अक्टूबर 1943 में सुभाष चन्द्र बोस द्वारा स्थापित स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार को जापान सहित कितने देशों ने मान्यता प्रदान की थी ?
- (a)5
- (b)4
- (c)9
- (d)10
सही — C, 9। यहाँ जिस सरकार की बात है वह आज़ाद हिंद की अर्ज़ी हुकूमत, यानी स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार है, जिसकी घोषणा सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्तूबर 1943 को सिंगापुर के कैथे भवन में की और राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, युद्ध मंत्री तथा विदेश मंत्री, चारों पद स्वयं सँभाले। नौ राज्यों ने उसे राजनयिक मान्यता दी, और केवल संख्या के बजाय सूची जानना उपयोगी है, क्योंकि सूची ही संख्या को समझाती है। आठ के नाम विवरणों में एक-से मिलते हैं : जापान साम्राज्य, नात्सी जर्मनी, इतालवी सामाजिक गणराज्य — यानी सितम्बर 1943 में खड़ा किया गया मुसोलिनी का शेष-राज्य सालो, न कि इटली का राजतंत्र, जो तब तक मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था — नानजिंग की वांग जिंगवेई सरकार, थाईलैंड, बा मॉ के अधीन बर्मा राज्य, मंचूकुओ, और दूसरा फ़िलीपीन गणराज्य। नौवाँ सामान्यतः क्रोएशिया का स्वतंत्र राज्य बताया जाता है, और छोटे सारांशों से यही छूटता है, इसीलिए लापरवाह वर्णनों में कुल संख्या कभी-कभी आठ दिखती है। यह सूची जो दिखाती है वह यह है कि मान्यता पूरी तरह धुरी शक्तियों और धुरी द्वारा बिठाई गई सरकारों से आई; किसी मित्र राष्ट्र या तटस्थ राज्य ने आज़ाद हिंद को मान्यता नहीं दी, और विशी फ़्रांस, यद्यपि धुरी का सहयोगी था, उसने कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी। इस उद्यम का ईमानदार माप यही है : नौ मान्यताएँ, सब युद्ध के एक ही पक्ष से, और फिर भी इतनी कि उस सरकार को राज्यत्व का दावा मिल गया जिसे उसने बरता भी — उसने कुछ ही दिनों में ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध युद्ध घोषित किया, उसे अंडमान और निकोबार द्वीपों पर नाममात्र अधिकार-क्षेत्र दिया गया, और बोस ने 30 दिसम्बर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराया।
- (a)5 — यह वह आँकड़ा है जिस तक अभ्यर्थी केवल उन्हीं राज्यों को गिनकर पहुँचता है जिनके नाम उसे अपने आप याद आ जाते हैं — जापान, जर्मनी, इटली, बर्मा और थाईलैंड — और वहीं रुक जाता है। इसमें नानजिंग शासन, मंचूकुओ, फ़िलीपीन और क्रोएशिया छूट जाते हैं, और ठीक वही आश्रित सरकारें कुल संख्या नौ बनाती हैं।
- (b)4 — और भी कम, और अभिलेख में इसका कोई आधार नहीं। यह उन अभ्यर्थियों को खींचता है जिन्हें केवल प्रमुख धुरी शक्तियाँ और एक एशियाई सहयोगी याद है, और इसे सबसे पहले हटा देना चाहिए, क्योंकि बोस की अपनी सरकार ने बड़ी शक्तियों से कहीं आगे तक मान्यताएँ गिनाई थीं।
