निम्नलिखित में से कौन–सा युग्म सुमेलित नही है ?
- (a)राज्यसभा में सीटों का आवंटन − चौथी अनुसूची
- (b)शपथ का प्रारूप − तीसरी अनुसूची
- (c)अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन − छठी अनुसूची
- (d)संघ सूची − सातवीं अनुसूची
सही — C, अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन − छठी अनुसूची। यही बेमेल युग्म है, और यही वह युग्म है जिसकी व्याख्या BPSC ने स्वयं 31 अक्टूबर 2025 को अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निस्तारण करते समय की: अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। इसे संविधान के अपने शीर्षकों के सामने जाँचिए। पाँचवीं अनुसूची का शीर्षक है 'अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध', और वह अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत जारी है। छठी अनुसूची का शीर्षक है 'असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध', और वह अनुच्छेद 244(2) तथा 275(1) के अंतर्गत जारी है। दो अलग वाक्यांश, दो अलग अनुसूचियाँ: अनुसूचित क्षेत्र पाँचवीं के हैं, और उन चार पूर्वोत्तर राज्यों के जनजाति क्षेत्र छठी के। संविधान इस सीमारेखा को अनुमान पर नहीं छोड़ता — पाँचवीं अनुसूची का पैरा 1 कहता है कि उस अनुसूची में 'राज्य' पद के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्य नहीं आते, इसलिए छठी अनुसूची वाले चारों राज्य पाँचवीं से स्पष्ट रूप से काट दिए गए हैं। शेष तीनों युग्म जैसे छपे हैं वैसे सही हैं, और यही इस प्रश्न को न्यायसंगत बनाता है। चौथी अनुसूची का शीर्षक है 'राज्य सभा में स्थानों का आवंटन', इसलिए विकल्प (a) टिकता है। तीसरी अनुसूची का शीर्षक है 'शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप' और उसमें मंत्रियों, विधायकों, न्यायाधीशों तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के शपथ-प्रारूप हैं, इसलिए विकल्प (b) टिकता है। सातवीं अनुसूची में सूची I संघ सूची, सूची II राज्य सूची और सूची III समवर्ती सूची हैं, इसलिए विकल्प (d) टिकता है। यह भी देख लीजिए कि जनजातीय प्रशासन वाली दोनों अनुसूचियाँ वास्तव में करती क्या हैं, क्योंकि नामपट्टों के पीछे का सार यही है। पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत जिस राज्य में अनुसूचित क्षेत्र हैं उसका राज्यपाल उनके प्रशासन पर राष्ट्रपति को प्रतिवर्ष, या जब भी राष्ट्रपति अपेक्षा करें, प्रतिवेदन देता है, और संघ की कार्यपालिका शक्ति उस पर राज्य को निर्देश देने तक जाती है; अधिक से अधिक बीस सदस्यों की जनजाति सलाहकार परिषद्, जिसके तीन-चौथाई सदस्य राज्य विधान सभा के अनुसूचित जनजाति सदस्य होते हैं, राज्यपाल को सलाह देती है; और 'अनुसूचित क्षेत्र' वे हैं जिन्हें राष्ट्रपति आदेश द्वारा घोषित करे। इसके बजाय छठी अनुसूची स्वायत्त जिले और स्वायत्त प्रदेश रचती है, जिनकी निर्वाचित जिला तथा प्रादेशिक परिषदें अपनी विधायी, न्यायिक और वित्तीय शक्तियाँ रखती हैं। पाँचवीं अनुसूची यानी राज्यपाल और राष्ट्रपति की देखरेख; छठी अनुसूची यानी स्वशासी परिषदें।
- (a)राज्यसभा में सीटों का आवंटन − चौथी अनुसूची — सही सुमेलित है, इसलिए यह उत्तर हो ही नहीं सकता। चौथी अनुसूची का शीर्षक है 'राज्य सभा में स्थानों का आवंटन' और वह सारणीबद्ध करती है कि हर राज्य तथा संघ राज्यक्षेत्र को राज्य सभा में कितने स्थान मिलते हैं। अभ्यर्थी इसे प्रायः दूसरी अनुसूची से गड्डमड्ड करके गँवाते हैं, जो राष्ट्रपति, राज्यपालों, पीठासीन अधिकारियों, न्यायाधीशों और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के वेतन तथा भत्तों से संबंधित है।
