निम्न में से कौन सा आवृत्ति बैंड INSAT/GSAT उपग्रह संचार हेतु उपयोग में नहीं लिया जाता है?
- (1)Ka
- (2)C
- (3)MF
- (4)Ku
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), MF.
ISRO के मिशन पृष्ठ INSAT/GSAT उपग्रहों के संचार पेलोड का वर्णन करते हैं। ये उपग्रह भूस्थिर कक्षा से C, विस्तारित C, Ku, Ka और S जैसे बैंडों में काम करते हैं, जिनकी आवृत्तियाँ गीगाहर्ट्ज में मापी जाती हैं।
GSAT-30 (17 जनवरी 2020 को प्रक्षेपित): C और Ku बैंड
GSAT-19 (2017) और GSAT-29 (2018): Ka/Ku-बैंड हाई थ्रूपुट ट्रांसपोंडर
GSAT-17 (2017): सामान्य C, विस्तारित C और S बैंड
MF, यानी मध्यम आवृत्ति, ITU के अनुसार 300 kHz से 3 MHz तक का बैंड है, जिसकी तरंगदैर्ध्य 1,000 m से 100 m तक होती है। इस पर मध्यम तरंग AM रेडियो प्रसारण होता है।
MF तरंगें पृथ्वी की सतह के साथ भू-तरंगों के रूप में चलती हैं, और आयनमंडल से अपवर्तित होकर पृथ्वी पर लौटने वाली आकाश तरंगों के रूप में भी। माइक्रोवेव आवृत्तियों पर रेडियो तरंगें दृष्टि-रेखा में चलती हैं, जो भू-स्थित डिश और उपग्रह के बीच का मार्ग है।
बाकी तीनों विकल्प माइक्रोवेव के अक्षर-नाम वाले बैंड हैं। IEEE Std 521 में C 4–8 GHz, Ku 12–18 GHz और Ka 27–40 GHz है, यानी किसी भी MF संकेत की आवृत्ति के एक हज़ार गुने से भी अधिक।
याद रखने की बात: INSAT/GSAT के पेलोड C, Ku और Ka जैसे माइक्रोवेव अक्षर-बैंडों में काम करते हैं; MF मध्यम तरंग AM प्रसारण का बैंड है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)Ka — Ka बैंड उपयोग में है। ISRO के अनुसार GSAT-19 और GSAT-29 में Ka/Ku-बैंड हाई थ्रूपुट संचार ट्रांसपोंडर हैं, और GSAT-14 (5 जनवरी 2014 को प्रक्षेपित) में क्षीणन अध्ययन के लिए 20.2 GHz और 30.5 GHz के दो Ka-बैंड बीकन थे।
IEEE की योजना में Ka 27–40 GHz है, जो इस प्रश्न के चारों बैंडों में सबसे ऊँचा है। ISRO का 20.2 GHz वाला Ka-बैंड बीकन दिखाता है कि उपग्रह-उपयोग में यह अक्षर-नाम उस सीमा से नीचे तक भी जा सकता है।
- (2)C — C बैंड उपयोग में है। ISRO के पृष्ठ के अनुसार GSAT-30 C और Ku बैंड में संचार सेवाएँ देता है, और GSAT-17 में सामान्य C-बैंड, विस्तारित C-बैंड और S-बैंड के पेलोड हैं।
IEEE की योजना में C 4–8 GHz है। 10 अप्रैल 2003 को प्रक्षेपित INSAT-3A में बारह सामान्य C-बैंड, छह विस्तारित C-बैंड और छह Ku-बैंड ट्रांसपोंडर थे।
- (4)Ku — Ku बैंड उपयोग में है। ISRO ने 6 फ़रवरी 2019 को प्रक्षेपित GSAT-31 को भूस्थिर कक्षा में Ku-बैंड ट्रांसपोंडर क्षमता बढ़ाने वाला बताया, और GSAT-15 में Ku-बैंड के 24 संचार ट्रांसपोंडर थे।
IEEE की योजना में Ku 12–18 GHz है। यह K बैंड (18–27 GHz) के ठीक नीचे है, और Ka उसके ठीक ऊपर।
अवधारणा
रेडियो तरंगों को आवृत्ति के आधार पर बैंडों में बाँटा जाता है। ITU की योजना दशक-बैंडों के नाम देती है: MF 300 kHz–3 MHz, HF 3–30 MHz, VHF 30–300 MHz, UHF 300 MHz–3 GHz, SHF 3–30 GHz और EHF 30–300 GHz।
माइक्रोवेव बैंडों के अक्षर-नाम भी होते हैं। IEEE Std 521 में L 1–2 GHz, S 2–4 GHz, C 4–8 GHz, X 8–12 GHz, Ku 12–18 GHz, K 18–27 GHz और Ka 27–40 GHz है।
अन्य नामकरण-प्रणालियाँ इनमें से कुछ सीमाएँ अलग ढंग से खींचती हैं, और किसी अक्षर की परास उपयोग के क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
