उपकरणों को विद्युत आघात से बचाने वाली युक्ति है :
- (a)फ्यूज
- (b)जनित्र
- (c)मोटर
- (d)धारा नियंत्रक
सही — A, फ्यूज। किसी और चीज़ से पहले वाक्य का कर्म पढ़िए : प्रश्न उस युक्ति के बारे में है जो उपकरणों को विद्युत के अतिरेक से बचाती है, और यही ठीक-ठीक फ़्यूज़ का काम है। फ़्यूज़ परिपथ में जान-बूझकर लगाई गई कमज़ोर कड़ी है। यह उपयुक्त रूप से कम गलनांक वाली धातु या मिश्रातु के तार का छोटा-सा टुकड़ा होता है, जिनके रूप में NCERT ऐलुमिनियम, ताँबा, लोहा या सीसा गिनाता है, और जो उपकरण के साथ श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है ताकि पूरी धारा उसी से होकर गुज़रे, और प्रायः धातु के सिरों वाली चीनी मिट्टी की कार्ट्रिज में बंद रहता है। भौतिकी जूल का तापन नियम है, H = I²Rt। चूँकि फ़्यूज़ का तार बाक़ी वायरिंग से पतला होता है, पाश में प्रति एकांक लम्बाई सबसे अधिक प्रतिरोध उसी का होता है, इसलिए वह हर दूसरी चीज़ से तेज़ गरम होता है; और चूँकि तापन धारा के वर्ग के साथ बढ़ता है, थोड़ी-सी अतिधारा भी असमानुपाती ताप-वृद्धि पैदा कर देती है। धारा के निर्धारित मान से ऊपर जाते ही फ़्यूज़ का तार पिघल जाता है, परिपथ टूट जाता है, और उपकरण तथा घर की वायरिंग उस आग या क्षति से बच जाती है जो अन्यथा लघु पाथन या अतिभारण कर देता। घरेलू फ़्यूज़ 1 A, 2 A, 3 A, 5 A और 10 A के आते हैं, और रेटिंग भार से चुनी जाती है : 220 V की आपूर्ति पर 1 किलोवाट की विद्युत इस्तरी 1000/220 = 4.54 ऐम्पियर लेती है, इसलिए 5 A का फ़्यूज़ सही रहेगा। अब वह चेतावनी जो अंक से अधिक महत्त्व रखती है, क्योंकि यह सुरक्षा से जुड़ी असली भ्रांति है। फ़्यूज़ किसी मनुष्य को विद्युत आघात से नहीं बचाता। वह परिपथ और उपकरणों को अनुचित रूप से ऊँची धारा से बचाता है। छाती के आर-पार कुछ दसियों मिलीऐम्पियर की धारा ही प्राणघातक हो सकती है, जो घरेलू फ़्यूज़ को पिघलने के लिए जिन कई ऐम्पियरों तक पहुँचना पड़ता है उनसे हज़ारों गुना नीचे है — फ़्यूज़ को पता तक न चलेगा। व्यक्ति को बचाता है भू-सम्पर्क तार, जो हरे विद्युतरोधन वाला होता है और घर के पास ज़मीन में गहरे गाड़ी गई धातु की पट्टी तक जाता है, और जो उपकरण की धातु की बॉडी को भू-विभव पर रखता है ताकि, NCERT के अपने शब्दों में, उपयोगकर्ता को तीव्र विद्युत आघात न लगे; और आधुनिक संस्थापनों में ELCB या RCCB, जो विद्युन्मय तार से जाती धारा की तुलना उदासीन तार से लौटती धारा से करता है और तब मिलीसेकेण्डों में परिपथ तोड़ देता है जब कोई छोटी अवशिष्ट धारा — व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए बिकने वाली युक्तियों में प्रायः लगभग 30 मिलीऐम्पियर — कहीं और से, जैसे किसी व्यक्ति के शरीर से, निकल रही हो। प्रश्न ‘उपकरणों को’ कहता है, और यही यहाँ फ्यूज को सही उत्तर बनाता है। (अंग्रेज़ी संस्करण का ‘protect equipments from the electric shock’ हिन्दी का शब्दानुवाद है और अंग्रेज़ी में ढीला पड़ता है; हिन्दी पाठ का ‘उपकरणों को’ स्पष्ट है।)
