सूची-A का सूची-B से मिलान कीजिये और नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये : सूची-A (वाद) – सूची-B (संशोधन को चुनौती) A. इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण – i. 42वाँ संशोधन B. मिनर्वा मिल बनाम भारत संघ – ii. 52वाँ संशोधन C. किहोतो हॉलोहान बनाम जशीलू – iii. 39वाँ संशोधन D. पी. संबामूर्थि बनाम आंध्रप्रदेश राज्य – iv. 32वाँ संशोधन कूट :
- (1)A-i, B-iii, C-iv, D-ii
- (2)A-ii, B-iii, C-i, D-iv
- (3)A-iv, B-ii, C-iii, D-i
- (4)A-iii, B-i, C-ii, D-iv
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), A-iii, B-i, C-ii, D-iv.
A. इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण — 39वाँ संशोधन। उनतालीसवें संशोधन अधिनियम, 1975 ने अनुच्छेद 329A जोड़ा, जो प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के निर्वाचन-विवादों पर एक विशेष उपबंध था। उच्चतम न्यायालय ने 7 नवंबर 1975 को यह वाद निर्णीत किया और उस अनुच्छेद का खंड (4) रद्द कर दिया।
B. मिनर्वा मिल बनाम भारत संघ (1980) — 42वाँ संशोधन। न्यायालय ने धारा 4 (जिसने अनुच्छेद 31C का दायरा बढ़ाया) और धारा 55 (जिसने अनुच्छेद 368 में खंड (4) और (5) जोड़कर संशोधनों को न्यायालयों में प्रश्नगत किए जाने से रोका) को अविधिमान्य घोषित किया।
C. किहोतो हॉलोहान (1992) — 52वाँ संशोधन। 1985 के इस अधिनियम ने दल-बदल पर दसवीं अनुसूची जोड़ी। राज्यों द्वारा अनुसमर्थन न होने के कारण उसका पैराग्राफ 7 अविधिमान्य ठहराया गया।
D. पी. संबामूर्थि बनाम आंध्रप्रदेश राज्य — 32वाँ संशोधन। 1973 के इस अधिनियम ने अनुच्छेद 371D जोड़ा; न्यायालय ने उसका खंड (5), अधिकरण के आदेशों को राज्य सरकार द्वारा बदलने या रद्द करने देने वाले परंतुक सहित, असंवैधानिक घोषित किया।
केवल तिथियाँ ही विकल्प छाँट देती हैं: 1975 का वाद 1976 या 1985 के संशोधन को चुनौती नहीं दे सकता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-i, B-iii, C-iv, D-ii — यहाँ हर युग्म गलत है। इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण को 42वें संशोधन से जोड़ना केवल तिथियों के आधार पर ही गलत है: वाद 1975 में निर्णीत हुआ, और बयालीसवाँ संशोधन अधिनियम 1976 का है।
मिनर्वा मिल को 42वें की जगह 39वें से, और दल-बदल वाले वाद को 52वें — जिसने दसवीं अनुसूची जोड़ी — की जगह 32वें से जोड़ा गया है।
- (2)A-ii, B-iii, C-i, D-iv — केवल D-iv, यानी संबामूर्थि का 32वें संशोधन से युग्म, सही है। राज नारायण (1975) का संबंध 52वें संशोधन से नहीं हो सकता, जो 1985 में आया।
मिनर्वा मिल ने 42वें को चुनौती दी थी, 39वें को नहीं, और किहोतो हॉलोहान 52वें संशोधन की दसवीं अनुसूची पर दल-बदल वाला वाद है, 42वें को चुनौती नहीं।
- (3)A-iv, B-ii, C-iii, D-i — चारों युग्म गलत हैं। राज नारायण का संबंध 39वें संशोधन से था, 32वें से नहीं, और मिनर्वा मिल (1980) का संबंध 1985 के 52वें संशोधन से नहीं हो सकता।
किहोतो हॉलोहान 39वें के बारे में नहीं है, और संबामूर्थि 42वें के बारे में नहीं है; उसने 32वें संशोधन द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 371D के खंड (5) को रद्द किया।
अवधारणा
केशवानंद भारती (1973) के बाद से उच्चतम न्यायालय का मत है कि अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद की संविधान-संशोधन शक्ति उसके मूल ढाँचे को नष्ट करने तक नहीं जाती। इस प्रश्न का हर वाद इसी सीमा को किसी विशेष संशोधन पर लागू करता है।
राज नारायण वाद में उस संशोधन की परख हुई जिसने प्रधानमंत्री के निर्वाचन को न्यायालयों से बचाया था। मिनर्वा मिल में उस संशोधन की परख हुई जिसने संशोधन-शक्ति को ही असीमित और पुनरावलोकन से परे बनाने का प्रयास किया।
किहोतो हॉलोहान ने दल-बदल विरोधी कानून को बरकरार रखा, पर एक पैराग्राफ को प्रक्रियागत दोष के कारण अविधिमान्य ठहराया — उसके लिए राज्यों का अनुसमर्थन आवश्यक था। संबामूर्थि ने प्रशासनिक अधिकरण के आदेशों को बदलने या रद्द करने की राज्य सरकार की शक्ति को रद्द किया।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "उच्चतम न्यायालय और न्यायिक पुनरावलोकन" और "संवैधानिक संशोधन" दोनों का नाम है। वाद और संशोधन का सुमेलन दोनों से जुड़ता है।
