निम्न में से कौनसा सही सुमेलित है?
- (1)मैंगनीज – बैलाडीला
- (2)बॉक्साइट – लोहरदगा
- (3)लोहा – कोडरमा
- (4)अभ्रक – तालचेर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), बॉक्साइट – लोहरदगा.
झारखण्ड का लोहरदगा बॉक्साइट क्षेत्र है। NCERT की कक्षा 12 की पुस्तक "भारत: लोग और अर्थव्यवस्था" (2019-20 का मुद्रण) बताती है कि झारखण्ड में लोहरदगा के पाट क्षेत्रों में बॉक्साइट के समृद्ध निक्षेप हैं। विकिपीडिया का इस नगर पर लेख इसे बॉक्साइट खानों के लिए प्रसिद्ध बताता है, जिन्हें चलाने वाली कंपनियों में हिंडाल्को भी है।
शेष तीनों विकल्प एक वास्तविक खनन क्षेत्र का नाम देते हैं, पर उसके साथ गलत खनिज जोड़ते हैं:
छत्तीसगढ़ का बैलाडीला लौह अयस्क क्षेत्र है।
झारखण्ड का कोडरमा अभ्रक से जुड़ा है।
ओडिशा का तालचेर कोयला खनन केन्द्र है।
इसलिए एकमात्र सही युग्म बॉक्साइट – लोहरदगा है।
लोहरदगा – बॉक्साइट; बैलाडीला – लौह अयस्क; कोडरमा – अभ्रक; तालचेर – कोयला।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)मैंगनीज – बैलाडीला — बैलाडीला लौह अयस्क क्षेत्र है। NCERT भारत की लौह अयस्क पट्टी को ओडिशा और झारखण्ड से आगे दुर्ग, दंतेवाड़ा और बैलाडीला तक बताती है, और विकिपीडिया छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला श्रेणी को अत्यंत उच्च श्रेणी का लौह अयस्क देने वाला खनन क्षेत्र बताता है।
NCERT के मैंगनीज क्षेत्र अलग हैं: ओडिशा के बोनाई और केंदुझर, मध्य प्रदेश की बालाघाट–छिंदवाड़ा पट्टी, और महाराष्ट्र के नागपुर तथा भंडारा, अन्य क्षेत्रों के साथ।
- (3)लोहा – कोडरमा — कोडरमा अभ्रक से जुड़ा है, लोहे से नहीं। विकिपीडिया का कोडरमा जिले पर लेख बताता है कि कभी कोडरमा को भारत की अभ्रक राजधानी माना जाता था।
NCERT झारखण्ड के उच्च गुणवत्ता वाले अभ्रक को निचले हजारीबाग पठार में लगभग 150 किमी लंबी और 22 किमी चौड़ी पट्टी में रखती है, और झारखण्ड की महत्वपूर्ण लौह अयस्क खानें नोवामुंडी और गुआ बताती है।
- (4)अभ्रक – तालचेर — तालचेर कोयला क्षेत्र है। NCERT ओडिशा के तालचेर और रामपुर को भारत के महत्वपूर्ण कोयला खनन केन्द्रों में गिनाती है।
NCERT के अभ्रक वर्णन में झारखण्ड का निचला हजारीबाग पठार, आन्ध्र प्रदेश का नेल्लोर जिला, और राजस्थान में जयपुर से भीलवाड़ा तक तथा उदयपुर के आसपास लगभग 320 किमी की पट्टी जैसे स्थान हैं। तालचेर उसमें नहीं है।
अवधारणा
बॉक्साइट वह अयस्क है जिससे एल्यूमिनियम बनता है। NCERT बताती है कि यह मुख्यतः लैटेराइट चट्टानों से जुड़े टर्शियरी निक्षेपों में, प्रायद्वीपीय भारत के पठारों और पहाड़ी श्रेणियों पर तथा तटीय भागों में मिलता है।
NCERT के बॉक्साइट क्षेत्रों में ओडिशा के कालाहांडी, संबलपुर, बोलनगीर और कोरापुट, झारखण्ड में लोहरदगा के पाट क्षेत्र, गुजरात के भावनगर और जामनगर, छत्तीसगढ़ का अमरकंटक पठार, और मध्य प्रदेश के कटनी-जबलपुर तथा बालाघाट शामिल हैं।
उत्पादन में हिस्सेदारी तिथि से बँधे आँकड़े हैं। भारतीय खान ब्यूरो की भारतीय खनिज वर्षपुस्तिका 2021, जो इस परीक्षा के बाद दिसम्बर 2023 में जारी हुई, 2020-21 में ओडिशा को अग्रणी उत्पादक राज्य बताती है, जिसका भारत के बॉक्साइट उत्पादन में लगभग 76% हिस्सा था।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारत का भूगोल" के अंतर्गत "प्रमुख खनिज–लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट एवं अभ्रक" सूचीबद्ध है। खनन क्षेत्र और उनके खनिज इसी शीर्षक में आते हैं।
