निम्नलिखित में से फर्श टाइल्स बनाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मेलामाइन एक उदाहरण है
- (a)थर्मोप्लास्टिक
- (b)पॉलीथीन
- (c)थर्मो सेटिंग प्लास्टिक
- (d)पी वी सी
सही — C, थर्मो सेटिंग प्लास्टिक। प्लास्टिक दो कुलों में बँटते हैं, इस आधार पर कि ढल जाने के बाद ऊष्मा उनके साथ क्या करती है। थर्मोप्लास्टिक में बहुलक की लंबी शृंखलाएँ एक-दूसरे के बगल में पड़ी रहती हैं और उनके बीच केवल दुर्बल बल होते हैं; ऊष्मा शृंखलाओं को सरकने देती है, इसलिए पदार्थ नरम पड़ता है, फिर से ढाला जा सकता है और ठंडा होकर दोबारा कठोर हो जाता है — और यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है। थर्मोसेटिंग प्लास्टिक की संरचना अलग है : ढलाई के दौरान शृंखलाएँ सहसंयोजी बंधों से बँधे एक त्रिविम जाल में तिर्यक-बंधित हो जाती हैं, और वह जाल एक बार बन जाने पर ऊष्मा उसे खोल नहीं सकती। वस्तु केवल जल या झुलस सकती है; उसे दोबारा पिघलाकर ढाला कभी नहीं जा सकता। मेलामाइन दूसरे कुल का है। जिसे 'मेलामाइन' कहकर बेचा जाता है वह मेलामाइन-फ़ॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन है, जो मेलामाइन (C3H6N6, तीन अमीनो समूह वाला एक ट्राइएज़ीन वलय) और फ़ॉर्मेल्डिहाइड के संघनन से बनता है, और वह ठीक ऐसे ही तिर्यक-बंधित जाल में जमता है। यही संरचना उसे वे गुण देती है जिनकी ओर प्रश्न संकेत करता है : वह कठोर है, खरोंच-रोधी है, आग का प्रतिरोध करता है और अधिकांश प्लास्टिकों से बेहतर ताप सह लेता है, और इसीलिए NCERT की विज्ञान पाठ्यपुस्तक उसके उपयोग में फ़र्श की टाइलें, रसोई के बरतन और आग-प्रतिरोधी कपड़े गिनाती है। विकल्प की शब्दावली ध्यान से पढ़िए। परीक्षक यह नहीं पूछ रहा कि मेलामाइन रासायनिक रूप से क्या है; वह पूछ रहा है कि वह प्लास्टिक के किस वर्ग का उदाहरण है, और वह वर्ग 'थर्मो सेटिंग प्लास्टिक' है। शेष तीनों विकल्प इस विभाजन की गलत ओर हैं — एक विपरीत वर्ग है, और बाक़ी दो उसी वर्ग के नामित सदस्य।
- (a)थर्मोप्लास्टिक — ठीक विपरीत वर्ग, और यही विकल्प सबसे अधिक गलत निशान बटोरेगा, क्योंकि समय के दबाव में छपे पन्ने पर दोनों शब्द लगभग एक जैसे दिखते हैं। थर्मोप्लास्टिक गरम करने पर नरम पड़ता है और बार-बार दोबारा ढाला जा सकता है — पॉलीथीन, पी वी सी, पॉलीस्टाइरीन, नायलॉन। मेलामाइन एक बार जम जाने पर बिलकुल दोबारा नहीं ढाला जा सकता।
- (b)पॉलीथीन — पॉलीथीन एक विशिष्ट थर्मोप्लास्टिक है — एथीन का बहुलक, जो थैलियों, बोतलों, पाइपों और पैकेजिंग फ़िल्म में काम आता है। वह नरम है, आसानी से पिघलकर दोबारा ढल जाता है, और गरम बरतन के नीचे बिगड़ जाएगा, और ठीक इसीलिए वह किसी फ़र्श की टाइल या खाने की थाली का पदार्थ नहीं है।
- (d)पी वी सी — पॉलीविनाइल क्लोराइड एक और नामित थर्मोप्लास्टिक है, जो पाइपों, केबल के आवरण, फ़र्श की चादरों और खिड़की के चौखटों में काम आता है। यह यहाँ इसलिए है कि पी वी सी सचमुच फ़र्श में इस्तेमाल होता है, इसलिए केवल 'फर्श टाइल्स' शब्द पढ़ने वाला अभ्यर्थी उसकी ओर हाथ बढ़ा सकता है — पर प्रश्न यह है कि मेलामाइन किस वर्ग का है, और पी वी सी गरम करने पर नरम पड़ता है जबकि मेलामाइन नहीं।