- (b)जनित्र — जनित्र स्रोत है, सुरक्षा-युक्ति नहीं। वह विद्युतचुम्बकीय प्रेरण से यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है — चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाई गई कुंडली, जिसमें AC वाले रूप में सर्पी वलय और DC वाले रूप में विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक होता है। वही तो पहले स्थान पर परिपथ में धारा ठेलता है; जनित्र से यह अपेक्षा करना कि वह उपकरणों को अतिरिक्त धारा से बचाए, आपूर्ति से यह कहना है कि वह आपको स्वयं अपने से बचाए। उसकी बनावट में ऐसा कुछ नहीं जो अतिधारा को भाँपे या तोड़े।
- (c)मोटर — ठीक विपरीत युक्ति : मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है, और इसके लिए चुम्बकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाला बल काम में आता है, और यही पंखे, पम्प, मिक्सर और वाटर कूलर चलाती है। मोटर एक भार है — उन्हीं उपकरणों में से एक जिसे स्वयं सुरक्षा चाहिए, और जो चालू होते समय भारी धारा लेती है। NCERT के पुराने संस्करणों में ‘विद्युत मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है’ को सही-ग़लत वाले प्रश्न के रूप में रखा गया था, और उत्तर ग़लत है; वह काम जनित्र का है। युक्तिसंगत किए गए पाठ में यह कथन हटा दिया गया, इसलिए इस समय छप रही पुस्तक में उसे मत खोजिए।
- (d)धारा नियंत्रक — बुद्धिमानी भरा भ्रामक विकल्प, क्योंकि यह सही काम का नाम ग़लत अर्थ में लेता है। धारा नियंत्रक या परिवर्ती प्रतिरोध धारा को नियंत्रित करता ज़रूर है, प्रतिरोध जोड़कर और बाक़ी काम ओम के नियम पर छोड़कर, और वह लैम्प की चमक घटाने या पंखे की चाल नियमित करने में काम आता है। पर सामान्य संचालन के दौरान धारा को नियमित करना उससे अलग बात है कि धारा ख़तरनाक हो जाए तो परिपथ तोड़ दिया जाए : धारा नियंत्रक आपूर्ति काट नहीं सकता, और लघु पाथन की धाराओं पर वह स्वयं जल जाएगा। ‘धारा नियंत्रक’ किसी मानक सुरक्षा-युक्ति का नाम है ही नहीं — वे फ़्यूज़ और लघु परिपथ वियोजक हैं।
घरेलू विद्युत संस्थापन के सामने तीन अलग-अलग ख़तरे होते हैं और वह हर एक का उत्तर अलग युक्ति से देता है, और इन्हें गड्डमड्ड कर देना अभ्यर्थी के ज्ञान में सबसे आम और सबसे ख़तरनाक छेद है। पहला ख़तरा अतिधारा है : या तो अतिभारण, जब एक ही परिपथ से बहुत सारे उपकरण खींचें या आपूर्ति वोल्टता आकस्मिक रूप से बढ़ जाए, या लघु पाथन, जब विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे छू जाएँ और रास्ते का प्रतिरोध ढह जाए। इसकी युक्ति फ़्यूज़ है, या उसका पुनः प्रयोज्य आधुनिक समकक्ष लघु परिपथ वियोजक, जो विद्युन्मय तार में श्रेणी क्रम में लगाया जाता है ताकि सारी धारा उसी से गुज़रे; फ़्यूज़ पिघल जाता है और MCB ट्रिप हो जाता है, और दोनों ही स्थितियों में वायरिंग के आग पकड़ने से पहले परिपथ टूट जाता है। दूसरा ख़तरा इस्तरी, टोस्टर या रेफ़्रिजरेटर जैसे उपकरण की धातु की बॉडी तक रिसाव है, और उसकी युक्ति हरे विद्युतरोधन वाला भू-सम्पर्क तार है, जो घर के पास ज़मीन में गहरे गाड़ी