निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए। जिस गद्यांश का उत्तर दे रहे हैं उसका स्पष्ट उल्लेख करें। (5 × 4 = 20)
गद्यांश-1:
“साहित्य में मानव के जीवन का प्रवास प्रतिफलित होता है। साहित्य स्वयं उस प्रवास और प्रगति का दर्पण है; विस्तारित होती हुई चेतना का परिणाम है। कई अर्थों में वह उस प्रवाह की दिशा और गति को भी प्रभावित करता है। साहित्य में निहित स्थितियों की व्याख्या और मूल्यांकन केवल स्वार्थी और सामूहिक के क्षेत्र तक सीमित नहीं होते, उनका सामाजिक अर्थ और प्रभाव क्या व्यापक होता है। साहित्य मानव की स्वार्थ-सिद्धि और जीवन-सेवा में जन्म लेता है। भाषा और मानवीय चेतना के विकास में निकट का सम्बन्ध है।”
गद्यांश-2:
“आज के सांस्कृतिक मानविकता की स्थिति। आधुनिकीकरण के प्रवाह आज के जमे हुए स्मृतियाँ समाप्त कर रहे हैं और नई सांस्कृतिक चेतना मानव को प्रभावित कर रही है। मानव का दायरा बदल रहा है। वैश्वीकरण ने एक अनोखी स्थिति उत्पन्न की है, जिसमें हित व्याप्त सामाजिक हितों को फैलाते हुए देखा जा रहा है। जिस वैश्विक भविष्य की तलाश हम कर रहे हैं, उसमें मानव समाज के पुनर्गठन की योजना भी सम्मिलित है। इस नये समय का आधार होगा अस्तित्व मानवतावादी सम्बन्धों की पुनः स्थापना। यदि हमें औद्योगिकीकरण और महानगरीकरण की विकृतियों से बचना है और अमानवीकरण के उपर से रोकना है, तो हमें उद्योगों का स्वरूप बदलना होगा और साथ ही सामाजिक सम्बन्धों का आधार भी।”