लडंग सन्दर्भित करता है :
- (a)स्थानान्तरित कृषि
- (b)वृक्षारोपण कृषि
- (c)कृषि का पदार्थ प्रकार
- (d)शुष्क कृषि
सही — A, स्थानान्तरित कृषि। लडंग दक्षिण-पूर्व एशिया में की जाने वाली स्थानान्तरित, यानी काट-और-जला कृषि का मलय तथा इंडोनेशियाई नाम है, और अंतिम कुंजी पर आयोग की अपनी टिप्पणी यही कहती है — वह लडंग को स्थानान्तरित कृषि का दक्षिण-पूर्व एशियाई नाम बताती है, विशेषकर मलेशिया और इंडोनेशिया में। शब्द स्वयं उत्तर खोल देता है : इंडोनेशियाई और मलय में *लडंग* का अर्थ है बिना सिंचाई वाला, सूखा खेत जिसमें फ़सल उगाई जाती है — *सावाह* का ठीक उलटा, जो मेड़बंदी और सिंचाई वाला गीला धान का खेत होता है। जंगल में से काटकर निकाला गया ऊपरी ढलान का सूखा टुकड़ा, जिसमें एक-दो मौसम फ़सल ली जाती है और फिर उसे छोड़ दिया जाता है, ठीक स्थानान्तरित कृषि का चक्र है : पेड़ और झाड़ी काटे जाते हैं, बचा हुआ जला दिया जाता है ताकि राख मिट्टी में पोटाश जोड़ दे, जब तक वह पोषक-उछाल टिकता है तब तक — आमतौर पर एक से तीन वर्ष — फ़सल ली जाती है, और फिर खेत को कहीं अधिक लम्बी परती के लिए छोड़ दिया जाता है, वनस्पति दोबारा पनपती रहती है और किसान कहीं और नया टुकड़ा खोल लेता है। अब वह विकल्प, जिससे ईमानदारी से निपटना ज़रूरी है, क्योंकि वह असत्य नहीं है। विकल्प (c), जो अंग्रेज़ी संस्करण में ‘Subsistence type of Agriculture’ यानी निर्वाह कृषि छपा है (हिन्दी पुस्तिका उसे ‘कृषि का पदार्थ प्रकार’ छापती है), लडंग के बारे में सच्चा कथन है : स्थानान्तरित कृषि निर्वाह-प्रणाली है ही, और हर मानक वर्गीकरण उसे आदिम निर्वाह कृषि के नीचे रखता है। पर (c) वंश का नाम लेता है जबकि (a) जाति का। ‘निर्वाह कृषि’ के भीतर मानसून एशिया की गहन आर्द्र-धान निर्वाह खेती, शुष्क सीमांतों पर आदिम पशुचारण और स्थायी निर्वाह जुताई भी आती है — इनमें से कोई लडंग नहीं है। प्रश्न पूछ रहा है कि लडंग शब्द किसे *सन्दर्भित करता है*, और कोई स्थानीय पद एक नामित प्रथा को सन्दर्भित करता है, उस पूरे कुल को नहीं जिसमें वह प्रथा बैठती है। जहाँ एक विकल्प विशिष्ट पद हो और दूसरा उसे समेटने वाली श्रेणी, वहाँ प्रीलिम्स की परिपाटी विशिष्ट को लेती है — और यहाँ आयोग की प्रकाशित टिप्पणी उसी विशिष्ट पाठ की पुष्टि करती है, इसलिए (a) वाली कुंजी केवल बचाव-योग्य नहीं, समझाई हुई है।
- (b)वृक्षारोपण कृषि — भूगोल की दृष्टि से ठीक और अवधारणा की दृष्टि से उलटा। मलेशिया और इंडोनेशिया पर सचमुच बागानों का बोलबाला है — 2023–24 में दुनिया के 7.73 करोड़ टन पाम तेल में से इंडोनेशिया ने 4.4 करोड़ टन और मलेशिया ने 1.97 करोड़ टन पैदा किया, यानी दोनों मिलाकर लगभग 80 प्रतिशत, और उसके अलावा उनके रबड़-बाग़ान भी हैं — इसलिए देश का साहचर्य ज़ोर से खींचता है। पर बाग़ान स्थायी, वाणिज्यिक और पूँजी-प्रधान होता है, जिसमें भाड़े के मज़दूर एक ही निर्यात फ़सल पर काम करते हैं और प्रसंस्करण वहीं होता है, जबकि लडंग अस्थायी, निर्वाह-मूलक, पारिवारिक श्रम वाला और मिश्रित फ़सल वाला होता है।
