बयाना दुर्ग स्थित वरिक विष्णुवर्धन विजय स्तम्भ किस काल का माना जाता है?
- (1)सल्तनत काल
- (2)मुगल काल
- (3)मौर्य काल
- (4)गुप्त काल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), गुप्त काल.
बयाना के निकट बिजयगढ़ (विजयगढ़) के पहाड़ी दुर्ग में वरिक जनजाति के विष्णुवर्धन का स्तंभ 371–72 ई. का है, जो गुप्त काल में आता है।
जे. एफ़. फ़्लीट के कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकेरम, खंड III (1888) के अनुसार अभिलेख चार सौ अट्ठाईस वर्ष बीत जाने पर की तिथि का है। फ़्लीट इस तिथि को मालव या विक्रम संवत् का मानते हैं, जिससे बीता हुआ वर्ष 371–72 ई. बनता है।
फ़्लीट जोड़ते हैं कि इससे पता चलता है कि वरिक विष्णुवर्धन पूरी संभावना से प्रारंभिक गुप्त राजा समुद्रगुप्त का सामंत था।
फ़्लीट का पाठ स्तंभ को यूप, यानी यज्ञ-स्तंभ, बताता है, जो पुण्डरीक यज्ञ पूरा होने पर खड़ा किया गया। प्रश्न का ‘विजय स्तम्भ’ इसका लोकप्रिय नाम है: विकिपीडिया का बयाना लेख 371 के इस लाल बलुआ पत्थर के स्तंभ को भीमलाट कहता है, जिसे विजय स्तंभ भी कहा जाता है।
बयाना में विष्णुवर्धन का स्तंभ: वर्ष 428, 371–72 ई., गुप्त काल।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)सल्तनत काल — दिल्ली सल्तनत 13वीं शताब्दी के आरंभ (1206) में शुरू हुई, इस स्तंभ की तिथि से आठ शताब्दियों से भी अधिक बाद।
फ़्लीट एक बहुत बाद के जोड़ का उल्लेख अवश्य करते हैं: लगभग 10वीं से 12वीं शताब्दी के अक्षरों में दो पंक्तियाँ, जिनमें ब्रह्मसागर नामक एक संन्यासी का नाम है और संभवतः 951-52 ई. की तिथि है। मूल अभिलेख 371–72 का है।
- (2)मुगल काल — मुगल काल 1526 में शुरू हुआ, 371–72 ई. से ग्यारह शताब्दियों से भी अधिक बाद।
फ़्लीट के पाठ के अनुसार स्तंभ का अपना अभिलेख मालव (विक्रम) संवत् का वर्ष 428 देता है, जो इसे मुगलों के नहीं, प्रारंभिक गुप्तों के अधीन रखता है।
- (3)मौर्य काल — लगभग 320 ई. पू. में स्थापित मौर्य साम्राज्य 185 ई. पू. तक चला, इस स्तंभ से कई शताब्दी पहले।
फ़्लीट विष्णुवर्धन को चौथी शताब्दी ई. के गुप्त राजा समुद्रगुप्त का सामंत मानते हैं, इसलिए यह तिथि मौर्य काल में नहीं बैठती।
अवधारणा
बिजयगढ़ अभिलेख बयाना क्षेत्र के एक स्थानीय शासक परिवार का तिथियुक्त अभिलेख है। इसमें वरिक जनजाति के विष्णुवर्धन का नाम है, जो यशोवर्धन के पुत्र, यशोरात के पौत्र और व्याघ्ररात के प्रपौत्र थे।
फ़्लीट स्तंभ को पुराने भरतपुर राज्य में बयाना के निकट बिजयगढ़ के दुर्ग की दक्षिणी दीवार के पास लाल बलुआ पत्थर का एकाश्म स्तंभ बताते हैं। इसकी तिथि शब्दों और अंक-चिह्नों दोनों में लिखी है: वर्ष 428, जिसे फ़्लीट अक्षरों के प्रकार और प्राप्ति-स्थान के आधार पर मालव या विक्रम संवत् का मानते हैं।
डी. सी. शुक्ल की अर्ली हिस्ट्री ऑफ़ राजस्थान सुझाती है कि वरिक मालव वंश की एक शाखा थे, और विष्णुवर्धन समुद्रगुप्त के समकालीन थे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "ऐतिहासिक राजस्थानः प्रारम्भिक ईस्वी काल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक केन्द्र। प्राचीन राजस्थान में समाज, धर्म एवं संस्कृति।" सूचीबद्ध है।
