निम्नलिखित में कौन सा एक युग्म सही सुमेलित नहीं है? पुस्तकें – लेखक (A) नेह तरंग – सवाई प्रतापसिंह (B) नागदमण – सांयाजी झूला (C) रणमल छन्द – श्रीधर व्यास (D) भाषा भूषण – महाराजा जसवंत सिंह
- (1)A
- (2)C
- (3)B
- (4)D
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), A.
प्रश्न वह युग्म पूछता है जो सही सुमेलित नहीं है। युग्म A, नेह तरंग – सवाई प्रतापसिंह, गलत है: नेह तरंग बूंदी के रावराजा बुधसिंह की रचना है, जयपुर के सवाई प्रतापसिंह की नहीं।
गंगा राम गर्ग का एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ वर्ल्ड हिन्दी लिटरेचर (1985) बूंदी के शासक बुधसिंह (1685–1739) के बारे में कहता है कि 446 छंदों में रची उनकी नेह तरंग (1727) अपने ढंग की एक रीति रचना है।
राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर ने यह पाठ अपनी राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला के क्रमांक 63 के रूप में "रावराजा बुधसिंह हाडा कृत नेहतरंग" शीर्षक से प्रकाशित किया।
जयपुर के सवाई प्रतापसिंह ब्रजनिधि नाम से लिखते थे। मोतीलाल मेनारिया की राजस्थानी साहित्य की रूपरेखा (1939) उनकी रचनाओं की सूची देती है, जो ब्रजनिधि ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित हुईं। उस सूची में स्नेह संग्राम और स्नेह बहार जैसे शीर्षक हैं, पर नेह तरंग नहीं।
बाकी तीन युग्म सही हैं।
नेह तरंग बुधसिंह (बूंदी) की है, प्रतापसिंह (जयपुर) की नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)C — विकल्प (2) युग्म C, रणमल छन्द – श्रीधर व्यास, का नाम देता है, जो सही है। हीरालाल माहेश्वरी की हिस्ट्री ऑफ़ राजस्थानी लिटरेचर श्रीधर व्यास की कविताओं में रणमल छन्द (70 पद्य) गिनाती है।
वे इसे ईडर के राव रणमल्ल राठौड़ द्वारा गुजरात के सूबेदार ज़फ़र ख़ाँ के विरुद्ध लड़े गए युद्ध पर एक ऐतिहासिक काव्य बताते हैं; ज़फ़र ख़ाँ ने 1398 में ईडर पर आक्रमण किया था, और यह काव्य 1400 में रचा गया।
- (3)B — विकल्प (3) युग्म B, नागदमण – सांयाजी झूला, का नाम देता है, जो सही है। माहेश्वरी लिखते हैं कि ईडर के राव कल्याणमल राठौड़ के निकट रहे लीलछा गाँव के सांयाजी झूला (लगभग 1523–1623) ने नागदमण की रचना की।
यह काव्य यमुना में कृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन का वर्णन करता है। सांयाजी झूला ने रुक्मणी हरण भी लिखा।
- (4)D — विकल्प (4) युग्म D, भाषा भूषण – महाराजा जसवंत सिंह, का नाम देता है, जो सही है। गर्ग (1985) भाषा भूषण को 17वीं शताब्दी के रीति कवि जसवंत सिंह द्वारा अलंकारों पर लिखी रचना बताते हैं।
मेनारिया जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की रचनाओं में भाषा भूषण को पहले स्थान पर रखते हैं और बताते हैं कि यह जयदेव के चंद्रालोक के ढंग पर लिखी गई है।
अवधारणा
राजस्थान की रियासतों के कई शासक स्वयं कवि थे। जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह ने अलंकारों पर भाषा भूषण लिखी, बूंदी के रावराजा बुधसिंह ने नेह तरंग लिखी, और जयपुर के सवाई प्रतापसिंह ने ब्रजनिधि नाम से अनेक रचनाएँ लिखीं।
अन्य दरबारी कवि थे। श्रीधर व्यास और सांयाजी झूला दोनों ने ईडर के राठौड़ शासकों के बारे में लिखा: रणमल छन्द 1398 के एक युद्ध का वर्णन करता है, और सांयाजी झूला राव कल्याणमल के निकट थे।