- (c)कृषि का पदार्थ प्रकार — असत्य नहीं — और ठीक यही इसे ख़तरनाक बनाता है। अंग्रेज़ी संस्करण में यह विकल्प ‘Subsistence type of Agriculture’ यानी निर्वाह कृषि है, और स्थानान्तरित कृषि सचमुच निर्वाह-प्रणाली है, इसलिए इसे चुनने वाले अभ्यर्थी ने कोई तथ्यगत भूल नहीं की। दिक़्क़त यह है कि ‘निर्वाह कृषि’ एक पूरी श्रेणी है, जिसमें गहन आर्द्र-धान निर्वाह खेती और आदिम पशुचारण भी आ जाते हैं; वह लडंग को जगह तो देती है, पहचान नहीं देती। नाम लिए गए स्थानीय पद के लिए नामित प्रथा ही चाहिए, इसलिए विशिष्ट विकल्प सामान्य विकल्प को हरा देता है और कुंजी (a) लेती है।
- (d)शुष्क कृषि — शुष्क कृषि का अर्थ है कम वर्षा वाले क्षेत्रों में परती छोड़ने, पलवार बिछाने और सूखा-सहिष्णु क़िस्मों के सहारे मिट्टी की नमी बचाकर फ़सल लेना। यह इसलिए पास लगता है कि लडंग वास्तव में सूखा, बिना सिंचाई वाला खेत होता है; पर शुष्क कृषि अर्ध-शुष्क मैदानों की स्थायी, बसी हुई प्रणाली है, जिसमें न जंगल की सफ़ाई होती है, न जलाना, और न खेत का स्थान बदलता है। यहाँ एक छपाई की बात नोट करने लायक़ है : अंग्रेज़ी संस्करण में यह विकल्प ‘Dry forming’ छपा है, जो ‘dry farming’ की टंकण-चूक है और उसे उसी रूप में पढ़ा जाना चाहिए, न कि किसी अनजानी अवधारणा के रूप में; हिन्दी पुस्तिका में यह चूक है ही नहीं।
स्थानान्तरित कृषि वह कृषि-प्रणाली है जिसमें खेत केवल कुछ समय के लिए जोते जाते हैं और फिर छोड़ दिए जाते हैं, जबकि उसके बाद उगने वाली परती-वनस्पति को स्वतंत्र रूप से दोबारा बढ़ने दिया जाता है। इसकी सामान्य तकनीक काट-और-जला है : पेड़, झाड़ियाँ और जंगल काटकर साफ़ किए जाते हैं और बची हुई वनस्पति जला दी जाती है, जिसकी राख मिट्टी में पोटाश जोड़ती है। फ़सल-अवधि छोटी होती है — प्रायः एक से तीन वर्ष, जब तक पोषक-उछाल चुक नहीं जाता और खरपतवार जम नहीं जाती — और वह उसके बाद की परती से कहीं छोटी होती है, जो इस प्रणाली के यूरोपीय रूपों में ऐतिहासिक रूप से 20–40 वर्ष तक चलती थी। यह निर्वाह-अर्थव्यवस्था है : किसी स्थायी खेत की जुताई नहीं, ख़रीदी हुई निविष्टि नाममात्र या शून्य, घर के लिए मिश्रित खाद्य फ़सलें, और ज़मीन का स्वामित्व तथा फेरबदल पट्टे से नहीं, समुदाय से तय होता है। यही प्रणाली जहाँ-जहाँ की जाती है वहाँ लगभग हर जगह अलग नाम ढोती है, और वे नाम परीक्षा की पक्की सामग्री हैं : मलेशिया और इंडोनेशिया में लडंग, पूर्वोत्तर भारत में झूम, आंध्र–ओडिशा पट्टी में पोडु या पेंडा, मध्य प्रदेश में बेवर और दहिया, केरल तथा पश्चिमी घाट में कुमारी, श्रीलंका में चेना, वियतनाम में रे, म्यांमार में तौंग्या, मेक्सिको और मध्य अमेरिका में मिल्पा, ब्राज़ील में रोका, वेनेज़ुएला में कोनूको और कांगो द्रोणी में मसोले।