बहुलक लंबे अणु हैं जो किसी छोटी इकाई को दोहराकर बनते हैं, और उनका स्थूल व्यवहार इस बात से निकलता है कि वे लंबे अणु आपस में किस तरह जमे हैं। रैखिक या हल्की शाखाओं वाली शृंखलाएँ, जो दुर्बल अंतराअणुक बलों से जुड़ी हों, थर्मोप्लास्टिक देती हैं : ऊष्मा उन दुर्बल बलों पर भारी पड़ती है, पदार्थ बहने लगता है, और उसे बहिर्वेधित, अंतःक्षेपण-ढलाई और पुनर्चक्रित किया जा सकता है। पॉलीथीन, पी वी सी, पॉलीस्टाइरीन, PET और नायलॉन सब इसी कुल के हैं, और पैकेजिंग पर यही कुल छाया हुआ है, ठीक इसलिए कि इसे पिघलाकर दोबारा गढ़ा जा सकता है। तिर्यक-बंधित शृंखलाएँ थर्मोसेट देती हैं : ढलाई का चरण स्वयं एक अनुत्क्रमणीय रासायनिक अभिक्रिया है, इसलिए तैयार वस्तु एक ही विशाल अणु होती है जिसे पिघलाया नहीं जा सकता। बैकेलाइट — फ़ीनॉल-फ़ॉर्मेल्डिहाइड — इस प्रकार का पहला व्यावसायिक प्लास्टिक था, और वह बिजली के स्विच तथा बरतनों के हत्थों में काम आता है, क्योंकि वह ऊष्मा और विद्युत् का कुचालक है; मेलामाइन-फ़ॉर्मेल्डिहाइड विद्यालयी स्तर का दूसरा मानक उदाहरण है, जिसे वहाँ चुना जाता है जहाँ कठोरता, ताप-प्रतिरोध और पोंछकर साफ़ हो जाने वाली सतह मायने रखती है। व्यावहारिक परिणाम दोनों ओर चलते हैं : थर्मोसेट अधिक टिकाऊ और ताप-प्रतिरोधी हैं पर उनका पुनर्चक्रण कहीं कठिन है, क्योंकि उन्हें पिघलाकर दोबारा गढ़ा नहीं जा सकता।
इस आकार के हर प्रश्न को दो आदतें हल कर देती हैं। पहली, पढ़िए कि माँगा क्या जा रहा है — कोई वर्ग या कोई पदार्थ। यहाँ प्रश्न एक पदार्थ का नाम लेता है, मेलामाइन, और सही विकल्प एक वर्ग का नाम लेता है, इसलिए जो विकल्प दूसरे पदार्थों के नाम लेते हैं (पॉलीथीन, पी वी सी) वे किसी और ही प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं और उन्हें कोई रसायन लगाए बिना, इसी आधार पर हटाया जा सकता है। दूसरी, वर्ग पहचानने के लिए रसोई वाली कसौटी लगाइए : यदि आप कल्पना कर सकते हैं कि उस पर कुछ गरम रखने से वस्तु बिगड़ जाएगी, तो वह थर्मोप्लास्टिक है; यदि वह झुकने के बजाय झुलस जाएगी, तो थर्मोसेट। मेलामाइन की थाली गरम भोजन से नरम नहीं पड़ती, और फ़र्श की टाइल गरम कमरे में नरम नहीं पड़ती, इसलिए मेलामाइन बैकेलाइट के साथ थर्मोसेट में बैठता है। एक जुड़ाव और साथ रखने लायक है, क्योंकि वह रसायन के बजाय समसामयिकी के प्रश्नों में आता है : मेलामाइन नाइट्रोजन-समृद्ध है, और इसीलिए 2008 के चीनी मिलावट कांड में उसे आपराधिक रूप से दूध और शिशु फ़ॉर्मूले में मिलाया गया — प्रोटीन की मानक जाँचें नाइट्रोजन मापती हैं और उससे धोखा खा गईं। वही यौगिक, बिलकुल दूसरे संदर्भ में।
- टाइलों और रसोई के बरतनों में प्रयुक्त मेलामाइन असल में मेलामाइन-फ़ॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन है — एक तिर्यक-बंधित थर्मोसेटिंग बहुलक, जिसे जमने के बाद न नरम किया जा सकता है, न दोबारा ढाला।
- थर्मोप्लास्टिक गरम करने पर नरम पड़ते हैं और बार-बार ढाले जा सकते हैं : पॉलीथीन, पी वी सी, पॉलीस्टाइरीन, नायलॉन और PET मानक उदाहरण हैं।
- बैकेलाइट (फ़ीनॉल-फ़ॉर्मेल्डिहाइड) दूसरा मानक थर्मोसेट है, जो बिजली के स्विचों और बरतनों के हत्थों में काम आता है, क्योंकि वह ऊष्मा और विद्युत्, दोनों का कुचालक है।
- NCERT मेलामाइन के उपयोग में फ़र्श की टाइलें, रसोई के बरतन और आग-प्रतिरोधी कपड़े गिनाती है, और नोट करती है कि वह आग का प्रतिरोध करता है तथा अन्य प्लास्टिकों से बेहतर ताप सहता है।
- थर्मोसेट का पुनर्चक्रण थर्मोप्लास्टिक की तुलना में ठीक इसलिए कठिन है कि उन्हें पिघलाया नहीं जा सकता; मेलामाइन स्वयं C3H6N6 है, एक नाइट्रोजन-समृद्ध ट्राइएज़ीन, और 2008 के दूध मिलावट कांड में इसी गुण का दुरुपयोग हुआ।

- समय के दबाव में 'थर्मो सेटिंग' को 'थर्मोप्लास्टिक' पढ़ लेना; दोनों शब्दों में थोड़ा ही अंतर है और वे यहाँ विकल्पों में पास-पास बैठे हैं
