संविधान में मूल कर्तव्यों को जिसकी सिफारिश पर सम्मिलित किया गया, वह हैं –
- (1)स्वर्ण सिंह समिति
- (2)शाह आयोग
- (3)प्रशासनिक सुधार आयोग
- (4)संथानम समिति
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), स्वर्ण सिंह समिति.
लोक सभा सचिवालय की जर्नल ऑफ़ पार्लियामेंट्री इन्फ़ॉर्मेशन (जुलाई 1976) बताती है कि 26 फ़रवरी 1976 को कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. बरुआ ने स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की, जिसका काम संविधान में संशोधनों का अध्ययन कर उन्हें सुझाना था। समिति ने 22 मई 1976 को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
इसके बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने सुझाव दिया कि यही समिति उन मूल कर्तव्यों और दायित्वों को संविधान में शामिल करने के प्रस्ताव भी तैयार करे, जो हर नागरिक का राष्ट्र के प्रति है (अंग्रेज़ी मूल का आशय)।
संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 ने भाग 4क, मूल कर्तव्य, जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद 51A है; यह 3 जनवरी 1977 से लागू हुआ। इसमें दस कर्तव्य थे, खंड (क) से (ञ) तक।
जर्नल वह अनुरोध दर्ज करती है, समिति का उत्तर नहीं। मूल अधिकार, निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य पर विकिपीडिया का अंग्रेज़ी लेख यह कड़ी देता है: कर्तव्य 42वें संशोधन द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशों पर जोड़े गए।
याद रखने का विचार: स्वर्ण सिंह समिति (1976) → 42वाँ संशोधन → भाग 4क, अनुच्छेद 51A।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)शाह आयोग — शाह आयोग आपातकाल के बाद आया और उसने आपातकाल की ही जाँच की। NCERT की अंग्रेज़ी पाठ्यपुस्तक पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस दर्ज करती है कि मई 1977 में जनता पार्टी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. सी. शाह की अध्यक्षता में एक जाँच आयोग नियुक्त किया।
उसका काम 25 जून 1975 को घोषित आपातकाल के दौरान हुए सत्ता के दुरुपयोग, ज़्यादतियों और अनियमितताओं के आरोपों की जाँच करना था।
- (3)प्रशासनिक सुधार आयोग — पहला प्रशासनिक सुधार आयोग 5 जनवरी 1966 को गठित हुआ। इसके अध्यक्ष पहले मोरारजी देसाई और बाद में के. हनुमंतैया रहे।
इसकी बीस रिपोर्टों में एक केंद्र-राज्य संबंधों पर थी। मूल कर्तव्य इसके एक दशक बाद स्वर्ण सिंह समिति के माध्यम से आए।
- (4)संथानम समिति — संथानम समिति भ्रष्टाचार निवारण समिति थी, जिसके अध्यक्ष सांसद के. संथानम थे। इसकी रिपोर्ट 31 मार्च 1964 की है।
इसका विषय प्रशासन में भ्रष्टाचार था, और इसकी सिफ़ारिशों पर 1964 में केन्द्रीय सतर्कता आयोग बना, यानी मूल कर्तव्य जोड़े जाने से बारह वर्ष पहले।
अवधारणा
मूल कर्तव्य वे दायित्व हैं जो संविधान हर नागरिक पर डालता है; ये भाग 4क के अनुच्छेद 51A में दिए गए हैं। इनमें संविधान का पालन करना और राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना, भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना, और प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना शामिल हैं।
बयालीसवें संशोधन ने 1976 में दस कर्तव्य जोड़े, जो 3 जनवरी 1977 से लागू हुए। संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने ग्यारहवाँ कर्तव्य, खंड (ट), जोड़ा, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
खंड (ट) के अनुसार माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य है कि वह छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली के अंतर्गत "उद्देशिका, मूल अधिकार, राज्य नीति के निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य।" सूचीबद्ध है।