चार में से दो विकल्प ज़ोर से काटे जा सकते हैं और असली मुक़ाबला बाक़ी दो के बीच है। वृक्षारोपण कृषि वाणिज्यिक, स्थायी और पूँजी-प्रधान है, जो जंगल की सफ़ाई के लिए बने किसी स्थानीय देशज पद के हर निहितार्थ का उलटा है; शुष्क कृषि अर्ध-शुष्क पट्टी की बसी हुई खेती है, जिसमें न सफ़ाई है न स्थान-परिवर्तन। बचते हैं ‘स्थानान्तरित कृषि’ और वह विकल्प जो अंग्रेज़ी में ‘Subsistence type of Agriculture’ है, और यहाँ अभ्यर्थी को तथ्य से अधिक परीक्षकों की एक आदत जाननी पड़ती है : जब एक विकल्प ठीक वही प्रथा हो और दूसरा वह बड़ा वर्ग जिसके भीतर वह बैठती है, तब नाम जिसे ‘सन्दर्भित करता है’ वह ठीक प्रथा ही होती है। लडंग सामान्य निर्वाह खेती का पर्याय नहीं है — किसी इंडोनेशियाई किसान का सिंचित सावाह भी निर्वाह खेती है, और वह किसी हाल में लडंग नहीं है। निर्णायक विभेदन यही जोड़ी है, लडंग और सावाह : सावाह गीला, सिंचित, स्थायी रूप से मेड़बंद धान-खेत है; लडंग सूखा, असिंचित, अस्थायी वन-प्रकोष्ठ है। यह जोड़ी बैठ जाए तो उत्तर किसी परिपाटी पर निर्भर रह ही नहीं जाता। एक व्यावहारिक सावधानी : अंग्रेज़ी संस्करण में विकल्प (d) ‘Dry forming’ छपा है — पुस्तिका की टंकण-चूकों को चूक ही पढ़िए, उनसे कोई पाँचवीं अवधारणा मत गढ़िए।
- अंतिम कुंजी पर BPSC की अपनी टिप्पणी कहती है कि लडंग स्थानान्तरित कृषि का दक्षिण-पूर्व एशियाई नाम है, विशेषकर मलेशिया और इंडोनेशिया में।
- इंडोनेशियाई और मलय में *लडंग* का शाब्दिक अर्थ है बिना सिंचाई वाला (सूखा) खेत जिसमें फ़सल उगाई जाती है — *सावाह* के विपरीत, जो सिंचित आर्द्र-धान का खेत है।
- स्थानान्तरित कृषि में काटी गई वनस्पति जलाई जाती है और राख मिट्टी में पोटाश जोड़ती है; खेत में लगभग एक से तीन वर्ष फ़सल ली जाती है और फिर उसे दोबारा पनपने के लिए कहीं लम्बी परती पर छोड़ दिया जाता है।
- उसी प्रणाली के स्थानीय नाम : झूम (पूर्वोत्तर भारत), पोडु/पेंडा (आंध्र–ओडिशा), बेवर/दहिया (मध्य प्रदेश), कुमारी (केरल और पश्चिमी घाट), चेना (श्रीलंका), रे (वियतनाम), तौंग्या (म्यांमार), मिल्पा (मेक्सिको और मध्य अमेरिका), रोका (ब्राज़ील), कोनूको (वेनेज़ुएला), मसोले (कांगो)।
- बाग़ान वाला भ्रामक विकल्प क्षेत्र के बारे में सही और प्रणाली के बारे में ग़लत है : 2023–24 में दुनिया के 7.73 करोड़ टन पाम तेल में से इंडोनेशिया ने 4.4 करोड़ टन और मलेशिया ने 1.97 करोड़ टन पैदा किया, पर बाग़ान स्थायी वाणिज्यिक जागीरें हैं, स्थानान्तरित निर्वाह-प्रकोष्ठ नहीं।