गई धातु की पट्टी से जुड़ा होता है, कम प्रतिरोध का रास्ता देता है और बॉडी को भू-विभव पर रखता है। तीसरा ख़तरा वह अवशिष्ट धारा है जो सचमुच किसी मनुष्य के शरीर से बह रही हो, और उसकी युक्ति ELCB या RCCB है, जो विद्युन्मय तार से जाती धारा की उदासीन तार से लौटती धारा से लगातार तुलना करता है और दोनों के मेल न खाते ही आपूर्ति काट देता है। उपकरण के लिए फ़्यूज़, व्यक्ति के लिए भू-सम्पर्कण और RCCB : यही एक पंक्ति में घरेलू विद्युत सुरक्षा का पूरा सार है।
उत्तर तक दो रास्ते जाते हैं और दोनों का अभ्यास करने लायक़ है। पहला विलोपन का है और उसमें बिजली का ज्ञान बिल्कुल नहीं चाहिए : जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में, और दोनों में से किसी का कोई सुरक्षा-कार्य है ही नहीं — वे ऊर्जा रूपांतरण के दो आधे भाग हैं, सुरक्षा-युक्तियाँ नहीं। ‘धारा नियंत्रक’ किसी मानक सुरक्षा-युक्ति का नाम नहीं है; वह परिवर्ती प्रतिरोध का वर्णन करता है, जो दोष को तोड़ने के बजाय सामान्य संचालन में धारा नियमित करता है। केवल एक विकल्प बचता है। दूसरा रास्ता सकारात्मक है और परीक्षक यही चाहता है : यह जानिए कि फ़्यूज़ की परिभाषा इससे बनती है कि वह क्या भाँपता है और कैसे प्रतिक्रिया करता है — वह धारा का परिमाण भाँपता है, और पिघलकर प्रतिक्रिया करता है, क्योंकि पतले, कम गलनांक वाले तार में जूल तापन I² के अनुसार चलता है। पर पूरे प्रश्न का एकमात्र निर्णायक विचार वाक्य का कर्म है। पूछिए, ‘किसे बचाना है ?’ जो प्रश्न उपकरण कहता है वह फ़्यूज़ की ओर संकेत करता है; जो व्यक्ति कहता वह भू-सम्पर्कण और ELCB/RCCB की ओर करता। हिन्दी पाठ यहाँ स्पष्ट है — वह ‘उपकरणों को’ कहता है — और यही शब्द कुंजी को वैध ठहराता है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण का ‘protect equipments from the electric shock’ हिन्दी का शब्दानुवाद होने के कारण ढीला पड़ जाता है। इस प्रश्न से यह सामान्यीकरण मत निकालिए कि फ़्यूज़ किसी व्यक्ति को आघात से सुरक्षित कर देता है। वह नहीं करता, और यह अंतर झुलसे हुए सॉकेट और किसी की मृत्यु के बीच का अंतर है।
- फ़्यूज़ का NCERT वाला वर्णन : उपयुक्त गलनांक वाली धातु या मिश्रातु के तार का टुकड़ा — उदाहरण के लिए ऐलुमिनियम, ताँबा, लोहा या सीसा — जो युक्ति के साथ श्रेणी क्रम में लगाया जाता है और प्रायः चीनी मिट्टी या वैसी ही सामग्री की, धातु के सिरों वाली कार्ट्रिज में बंद रहता है। घरेलू फ़्यूज़ 1 A, 2 A, 3 A, 5 A और 10 A के आते हैं।
- क्रियाविधि जूल का तापन नियम है, H = I²Rt। फ़्यूज़ का तार पतला होता है, इसलिए पाश में प्रति एकांक लम्बाई सबसे अधिक प्रतिरोध उसी का होता है और वह सबसे तेज़ गरम होता है; धारा के निर्धारित मान से ऊपर जाते ही वह पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
- भार से फ़्यूज़ की रेटिंग निकालना : 220 V पर 1 किलोवाट खपाने वाली विद्युत इस्तरी 1000/220 = 4.54 ऐम्पियर लेती है, इसलिए 5 A का फ़्यूज़ काम में लेना चाहिए। भार से बहुत ऊपर का फ़्यूज़ चुनना उद्देश्य ही मार देता है; उससे नीचे का चुनना यह अर्थ रखता है कि फ़्यूज़ सामान्य उपयोग में ही उड़ जाएगा।
