा से नहीं।
- (2)लाल रुधिर कोशिकाएँ — लाल रुधिर कोशिकाओं पर मलेरिया परजीवी आक्रमण करता है। NCERT के अनुसार Plasmodium यकृत कोशिकाओं में गुणन करता है और फिर लाल रुधिर कणिकाओं पर आक्रमण करके उन्हें फोड़ देता है।
JE एक विषाणु से होता है, प्रोटोज़ोआ से नहीं। WHO, JE विषाणु को एक फ्लेविवायरस बताता है जिसका गंभीर रूप इन्सेफेलाइटिस है; संक्रमित होने के बाद मनुष्यों के रक्त में इतना विषाणु भी नहीं बनता कि वे रक्त पीने वाले मच्छरों को संक्रमित कर सकें।
- (4)फेफड़े — फेफड़ों का रोग श्वसन संक्रमणों से जुड़ा है, जैसे SARS, जिसे WHO एक SARS-संबद्ध कोरोनावायरस से होने वाला विषाणुजनित श्वसन रोग बताता है।
WHO, JE के जो गंभीर संकेत गिनाता है, वे तंत्रिका-संबंधी हैं: गर्दन में अकड़न, दिशाभ्रम, कोमा, दौरे और स्पास्टिक पक्षाघात। JE की पुष्टि के लिए WHO मस्तिष्क-मेरु द्रव, यानी मस्तिष्क और मेरुरज्जु के आसपास के द्रव, की जाँच को प्राथमिकता देता है।
अवधारणा
जापानी इन्सेफेलाइटिस JE विषाणु से होता है, जिसे WHO डेंगू, पीत ज्वर और वेस्ट नाइल विषाणुओं से संबंधित एक फ्लेविवायरस बताता है।
यह विषाणु मच्छरों और सूअरों और/या जल-पक्षियों के बीच चक्र में घूमता है। मनुष्य क्यूलेक्स मच्छरों, मुख्यतः Culex tritaeniorhynchus, के काटने से संक्रमित होते हैं।
WHO के अनुसार अधिकांश संक्रमण हल्के होते हैं, जिनमें बुखार और सिरदर्द होता है, या उनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, और लगभग 250 में से 1 संक्रमण गंभीर नैदानिक बीमारी में बदलता है। CDC गंभीर रूप को मस्तिष्क की सूजन (इन्सेफेलाइटिस) बताता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "स्वास्थ्य देखभाल; संक्रामक, असंक्रामक एवं पशुजन्य रोग" सूचीबद्ध है।
WHO का तथ्य-पत्र (9 मई 2019) बताता है कि WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रों के 24 देशों में JE विषाणु का स्थानिक संचरण होता है, जिससे 3 अरब से अधिक लोग संक्रमण के जोखिम में हैं।
इसका कोई विषाणुरोधी उपचार नहीं है; देखभाल सहायक होती है। सुरक्षित और प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, और WHO उन सभी क्षेत्रों में JE टीकाकरण की अनुशंसा करता है जहाँ यह रोग मान्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है।
मुख्य तथ्य
- CDC: JE विषाणु से संक्रमित लोगों के एक छोटे प्रतिशत में मस्तिष्क की सूजन (इन्सेफेलाइटिस) विकसित होती है।
- WHO (9 मई 2019): JE विषाणु मच्छर-जनित फ्लेविवायरस है, जो डेंगू, पीत ज्वर और वेस्ट नाइल विषाणुओं से संबंधित है।
- WHO: मनुष्य क्यूलेक्स मच्छरों, मुख्यतः Culex tritaeniorhynchus, के काटने से संक्रमित होते हैं; विषाणु मच्छरों, सूअरों और/या जल-पक्षियों के बीच चक्र में घूमता है।
- WHO: JE विषाणु के लगभग 250 में से 1 संक्रमण गंभीर नैदानिक बीमारी में बदलता है; रोग-लक्षण वाले लोगों में मृत्यु-दर 30% तक हो सकती है।
- WHO: JE का पहला मामला 1871 में जापान में दर्ज हुआ; इसका कोई विषाणुरोधी उपचार नहीं है, पर टीके उपलब्ध हैं।
WHO के जापानी इन्सेफेलाइटिस तथ्य-पत्र (9 मई 2019) और CDC के जापानी इन्सेफेलाइटिस पृष्ठ से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रवेश का स्थान बनाम लक्ष्य: विषाणु त्वचा में मच्छर के काटने से प्रवेश करता है, पर रोग मस्तिष्क में होता है।