- निर्वाह कृषि वाला विकल्प इसलिए चुन लेना कि वह लडंग के बारे में सही है। सही तो है, पर बहुत चौड़ा है — प्रश्न पूछता है कि यह पद किसे सन्दर्भित करता है, और वह विशिष्ट प्रथा है
- ‘वृक्षारोपण कृषि’ चुन लेना क्योंकि मलेशिया और इंडोनेशिया बाग़ान-अर्थव्यवस्थाएँ हैं; क्षेत्र सही है, खेती की प्रणाली उलटी है
- अंग्रेज़ी संस्करण में छपे ‘Dry forming’ को अलग अवधारणा मान लेना। वह dry farming की टंकण-चूक है, यानी कम वर्षा वाले इलाक़ों की बसी हुई खेती
BPSC शब्दावली सीधे जाँचता है — एक स्थानीय पद, चार नामित कृषि-प्रणालियाँ — इसलिए या तो अभ्यर्थी ने वह शब्द देखा है या नहीं, और अंक विशिष्ट तथा सामान्य विकल्प के बीच के बाल-बराबर अन्तर पर गँवाया जाता है। UPSC पद स्वयं लगभग कभी नहीं पूछता; वह परिणाम पूछता है, जैसे कौन-सी कृषि-प्रथा पर्यावरण-अनुकूल है, जिसमें स्थानान्तरित कृषि छलावे के रूप में रखी जाती है (1999), या वह इस प्रथा को मृदा अपरदन, वन अधिकार और जनजातीय आजीविका वाले कथन-समुच्चय के भीतर बैठा देता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी कृषि-प्रथा पर्यावरण-अनुकूल है ?
- (a) जैविक खेती
- (b) स्थानान्तरित कृषि
- (c) उच्च उपज देने वाली क़िस्मों की खेती
- (d) काँच-गृहों में पौधे उगाना
उत्तर(a) जैविक खेती
वही प्रथा, पर दूसरे सिरे से जाँची गई — UPSC स्थानान्तरित कृषि को छलावे के रूप में रखता है और अपेक्षा करता है कि अभ्यर्थी जानता हो कि जंगल काटकर जलाना पर्यावरण-अनुकूल विकल्प नहीं है।
“जलवायु चरम है, वर्षा अल्प है और लोग पहले घुमंतू पशुचारक हुआ करते थे।” उपर्युक्त कथन निम्नलिखित में से किस क्षेत्र का सर्वोत्तम वर्णन करता है ?
- (a) अफ़्रीकी सवाना
- (b) मध्य एशियाई स्टेपी
- (c) उत्तरी अमेरिकी प्रेयरी
- (d) साइबेरियाई टुंड्रा
उत्तर(b) मध्य एशियाई स्टेपी
उसी अध्याय का साथी विषय — घुमंतू पशुचारण और स्थानान्तरित कृषि आदिम निर्वाह अर्थव्यवस्था के दो उत्कृष्ट उदाहरण हैं, और दोनों की परीक्षा आजीविका को उस जगह से मिलाकर ली जाती है जहाँ वह चलती है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
‘मिल्पा’ किस क्षेत्र में स्थानान्तरित कृषि का स्थानीय नाम है ?
- (a)मेक्सिको और मध्य अमेरिका
- (b)श्रीलंका
- (c)वियतनाम
- (d)कांगो द्रोणी
उत्तर(a) मेक्सिको और मध्य अमेरिका — चेना श्रीलंका का नाम है, रे वियतनाम का, और मसोले कांगो द्रोणी में चलता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
स्थानान्तरित कृषि में काटी गई वनस्पति को जलाने से मिट्टी को मुख्य रूप से क्या मिलता है ?
- (a)हवा से स्थिरीकृत नाइट्रोजन
- (b)राख से पोटाश
- (c)धुएँ से सल्फ़र
- (d)बिना जली लकड़ी से ह्यूमस
उत्तर(b) राख से पोटाश — यह अल्पजीवी पोषक-उछाल है, और इसीलिए वह खेत परती पर छोड़े जाने से पहले केवल एक से तीन वर्ष की फ़सल सँभाल पाता है।