भारत, चीन और इंग्लैंड के बीच त्रिकोणीय व्यापार का मुख्य आर्थिक आधार क्या था ?
- (a)रेशम
- (b)अफीम
- (c)काली मिर्च
- (d)उपरोक्त में एक से अधिक
सही — B, अफ़ीम। यह त्रिकोण ब्रिटेन की एक भुगतान-समस्या हल करने के लिए बना था। ब्रिटेन में चीनी चाय की ज़बरदस्त माँग पैदा हो चुकी थी, पर चीन को बदले में ब्रिटेन की लगभग कोई वस्तु नहीं चाहिए थी और वह केवल चाँदी लेता था, इसलिए बहुमूल्य धातु लगातार ब्रिटेन से निकलकर कैंटन पहुँच रही थी। अफ़ीम ने इस बहाव को उलट दिया। बंगाल प्रेसीडेंसी में उगाई जाने वाली अफ़ीम पर ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार था — बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पोस्ता ज़िले, जिन्हें कंपनी की पटना और बनारस एजेंसियों के ज़रिए चलाया जाता था — कंपनी उसे संसाधित करती और कलकत्ता में निजी 'कंट्री ट्रेडरों' को नीलाम कर देती थी। चूँकि कंपनी स्वयं ऐसी वस्तु की तस्करी करती नहीं दिख सकती थी जिस पर चिंग राज्य ने प्रतिबंध लगा रखा था, इसलिए वे निजी व्यापारी पेटियाँ चीनी तट तक ले जाकर चाँदी में बेचते थे; वही चाँदी वापस कैंटन में चाय ख़रीदने में लगती और चाय इंग्लैंड चली जाती। भारत ने नशा दिया, चीन ने चाय दी और नशा खपाया, इंग्लैंड ने माँग और जहाज़रानी दी। त्रिकोण की हर भुजा का अंतिम वित्तपोषण अफ़ीम से होता था — 'मुख्य आर्थिक आधार' का यहाँ यही अर्थ है। इस निर्भरता का पैमाना इसी से सिद्ध होता है कि उसे बचाने के लिए ब्रिटेन क्या करने को तैयार था: जब चिंग आयुक्त लिन ज़ेशू ने 1839 में हुमेन में लगभग 20,000 पेटी अफ़ीम ज़ब्त कर नष्ट कर दी, तो ब्रिटेन ने युद्ध छेड़ दिया, और पहला अफ़ीम युद्ध (1839–42) नानकिंग की संधि के साथ समाप्त हुआ। दूसरे युद्ध (1856–60) को तिएनत्सिन की संधि और पेकिंग के अभिसमय ने समाप्त किया, जिन्होंने इस व्यापार को पूरी तरह वैध बना दिया।
- (a)रेशम — इस व्यापार में रेशम सचमुच चलता था — चीनी रेशम चाय के साथ ब्रिटेन जाता था, और बंगाल का कच्चा रेशम कंपनी के प्रमुख निर्यातों में से एक था। पर रेशम माल था, तंत्र नहीं: वह एक और वस्तु थी जिसके लिए ब्रिटेन को चीन को भुगतान करना पड़ता था, इसलिए उसने चाँदी की समस्या हल करने के बजाय और गहरी की। भुगतान की खाई को पाटने वाली वस्तु अफ़ीम थी।
- (c)काली मिर्च — काली मिर्च एक पुरानी और अलग कहानी की है — मालाबार का मसाला-व्यापार, जो सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों और डचों को भारत खींच लाया। उन्नीसवीं शताब्दी के अफ़ीम-चाय-चाँदी त्रिकोण में उसकी कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं थी, और चीन उसका बाज़ार भी नहीं था।
- (d)उपरोक्त में एक से अधिक — यह विकल्प प्रश्न के एक ही शब्द से कट जाता है: 'मुख्य'। किसी भी सर्वोच्चता-सूचक शब्द का उत्तर ठीक एक ही हो सकता है, इसलिए रेशम का व्यापार सचमुच होने के बावजूद वह इस व्यापार के मुख्य आर्थिक आधार का पद साझा नहीं कर सकता। BPSC का यह चौथा विकल्प जब भी दिखे, यही कसौटी लगाइए — 'एक से अधिक' तभी सही हो सकता है जब पूछी गई बात के बारे में पहले के कम-से-कम दो विकल्प एक साथ सत्य हों, और 'मुख्य', 'सबसे बड़ा' या 'पहला' वाला प्रश्न इसे असंभव बना देता है।