- (b)शपथ का प्रारूप − तीसरी अनुसूची — सही सुमेलित है। तीसरी अनुसूची का शीर्षक है 'शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप' और उसमें वे वास्तविक पाठ छपे हैं जिन्हें संघ तथा राज्यों के मंत्री, संसद और राज्य विधानमंडलों के अभ्यर्थी तथा सदस्य, और उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक लेते हैं। केवल राष्ट्रपति और राज्यपालों की शपथ कहीं और, स्वयं अनुच्छेद 60 और 159 में बैठती है।
- (d)संघ सूची − सातवीं अनुसूची — सही सुमेलित है, और यही वह युग्म है जिसके बारे में अभ्यर्थी सबसे अधिक आश्वस्त होता है। सातवीं अनुसूची तीन सूचियों वाली अनुसूची है, जिसे अनुच्छेद 246 के साथ पढ़ा जाता है — सूची I संघ सूची, सूची II राज्य सूची, सूची III समवर्ती सूची। इतनी परिचित होने के कारण यह सबसे पहले हटाई जाती है, और ठीक इसीलिए परीक्षक इसे 'सही सुमेलित नहीं' वाले प्रश्न में रखता है: इसकी कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती और यह अभ्यर्थी को पाँचवीं तथा छठी के बीच के असली निर्णय की ओर तेजी से ले जाती है।
संविधान में मूल रूप से आठ अनुसूचियाँ थीं; अब बारह हैं, और हर अनुसूची विस्तार का वह पुलिंदा है जिसे अनुच्छेदों से बाहर निकाल दिया गया ताकि अनुच्छेदों का पाठ पढ़ने लायक बना रहे। हर अनुसूची किसी अनुच्छेद से बँधी है, और यह लंगर जान लेना प्रायः सूची रटने से तेज पड़ता है: पहली (राज्य और संघ राज्यक्षेत्र) अनुच्छेद 1 और 4 से; दूसरी (राष्ट्रपति, राज्यपालों, पीठासीन अधिकारियों, न्यायाधीशों और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के वेतन-भत्ते) अनुच्छेद 59, 65 और 125 सहित कई अनुच्छेदों से; तीसरी (शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप) अनुच्छेद 75, 84, 99, 124, 148, 164, 188 और 219 से; चौथी (राज्य सभा के स्थानों का आवंटन) अनुच्छेद 4 और 80 से; पाँचवीं अनुच्छेद 244(1) से; छठी अनुच्छेद 244(2) और 275(1) से; सातवीं अनुच्छेद 246 से; आठवीं (भाषाएँ) अनुच्छेद 344 और 351 से; नौवीं (कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण), जिसे 1951 में पहले संशोधन ने जोड़ा और जो अनुच्छेद 31ख से बँधी है; दसवीं (दल-बदल के आधार पर निरर्हता), जिसे 1985 में 52वें संशोधन ने जोड़ा; तथा ग्यारहवीं और बारहवीं, जिन्हें 1992 में 73वें और 74वें संशोधनों ने जोड़ा और जो उन विषयों की सूची देती हैं जो अनुच्छेद 243छ के अंतर्गत पंचायतों को और अनुच्छेद 243ब के अंतर्गत नगरपालिकाओं को सौंपे जा सकते हैं। पाँचवीं और छठी वही जोड़ी है जिस पर परीक्षक सबसे अधिक लौटते हैं, क्योंकि दोनों जनजातीय प्रशासन से संबंधित हैं और दोनों के नाम एक किस्म के क्षेत्र पर हैं — पर वे उल्टे सिद्धांतों पर चलती हैं। पाँचवीं प्रशासन को राष्ट्रपति की देखरेख में राज्य के राज्यपाल के पास रखती है; छठी उसे निर्वाचित स्वायत्त परिषदों को सौंप देती है।
'सही सुमेलित नहीं' वाले प्रश्न उस अभ्यर्थी को पुरस्कृत करते हैं जो चारों युग्म जाँचता है, न कि उस पर रुक जाता है जो पहली नजर में अटपटा लगे। सस्ते वाले पहले निपटाइए: सातवीं अनुसूची में संघ सूची और तीसरी में शपथ-प्रारूप, ये अनुसूची-सूची के दो सबसे अधिक रटाए गए तथ्य हैं, और चौथी अनुसूची का राज्य सभा के स्थानों का आवंटन लगभग उतना ही सुरक्षित है। तीन युग्म खड़े रह जाने पर उत्तर स्वतः निकल आता है, और फिर आप उस पर सिर खपाने के बजाय उसकी पुष्टि भर कर सकते हैं। यहाँ पुष्टि छपे हुए युग्म के एक ही शब्द पर टिकी है: 'अनुसूचित क्षेत्रों'। संविधान दो अलग पारिभाषिक पदों का प्रयोग करता है, और लगातार करता है। 'अनुसूचित क्षेत्र' पाँचवीं अनुसूची का पद है, अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत। 