एक कारगर तरीका यह है कि हर वाद को एक वर्ष से और हर संशोधन को एक वर्ष से जोड़ें, फिर वह हर युग्म हटा दें जिसमें वाद संशोधन से पहले का हो। यहाँ केवल इसी से विकल्प (1), (2) और (3) हट जाते हैं।
हर संशोधन के साथ एक विषय जोड़ लेना भी मदद करता है: 32वाँ — आंध्रप्रदेश, अनुच्छेद 371D; 39वाँ — उच्च पदधारियों के निर्वाचन; 42वाँ — आपातकाल-युग का व्यापक संशोधन; 52वाँ — दल-बदल विरोधी।
मुख्य तथ्य
- इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण वाद 7 नवंबर 1975 को निर्णीत हुआ; इसका संबंध अनुच्छेद 329A जोड़ने वाले उनतालीसवें संशोधन अधिनियम, 1975 से था।
- मिनर्वा मिल (1980) ने बयालीसवें संशोधन अधिनियम, 1976 की धारा 4 और 55 को अविधिमान्य घोषित किया।
- दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी) बावनवें संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ी गई और 1 मार्च 1985 से प्रभावी हुई।
- किहोतो हॉलोहान में दसवीं अनुसूची का पैराग्राफ 7 अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अंतर्गत अनुसमर्थन न होने के कारण अविधिमान्य घोषित हुआ।
- पी. संबामूर्थि वाद में उच्चतम न्यायालय ने बत्तीसवें संशोधन अधिनियम, 1973 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 371D के खंड (5) को असंवैधानिक घोषित किया।
सही कूट: A-iii, B-i, C-ii, D-iv — विकल्प (4)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कोई वाद अपने बाद बने संशोधन को चुनौती नहीं दे सकता। स्मृति से पहले वर्ष जाँचिए: 1975 का होने के कारण राज नारायण के लिए 42वाँ (1976) और 52वाँ (1985) हट जाते हैं।
- किहोतो हॉलोहान ने दल-बदल विरोधी कानून रद्द नहीं किया; उसने दसवीं अनुसूची को बरकरार रखा और केवल पैराग्राफ 7 को अविधिमान्य ठहराया।
- मिनर्वा मिल और केशवानंद भारती दोनों मूल ढाँचे वाले वाद हैं, पर बयालीसवें संशोधन की परख केवल मिनर्वा मिल में हुई, जो संशोधन केशवानंद के तीन वर्ष बाद आया।
एक रूप वादों को संशोधनों से, या उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत से, सुमेलित करवाता है, जैसा यहाँ है।
दूसरा रूप प्रमुख निर्णयों का कालानुक्रम पूछता है — गोपालन, गोलकनाथ, केशवानंद भारती, मिनर्वा मिल।
तीसरा रूप किसी संशोधन का नाम देकर पूछता है कि उच्चतम न्यायालय ने उसका कौन-सा भाग रद्द किया, या किस आधार पर — मूल ढाँचा या अनुसमर्थन का अभाव।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021, 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने बयालीसवें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 368 के खंड (4) और (5) को अविधिमान्य घोषित किया?
- (a)केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- (b)मिनर्वा मिल बनाम भारत संघ
- (c)गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- (d)एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ
उत्तर(2) — मिनर्वा मिल (1980) ने बयालीसवें संशोधन की धारा 55, जिसने ये खंड जोड़े थे, अविधिमान्य घोषित की। विकल्प (1), केशवानंद भारती (1973), 1976 के अधिनियम से पहले का है। विकल्प (3), गोलकनाथ (1967), भी उससे पहले का है। विकल्प (4), एस. आर. बोम्मई (1994), अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन से जुड़ा था। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दल-बदल के आधार पर निरर्हता के उपबंधों वाली दसवीं अनुसूची संविधान में किसके द्वारा जोड़ी गई?
- (a)बयालीसवाँ संशोधन अधिनियम, 1976
- (b)चौवालीसवाँ संशोधन अधिनियम, 1978
- (c)बावनवाँ संशोधन अधिनियम, 1985
- (d)इकसठवाँ संशोधन अधिनियम, 1988
उत्तर(3) — बावनवें संशोधन अधिनियम, 1985 ने दसवीं अनुसूची जोड़ी। विकल्प (1) आपातकाल-युग का वह संशोधन है जिसकी परख मिनर्वा मिल में हुई। विकल्प (2) ने आपातकाल-युग के कई बदलाव पलटे। विकल्प (4) ने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 की।