राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित कौन से संविधान संशोधन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था?
- (1)98वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
- (2)97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
- (3)99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
- (4)100वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), 99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम.
संविधान (निन्यानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2014 ने अनुच्छेद 124A, 124B और 124C अंतःस्थापित कर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाया। आयोग को भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों और न्यायाधीशों की नियुक्ति, तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश करनी थी।
उसी अधिनियम ने अनुच्छेद 124(2), 217(1) और 222(1) में परामर्श वाले शब्दों के स्थान पर आयोग की सिफारिश रखी। यह 13 अप्रैल 2015 को प्रवृत्त हुआ।
संविधान के आधिकारिक हिन्दी पाठ में अनुच्छेद 124A की पाद-टिप्पणी दर्ज करती है: "यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन रिकार्ड एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले में उच्चतम न्यायालय के तारीख 16-10-2015 के आदेश द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है।"
विकिपीडिया के विवरण के अनुसार यह निर्णय पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 से दिया, जिसमें न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर असहमत थे। बहुमत ने संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 दोनों को असंवैधानिक घोषित किया।
याद रखने का विचार: 99वाँ संशोधन, 2014 → राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग → 16 अक्टूबर 2015 को अभिखंडित।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)98वाँ संविधान संशोधन अधिनियम — संविधान (अठानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2012 ने 1 अक्टूबर 2013 से अनुच्छेद 371J, कर्नाटक राज्य के संबंध में विशेष उपबंध अंतःस्थापित किया।
यह राष्ट्रपति को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विकास बोर्ड, निधियों के साम्यापूर्ण आबंटन, और वहाँ के लोगों के लिए लोक नियोजन, शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण में साम्यापूर्ण अवसर के लिए राज्यपाल के विशेष उत्तरदायित्व का उपबंध करने देता है।
- (2)97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम — संविधान (सतानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2011 सहकारी सोसाइटियों से संबंधित संशोधन है। इसने अनुच्छेद 19(1)(ग) में "या सहकारी सोसाइटी" शब्द जोड़े, सहकारी सोसाइटियों के संवर्धन पर अनुच्छेद 43B अंतःस्थापित किया, और भाग 9ख, सहकारी सोसाइटियां, अंतःस्थापित किया।
यह राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से दो संशोधन पहले आया और सहकारी संस्थाओं से संबंधित है, न्यायपालिका से नहीं।
- (4)100वाँ संविधान संशोधन अधिनियम — संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 ने भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा करार को प्रभावी किया: उसके अपने शब्दों में, "राज्यक्षेत्रों का भारत द्वारा अर्जन किए जाने और कतिपय राज्यक्षेत्रों का बांग्लादेश को अंतरण किए जाने" को।
पहली अनुसूची में इसकी प्रविष्टियाँ, असम जैसे राज्यों के लिए, 31 जुलाई 2015 से प्रभावी हैं। यह राज्यक्षेत्र से संबंधित है, न्यायाधीशों की नियुक्ति से नहीं।
अवधारणा
अनुच्छेद 124A ने आयोग के छह सदस्य तय किए: अध्यक्ष के रूप में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, उच्चतम न्यायालय के उनसे ठीक नीचे के दो ज्येष्ठ न्यायाधीश, संघ का विधि और न्याय का भारसाधक मंत्री, और दो विख्यात व्यक्ति।
विख्यात व्यक्तियों को प्रधान मंत्री, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और लोक सभा में विपक्ष के नेता, या सबसे बड़े एकल विपक्षी दल के नेता, की समिति द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाना था।
उनमें से एक को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्तियों अथवा स्त्रियों में से होना था; प्रत्येक का कार्यकाल तीन वर्ष का था, पुनःनामनिर्देशन के बिना।
यह आयोग न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था का स्थान लेता। 16 अक्टूबर 2015 के निर्णय ने उस परिवर्तन को समाप्त कर दिया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के अंतर्गत "राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद्, संसद, उच्चतम न्यायालय और न्यायिक पुनरावलोकन।" सूचीबद्ध है। संविधान संशोधनों का न्यायिक पुनरावलोकन वह स्थान है जहाँ यह मामला आता है।
