निम्नांकित में से कौन राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हेतु अधिकृत है?
- (1)मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी
- (2)उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
- (3)प्रमुख समाज सेवी व्यक्ति
- (4)पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश.
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत एक राज्य आयोग है। उस अधिनियम की धारा 21(2)(क) तय करती है कि उसका अध्यक्ष कौन हो सकता है।
2006 के संशोधन (2006 का अधिनियम सं. 43) द्वारा प्रतिस्थापित रूप में इस खंड के अनुसार अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होना था जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का सं. 19) ने इस खंड में मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश कर दिया।
गृह मंत्रालय ने इसे 2 अगस्त 2019 से लागू किया, इसलिए परीक्षा की तिथि पर अध्यक्ष को ऐसा व्यक्ति होना था जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो।
चारों विकल्पों में केवल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश खंड के दोनों रूपों में उपयुक्त है। उत्तर विकल्प (2) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी — मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी अध्यक्ष पद के योग्य नहीं है। धारा 21(2)(क) के लिए ऐसा व्यक्ति चाहिए जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो (न्यायाधीश वाला अंश 2019 में जोड़ा गया)।
अधिनियम के अन्य दो स्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश के लिए, और मानव अधिकारों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति के लिए हैं; इनमें से कोई भी अध्यक्ष का नहीं है।
- (3)प्रमुख समाज सेवी व्यक्ति — समाज सेवी व्यक्ति अध्यक्ष पद के योग्य नहीं है। अध्यक्ष का खंड, धारा 21(2)(क), ऐसे व्यक्ति तक सीमित है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो।
अधिनियम धारा 21(2)(ग) के अंतर्गत एक सदस्य का स्थान मानव अधिकारों से संबंधित विषयों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों के लिए रखता है। वह सदस्य का स्थान है, अध्यक्ष का नहीं।
- (4)पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी — महानिदेशक स्तर का पुलिस अधिकारी योग्य नहीं है। धारा 21(2)(क) अध्यक्ष पद के लिए केवल ऐसे व्यक्ति का नाम देती है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो।
2019 के संशोधन से पहले या बाद, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के सिवा कोई विकल्प इस खंड में उपयुक्त नहीं बैठता।
अवधारणा
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और राज्य मानव अधिकार आयोग बनाता है। 2006 में प्रतिस्थापित धारा 21(2) राज्य आयोग को एक अध्यक्ष और दो सदस्य देती है।
अध्यक्ष किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश (2019 से, या न्यायाधीश) रहा होना चाहिए। एक सदस्य उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो या रहा हो, या राज्य में कम से कम सात वर्ष के अनुभव वाला जिला न्यायाधीश हो या रहा हो। दूसरे सदस्य को मानव अधिकारों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।
धारा 22(1) के अंतर्गत राज्यपाल अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अधिपत्र द्वारा करता है, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के बाद।
समिति के अन्य सदस्य विधानसभा अध्यक्ष, गृह विभाग के भारसाधक मंत्री और विपक्ष के नेता हैं; जहाँ राज्य में विधान परिषद् है, वहाँ उसके सभापति और विपक्ष के नेता भी इसमें होते हैं।
2006 में संशोधित धारा 23 के अंतर्गत अध्यक्ष या सदस्य केवल राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है: उच्चतम न्यायालय की जाँच के बाद साबित कदाचार या असमर्थता पर, या धारा 23(2) में गिनाए आधारों पर, जैसे दिवालिया होना या पद के बाहर सवेतन नियोजन।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत, संस्थाएं शीर्षक में, "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग।" सूचीबद्ध है।
राजस्थान आयोग की वेबसाइट के अनुसार राज्य सरकार की 18 जनवरी 1999 की अधिसूचना से उसका गठन हुआ, और वह मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ।
2019 के संशोधन ने पात्रता से अधिक भी बदला। उसने धारा 24(1) और (2) में पदावधि पाँच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष की, और धारा 24(1) में पुनर्नियुक्ति की पात्रता जोड़ी।
यह संशोधन 1 अगस्त 2019 की गृह मंत्रालय की अधिसूचना (का.आ. 2756(अ)) द्वारा 2 अगस्त 2019 से लागू हुआ।
मुख्य तथ्य
- धारा 21(2)(क), मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (2019 में यथासंशोधित): राज्य आयोग का अध्यक्ष किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा होना चाहिए।
- 2019 के संशोधन से पहले यह खंड ऐसा व्यक्ति माँगता था जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
- मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का सं. 19) 2 अगस्त 2019 से लागू हुआ।
- धारा 22(1): राज्यपाल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर अध्यक्ष की नियुक्ति करता है।
- राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग का गठन राज्य सरकार की 18 जनवरी 1999 की अधिसूचना से हुआ और वह मार्च 2000 में क्रियाशील हुआ।
उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश हर रूप में योग्य है; विकल्प (2)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 2019 से पहले के नियम को अब भी लागू मान लेना। 2 अगस्त 2019 से ऐसा व्यक्ति भी, जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो, केवल मुख्य न्यायाधीश ही नहीं, राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता है।
- मानव अधिकार विशेषज्ञ वाले स्थान को अध्यक्ष पद मान लेना। धारा 21(2)(ग) वह स्थान एक सदस्य के लिए रखती है।
- नियुक्त करने और हटाने वाले प्राधिकारी को मिला देना। राज्यपाल नियुक्त करता है; हटा केवल राष्ट्रपति सकता है, कदाचार या असमर्थता के लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच के बाद, या धारा 23(2) के अंतर्गत दिवालिया होने जैसे आधारों पर आदेश द्वारा।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि राज्य मानव अधिकार आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए कौन योग्य है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न आयोग के सदस्यों, नियुक्तियों की सिफारिश करने वाली समिति, या 2019 के संशोधन के बाद की पदावधि के बारे में भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने धारा 24 (राज्य मानव अधिकार आयोग) के अंतर्गत पदावधि को बदला —
- (a)तीन वर्ष से पाँच वर्ष
- (b)पाँच वर्ष से तीन वर्ष
- (c)छह वर्ष से पाँच वर्ष
- (d)पाँच वर्ष से छह वर्ष
उत्तर(2) — 2019 के अधिनियम की धारा 6 मूल अधिनियम की धारा 24(1) और (2) में पाँच वर्ष के स्थान पर तीन वर्ष रखती है। विकल्प (1) परिवर्तन को उलट देता है, और छह वर्ष (3), (4) किसी भी रूप में पदावधि नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के अंतर्गत राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति की सिफारिश करने वाली समिति की अध्यक्षता कौन करता है?
- (a)राज्यपाल
- (b)उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
- (c)मुख्यमंत्री
- (d)विधानसभा अध्यक्ष
उत्तर(3) — धारा 22(1) मुख्यमंत्री को समिति का अध्यक्ष बताती है, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष (4), गृह मंत्री और विपक्ष के नेता सदस्य हैं। राज्यपाल (1) उसकी सिफारिश पर नियुक्ति करता है। उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश की नियुक्ति से पहले मुख्य न्यायाधीश (2) से परामर्श किया जाता है।