राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश लागू हुआ –
- (1)11 जनवरी, 2021 को
- (2)18 दिसंबर, 2019 को
- (3)11 जनवरी, 2020 को
- (4)18 दिसंबर, 2020 को
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), 18 दिसंबर, 2019 को.
18 दिसम्बर 2019 के राजस्थान राजपत्र में राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019 (2019 का अध्यादेश संख्या 4) का प्राधिकृत अंग्रेज़ी अनुवाद छपा है। उसके अनुसार राज्यपाल ने यह अध्यादेश 18 दिसम्बर 2019 को बनाया और प्रख्यापित किया।
अध्यादेश की धारा 1(3) के अनुसार यह तुरंत प्रवृत्त होगा। इसलिए यह उसी दिन लागू हुआ जिस दिन प्रख्यापित हुआ।
बाद में इस अध्यादेश का स्थान राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 (2020 का अधिनियम संख्या 3) ने लिया। इस अधिनियम को 27 फरवरी 2020 को राज्यपाल की अनुमति मिली, और इसकी धारा 1(3) के अनुसार इसे 18 दिसम्बर 2019 से प्रवृत्त हुआ माना जाता है।
याद रखने की बात: अध्यादेश 18 दिसम्बर 2019 को प्रख्यापित हुआ और उसी दिन लागू हुआ; उसका स्थान लेने वाला अधिनियम भी उसी तिथि से प्रवृत्त माना जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)11 जनवरी, 2021 को — 11 जनवरी 2021 अध्यादेश के लागू होने से एक वर्ष से भी अधिक बाद की तिथि है। तब तक अध्यादेश निरसित होकर राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 से प्रतिस्थापित हो चुका था, जिसे 27 फरवरी 2020 को अनुमति मिली।
अध्यादेश 18 दिसम्बर 2019 को तुरंत प्रवृत्त हुआ था।
- (3)11 जनवरी, 2020 को — 11 जनवरी 2020 राजपत्र में दी गई तिथि नहीं है। अध्यादेश 18 दिसम्बर 2019 को प्रख्यापित हुआ और उसी दिन तुरंत प्रवृत्त हुआ।
इसके बाद का तिथि-युक्त चरण वह अधिनियम था जिसने इसका स्थान लिया, और जिसे 27 फरवरी 2020 को राज्यपाल की अनुमति मिली।
- (4)18 दिसंबर, 2020 को — इस विकल्प में दिन और महीना सही हैं, पर वर्ष गलत है। अध्यादेश के अपने नाम, राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019, में वर्ष 2019 है, और यह 18 दिसम्बर 2019 को प्रख्यापित हुआ।
दिसम्बर 2020 तक यह अध्यादेश 2020 के अधिनियम की धारा 45 द्वारा निरसित हो चुका था।
अवधारणा
संविधान के अनुच्छेद 213(1) के अंतर्गत, जब विधान सभा सत्र में न हो और राज्यपाल का समाधान हो जाए कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई आवश्यक है, तब राज्यपाल अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है।
अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो राज्य विधान-मंडल के अधिनियम का। अनुच्छेद 213(2)(क) के अंतर्गत इसे विधान सभा के समक्ष रखा जाना चाहिए, और विधान-मंडल के पुनः समवेत होने से छह सप्ताह बीतने पर यह प्रवर्तन में नहीं रहता, जब तक उससे पहले इसे अननुमोदित न कर दिया जाए।
यहाँ आगे का कदम एक अधिनियम था, जिसने अध्यादेश को निरसित किया, उसके अधीन किए गए कार्यों को बचाया, और अध्यादेश की तिथि से प्रवृत्त माना गया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "समसामयिक घटनाएं" के अंतर्गत "राजस्थान, भारतीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की प्रमुख समसामयिक घटनाएं एवं मुद्दे" सूचीबद्ध हैं।
अध्यादेश की प्रस्तावना दर्ज करती है कि विधान सभा सत्र में नहीं थी, और अनुच्छेद 213 के खंड (1) का सहारा लेती है। इसके घोषित उद्देश्यों में जन आधार पहचान संख्या को पहचानकर्ता के रूप में उपयोग करके लोक कल्याणकारी लाभ और सेवाएँ पहुँचाना शामिल है।