- फ़्यूज़ असल में किसे बचाता है, NCERT के अपने शब्दों में : वह ‘अतिभारण के कारण उपकरणों और परिपथ को होने वाली क्षति रोकता है’, और वह ‘अनुचित रूप से उच्च विद्युत धारा के प्रवाह को रोककर विद्युत परिपथ तथा उपकरण को सम्भावित क्षति से बचाता है’। यह उपकरण की सुरक्षा है, व्यक्ति की नहीं।
- व्यक्ति को क्या बचाता है : हरे विद्युतरोधन वाला भू-सम्पर्क तार, जो घर के पास ज़मीन में गहरे गाड़ी गई धातु की पट्टी से जुड़ा होता है, उपकरण की धातु की बॉडी को भू-विभव पर रखता है ताकि, जैसा NCERT कहता है, उपयोगकर्ता को तीव्र विद्युत आघात न लगे। आधुनिक बोर्डों में ELCB/RCCB भी जोड़ा जाता है, जो प्रायः लगभग 30 मिलीऐम्पियर की अवशिष्ट धारा पर ट्रिप करने के लिए बनाया जाता है — फ़्यूज़ को जिन कई ऐम्पियरों की ज़रूरत होती है उनसे कई घात नीचे।
- फ़्यूज़ एक बार काम आने वाला होता है और उड़ने के बाद बदलना पड़ता है; लघु परिपथ वियोजक (MCB) वही अतिधारा वाला काम एक ऐसे स्विच से करता है जो ट्रिप होता है और फिर से चालू किया जा सकता है। दोनों श्रेणी क्रम में और विद्युन्मय तार में जोड़े जाते हैं, उदासीन तार में कभी नहीं और समांतर में कभी नहीं।

- यह प्रश्न जिस सुरक्षा-भ्रांति को न्योता देता है : फ़्यूज़ उपकरणों और वायरिंग को अतिधारा से बचाता है — वह किसी व्यक्ति को विद्युत आघात से नहीं बचाता, क्योंकि कुछ दसियों मिलीऐम्पियर की प्राणघातक शारीरिक धारा किसी भी फ़्यूज़ की रेटिंग से बहुत नीचे है। व्यक्तिगत सुरक्षा भू-सम्पर्कण और ELCB/RCCB से आती है
- यह मान लेना कि फ़्यूज़ के तार का प्रतिरोध बहुत ऊँचा होना चाहिए; आवश्यक गुण कम गलनांक है, और UPSC ठीक यही भेद जाँच चुका है
- फ़्यूज़ को समांतर में, या उदासीन तार में जोड़ देना — उसे विद्युन्मय तार में श्रेणी क्रम में बैठना चाहिए ताकि पूरी धारा उससे गुज़रे और उसके टूटने से उपकरण सचमुच अलग हो जाए
BPSC सुरक्षा-युक्तियों को सपाट एक-पंक्ति के स्मरण के रूप में पूछता है, और उसकी अंग्रेज़ी प्रायः हिन्दी का शब्दानुवाद होती है, इसलिए निर्णायक कौशल वाक्य का कर्म पढ़ना है — ‘उपकरणों को’ फ़्यूज़ की ओर संकेत करता है, जबकि ‘व्यक्ति को’ भू-सम्पर्कण और ELCB की ओर करता। UPSC ने अकेली बार जब फ़्यूज़ का प्रश्न रखा, तब उसने एक परत और गहरे जाकर पूछा कि फ़्यूज़ तार में कौन-सा गुण होना चाहिए और उसे कैसे जोड़ा जाता है, जिसमें उत्तर ‘कम गलनांक’ था और ‘समांतर में जुड़ा होता है’, ‘मुख्यतः चाँदी की मिश्रातुओं से बनता है’ तथा ‘बहुत उच्च प्रतिरोध’ जाल थे। इसलिए BPSC युक्ति का नाम बताने पर पुरस्कार देता है; UPSC उस पदार्थ-गुण और उस जोड़-स्थिति को जानने पर, जो युक्ति को काम करने लायक़ बनाते हैं।
मुख्य विद्युत आपूर्ति में फ़्यूज़ सुरक्षा युक्ति के रूप में काम में लिया जाता है। फ़्यूज़ के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a) यह मुख्य स्विच के साथ समांतर क्रम में जुड़ा होता है