गर्ग नेह तरंग को रीति रचना और जसवंत सिंह को रीति कवि कहते हैं। उनकी रीति प्रविष्टियों में काव्यशास्त्र की रचनाएँ आती हैं, जैसे अलंकारों पर भाषा भूषण और नायक-नायिका भेद पर एक दक्षण-विलास।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "भाषा एवं साहित्य : राजस्थानी भाषा की बोलियाँ। राजस्थानी भाषा का साहित्य एवं लोक साहित्य।" सूचीबद्ध है।
यहाँ की रचनाएँ कई शताब्दियों में फैली हैं: रणमल छन्द 1400 में रचा गया, सांयाजी झूला लगभग 1523–1623 में हुए, जसवंत सिंह 17वीं शताब्दी के कवि थे, और नेह तरंग 1727 की है। जिस दरबार की कवि ने सेवा की, वह रचना का काल तय करने में मदद करता है।
मुख्य तथ्य
- नेह तरंग (1727) बूंदी के रावराजा बुधसिंह की रचना है (गर्ग, 1985; राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला क्रमांक 63)।
- जयपुर के सवाई प्रतापसिंह ब्रजनिधि उपनाम से लिखते थे; उनकी रचनाएँ ब्रजनिधि ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित हुईं (मेनारिया)।
- श्रीधर व्यास का रणमल छन्द ईडर के राव रणमल्ल राठौड़ के गुजरात के ज़फ़र ख़ाँ के विरुद्ध युद्ध का वर्णन करता है (माहेश्वरी)।
- कृष्ण द्वारा कालिया के दमन पर नागदमण लीलछा के सांयाजी झूला की रचना है, जो ईडर के राव कल्याणमल के निकट थे (माहेश्वरी)।
- अलंकारों पर रचना भाषा भूषण जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की है (गर्ग; मेनारिया)।
युग्म A गलत सुमेलित है, जो विकल्प (1) के रूप में छपा है। स्रोत: गर्ग (1985); राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला क्रमांक 63; माहेश्वरी; मेनारिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकल्प क्रम से नहीं छपे हैं: विकल्प (2) युग्म C है और विकल्प (3) युग्म B, इसलिए हर विकल्प के भीतर का अक्षर पढ़ें।
- प्रतापसिंह के स्नेह संग्राम जैसे शीर्षक नेह तरंग जैसे लगते हैं; मिलता-जुलता शब्द उसे उनकी रचना नहीं बनाता।
- दूसरी भाषाओं में भी मिलते-जुलते शीर्षक हैं: एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर कन्नड़ लेखक नागवर्मा की एक भाषाभूषण और 1902 की एक मलयालम भाषाभूषणम् का उल्लेख करता है। राजस्थान के दरबार की भाषा भूषण जसवंत सिंह की है।
कोई प्रश्न पुस्तकों और लेखकों की सूची देकर पूछ सकता है कि कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न किसी एक रचना का लेखक भी पूछ सकता है, रचनाओं को लेखकों से सुमेलित करवा सकता है, या पूछ सकता है कि किस शासक ने किस उपनाम से लिखा।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन पर राजस्थानी काव्य ‘नागदमण’ किसने लिखा?
- (a)सांयाजी झूला
- (b)श्रीधर व्यास
- (c)महाराजा जसवंत सिंह
- (d)रावराजा बुधसिंह
उत्तर(1) — माहेश्वरी लीलछा के सांयाजी झूला को नागदमण का लेखक बताते हैं। विकल्प (2), श्रीधर व्यास, ने रणमल छन्द लिखा; विकल्प (3), जसवंत सिंह, ने भाषा भूषण; विकल्प (4), बुधसिंह, ने नेह तरंग। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जयपुर के सवाई प्रतापसिंह किस उपनाम से काव्य रचना करते थे?
- (a)नागरीदास
- (b)ब्रजनिधि
- (c)स्नेह संग्राम
- (d)नेह तरंग
उत्तर(2) — मेनारिया लिखते हैं कि सवाई प्रतापसिंह अपने काव्य में ब्रजनिधि नाम का प्रयोग करते थे, और उनकी रचनाएँ ब्रजनिधि ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित हुईं। विकल्प (3), स्नेह संग्राम, उनकी एक रचना है, उपनाम नहीं; विकल्प (4), नेह तरंग, बुधसिंह की रचना है; विकल्प (1), नागरीदास, वह नाम नहीं है जो ये स्रोत उनके लिए देते हैं।