2020 का अधिनियम मुख्य सचिव को राजस्थान जन आधार प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाता है, और प्राधिकरण का मुख्यालय जयपुर में है।
मुख्य तथ्य
- 18 दिसम्बर 2019: राज्यपाल ने राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश, 2019 (2019 का अध्यादेश संख्या 4) प्रख्यापित किया; यह तुरंत प्रवृत्त हुआ।
- 27 फरवरी 2020: राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 (2020 का अधिनियम संख्या 3) को राज्यपाल की अनुमति मिली।
- अधिनियम 18 दिसम्बर 2019 से प्रवृत्त माना जाता है, और इसकी धारा 45 अध्यादेश को निरसित करती है।
- अधिनियम के अंतर्गत 'परिवार का मुखिया' अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला सदस्य है, और ऐसी सदस्य न होने वाले परिवारों के लिए परंतुक हैं।
- मुख्य सचिव राजस्थान जन आधार प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं; इसका मुख्यालय जयपुर में है।
स्रोत: अध्यादेश (18 दिसम्बर 2019 का अंक) और अधिनियम (18 मार्च 2020 का अंक) के राजस्थान राजपत्र पाठ; आयोजना विभाग की 5 मई 2020 की अधिसूचना।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अध्यादेश और अधिनियम: अध्यादेश 18 दिसम्बर 2019 को प्रवृत्त हुआ; अधिनियम को 27 फरवरी 2020 को अनुमति मिली, पर वह 18 दिसम्बर 2019 से प्रवृत्त माना जाता है।
- दिन और महीना वही, वर्ष अलग: 18 दिसम्बर 2020 एक वर्ष बाद की तिथि है।
- नाम में लिखा वर्ष जाँच का साधन है, प्रमाण नहीं: दस्तावेज़ अध्यादेश, 2019 है, और तिथि उसकी धारा 1(3) तय करती है, जो इसे 18 दिसम्बर 2019 को तुरंत प्रवृत्त करती है।
कोई प्रश्न राजस्थान के किसी अध्यादेश या अधिनियम का नाम देकर उसके लागू होने की तिथि पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किस अधिनियम ने अध्यादेश का स्थान लिया, उस अधिनियम को कब अनुमति मिली, या उसके द्वारा बने प्राधिकरण का अध्यक्ष कौन है।
संबंधित PYQ
किस संशोधन अधिनियम द्वारा ‘ग्राम सेवक’ को ‘ग्राम विकास अधिकारी’ से प्रतिस्थापित किया गया है ?
- (1) राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2015
- (2) राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2017
- (3) राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2019
- (4) राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2021
उत्तर(4)
दोनों राजस्थान के किसी कानून की तिथि या वर्ष पूछते हैं। वह प्रश्न पूछता है कि किस संशोधन अधिनियम द्वारा ‘ग्राम सेवक’ को ‘ग्राम विकास अधिकारी’ से प्रतिस्थापित किया गया (RPSC की कुंजी: राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2021); यह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अध्यादेश कब लागू हुआ।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 को राज्यपाल की अनुमति कब मिली?
- (a)27 फरवरी 2020
- (b)18 दिसम्बर 2019
- (c)5 मई 2020
- (d)28 फरवरी 2021
उत्तर(1) — अधिनियम का राजपत्र पाठ बताता है कि इसे 27 फरवरी 2020 को राज्यपाल की अनुमति मिली। विकल्प (2) अध्यादेश की तिथि है, विकल्प (3) प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना की तिथि है, और विकल्प (4) अधिनियम के इतिहास की कोई तिथि नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 के अंतर्गत राजस्थान जन आधार प्राधिकरण का अध्यक्ष कौन है?
- (a)मुख्यमंत्री
- (b)राज्य के मुख्य सचिव
- (c)राज्यपाल
- (d)आयोजना मंत्री
उत्तर(2) — अधिनियम की धारा 19(6) के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव प्राधिकरण के अध्यक्ष होंगे। अधिनियम यह पद विकल्प (1), (3) या (4) को नहीं देता।