सूची–I एवं सूची–II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए – सूची–I (A) व्रीही (B) मुद्ग (C) यव (D) इक्षु सूची–II (i) गन्ना (ii) चावल (iii) मूंग (iv) जौ कूट –
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
- (2)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
- (3)A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii)
- (4)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i).
चारों शब्द वैदिक ग्रंथों में मिलने वाले फ़सलों के संस्कृत नाम हैं। सही कूट A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i) है।
(A) व्रीही → (ii) चावल। मोनियर-विलियम्स का संस्कृत-इंग्लिश कोश व्रीहि का अर्थ चावल देता है, और बताता है कि इसका उल्लेख ऋग्वेद में नहीं है, पर अथर्ववेद में यव और तिल के साथ इसका नाम आता है।
(B) मुद्ग → (iii) मूंग। मोनियर-विलियम्स मुद्ग का अर्थ Phaseolus Mungo (पौधा और उसके दाने दोनों) देते हैं, और इसका पहला उद्धरण वाजसनेयी संहिता से देते हैं।
(C) यव → (iv) जौ। मोनियर-विलियम्स यव का अर्थ जौ देते हैं, और (iv) पर जौ ही छपा है।
(D) इक्षु → (i) गन्ना। मोनियर-विलियम्स अथर्ववेद का उद्धरण देकर इक्षु का अर्थ गन्ना बताते हैं।
व्रीही चावल, मुद्ग मूंग, यव जौ, इक्षु गन्ना।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv) — यह कूट दोनों सूचियों को छपे क्रम में जोड़ता है, और इसका एक भी जोड़ा सही नहीं है। यह व्रीही को गन्ना, मुद्ग को चावल, यव को मूंग और इक्षु को जौ बनाता है।
व्रीही चावल है और इक्षु गन्ना; मुद्ग मूंग है और यव जौ।
- (2)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) — यहाँ दो जोड़े सही हैं, B-(iii) मुद्ग – मूंग और D-(i) इक्षु – गन्ना। फिर यह कूट बाकी दो को आपस में बदल देता है, और व्रीही को जौ तथा यव को चावल बनाता है।
व्रीही चावल है, और यव जौ, इसलिए A-(iv) और C-(ii) दोनों गलत हैं।
- (3)A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii) — इस कूट का एक भी जोड़ा सही नहीं है। यह व्रीही को मूंग, मुद्ग को जौ, यव को गन्ना और इक्षु को चावल बनाता है।
इक्षु गन्ना है, चावल नहीं; व्रीही चावल है, और यव जौ।
अवधारणा
वैदिक ग्रंथ अपने समय की फ़सलों के नाम देते हैं। एस. के. दास की द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ़ एंशिएंट इंडिया (दूसरा संस्करण) शुक्ल यजुर्वेद की एक प्रार्थना उद्धृत करती है, जो व्रीहि, यव, माष, तिल, मुद्ग, गोधूम, मसूर और अन्य फ़सलों के नाम लेकर माँगती है कि वे यज्ञ से समृद्ध हों।
ग्रंथों के बीच फ़सलें बदलीं। मोनियर-विलियम्स बताते हैं कि व्रीहि ऋग्वेद में नहीं, अथर्ववेद में आता है, और प्राचीनतम समय में यव का अर्थ संभवतः कोई भी अनाज था।
दास दर्ज करते हैं कि मैकडॉनल और कीथ ने यव का अर्थ संभवतः कोई भी अनाज लिया, जबकि भारतीय टीकाकारों ने इसे जौ माना है। वे फ़सल-चक्र का भी उल्लेख करते हैं: जौ के एक मौसम के बाद चावल, दालें और तिल।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारत के इतिहास के प्राचीनकाल एवं मध्यकाल के अंतर्गत "भारत के सांस्कृतिक आधार –सिन्धु एवं वैदिक काल" सूचीबद्ध है।