मूल कर्तव्य 25 जून 1975 को घोषित आपातकाल के दौर के हैं। स्वर्ण सिंह समिति कांग्रेस पार्टी की समिति थी, जिसे पार्टी अध्यक्ष ने फ़रवरी 1976 में, आपातकाल लागू रहते हुए, गठित किया।
आपातकाल समाप्त होने के बाद जनता पार्टी सरकार ने मई 1977 में उस दौर की ज़्यादतियों की जाँच के लिए शाह आयोग नियुक्त किया। 1976 में जोड़े गए कर्तव्य संविधान में बने रहे।
मुख्य तथ्य
- जर्नल ऑफ़ पार्लियामेंट्री इन्फ़ॉर्मेशन (जुलाई 1976): कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. बरुआ ने 26 फ़रवरी 1976 को संविधान में संशोधन सुझाने के लिए स्वर्ण सिंह समिति नियुक्त की।
- समिति ने 22 मई 1976 को अंतिम रिपोर्ट सौंपी; इसके बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने उससे नागरिकों के मूल कर्तव्यों के प्रस्ताव भी तैयार करने को कहा।
- संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 ने भाग 4क और अनुच्छेद 51A जोड़े, जो 3 जनवरी 1977 से लागू हुए।
- संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने अनुच्छेद 51A में खंड (ट) जोड़ा, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
- शाह आयोग: मई 1977 में न्यायमूर्ति जे. सी. शाह की अध्यक्षता में आपातकाल के दौरान हुई ज़्यादतियों की जाँच के लिए नियुक्त।
स्रोत: जर्नल ऑफ़ पार्लियामेंट्री इन्फ़ॉर्मेशन, जुलाई 1976; NCERT, पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस; भ्रष्टाचार निवारण समिति की रिपोर्ट; विकिपीडिया, प्रशासनिक सुधार आयोग।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- शाह आयोग को आपातकाल के संवैधानिक बदलावों से जोड़ना: वह आपातकाल की ज़्यादतियों की जाँच थी, जो मई 1977 में, कर्तव्य जोड़े जाने के बाद, नियुक्त हुई।
- दस कर्तव्यों को वर्तमान संख्या मान लेना: छियासीवें संशोधन से जोड़ा गया खंड (ट) 1 अप्रैल 2010 से लागू है।
- संथानम समिति को भी एक नामित समिति होने के कारण कर्तव्यों का श्रेय देना: उसका विषय भ्रष्टाचार निवारण था।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि मूल कर्तव्यों की सिफ़ारिश किस समिति ने की, या वे किस वर्ष और किस संशोधन से जोड़े गए।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि अनुच्छेद 51A में कोई विशेष कर्तव्य किस क्रम पर है, या स्वर्ण सिंह समिति में कौन-कौन थे।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018, 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 51A का कौन-सा खंड जोड़ा गया?
- (a)खंड (ज)
- (b)खंड (झ)
- (c)खंड (ञ)
- (d)खंड (ट)
उत्तर(4) — खंड (ट), यानी छह से चौदह वर्ष के बालक के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करने का माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य, छियासीवें संशोधन द्वारा 1 अप्रैल 2010 से जोड़ा गया। विकल्प (1), (2) और (3) बयालीसवें संशोधन द्वारा जोड़े गए दस कर्तव्यों में थे। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मई 1977 में नियुक्त शाह आयोग को किसकी जाँच करनी थी?
- (a)आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग, ज़्यादतियों और अनियमितताओं के आरोप
- (b)लोक प्रशासन में भ्रष्टाचार
- (c)केंद्र-राज्य संबंध
- (d)संविधान में मूल कर्तव्यों को शामिल करना
उत्तर(1) — NCERT दर्ज करता है कि न्यायमूर्ति जे. सी. शाह की अध्यक्षता वाले आयोग को 25 जून 1975 के आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग, ज़्यादतियों और अनियमितताओं की जाँच करनी थी। विकल्प (2) संथानम समिति का विषय था, विकल्प (3) प्रशासनिक सुधार आयोग के विषयों में एक, और विकल्प (4) स्वर्ण सिंह समिति का।