राजस्थान उच्च न्यायालय के निम्नांकित न्यायाधीशों में से कौन राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री के पद पर आसीन रहे हैं?
- (1)जस्टिस मोहम्मद यामीन
- (2)जस्टिस सूरज नारायण डीडवानिया
- (3)जस्टिस फारूख़ हसन
- (4)जस्टिस यादराम मीणा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), जस्टिस फारूख़ हसन.
अभिलेखों में नाम की वर्तनी अलग है: भारत का राजपत्र और उच्च न्यायालय की सूची अंग्रेज़ी में हैं, और विधानसभा की हिन्दी कार्यवाही नाम "श्री फारूक हसन" छापती है, जबकि प्रश्न का हिन्दी विकल्प "फारूख़ हसन" है।
मंत्री के रूप में। राजस्थान विधानसभा की 9 मार्च 1976 और 30 मार्च 1977 की कार्यवाही में सदन में "राज्य मंत्री, शिक्षा (श्री फारूक हसन)" द्वारा दिए गए उत्तर छपे हैं।
न्यायाधीश के रूप में। न्याय विभाग की 12 जुलाई 1985 की अधिसूचना ने, जो 3 अगस्त 1985 के भारत के राजपत्र में छपी, श्री फारूक हसन को छह अन्य के साथ राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया। उच्च न्यायालय की अपने न्यायाधीशों की सूची उनका कार्यकाल 13 जुलाई 1985 से 31 दिसंबर 1994 देती है।
कोई भी अभिलेख दूसरे पद का उल्लेख नहीं करता। 1976–77 के मंत्री और 1985 के न्यायाधीश एक ही व्यक्ति हैं, यह बात RPSC की कुंजी पर आधारित है, जो विकल्प (3) को सही मानती है।
याद रखने का विचार: विधानसभा अभिलेखों में फारूक हसन राज्य मंत्री, शिक्षा (1976–77) और उच्च न्यायालय की सूची में न्यायाधीश (1985–94); RPSC की कुंजी इन्हें एक ही जीवन-वृत्त मानती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)जस्टिस मोहम्मद यामीन — राजस्थान उच्च न्यायालय की अपने न्यायाधीशों की सूची मोहम्मद यामीन को 6 अप्रैल 1996 से 3 जुलाई 2001 तक न्यायाधीश दर्ज करती है।
RPSC की कुंजी उन्हें राज्यमंत्री के पद पर रहे न्यायाधीश के रूप में नहीं दिखाती; वह जस्टिस फारूख़ हसन को दिखाती है। 1976 और 1977 की विधानसभा कार्यवाही में एक फारूक हसन राज्य मंत्री, शिक्षा के रूप में उत्तर देते दिखते हैं।
- (2)जस्टिस सूरज नारायण डीडवानिया — उच्च न्यायालय की सूची सूरज नारायण डीडवानिया को 25 नवंबर 1978 से 24 जून 1981 तक न्यायाधीश दर्ज करती है।
RPSC की कुंजी उन्हें राज्यमंत्री के पद पर रहे न्यायाधीश के रूप में नहीं दिखाती; वह जस्टिस फारूख़ हसन को दिखाती है। 1976 और 1977 की विधानसभा कार्यवाही में एक फारूक हसन राज्य मंत्री, शिक्षा के रूप में दिखते हैं।
- (4)जस्टिस यादराम मीणा — जस्टिस यादराम मीणा के अभिलेख कई उच्च न्यायालयों में फैले जीवन-वृत्त को दिखाते हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय की सूची वहाँ उनका कार्यकाल 20 जुलाई 1990 से दर्ज करती है, साथ में कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थानांतरण और राजस्थान में वापसी।
भारत का राजपत्र 2006 में गुजरात उच्च न्यायालय में उनका स्थानांतरण और 2 फ़रवरी 2007 को उसी न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति दर्ज करता है। RPSC की कुंजी राज्यमंत्री के पद पर रहे न्यायाधीश के रूप में उन्हें नहीं, जस्टिस फारूख़ हसन को दिखाती है।
अवधारणा
राज्य मंत्री किसी राज्य की मंत्रिपरिषद् का वह सदस्य है जो कैबिनेट स्तर से नीचे होता है। अनुच्छेद 164(1) के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा, तथा मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति अनुच्छेद 217(1) के अंतर्गत राष्ट्रपति करता है। अनुच्छेद 217(2) के लिए भारत की नागरिकता और भारत के राज्यक्षेत्र में कम से कम दस वर्ष तक न्यायिक पद, या किसी उच्च न्यायालय में कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता रहना आवश्यक है।
दोनों पद अलग हैं: एक कार्यपालिका का है, दूसरा न्यायपालिका का। कोई व्यक्ति अपने जीवन-वृत्त में अलग-अलग समय पर दोनों पद धारण कर सकता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय।" सूचीबद्ध है, जो मंत्रिपरिषद् और उच्च न्यायालय को एक ही शीर्षक में रखता है।