दास उत्तर वैदिक काल की दोहरी फ़सल को आंशिक रूप से अनाजों और पौधों की अधिक किस्मों की खेती के ज्ञान से जोड़ते हैं। चावल और गन्ना अथर्ववेद में आते हैं, और यजुर्वेद कहीं अधिक अनाज और दालें गिनाता है।
मुख्य तथ्य
- व्रीहि का अर्थ चावल है; यह ऋग्वेद में नहीं, पर अथर्ववेद में आता है (मोनियर-विलियम्स)।
- मुद्ग एक दलहन है, जिसे मोनियर-विलियम्स Phaseolus Mungo बताते हैं और वाजसनेयी संहिता से उद्धृत करते हैं।
- यव जौ है; प्राचीनतम ग्रंथों में इसका अर्थ संभवतः कोई भी अनाज था (मोनियर-विलियम्स)।
- इक्षु गन्ना है, जिसे अथर्ववेद I.34.5 से उद्धृत किया गया है (मोनियर-विलियम्स)।
- दास के अनुसार मैकडॉनल और कीथ ने यव को संभवतः कोई भी अनाज माना, जबकि भारतीय टीकाकारों ने इसे जौ माना है।
सही कूट, विकल्प (4)। अर्थ मोनियर-विलियम्स के संस्कृत-इंग्लिश कोश से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यव का अर्थ स्रोतों में एक-सा नहीं रहा: मोनियर-विलियम्स के अनुसार प्राचीनतम समय में इसका अर्थ संभवतः कोई भी अनाज था, दास के अनुसार मैकडॉनल और कीथ भी इसे संभवतः कोई भी अनाज मानते थे, जबकि भारतीय टीकाकार इसे जौ मानते हैं; सूची में यव का जोड़ा (iv) जौ है।
- व्रीहि (चावल) शब्द ऋग्वेद में नहीं है, पर अथर्ववेद में आता है, इसलिए केवल ऋग्वेद की फ़सलों की सूची में यह नहीं मिलेगा।
- वैदिक सूचियों में मुद्ग और माष दोनों दलहन हैं; मुद्ग मूंग है।
कोई प्रश्न वैदिक फ़सल-नामों को उनसे सूचित फ़सलों से सुमेलित करवा सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कौन-सी फ़सल पहली बार किसी उत्तर वैदिक ग्रंथ में आती है, या किसी एक संस्कृत अनाज-नाम का अर्थ पूछ सकता है।
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UnlockIAS ने इस प्रश्न की तुलना अन्य RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न-पत्रों के प्रश्नों से की; कोई भी जोड़ने लायक मिलता-जुलता प्रश्न नहीं मिला।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एस. के. दास द्वारा उद्धृत शुक्ल यजुर्वेद की फ़सलों की सूची में ‘गोधूम’ किसका सूचक है?
- (a)गेहूँ
- (b)तिल
- (c)मसूर
- (d)जौ
उत्तर(1) — दास द्वारा दिए गए शुक्ल यजुर्वेद की प्रार्थना के अनुवाद में गोधूम का अर्थ गेहूँ है। विकल्प (2), तिल, सूची के ‘तिल’ का अर्थ है; विकल्प (3), मसूर, ‘मसूर’ का; विकल्प (4), जौ, ‘यव’ का। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा अनाज-नाम ऋग्वेद में नहीं मिलता, पर अथर्ववेद में आता है?
- (a)व्रीहि
- (b)यव
- (c)धाना
- (d)इनमें से कोई नहीं
उत्तर(1) — मोनियर-विलियम्स बताते हैं कि व्रीहि (चावल) का उल्लेख ऋग्वेद में नहीं है, पर अथर्ववेद में इसका नाम आता है। विकल्प (2), यव, ऋग्वेद से उद्धृत है; विकल्प (3), धाना, की चर्चा दास अनाज के एक ऋग्वैदिक शब्द के रूप में करते हैं; विकल्प (4) गलत है क्योंकि व्रीहि ठीक बैठता है।