बयाना ऐसा ही एक केन्द्र है। रायचौधुरी एक शिलालेख भी दर्ज करते हैं जिससे पता चलता है कि कभी यौधेयों का बिजयगढ़ क्षेत्र पर अधिकार था, इसलिए उसी पहाड़ी दुर्ग में एक से अधिक प्राचीन शासक समूहों के साक्ष्य हैं।
मुख्य तथ्य
- विष्णुवर्धन का बिजयगढ़ शिलास्तंभ अभिलेख फ़्लीट के कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकेरम, खंड III (1888) में क्रमांक 59 है।
- यह बीते हुए वर्ष 428 का है, जिसे फ़्लीट मालव या विक्रम संवत् का मानते हैं: 371–72 ई.।
- फ़्लीट: वरिक जनजाति का विष्णुवर्धन पूरी संभावना से समुद्रगुप्त का सामंत था।
- अभिलेख पुण्डरीक यज्ञ पूरा होने पर स्तंभ को यूप के रूप में खड़ा किए जाने को दर्ज करता है।
- बिजयगढ़ का पहाड़ी दुर्ग पुराने भरतपुर राज्य में बयाना के निकट है (फ़्लीट)।
स्तंभ की तिथि गुप्त काल, विकल्प (4), में आती है। स्तंभ की तिथि फ़्लीट (1888) से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रश्न स्तंभ को विजय स्तम्भ कहता है; फ़्लीट इसे यूप, यानी यज्ञ-स्तंभ, कहते हैं। दोनों बयाना के निकट बिजयगढ़ के लाल बलुआ पत्थर के स्तंभ के नाम हैं।
- 428 ईसवी सन् की तिथि नहीं है। फ़्लीट इसे मालव या विक्रम संवत् का मानते हैं, जिससे 371–72 ई. बनता है; शक संवत् से 506–07 ई. बनता, जिसे डी. सी. शुक्ल अभिलेख की लिपि के विरुद्ध बताते हैं।
- स्तंभ पर लगभग 10वीं से 12वीं शताब्दी का बाद का दो पंक्तियों का जोड़ मूल अभिलेख की तिथि तय नहीं करता।
कोई प्रश्न राजस्थान के किसी अभिलेख या स्मारक का नाम देकर उसका काल पूछ सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी स्थल पर किस राजवंश का शासन था, या किसी अभिलेख की तिथि किस संवत् में है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जे. एफ़. फ़्लीट के अनुसार विष्णुवर्धन के बिजयगढ़ (बयाना) स्तंभ अभिलेख की तिथि किस संवत् की मानी जानी चाहिए?
- (a)मालव या विक्रम संवत्
- (b)शक संवत्
- (c)गुप्त संवत्
- (d)हर्ष संवत्
उत्तर(1) — फ़्लीट वर्ष 428 को मालव या विक्रम संवत् का मानते हैं, जिससे 371–72 ई. बनता है। विकल्प (2), शक संवत्, से 506–07 ई. बनता; फ़्लीट इस पाठ का उल्लेख करते हैं, पर अक्षरों का प्रकार उन्हें मालव संवत् की ओर ले जाता है। विकल्प (3) और विकल्प (4) वह संवत् नहीं हैं जो वे देते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बयाना के निकट बिजयगढ़ स्तंभ अभिलेख के विष्णुवर्धन किस जनजाति के थे?
- (a)वरिक
- (b)यौधेय
- (c)मालव
- (d)आर्जुनायन
उत्तर(1) — फ़्लीट अभिलेख को वरिक जनजाति के विष्णुवर्धन नामक राजा का पढ़ते हैं। विकल्प (2), यौधेय, बिजयगढ़ क्षेत्र के एक दूसरे अभिलेख से ज्ञात हैं; विकल्प (3), मालव, को डी. सी. शुक्ल केवल उस वंश के रूप में सुझाते हैं जिससे वरिक निकले; विकल्प (4) का अभिलेख में नाम नहीं है।