राजस्थान उच्च न्यायालय की अपने न्यायाधीशों की सूची 29 अगस्त 1949 को उसकी स्थापना से चलती है, और हर न्यायाधीश के कार्यभार ग्रहण और पद छोड़ने की तिथियाँ तथा स्थानांतरण की टिप्पणियाँ देती है। विधानसभा की कार्यवाही दर्ज करती है कि सदन में किस विभाग की ओर से किसने उत्तर दिया।
साथ रखकर पढ़ने पर ये अभिलेख दोनों पदों में फारूक हसन नाम दिखाते हैं; कोई भी यह नहीं कहता कि दोनों एक ही व्यक्ति हैं।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही, 9 मार्च 1976 और 30 मार्च 1977: श्री फारूक हसन ने राज्य मंत्री, शिक्षा के रूप में उत्तर दिए; वे बाद के न्यायाधीश ही हैं, यह RPSC की कुंजी पर आधारित है।
- भारत का राजपत्र, 3 अगस्त 1985: 12 जुलाई 1985 की अधिसूचना ने श्री फारूक हसन और छह अन्य को राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया।
- राजस्थान उच्च न्यायालय की न्यायाधीश सूची: फारूक हसन, 13 जुलाई 1985 से 31 दिसंबर 1994; मोहम्मद यामीन, 6 अप्रैल 1996 से 3 जुलाई 2001।
- राजस्थान उच्च न्यायालय की सूची: सूरज नारायण डीडवानिया, 25 नवंबर 1978 से 24 जून 1981।
- भारत का राजपत्र: गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यादराम मीणा 2 फ़रवरी 2007 की अधिसूचना से उसके मुख्य न्यायाधीश नियुक्त।
स्रोत: 1949 से राजस्थान उच्च न्यायालय की न्यायाधीश सूची; राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही (1976, 1977); भारत का राजपत्र (1985, 2006, 2007)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वर्तनी के कारण सही नाम छोड़ देना: प्रश्न का हिन्दी विकल्प "फारूख़ हसन" छापता है, जबकि विधानसभा की कार्यवाही "श्री फारूक हसन" छापती है।
- लंबे न्यायिक जीवन-वृत्त के कारण कोई नाम चुन लेना: यादराम मीणा का दर्ज जीवन-वृत्त राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तक जाता है।
- पदों का क्रम उलट देना: विधानसभा अभिलेख 1976–77 में एक फारूक हसन को मंत्री दिखाते हैं, और राजपत्र 1985 में एक फारूक हसन को न्यायाधीश नियुक्त करता है; RPSC की कुंजी इन्हें एक ही जीवन-वृत्त मानती है।
कोई प्रश्न कई न्यायाधीशों के नाम देकर पूछ सकता है कि उनमें से किसने कोई दूसरा पद भी धारण किया, जैसे मंत्री, अध्यक्ष या राज्यपाल।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि राजस्थान उच्च न्यायालय के कौन-से न्यायाधीश बाद में किसी दूसरे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के संविधान के अनुच्छेद 217(2) के अनुसार कोई अधिवक्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए तब अर्हित होता है, जब वह किसी उच्च न्यायालय का कम से कम कितने वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो?
- (a)पाँच वर्ष
- (b)सात वर्ष
- (c)दस वर्ष
- (d)बारह वर्ष
उत्तर(3) — अनुच्छेद 217(2)(ख) के लिए किसी उच्च न्यायालय का या ऐसे दो या अधिक न्यायालयों का लगातार कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता रहना आवश्यक है। विकल्प (1), (2) और (4) वह अवधि नहीं हैं जो यह खंड बताता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यादराम मीणा 2 फ़रवरी 2007 की अधिसूचना से किस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए?
- (a)कलकत्ता उच्च न्यायालय
- (b)गुजरात उच्च न्यायालय
- (c)मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
- (d)पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय
उत्तर(2) — भारत के राजपत्र की 2 फ़रवरी 2007 की अधिसूचना ने उन्हें, जो तब गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे, उसी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। विकल्प (1), कलकत्ता, वह न्यायालय है जहाँ राजस्थान उच्च न्यायालय की सूची उनका एक पहले का स्थानांतरण दर्ज करती है। विकल्प (3) और (4) इन अधिसूचनाओं में नहीं आते।