भारत–चीन–ब्रिटेन का यह त्रिकोण कंपनी के उत्तरकालीन साम्राज्य का वित्तीय इंजन था। बंगाल की अफ़ीम राज्य का एकाधिकार थी: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को पोस्ता उगाने के लिए पेशगी दी जाती थी और वे नियत क़ीमतों पर कच्ची अफ़ीम कंपनी की एजेंसियों को देने के लिए बाध्य थे, जहाँ उसे चीन के बाज़ार के लिए पेटियों में तैयार किया जाता था। पश्चिमी रियासतों की मालवा अफ़ीम बंबई के रास्ते इससे स्पर्धा करती थी। यह राजस्व अत्यंत महत्वपूर्ण था — दशकों तक अफ़ीम भारतीय सरकार की आय के सबसे बड़े एकल स्रोतों में रही, भू-राजस्व से ही पीछे। ब्रिटिश पक्ष में, 1813 के चार्टर अधिनियम ने कंपनी का भारतीय व्यापार का एकाधिकार समाप्त किया पर चाय के और चीन के साथ व्यापार के एकाधिकार को स्पष्ट रूप से बनाए रखा; बचा हुआ वह एकाधिकार 1833 में गया। इसी व्यवस्था ने उस धन-निष्कासन (ड्रेन ऑफ़ वेल्थ) के तर्क को भी खुराक दी जिसे आगे चलकर दादाभाई नौरोजी जैसे भारतीय राष्ट्रवादियों ने रखा: भारतीय भूमि, भारतीय किसान और भारतीय राजस्व एक ऐसे व्यापार का वित्तपोषण कर रहे थे जिसका मुनाफ़ा लंदन में जमा होता था।
विकल्प पढ़ने से पहले प्रश्न में छिपे सर्वोच्चता-सूचक शब्द को पढ़िए। 'मुख्य आर्थिक आधार' उस एक वस्तु के बारे में पूछ रहा है जिसके बिना यह त्रिकोण ढह जाता, न कि व्यापार में शामिल वस्तुओं की सूची के बारे में। रेशम और चाय — दोनों वास्तविक मात्रा में चलते थे, पर दोनों उस दिशा में चलते थे जिसमें ब्रिटेन की चाँदी ख़र्च होती थी; केवल अफ़ीम उस दिशा में चलती थी जिसमें चाँदी कमाई जाती थी। यही असमानता निर्णायक विचार है, और यही विकल्प (d) को भी समाप्त कर देती है, क्योंकि जिस प्रश्न में 'मुख्य' शब्द हो उसके दो उत्तर नहीं हो सकते। राज्य के प्रश्नपत्र के लिए बिहार वाला सूत्र पकड़े रखने योग्य है: पटना के आसपास के पोस्ता क्षेत्र बंगाल अफ़ीम एकाधिकार का हृदय थे, इसलिए यह औपनिवेशिक आर्थिक इतिहास एक स्थानीय पते के साथ आता है। याद रखने के लिए पूरा चक्र एक पंक्ति में दोहराइए — बिहार का पोस्ता, कलकत्ता की नीलामी, कैंटन की चाँदी, लंदन की चाय।
- प्रवाह की दिशा: भारतीय अफ़ीम चीन को; चीनी चाँदी व्यापारियों को; वही चाँदी चीनी चाय पर ख़र्च; चाय ब्रिटेन को — केवल अफ़ीम वाली भुजा चाँदी कमाती थी, बाक़ी ख़र्च करती थीं
- बंगाल की अफ़ीम ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार थी, जो बिहार और बनारस के क्षेत्रों में उगाई जाती और कलकत्ता में उन निजी कंट्री ट्रेडरों को नीलाम होती थी जो उसे चीन ले जाते थे
- लिन ज़ेशू ने 1839 में हुमेन में ज़ब्त की गई लगभग 20,000 पेटी अफ़ीम नष्ट कर दी, जो पहले अफ़ीम युद्ध का तात्कालिक कारण बना
- पहला अफ़ीम युद्ध 1839–42, जो नानकिंग की संधि (1842) से समाप्त हुआ; दूसरा अफ़ीम युद्ध 1856–60, जो तिएनत्सिन की संधि (1858) और पेकिंग के अभिसमय (1860) से समाप्त हुआ और जिसने इस व्यापार को वैध कर दिया
- 1813 के चार्टर अधिनियम ने कंपनी का भारतीय व्यापार एकाधिकार समाप्त किया पर चाय तथा चीन-व्यापार पर उसका एकाधिकार बनाए रखा; वह भी 1833 के चार्टर अधिनियम से समाप्त हुआ
