राष्ट्रीय आय लेखांकन में ‘आधार वर्ष’ का अर्थ है –
- (1)जिस वर्ष की आय का उपयोग मौद्रिक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।
- (2)जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग मौद्रिक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।
- (3)जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग वास्तविक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।
- (4)जिस वर्ष की आय का उपयोग वास्तविक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग वास्तविक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।.
NCERT की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स दो मापों को अलग करती है। मौद्रिक GDP वर्तमान प्रचलित कीमतों पर GDP का मूल्य है। वास्तविक GDP उन्हीं वस्तुओं और सेवाओं को कीमतों के एक स्थिर समूह पर आँकता है, इसलिए वास्तविक GDP में बदलाव उत्पादन की मात्रा में बदलाव दिखाता है।
स्थिर कीमतें किसी वर्ष से लेनी होती हैं। NCERT इसे सीधे नाम देती है: आधार वर्ष वह वर्ष है जिसकी कीमतों का उपयोग वास्तविक GDP की गणना में किया जा रहा है।
उसका उदाहरण: एक देश 2001 में 15 रुपये की दर से ब्रेड की 110 इकाइयाँ बनाता है। 2001 का मौद्रिक GDP 110 × 15 = 1,650 रुपये है। 2000 की 10 रुपये की कीमत पर आँकने से वास्तविक GDP 110 × 10 = 1,100 रुपये है, और 2000 आधार वर्ष है।
इस तरह आधार वर्ष कीमतें देता है, और केवल वास्तविक GDP के लिए: जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग वास्तविक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है।
याद रखने योग्य बात: वास्तविक GDP = इस वर्ष का उत्पादन × आधार वर्ष की कीमतें; मौद्रिक GDP = इस वर्ष का उत्पादन × इस वर्ष की कीमतें।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)जिस वर्ष की आय का उपयोग मौद्रिक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है। — मौद्रिक GDP को किसी आधार वर्ष की आवश्यकता ही नहीं होती। वह किसी वर्ष के उत्पादन को उसी वर्ष की प्रचलित कीमतों पर आँकता है, इसलिए इसमें केवल वही चालू वर्ष शामिल है जिसे मापा जा रहा है।
आधार वर्ष तभी आता है जब उत्पादन को स्थिर कीमतों पर फिर से आँका जाता है, और यही वास्तविक GDP की गणना है।
- (2)जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग मौद्रिक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है। — यह दोनों मापों को मिला देता है। मौद्रिक GDP के लिए प्रयुक्त कीमतें चालू वर्ष की अपनी कीमतें हैं, किसी आधार वर्ष की नहीं।
जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग होता है — यही NCERT की आधार वर्ष की परिभाषा है, पर वह वास्तविक GDP से जुड़ी है, मौद्रिक GDP से नहीं।
- (4)जिस वर्ष की आय का उपयोग वास्तविक जी. डी. पी. की गणना के लिए किया जाता है। — वास्तविक GDP चालू वर्ष का उत्पादन लेकर उसे आधार वर्ष की कीमतों पर आँकता है। आधार वर्ष कीमतें देता है, आय या उत्पादन नहीं।
NCERT के उदाहरण में ब्रेड की 110 इकाइयाँ 2001 की हैं, वही वर्ष जिसे मापा जा रहा है; केवल 10 रुपये की कीमत आधार वर्ष 2000 से आती है।
अवधारणा
कीमतें बदलने पर अलग-अलग वर्षों के GDP की तुलना कठिन हो जाती है: उत्पादन वही रहे और कीमतें दोगुनी हो जाएँ तो भी GDP दोगुना हो सकता है। वास्तविक GDP हर वर्ष के उत्पादन को एक निश्चित वर्ष, आधार वर्ष, की कीमतों पर आँककर यह प्रभाव हटा देता है।
मौद्रिक और वास्तविक GDP का अनुपात GDP अपस्फीतिक (deflator) है, जो बताता है कि आधार वर्ष से चालू वर्ष तक कीमतें कितनी बदलीं। NCERT के ब्रेड वाले उदाहरण में 1,650 ÷ 1,100 = 1.5, यानी 150 प्रतिशत।
कीमत सूचकांकों के भी आधार वर्ष होते हैं, जिनमें आधार वर्ष का कीमत स्तर 100 माना जाता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "आर्थिक अवधारणाएँ एवं भारतीय अर्थव्यवस्था" के "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" के अंतर्गत "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान" सूचीबद्ध है।
राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार स्थिर कीमतों पर GSDP वस्तुओं और सेवाओं को उस निश्चित वर्ष की प्रचलित कीमतों पर आँककर बनाया जाता है जिसे आधार वर्ष कहते हैं। समीक्षा राज्य आय को चालू कीमतों और स्थिर (2011-12) कीमतों दोनों पर देती है।
वही समीक्षा दिखाती है कि अलग-अलग शृंखलाओं के आधार वर्ष अलग हैं: राज्य के थोक मूल्य सूचकांक का 1999-2000=100, अखिल भारतीय थोक मूल्य सूचकांक का 2011-12=100, और औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) का 2016=100, जिस आधार पर यह सितम्बर 2020 से पहले के 2001=100 के स्थान पर जारी हो रहा है।
मुख्य तथ्य
- NCERT: आधार वर्ष = वह वर्ष जिसकी कीमतों का उपयोग वास्तविक GDP की गणना में किया जा रहा है।
- NCERT: मौद्रिक GDP वर्तमान प्रचलित कीमतों पर GDP का मूल्य है।
- NCERT: GDP अपस्फीतिक = मौद्रिक GDP ÷ वास्तविक GDP।
- आर्थिक समीक्षा 2020-21: थोक मूल्य सूचकांक का आधार राजस्थान के लिए 1999-2000=100, अखिल भारत के लिए 2011-12=100।
- आर्थिक समीक्षा 2020-21: स्थिर कीमतों पर GSDP उत्पादन को एक निश्चित आधार वर्ष, 2011-12, की कीमतों पर आँकता है।
स्रोत: NCERT, इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स (कक्षा 12), अध्याय 2, खंड 2.4, मौद्रिक और वास्तविक GDP।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आधार वर्ष को मौद्रिक GDP से जोड़ना: मौद्रिक GDP चालू वर्ष की अपनी कीमतें लेता है और उसे आधार वर्ष की आवश्यकता नहीं होती।
- यह मान लेना कि आधार वर्ष उत्पादन देता है: वास्तविक GDP चालू वर्ष की मात्राएँ रखता है और आधार वर्ष से केवल कीमतें लेता है।
- हर शृंखला का एक ही आधार वर्ष मान लेना: राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2020-21 स्थिर कीमतों पर GSDP के लिए 2011-12 लेती है, पर राज्य के थोक मूल्य सूचकांक के लिए 1999-2000=100।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि आधार वर्ष का अर्थ क्या है, या वास्तविक और मौद्रिक GDP किन कीमतों का उपयोग करते हैं।
कोई प्रश्न दो वर्षों का उत्पादन और कीमतें देकर वास्तविक GDP या GDP अपस्फीतिक भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
गत वर्ष की तुलना में वर्ष 2022-23 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन GSVA (स्थिर 2011-12 बुनियादी मूल्यों पर) में किस क्षेत्र के योगदान में सर्वाधिक वृद्धि होने का अनुमान है ?
- (1) इनमें से कोई नहीं
- (2) सेवा क्षेत्र
- (3) उद्योग क्षेत्र
- (4) कृषि क्षेत्र
उत्तर(2)
स्थिर कीमतों वाले आँकड़ों का उपयोग करता है। वह प्रश्न पूछता है कि 2022-23 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन GSVA (स्थिर 2011-12 बुनियादी मूल्यों पर) में किस क्षेत्र के योगदान में सर्वाधिक वृद्धि का अनुमान है (RPSC की कुंजी: सेवा क्षेत्र); यह प्रश्न ऐसी स्थिर कीमतों के पीछे के आधार वर्ष का अर्थ पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक देश केवल चावल का उत्पादन करता है। 2011 में उसने 20 रुपये प्रति इकाई की दर से 50 इकाइयाँ बनाईं; 2021 में 30 रुपये प्रति इकाई की दर से 60 इकाइयाँ। 2011 को आधार वर्ष मानकर 2021 का वास्तविक GDP है
- (a)1,000 रुपये
- (b)1,200 रुपये
- (c)1,800 रुपये
- (d)1,500 रुपये
उत्तर(2) — वास्तविक GDP = 2021 का उत्पादन × आधार वर्ष की कीमत = 60 × 20 = 1,200 रुपये। विकल्प (1) 2011 का GDP है, विकल्प (3) 2021 का मौद्रिक GDP (60 × 30) है, और विकल्प (4) 2011 के उत्पादन को 2021 की कीमत पर आँकता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यदि मौद्रिक GDP 1,650 रुपये और वास्तविक GDP 1,100 रुपये है, तो प्रतिशत में GDP अपस्फीतिक है
- (a)66.7 प्रतिशत
- (b)150 प्रतिशत
- (c)110 प्रतिशत
- (d)165 प्रतिशत
उत्तर(2) — अपस्फीतिक = मौद्रिक ÷ वास्तविक × 100 = 1,650 ÷ 1,100 × 100 = 150। विकल्प (1) वास्तविक को मौद्रिक से भाग देता है, और विकल्प (3) तथा (4) इन दोनों आँकड़ों से नहीं निकलते।