यह मामला अनुच्छेद 217(1) के माध्यम से राजस्थान तक पहुँचता है। 99वें संशोधन ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति वाला खंड फिर से लिखा, जिनमें राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी आते हैं, और आधिकारिक पाठ आज भी वह शब्दावली इस पाद-टिप्पणी के साथ छापता है कि संशोधन अभिखंडित कर दिया गया।
संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 साथ-साथ अधिनियमित हुए और एक ही दिन, 13 अप्रैल 2015 को, प्रवृत्त किए गए।
मुख्य तथ्य
- संविधान (निन्यानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2014 ने अनुच्छेद 124A, 124B और 124C अंतःस्थापित कर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाया; 13 अप्रैल 2015 से प्रवृत्त।
- अनुच्छेद 124A: भारत के मुख्य न्यायमूर्ति (अध्यक्ष), उच्चतम न्यायालय के दो अगले ज्येष्ठ न्यायाधीश, संघ के विधि मंत्री और दो विख्यात व्यक्ति।
- सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन रिकार्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ, 16 अक्टूबर 2015 का निर्णय (ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117), ने संशोधन को अभिखंडित किया।
- विकिपीडिया: संविधान पीठ ने 4:1 से निर्णय दिया; न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर असहमत थे।
- 98वाँ संशोधन (2012): अनुच्छेद 371J, कर्नाटक; 97वाँ (2011): सहकारी सोसाइटियां; 100वाँ (2015): भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा।
स्रोत: भारत के संविधान के आधिकारिक पाठ की पाद-टिप्पणियाँ और परिशिष्ट 1।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पास-पास की संख्याओं को मिला देना: 97वाँ सहकारी सोसाइटियां, 98वाँ कर्नाटक का अनुच्छेद 371J, 99वाँ राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग, 100वाँ बांग्लादेश भूमि सीमा।
- अनुच्छेद 124(2) और 217(1) में अब भी छपी आयोग वाली शब्दावली को प्रवृत्त नियम समझ लेना: आधिकारिक पाठ की पाद-टिप्पणी इसे 16 अक्टूबर 2015 को अभिखंडित बताती है।
- संशोधन को 2015 का मान लेना: अधिनियम संविधान (निन्यानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2014 है; 2015 वह वर्ष है जब यह प्रभावी हुआ (13 अप्रैल) और अभिखंडित हुआ (16 अक्टूबर)।
कोई प्रश्न किसी संशोधन द्वारा बनाई गई संस्था का नाम देकर संशोधन की संख्या पूछ सकता है, या उसे अभिखंडित करने वाले मामले का नाम पूछ सकता है।
कोई प्रश्न संशोधनों को उनके विषयों से सुमेलित भी करवा सकता है, या पूछ सकता है कि अनुच्छेद 124A के अंतर्गत प्रस्तावित आयोग में कौन थे।
संबंधित PYQ
सूची-A का सूची-B से मिलान कीजिये और नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये : सूची-A (वाद) – सूची-B (संशोधन को चुनौती) A. इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण – i. 42वाँ संशोधन B. मिनर्वा मिल बनाम भारत संघ – ii. 52वाँ संशोधन C. किहोतो हॉलोहान बनाम जशीलू – iii. 39वाँ संशोधन D. पी. संबामूर्थि बनाम आंध्रप्रदेश राज्य – iv. 32वाँ संशोधन कूट :
- (1) A-i, B-iii, C-iv, D-ii
- (2) A-ii, B-iii, C-i, D-iv
- (3) A-iv, B-ii, C-iii, D-i
- (4) A-iii, B-i, C-ii, D-iv
उत्तर(4)
उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान संशोधन को परखने का वही विचार: वह प्रश्न चार वादों को उनमें चुनौती दिए गए संशोधनों से सुमेलित करवाता है (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), A-iii, B-i, C-ii, D-iv)। यह प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित कौन-सा संशोधन असंवैधानिक घोषित हुआ।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान (निन्यानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2014 द्वारा अंतःस्थापित अनुच्छेद 124A के अंतर्गत राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का अध्यक्ष कौन होना था?
- (a)संघ का विधि और न्याय का भारसाधक मंत्री
- (b)भारत का मुख्य न्यायमूर्ति
- (c)प्रधान मंत्री
- (d)एक समिति द्वारा नामनिर्दिष्ट विख्यात व्यक्ति
उत्तर(2) — अनुच्छेद 124A(1)(क) भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को पदेन अध्यक्ष बताता है। विकल्प (1) सदस्य था। विकल्प (3) केवल विख्यात व्यक्तियों को नामनिर्दिष्ट करने वाली समिति में थे। विकल्प (4) दो सदस्यों का वर्णन है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस संविधान संशोधन ने कर्नाटक राज्य के संबंध में विशेष उपबंध वाला अनुच्छेद 371J अंतःस्थापित किया?
- (a)97वाँ संशोधन
- (b)98वाँ संशोधन
- (c)99वाँ संशोधन
- (d)100वाँ संशोधन
उत्तर(2) — अनुच्छेद 371J संविधान (अठानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2012 द्वारा 1 अक्टूबर 2013 से अंतःस्थापित किया गया। विकल्प (1) सहकारी सोसाइटियों से, विकल्प (3) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से, और विकल्प (4) भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा से संबंधित है।