- अठारहवीं शताब्दी के मध्य में बंगाल से कंपनी के प्रमुख निर्यात थे — कपास, रेशम, शोरा और अफ़ीम

- केवल व्यापार में शामिल वस्तु (रेशम, चाय) को उस वस्तु से भ्रमित कर देना जिसने व्यापार का वित्तपोषण किया (अफ़ीम)
- जिस प्रश्न में 'मुख्य', 'सबसे बड़ा' या 'पहला' जैसा सर्वोच्चता-सूचक शब्द हो, उसमें 'उपरोक्त में एक से अधिक' की ओर हाथ बढ़ा देना
- काली मिर्च को उन्नीसवीं शताब्दी में रख देना — वह मालाबार तट के पुर्तगाली और डच मसाला-व्यापार की वस्तु है
BPSC औपनिवेशिक आर्थिक इतिहास एक पंक्ति में पूछता है और एक ही वस्तु, व्यक्ति या तिथि की अपेक्षा करता है, प्रायः अपना घरेलू चौथा विकल्प साथ जोड़कर यह देखने के लिए कि आप बचाव का रास्ता तो नहीं लेते। UPSC यही सामग्री संस्थाओं और विधानों के रास्ते जाँचना पसंद करता है — किसी नामित काल के प्रमुख निर्यात, किसी विशेष चार्टर अधिनियम ने कंपनी के एकाधिकार के साथ क्या किया, या होम चार्जेज़ में कौन-कौन सी मदें थीं।
18वीं शताब्दी के मध्य में अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल से निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएँ थीं
- (a) कच्ची कपास, तिलहन और अफ़ीम
- (b) चीनी, नमक, जस्ता और सीसा
- (c) ताँबा, चाँदी, सोना, मसाले और चाय
- (d) कपास, रेशम, शोरा और अफ़ीम
उत्तर(d) कपास, रेशम, शोरा और अफ़ीम
वही वाणिज्य भारतीय छोर से देखा गया — UPSC बंगाल से कंपनी के प्रमुख निर्यातों में अफ़ीम की पुष्टि करता है, और यही वह भुजा है जो चीनी चाय ख़रीदने वाली चाँदी कमाती थी।
'1813 के चार्टर अधिनियम' के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसने चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया। 2. इसने कंपनी के अधीन भारतीय क्षेत्रों पर ब्रिटिश ताज की प्रभुसत्ता का दावा किया। 3. अब भारत के राजस्व पर ब्रिटिश संसद का नियंत्रण हो गया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(a) केवल 1 और 2
उसी त्रिकोण का क़ानूनी ढाँचा: संसद ने 1813 में चाय और चीन-व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार ठीक इसलिए बनाए रखा क्योंकि वह भुजा खोल देने के लिए बहुत मूल्यवान थी, और उसे 1833 में ही छोड़ा गया।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
1842 की नानकिंग की संधि, जिसने पहला अफ़ीम युद्ध समाप्त किया, के परिणामस्वरूप ब्रिटेन को सौंपा गया
- (a)मकाउ
- (b)हांगकांग
- (c)फ़ॉर्मोसा
- (d)शंघाई
उत्तर(b) हांगकांग — इस संधि ने ब्रिटिश व्यापार के लिए पाँच संधि-बंदरगाह भी खोले और चीन पर क्षतिपूर्ति लगाई। मकाउ पुर्तगाली था, और शंघाई हस्तांतरण के बजाय संधि-बंदरगाह बना।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल अफ़ीम एकाधिकार के अंतर्गत किसानों से एकत्र कच्ची अफ़ीम को संसाधित कर मुख्यतः कहाँ नीलाम किया जाता था ?
- (a)बंबई
- (b)मद्रास
- (c)कलकत्ता
- (d)सूरत
उत्तर(c) कलकत्ता — बिहार और बनारस के क्षेत्रों की बंगाल अफ़ीम वहीं उन निजी व्यापारियों को नीलाम होती थी जो उसे चीन ले जाते थे; पश्चिमी रियासतों की मालवा अफ़ीम इसके बजाय बंबई से निकलती थी।