'जनजाति क्षेत्र' छठी अनुसूची का पद है, अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के अंतर्गत, और वह नाम से ही असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम तक सीमित है। यही अकेला विभेदक तथ्य है, और पाँचवीं अनुसूची का पैरा 1 यह घोषित करके उस पर मुहर लगा देता है कि उस अनुसूची में 'राज्य' शब्द के अंतर्गत वे चारों राज्य नहीं आते। इसलिए दोनों अनुसूचियाँ अतिव्यापी हो ही नहीं सकतीं: कोई अनुसूचित क्षेत्र परिभाषा से ही छठी अनुसूची के चारों राज्यों से बाहर है, और छठी के अंतर्गत कोई जनजाति क्षेत्र परिभाषा से ही पाँचवीं से शासित नहीं है। जाल यह है कि दोनों अनुसूचियाँ जनजातीय प्रशासन के बारे में हैं और अगल-बगल बैठती हैं, इसलिए जिस अभ्यर्थी ने 'जनजाति क्षेत्र — छठी अनुसूची' को नारे की तरह सीखा है, वह 'अनुसूचित क्षेत्रों' को उसी का पर्याय पढ़ेगा और बेमेल युग्म के ऊपर से गुजर जाएगा। इस प्रश्न पर आयोग की अपनी टिप्पणी इस भेद को दोहराने से अधिक कुछ नहीं करती, और यही बताता है कि कितने अभ्यर्थी चूके।
- पाँचवीं अनुसूची का शीर्षक है 'अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध' और वह अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत जारी है; छठी अनुसूची का शीर्षक है 'असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध' और वह अनुच्छेद 244(2) तथा 275(1) के अंतर्गत जारी है — अलग विषय, अलग अनुच्छेद, अलग अनुसूची।
- पाँचवीं अनुसूची का पैरा 1 उपबंधित करता है कि उस अनुसूची में 'राज्य' पद के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्य नहीं आते — यही संविधान के अपने शब्द हैं जो पाँचवीं अनुसूची की व्यवस्था को छठी से अलग करते हैं, और यह चार राज्यों वाली सूची पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम 1971, 1984 के 49वें संशोधन और मिजोरम राज्य अधिनियम 1986 से बनती गई।
- पाँचवीं अनुसूची की मशीनरी: पैरा 3 अपेक्षा करता है कि जिस राज्य में अनुसूचित क्षेत्र हैं उसका राज्यपाल राष्ट्रपति को प्रतिवर्ष या जब भी अपेक्षित हो प्रतिवेदन दे, और संघ की कार्यपालिका शक्ति उनके प्रशासन पर निर्देश देने तक जाती है; पैरा 4 अधिक से अधिक बीस सदस्यों की जनजाति सलाहकार परिषद् गठित करता है, जिनमें यथासंभव तीन-चौथाई राज्य विधान सभा के अनुसूचित जनजाति सदस्य हों; पैरा 6 अनुसूचित क्षेत्र उन्हें बनाता है जिन्हें राष्ट्रपति आदेश द्वारा घोषित करे।
- छठी अनुसूची की मशीनरी देखरेख की नहीं, अधिकार-हस्तांतरण की है: पैरा 1 पैरा 20 की सारणी में सूचीबद्ध जनजाति क्षेत्रों को स्वायत्त जिले बनाता है, जिन्हें राज्यपाल आगे स्वायत्त प्रदेशों में बाँट सकता है, और हर एक में विधायी, न्यायिक तथा वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करने वाली निर्वाचित जिला या प्रादेशिक परिषद् होती है।
- संविधान के अपने शीर्षकों से तीनों सही सुमेलित युग्म: तीसरी अनुसूची — शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप; चौथी अनुसूची — राज्य सभा में स्थानों का आवंटन; सातवीं अनुसूची — सूची I संघ सूची, सूची II राज्य सूची, सूची III समवर्ती सूची। संविधान आठ अनुसूचियों से आरंभ हुआ और अब उसमें बारह हैं, जिनमें नौवीं पहले संशोधन (1951) से, दसवीं 52वें (1985) से तथा ग्यारहवीं और बारहवीं 73वें और 74वें (1992) से जुड़ीं।
प्रकाशित पंक्ति ही उत्तर है। संविधान दो अलग पारिभाषिक पद बनाए रखता है — पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत 'अनुसूचित क्षेत्र' और छठी के अंतर्गत 'जनजाति क्षेत्र' — और पाँचवीं अनुसूची का पैरा 1 असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को उसके अपने प्रवर्तन से स्पष्ट रूप से बाहर कर देता है, इसलिए दोनों व्यवस्थाएँ कभी अतिव्यापी नहीं होतीं।
- 'अनुसूचित क्षेत्रों' और 'जनजाति क्षेत्रों' को पर्याय मान लेना — ये अलग-अलग पारिभाषिक पद हैं, पहला पाँचवीं अनुसूची का और दूसरा छठी का, और पाँचवीं अनुसूची का अपना पैरा 1 छठी अनुसूची वाले चारों राज्यों को बाहर कर देता है
- 'सही सुमेलित नहीं' वाले प्रश्न का उत्तर पहले असामान्य दिखने वाले युग्म से दे देना, चारों जाँचे बिना — इनमें से तीन युग्म सीधे संविधान के मुद्रित शीर्षकों से उठाए गए हैं और सेकंडों में निपटाए जा सकते हैं