तरंग कैसे चलती है, यह उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। MF तरंगें भूमि के साथ चलती हैं या आयनमंडल से अपवर्तित होकर लौटती हैं। माइक्रोवेव आवृत्तियों पर रेडियो दृष्टि-रेखा में चलता है, और इसी तरह घर की डिश किसी भूस्थिर उपग्रह का संकेत पकड़ती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "रक्षा प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं उपग्रह" सूचीबद्ध है।
ISRO के पृष्ठ नए संचार उपग्रहों को INSAT/GSAT प्रणाली में शामिल किए जाने का वर्णन करते हैं। INSAT-1B के ISRO पृष्ठ पर इसका प्रक्षेपण 30 अगस्त 1983 को और पूर्ण परिचालन क्षमता अक्टूबर 1983 में दर्ज है।
ISRO ने 17 दिसम्बर 2020 को विस्तारित-C बैंड सेवाओं के लिए PSLV-C50 से प्रक्षेपित CMS-01 को भारत का 42वाँ संचार उपग्रह बताया।
इस प्रणाली के कुछ उपग्रहों में संचार के अलावा अन्य पेलोड भी हैं। INSAT-3A में मौसम संबंधी प्रेक्षण के लिए अति उच्च विभेदन रेडियोमीटर (VHRR) था, और GSAT-15 में L1 और L5 बैंड में काम करने वाला GAGAN नेविगेशन पेलोड था।
मुख्य तथ्य
- MF (मध्यम आवृत्ति) ITU का 300 kHz से 3 MHz तक का बैंड है, तरंगदैर्ध्य 1,000 m से 100 m; इस पर मध्यम तरंग AM प्रसारण होता है।
- IEEE Std 521 के अक्षर-बैंड: S 2–4 GHz, C 4–8 GHz, Ku 12–18 GHz और Ka 27–40 GHz।
- ISRO: 17 जनवरी 2020 को प्रक्षेपित GSAT-30 भूस्थिर कक्षा से C और Ku बैंड में संचार सेवाएँ देता है।
- ISRO: GSAT-19 (जून 2017) और GSAT-29 (नवम्बर 2018) में Ka/Ku-बैंड हाई थ्रूपुट संचार ट्रांसपोंडर हैं।
- ISRO: 29 जून 2017 को प्रक्षेपित GSAT-17 में सामान्य C-बैंड, विस्तारित C-बैंड और S-बैंड के पेलोड हैं।
परास: MF के लिए ITU, C, Ku और Ka के लिए IEEE Std 521। उपग्रहों का विवरण ISRO के मिशन पृष्ठों के अनुसार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- MF को माइक्रोवेव का अक्षर-बैंड समझ लेना। MF 300 kHz–3 MHz का ITU दशक-बैंड है; C, Ku और Ka गीगाहर्ट्ज बैंडों के अक्षर-नाम हैं।
- Ku और Ka को आपस में मिला देना। IEEE की योजना में Ku (12–18 GHz) K बैंड के नीचे है और Ka (27–40 GHz) उसके ऊपर।
- किसी अक्षर की परास को हर जगह एक-सी मान लेना। IEEE Ka को 27–40 GHz रखता है, फिर भी ISRO GSAT-14 के 20.2 GHz बीकन को Ka-बैंड बीकन कहता है।
कोई प्रश्न आवृत्ति बैंडों की सूची देकर पूछ सकता है कि कोई उपग्रह प्रणाली उनमें से किसका उपयोग नहीं करती, जैसा यह प्रश्न करता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी नामित बैंड की आवृत्ति परास क्या है, उस बैंड की तरंगें कैसे संचरित होती हैं, या किसी नामित GSAT उपग्रह में कौन से बैंड हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ITU नामकरण में मध्यम आवृत्ति (MF) बैंड की आवृत्ति परास निम्न में से कौन सी है?
- (a)30 kHz – 300 kHz
- (b)300 kHz – 3 MHz
- (c)3 MHz – 30 MHz
- (d)4 GHz – 8 GHz
उत्तर(2) — MF 300 kHz से 3 MHz तक है। विकल्प (1) निम्न आवृत्ति (LF) बैंड है, विकल्प (3) उच्च आवृत्ति (HF) बैंड है, और विकल्प (4) IEEE की अक्षर-योजना में C बैंड है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जनवरी 2020 में प्रक्षेपित GSAT-30 भूस्थिर कक्षा से किन बैंडों में संचार सेवाएँ देता है?
- (a)C और Ku बैंड
- (b)S और UHF बैंड
- (c)Ka और Q/V बैंड
- (d)L1 और L5 बैंड
उत्तर(1) — ISRO के पृष्ठ के अनुसार GSAT-30 C और Ku बैंड में संचार सेवाएँ देता है। विकल्प (2) उन बैंडों के नाम देता है जिन्हें ISRO अन्य उपग्रहों के लिए बताता है (GSAT-17 पर S, INSAT-3A के डेटा रिले ट्रांसपोंडर पर UHF); विकल्प (3) GSAT-29 के पेलोड के बैंड देता है, जिसमें Ka/Ku-बैंड ट्रांसपोंडर और Q/V-बैंड पेलोड हैं; विकल्प (4) GSAT-15 का GAGAN नेविगेशन पेलोड है।