- मच्छर-जनित होने का अर्थ रक्त-कोशिका का रोग नहीं: मलेरिया का Plasmodium लाल रुधिर कोशिकाओं पर आक्रमण करता है, जबकि JE विषाणु मस्तिष्क में सूजन लाता है।
- नाम में 'जापानी' है, पर WHO दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत में स्थानिक संचरण वाले 24 देश गिनाता है; पहला दर्ज मामला 1871 में जापान में था।
कोई प्रश्न किसी रोग का नाम देकर पूछ सकता है कि वह मुख्यतः किस अंग को प्रभावित करता है, या उसे कौन सा मच्छर फैलाता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई रोग विषाणु, जीवाणु या प्रोटोज़ोआ में से किससे होता है।
संबंधित PYQ
“विशिष्ट रोगवाहक – जनित रोग – रोगाणु के प्रकार” के गलत समुच्चय का चयन कीजिए ।
- (1) एडीस – चिकुनगुनिया – जीवाणु
- (2) क्यूलेक्स – लिम्फेटिक फाइलेरिएसिस – परजीवी
- (3) एनोफ़िलीज़ – मलेरिया – परजीवी
- (4) एडीस – डेंगू – विषाणु
उत्तर(1)
विचारों का वही समूह: मच्छर रोगवाहक और उनके द्वारा फैलाए जाने वाले रोगाणु का प्रकार। वह प्रश्न विशिष्ट रोगवाहक – जनित रोग – रोगाणु के प्रकार का गलत समुच्चय पूछता है, जिसके विकल्पों में क्यूलेक्स – लिम्फेटिक फाइलेरिएसिस – परजीवी भी है (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), एडीस – चिकुनगुनिया – जीवाणु); यहाँ का प्रश्न पूछता है कि JE विषाणु शरीर के किस हिस्से को संक्रमित करता है।
निम्न रोगों में से कौन सा रोग जीवाण्वीय रोग नहीं है ?
- (1) डिफ्थीरिया
- (2) प्लेग
- (3) न्युमोनिया
- (4) डेंगू
उत्तर(4)
रोगों को उनके रोगाणु के आधार पर छाँटने का वही कौशल। वह प्रश्न पूछता है कि कौन सा रोग जीवाण्वीय रोग नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), डेंगू); यहाँ का प्रश्न JE विषाणु से जुड़ा है, जिसे WHO डेंगू विषाणु से संबंधित फ्लेविवायरस बताता है, और उस अंग से जिस पर यह आक्रमण करता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु मनुष्यों में मुख्यतः किसके काटने से संचरित होता है ?
- (a)मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर
- (b)घरेलू मक्खी
- (c)Culex tritaeniorhynchus मच्छर
- (d)चूहे का पिस्सू
उत्तर(3) — WHO के अनुसार JE विषाणु संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों, मुख्यतः Culex tritaeniorhynchus, के काटने से मनुष्यों तक पहुँचता है। विकल्प (1) वह रोगवाहक है जिसे NCERT मलेरिया के लिए बताता है, और WHO विकल्प (2) या विकल्प (4) में से किसी को JE का रोगवाहक नहीं बताता। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
WHO के अनुसार, जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु से संक्रमित मनुष्य इसे रक्त पीने वाले मच्छरों तक नहीं पहुँचाते, क्योंकि –
- (a)उनके रक्त में पर्याप्त विषाणु विकसित नहीं होता
- (b)विषाणु त्वचा में ही नष्ट हो जाता है
- (c)क्यूलेक्स मच्छर मनुष्यों को नहीं काटते
- (d)विषाणु केवल फेफड़ों में रहता है
उत्तर(1) — WHO के अनुसार संक्रमित होने के बाद मनुष्यों में इतनी विषाणु-रक्तता (viraemia) विकसित नहीं होती कि रक्त पीने वाले मच्छर संक्रमित हों। विकल्प (3) WHO के कथन के विपरीत है, जिसके अनुसार मनुष्य क्यूलेक्स के काटने से ही संक्रमित होते हैं, और विकल्प (2) और (4) रोग के मस्तिष्क तक पहुँचने के क्रम के विपरीत हैं।