- राज्य सभा के स्थानों का आवंटन दूसरी अनुसूची में रख देना — दूसरी वेतन और भत्तों से संबंधित है; आवंटन की सारणी चौथी में है
BPSC को सुमेलित युग्मों का सघन रूप पसंद है: चार युग्म, एक खोट, कोई कथन-क्रमांकन नहीं, और खोट ठीक उसी जगह रोपी गई जहाँ अगल-बगल की दो अनुसूचियाँ मिलती-जुलती भाषा प्रयोग करती हैं। यह शुद्ध स्मरण-परीक्षण है जो तर्क को नहीं, नारे रटने को दंडित करता है। UPSC इसी अनुसूची-सूची को तीन दशकों से खोदता आया है, पर प्रायः एक बार में एक अनुसूची और सकारात्मक रूप में — सीधे पूछते हुए कि अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण के विशेष उपबंध किस अनुसूची में हैं, या कौन-सा कथन चौथी अनुसूची का सही वर्णन करता है, और यह प्रश्न उसे इतना पसंद आया कि उसने 2001 में और फिर 2004 में लगभग हूबहू दोहराया।
भारत के संविधान की किस अनुसूची में अनेक राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण के लिए विशेष उपबंध हैं?
- (a) तीसरी
- (b) पाँचवीं
- (c) सातवीं
- (d) नौवीं
उत्तर(b) पाँचवीं
वही तथ्य सकारात्मक रूप में पूछा गया — UPSC पाँचवीं अनुसूची का अपना शीर्षक रखकर अनुसूची का नाम पुछवाता है, जबकि BPSC उसी शीर्षक के सामने गलत अनुसूची छापकर उसे पकड़वाता है। दोनों इसी पर टिके हैं कि अनुसूचित क्षेत्रों को छठी अनुसूची के जनजाति क्षेत्रों से अलग किया जा सके।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन भारत के संविधान की चौथी अनुसूची का सही वर्णन करता है?
- (a) इसमें संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन की योजना है
- (b) इसमें संविधान में सूचीबद्ध भाषाएँ हैं
- (c) इसमें जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन संबंधी उपबंध हैं
- (d) यह राज्य सभा में स्थानों का आवंटन करती है
उत्तर(d) यह राज्य सभा में स्थानों का आवंटन करती है
यह अनुसूची-से-विषय वाला वही मानचित्र जाँचता है, और उसके चारों विकल्प इस BPSC प्रश्न का लगभग दर्पण हैं — जिस चौथी अनुसूची वाले युग्म को BPSC सही छापता है वही यहाँ उत्तर है, जबकि शक्तियों का विभाजन और जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन गलत ठिकानों के रूप में आते हैं, यानी ठीक वे भ्रम जिनका दोहन BPSC करता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ?
- (a)राष्ट्रपति और राज्यपालों के वेतन तथा भत्ते — दूसरी अनुसूची
- (b)संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएँ — आठवीं अनुसूची
- (c)दल-बदल के आधार पर निरर्हता — नौवीं अनुसूची
- (d)पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व — ग्यारहवीं अनुसूची
उत्तर(c) दल-बदल के आधार पर निरर्हता — नौवीं अनुसूची। दल-बदल विरोधी उपबंध दसवीं अनुसूची में हैं, जिसे 1985 में 52वें संशोधन ने जोड़ा; नौवीं अनुसूची, जिसे 1951 में पहले संशोधन ने जोड़ा, कुछ अधिनियमों तथा विनियमों को विधिमान्य करती है और अनुच्छेद 31ख के साथ पढ़ी जाती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के संविधान की छठी अनुसूची निम्नलिखित में से किन राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन का उपबंध करती है ?
- (a)असम, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम
- (b)असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम
- (c)झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश
- (d)असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम
उत्तर(b) असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम — छठी अनुसूची के अपने शीर्षक में नामित चारों राज्य; नागालैंड और सिक्किम के लिए इसके बजाय अनुच्छेद 371क तथा 371च के अंतर्गत विशेष उपबंध हैं, जबकि विकल्प (c) के राज्यों में पाँचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्र आते हैं।