- (b) यह मुख्यतः चाँदी की मिश्रातुओं से बनाया जाता है
- (c) इसका गलनांक निम्न होना चाहिए
- (d) इसका प्रतिरोध बहुत उच्च होना चाहिए
उत्तर(c) इसका गलनांक निम्न होना चाहिए
वही युक्ति, एक परत गहरे। BPSC आपसे सुरक्षा-युक्ति का नाम पुछवाता है; UPSC मान लेता है कि वह आपको आता है और पूछता है कि उसे काम करने लायक़ कौन-सा गुण बनाता है — निम्न गलनांक, ताकि परिपथ में सबसे पहले फ़्यूज़ का तार ही टूटे — और ‘समांतर में जुड़ा होता है’ तथा ‘बहुत उच्च प्रतिरोध’ को उन जालों के रूप में रखता है जिनमें अधूरी याद फँसती है।
कथन (A) : धातु के तार से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसका ताप बढ़ जाता है। कारण (R) : धातु के परमाणुओं का आपस में टकराना ऊष्मा ऊर्जा मुक्त करता है।
- (a) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है
- (b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है, परन्तु R ग़लत है
- (d) A ग़लत है, परन्तु R सही है
उत्तर(c) A सही है, परन्तु R ग़लत है
फ़्यूज़ इसी भौतिकी पर चलता है। धारावाही तार इसलिए गरम होता है कि अपवाहित इलेक्ट्रॉन जालक-आयनों से टकराते हैं और विद्युत ऊर्जा I²R ऊष्मा के रूप में क्षय होती है — न कि इसलिए कि धातु के परमाणु आपस में टकराते हैं, और इसीलिए दिया गया कारण ग़लत है। फ़्यूज़ बस उसी तापन को इस तरह गढ़ देता है कि गलनांक तक सबसे पहले वही पहुँचे।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
घरेलू विद्युत परिपथ में काम में लिए जाने वाले फ़्यूज़ तार को चाहिए कि वह
- (a)उच्च गलनांक वाला हो और उपकरण के साथ समांतर क्रम में जुड़ा हो
- (b)निम्न गलनांक वाला हो और उपकरण के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हो
- (c)निम्न गलनांक वाला हो और उपकरण के साथ समांतर क्रम में जुड़ा हो
- (d)उच्च गलनांक वाला हो और उपकरण के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हो
उत्तर(b) निम्न गलनांक वाला हो और उपकरण के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ा हो — फ़्यूज़ को वायरिंग से पहले पिघलना है, इसलिए उसकी मिश्रातु निम्न गलनांक के लिए चुनी जाती है, और उसे परिपथ की पूरी धारा ढोनी है, जिसे केवल श्रेणी संयोजन सुनिश्चित करता है। समांतर में वह लगभग कोई धारा नहीं ढोता और कभी उड़ता ही नहीं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
2 किलोवाट रेटिंग वाला एक विद्युत गीज़र 220 V की घरेलू आपूर्ति पर चलाया जाना है। उसके परिपथ के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा फ़्यूज़ उपयुक्त है ?
- (a)1 A
- (b)3 A
- (c)5 A
- (d)15 A
उत्तर(d) 15 A — गीज़र सामान्य संचालन में I = P/V = 2000/220 = 9.09 ऐम्पियर लेता है, इसलिए इससे कम रेटिंग वाला कोई भी फ़्यूज़ हर बार गीज़र चालू करते ही पिघल जाएगा। इसीलिए घरों में गीज़र और एयर कूलर जैसे उच्च शक्ति वाले उपकरणों के लिए अलग 15 A का परिपथ रखा जाता है, और 5 A का परिपथ बत्तियों तथा पंखों के लिए छोड़ा जाता है।