चार में से दो स्थान, लोहरदगा और कोडरमा, झारखण्ड में हैं, और NCERT नोवामुंडी तथा गुआ को उसी राज्य की लौह अयस्क खानें बताती है। लोहरदगा में बॉक्साइट है और कोडरमा अभ्रक से जुड़ा है, इसलिए केवल राज्य से युग्म तय नहीं होता।
राजस्थान भी अभ्रक के मानचित्र पर है: NCERT जयपुर से भीलवाड़ा तक और उदयपुर के आसपास लगभग 320 किमी की अभ्रक पट्टी बताती है।
मुख्य तथ्य
- NCERT (कक्षा 12, "भारत: लोग और अर्थव्यवस्था", 2019-20 का मुद्रण): झारखण्ड में लोहरदगा के पाट क्षेत्रों में बॉक्साइट के समृद्ध निक्षेप हैं।
- NCERT: भारत की लौह अयस्क पट्टी दुर्ग, दंतेवाड़ा और बैलाडीला तक जाती है; विकिपीडिया बैलाडीला श्रेणी को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बताता है।
- विकिपीडिया (कोडरमा जिला): कभी कोडरमा को भारत की अभ्रक राजधानी माना जाता था।
- NCERT: ओडिशा के तालचेर और रामपुर महत्वपूर्ण कोयला खनन केन्द्र हैं।
- NCERT: राजस्थान की अभ्रक पट्टी जयपुर से भीलवाड़ा तक और उदयपुर के आसपास लगभग 320 किमी में फैली है।
हर विकल्प एक वास्तविक खनन क्षेत्र का नाम देता है; केवल लोहरदगा अपने ही खनिज के साथ जुड़ा है। स्रोत: NCERT "भारत: लोग और अर्थव्यवस्था" (2019-20 का मुद्रण); विकिपीडिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- राज्य के आधार पर युग्म तय करना। लोहरदगा, कोडरमा और नोवामुंडी–गुआ की लौह खानें सभी झारखण्ड में हैं, पर हर एक का खनिज अलग है।
- एक ही पट्टी में मिलने वाले खनिजों को मिला देना। NCERT ओडिशा के बोनाई और केंदुझर को लौह अयस्क और मैंगनीज दोनों के लिए गिनाती है, फिर भी बैलाडीला केवल उसके लौह अयस्क वर्णन में आता है।
- परिचित स्थान-नाम पर भरोसा कर लेना। हर विकल्प एक वास्तविक खनन क्षेत्र का नाम देता है; हर गलत विकल्प में त्रुटि उसके साथ जोड़े गए खनिज में है।
कोई प्रश्न, जैसे यहाँ, खनिजों को खनन क्षेत्रों से जोड़कर सही युग्म पूछ सकता है।
कोई प्रश्न गलत युग्म भी पूछ सकता है, किसी खनन क्षेत्र का नाम देकर उसका खनिज पूछ सकता है, या पूछ सकता है कि कोई खनन पट्टी किस राज्य में है।
संबंधित PYQ
राजस्थान में कालाखुटा, लीलवानी, नारदिया, तिम्मामोरी किस खनिज के उत्पादक क्षेत्र हैं ?
- (1) मैंगनीज़
- (2) टंगस्टन
- (3) ताँबा
- (4) लौह–अयस्क
उत्तर(1)
खनन स्थानों को खनिज से जोड़ने का वही कौशल, राजस्थान के भीतर। वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान में कालाखुटा, लीलवानी, नारदिया, तिम्मामोरी किस खनिज के उत्पादक क्षेत्र हैं (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), मैंगनीज़); यह प्रश्न पूरे भारत के खनिजों और खनन क्षेत्रों के युग्म जाँचता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
छत्तीसगढ़ की बैलाडीला श्रेणी किसके खनन के लिए जानी जाती है –
- (a)लौह अयस्क
- (b)मैंगनीज
- (c)बॉक्साइट
- (d)कोयला
उत्तर(1) — NCERT बैलाडीला को भारत की लौह अयस्क पट्टी में शामिल करती है, और विकिपीडिया इस श्रेणी को अत्यंत उच्च श्रेणी का लौह अयस्क देने वाली बताता है। विकल्प (2), मैंगनीज, विकल्प (3), बॉक्साइट, और विकल्प (4), कोयला, वे खनिज नहीं हैं जिन्हें NCERT बैलाडीला से जोड़ती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्न में से कौन-सा सही सुमेलित है?
- (a)कोयला – कुद्रेमुख
- (b)अभ्रक – नेल्लोर
- (c)बॉक्साइट – नोवामुंडी
- (d)लौह अयस्क – तालचेर
उत्तर(2) — NCERT बताती है कि आन्ध्र प्रदेश का नेल्लोर जिला सर्वोत्तम गुणवत्ता का अभ्रक देता है। विकल्प (1), कुद्रेमुख, लौह अयस्क क्षेत्र है; विकल्प (3), नोवामुंडी, लौह अयस्क खान है; विकल्प (4), तालचेर, कोयला खनन केन्द्र है।