जोधपुर नरेश मानसिंह की रानी भटियाणी प्रतापकुँवरी ने अपने द्वारा बनाय गये मंदिर को पुनः अन्यत्र बनवाया, क्योंकि पहले वाला मंदिर जमीन में धंस गया था, और उसने उसकी प्राण प्रतिष्ठा 1857 में कराई। उस मंदिर का नाम है –
- (1)कुंज बिहारी मंदिर
- (2)महामंदिर
- (3)घनश्यामजी का मंदिर
- (4)तीजा मांजी का मंदिर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), तीजा मांजी का मंदिर.
जोधपुर के महाराजा मानसिंह की रानी भटियाणी प्रतापकुँवरी का मंदिर जोधपुर शहर का तीजा माजी (तीजा मांजी) का मंदिर है।
लेफ़्टिनेंट-कर्नल आर्चीबाल्ड एडम्स की द वेस्टर्न राजपूताना स्टेट्स (1899) लिखती है कि तीजा माजी का मंदिर महाराजा मानसिंह की विधवा माजी तीजा भटियाणीजी ने बनवाया। भटियाणीजी यानी भाटी कुल की रानी।
भारतीय संस्कृति कोश प्रतापकुँवरी को भक्ति में लीन कवयित्री और मानसिंह की तीसरी रानी बताता है। उसके अनुसार 1843 में मानसिंह के निधन के बाद उन्होंने अनेक मंदिर बनवाए।
मधु प्रसाद अग्रवाल की मारवाड़ की चित्रकला (1993) सीधे उनका नाम लेती है: मानसिंह की तीसरी रानी भटियाणी रानी प्रतापकुँवरी ने तीजा माजी का मंदिर बनवाया, जिसकी छत पर राम राज्याभिषेक जैसे भित्तिचित्र हैं।
प्रश्न के अन्य ब्योरे, जैसे पहले वाले मंदिर का ज़मीन में धँसना और 1857 में प्राण प्रतिष्ठा, इन विवरणों में नहीं दिए गए हैं; वे यह नहीं बदलते कि रानी ने कौन-सा मंदिर बनवाया।
मानसिंह की विधवा भटियाणी प्रतापकुँवरी — तीजा माजी का मंदिर।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)कुंज बिहारी मंदिर — जोधपुर का कुंज बिहारी मंदिर पहले, महाराजा विजयसिंह के समय में बना। एडम्स (1899) कुंजबिहारीजी के मंदिर को जोधपुर का सबसे अच्छी नक्काशी वाला और सबसे सुंदर मंदिर कहते हैं।
उनके अनुसार इसे महाराजा विजयसिंह के समय के गुलाबरायजी ने बनवाया, जिन्होंने गुलाब सागर तालाब भी बनवाया।
- (2)महामंदिर — महामंदिर मानसिंह से जुड़ा है, पर नाथ सम्प्रदाय से, किसी रानी के मंदिर से नहीं।
एडम्स (1899) निज मंदिर, उदय मंदिर और महामंदिर को मानसिंह के शासनकाल में बने नाथों के मंदिरों में गिनाते हैं। वे देवनाथ को महामंदिर का संस्थापक बताते हैं, जो जोधपुर के नागौरी गेट के बाहर एक परकोटे वाला उपनगर है।
- (3)घनश्यामजी का मंदिर — घनश्यामजी का मंदिर राव गांगा और महाराजा विजयसिंह से जुड़ा है, मानसिंह की रानी से नहीं।
एडम्स (1899) के अनुसार राव गांगा सिरोही से श्यामजी की एक मूर्ति लाए और उसे अपने बनवाए एक पुराने मंदिर में स्थापित किया, जो बाद में घनश्यामजी का मंदिर कहलाया। महाराजा विजयसिंह ने मूर्ति को अपने मंदिर में स्थानांतरित किया, जो गंगश्यामजी का मंदिर कहलाया।
अवधारणा
जोधपुर के मंदिर शहर के शासकों और उनके परिवारों का अभिलेख हैं। महाराजा विजयसिंह के काल से कुंज बिहारी मंदिर और वल्लभाचार्य सम्प्रदाय के मंदिर मिले। महाराजा मानसिंह के शासनकाल से महामंदिर और नाथ सम्प्रदाय के अन्य मंदिर मिले; एडम्स महामंदिर के नाथजी को मानसिंह के आध्यात्मिक गुरु का वंशज बताते हैं।
राजपरिवार की रानियों ने भी मंदिर बनवाए। एडम्स मानसिंह की भटियाणी विधवा द्वारा बनवाए तीजा माजी के मंदिर और बघेली रानियों द्वारा बनवाए दो मंदिरों के नाम देते हैं।