- पी वी सी चुन लेना क्योंकि पी वी सी सचमुच फ़र्श में काम आता है — प्रश्न यह पूछता है कि मेलामाइन किस वर्ग का है, यह नहीं कि फ़र्श और किन चीज़ों से बनते हैं
- यह मान लेना कि थर्मोसेट आम तौर पर 'अधिक मज़बूत प्लास्टिक' होते हैं; परिभाषक गुण अनुत्क्रमणीय तिर्यक-बंधन है, मज़बूती नहीं
BPSC बहुलकों को एक-पंक्ति के वर्गीकरण के रूप में पूछता है, जिसमें प्रश्न में कोई नामित पदार्थ होता है, और विकल्पों में वर्ग तथा पदार्थ मिला दिए जाते हैं, ताकि ध्यान से न पढ़ने वाला अभ्यर्थी वर्ग के बजाय कोई विश्वसनीय लगता पदार्थ उठा ले। UPSC किसी एक नामित बहुलक पर बहु-कथन प्रश्न पसंद करता है — क्या PET के रेशे कपास के साथ मिलाए जा सकते हैं, क्या उसकी बोतलें पुनर्चक्रित हो सकती हैं, क्या उसे स्वच्छ रूप से भस्म किया जा सकता है — जो पाठ्यपुस्तकीय श्रेणी के बजाय गुणों और पर्यावरणीय परिणामों की परीक्षा लेता है।
पॉलीएथिलीन टेरेफ़्थेलेट, जिसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन में इतना व्यापक है, के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. इसके रेशों को ऊन और कपास के रेशों के साथ मिलाकर उनके गुण बढ़ाए जा सकते हैं। 2. इससे बने पात्रों में कोई भी मादक पेय रखा जा सकता है। 3. इससे बनी बोतलें पुनर्चक्रित कर अन्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। 4. इससे बनी वस्तुओं का निपटान भस्मीकरण द्वारा बिना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के आसानी से किया जा सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a) 1 और 3
- (b) 2 और 4
- (c) 1 और 4
- (d) 2 और 3
उत्तर(a) 1 और 3
वही विषय थर्मोप्लास्टिक वाले छोर से — PET को ठीक इसलिए पिघलाकर नए उत्पादों में पुनर्चक्रित किया जा सकता है कि उसकी शृंखलाएँ तिर्यक-बंधित नहीं हैं, और यही वह गुण है जो मेलामाइन में नहीं है तथा जिस पर पूरा दो-कुल वाला वर्गीकरण टिका है।
PHBV जैव-निम्नीकरणीय बहुलक का पूरा नाम :
- (a) पॉलीहाइड्रॉक्सी ब्यूटिल वैनिलीन
- (b) पॉली हाइड्रॉक्सी ब्यूटेन वेरैट्रिक अम्ल
- (c) पॉली (3-हाइड्रॉक्सी ब्यूटिरेट-को-3 हाइड्रॉक्सी वैलरेट)
- (d) पॉली हाइड्रॉक्सी ब्यूटिरिक अम्ल वेरैट्रिक अम्ल
उत्तर(c) पॉली (3-हाइड्रॉक्सी ब्यूटिरेट-को-3 हाइड्रॉक्सी वैलरेट)
आयोग अगले वर्ष भी बहुलकों पर टिका रहा और वर्गीकरण से नामकरण की ओर बढ़ा — इसका प्रमाण कि प्लास्टिक वाला अध्याय पूरा सीखने लायक है, थर्मोप्लास्टिक-थर्मोसेट विभाजन से लेकर जैव-निम्नीकरणीय विकल्पों तक।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बिजली के स्विचों और रसोई के बरतनों के हत्थों में प्रयुक्त बैकेलाइट किसका उदाहरण है ?
- (a)थर्मोप्लास्टिक
- (b)थर्मोसेटिंग प्लास्टिक
- (c)प्राकृतिक बहुलक
- (d)प्रत्यास्थलक (इलास्टोमर)
उत्तर(b) थर्मोसेटिंग प्लास्टिक — फ़ीनॉल-फ़ॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन, जो तिर्यक-बंधित और दोबारा न ढलने वाला है, तथा ऊष्मा और विद्युत्, दोनों का कुचालक है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा प्लास्टिक गरम करके बार-बार नरम किया और दोबारा ढाला जा सकता है ?
- (a)मेलामाइन-फ़ॉर्मेल्डिहाइड
- (b)बैकेलाइट
- (c)पॉलीविनाइल क्लोराइड
- (d)वल्कनीकृत रबर
उत्तर(c) पॉलीविनाइल क्लोराइड — यह थर्मोप्लास्टिक है, इसलिए गरम करने पर नरम पड़ता है और दोबारा ढाला जा सकता है; मेलामाइन, बैकेलाइट और वल्कनीकृत रबर सभी तिर्यक-बंधित हैं और अनुत्क्रमणीय रूप से जम जाते हैं।