जोधपुर ज़िला गज़ेटियर (1979) भी शहर के मंदिरों में कुंज बिहारी, घनश्याम और महामंदिर के साथ तीजा माजी का मंदिर गिनाता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "राजस्थान की वास्तु परम्परा– मंदिर, किले, महल एवं मानव निर्मित जलीय संरचनाएँ; चित्रकला की विभिन्न शैलियाँ और हस्तशिल्प।" सूचीबद्ध है।
बाद के शासकों ने इन मंदिरों को और सँवारा। आर. ए. अग्रवाल की हिस्ट्री, आर्ट एंड आर्किटेक्चर ऑफ़ जैसलमेर (1979) बताती है कि महाराजा तख़्तसिंह के समय जोधपुर दुर्ग के कक्षों और तीजा माजी के मंदिर को चित्रों से सजाया गया।
मुख्य तथ्य
- एडम्स (1899): तीजा माजी का मंदिर महाराजा मानसिंह की विधवा माजी तीजा भटियाणीजी ने बनवाया।
- जोधपुर के महाराजा मानसिंह का निधन 1843 में हुआ (एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर; भारतीय संस्कृति कोश)।
- एडम्स (1899): कुंज बिहारी मंदिर महाराजा विजयसिंह के समय के गुलाबरायजी ने बनवाया।
- एडम्स (1899): मानसिंह के शासनकाल में बने नाथों के मंदिर महामंदिर के संस्थापक देवनाथ थे।
- जोधपुर ज़िला गज़ेटियर (1979) जोधपुर शहर के मंदिरों में तीजा माजी का मंदिर गिनाता है।
निर्माता एडम्स, द वेस्टर्न राजपूताना स्टेट्स (1899) के अनुसार। विकल्प (4) उत्तर है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- महामंदिर और तीजा माजी का मंदिर दोनों मानसिंह के समय के हैं, पर महामंदिर नाथ सम्प्रदाय का है और तीजा माजी का मंदिर उनकी रानी का।
- मंदिर का नाम रानी की उपाधि से है, उनके व्यक्तिगत नाम से नहीं: एडम्स उन्हें माजी तीजा भटियाणीजी कहते हैं, जबकि प्रश्न उन्हें प्रतापकुँवरी कहता है।
- एडम्स के विवरण में घनश्यामजी की कथा दो इमारतों में बँटी है: राव गांगा का पुराना मंदिर, जिसे वे घनश्यामजी का मंदिर कहते हैं, और विजयसिंह का मंदिर जिसमें मूर्ति पहुँची, गंगश्यामजी का मंदिर।
कोई प्रश्न किसी मंदिर के निर्माता और इतिहास का वर्णन कर उसका नाम पूछ सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न मंदिरों को उन्हें बनवाने वाले शासकों या रानियों से, या मंदिरों को उनके नगरों या ज़िलों से सुमेलित भी करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जोधपुर का महामंदिर किस सम्प्रदाय से संबंधित है?
- (a)नाथ सम्प्रदाय
- (b)वल्लभ सम्प्रदाय
- (c)दादू पंथ
- (d)रामस्नेही सम्प्रदाय
उत्तर(1) — एडम्स (1899) महामंदिर को महाराजा मानसिंह के शासनकाल में बने नाथों के मंदिरों में गिनाते हैं और देवनाथ को इसका संस्थापक बताते हैं। विकल्प (2), वल्लभ सम्प्रदाय, उनके विवरण में महाराजा विजयसिंह के काल के मंदिरों से जुड़ा है; विकल्प (3) और विकल्प (4) राजस्थान के अन्य सम्प्रदाय हैं जिन्हें वे महामंदिर से नहीं जोड़ते। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
19वीं शताब्दी के विवरणों के अनुसार जोधपुर का कुंज बिहारी मंदिर किस शासक के समय में बना?
- (a)राव गांगा
- (b)महाराजा विजयसिंह
- (c)महाराजा मानसिंह
- (d)महाराजा तख़्तसिंह
उत्तर(2) — एडम्स (1899) के अनुसार कुंज बिहारी मंदिर महाराजा विजयसिंह के समय के गुलाबरायजी ने बनवाया। विकल्प (1), राव गांगा, ने वह पुराना मंदिर बनवाया जो बाद में घनश्यामजी का मंदिर कहलाया; विकल्प (3), मानसिंह, महामंदिर से जुड़े हैं; विकल्प (4), तख़्तसिंह, तीजा माजी के मंदिर के चित्रों से जुड़े हैं।