- (d)10 — बाल-बाल चूकने वाला विकल्प, और प्रश्नपत्र पर सबसे ख़तरनाक, क्योंकि यह केवल एक की दूरी पर है। यह तब बनता है जब सूची में कोई दसवाँ राज्य जोड़ दिया जाए — प्रायः विशी फ़्रांस, जो धुरी का सहयोगी था पर जिसने आज़ाद हिंद को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी। अभिलिखित संख्या नौ है।
स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार एक सेना को राज्य में बदलने का प्रयास थी। बोस 16-17 जनवरी 1941 की रात कलकत्ता के एल्गिन रोड पर अपनी नज़रबंदी से निकल भागे, अफ़ग़ानिस्तान और सोवियत संघ होते हुए बर्लिन पहुँचे, वहाँ उत्तर अफ़्रीका में बंदी बनाए गए भारतीयों से 'फ़्री इंडिया लीजन' खड़ी की, और फिर पनडुब्बी से दक्षिण-पूर्व एशिया आए, मई 1943 में टोक्यो और जुलाई में सिंगापुर पहुँचे। 4 जुलाई 1943 को उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता लीग और पुनर्जीवित आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व सँभाला, जिसे 1942 में पहली बार मोहन सिंह और रासबिहारी बोस ने खड़ा किया था। सेना से सरकार तक का क़दम 21 अक्तूबर 1943 को उठा, और वह मायने रखता था, क्योंकि सरकार वे काम कर सकती है जो सेना नहीं कर सकती : मान्यता प्राप्त करना, युद्ध घोषित करना, भूभाग का प्रशासन करना, अपनी मुद्रा और सम्मान जारी करना। आज़ाद हिंद ने चारों किए, कम-से-कम नाममात्र। उसकी टुकड़ियों के नाम गांधी, नेहरू, आज़ाद और सुभाष थे, और उसने लक्ष्मी सहगल के नेतृत्व में महिला युद्ध-इकाई झाँसी की रानी रेजिमेंट भी उतारी। 1944 में इंफाल-कोहिमा अभियान की विफलता के साथ उसका सैन्य प्रयास समाप्त हो गया, पर उसका राजनीतिक उत्तर-जीवन निर्णायक रहा : 1945-46 में लाल क़िले में आज़ाद हिंद फ़ौज के अधिकारियों के मुक़दमों ने जन-सहानुभूति की जो लहर पैदा की, इतिहासकार उसे ब्रिटिश वापसी के दबावों में से एक मानते हैं।
इस तरह के संख्यात्मक प्रश्नों का उत्तर तभी दिया जा सकता है जब संख्या किसी लंगर के साथ रखी जाए, क्योंकि सूखा आँकड़ा एक वर्ष की पुनरावृत्ति भी नहीं झेलता। नौ को सूची की बनावट से बाँधिए : तीन असली धुरी शक्तियाँ (जापान, जर्मनी, इतालवी सामाजिक गणराज्य), थाईलैंड एक संप्रभु सहयोगी के रूप में, न कि बिठाई गई सरकार के रूप में, एशिया में जापान-प्रायोजित चार सरकारें (नानजिंग चीन, बर्मा, मंचूकुओ, फ़िलीपीन) और एक यूरोपीय आश्रित राज्य (क्रोएशिया)। तीन जोड़ एक जोड़ चार जोड़ एक बराबर नौ, और यह ढाँचा अंक की तुलना में थामना आसान है। दो और सावधानियाँ। पहली, किस इटली की बात है, इसमें सटीक रहिए : इटली का राजतंत्र सितम्बर 1943 में मित्र राष्ट्रों के साथ युद्धविराम पर हस्ताक्षर कर चुका था, इसलिए मान्यता देने वाला इतालवी सामाजिक गणराज्य था। दूसरी, सरकार के नाम में सटीक रहिए। जब BPSC ने यही घटना 71वीं CCE में पूछी तो अंग्रेज़ी संस्करण में 'Provincial Government of India' छपा था, और आयोग ने बाद में स्वयं स्वीकार किया कि वह शब्द 'Provisional' होना चाहिए था — 1943 में 'प्रांतीय सरकार' का अर्थ होता भारत शासन अधिनियम 1935 के अंतर्गत किसी एक प्रांत को चलाने वाला मंत्रिमंडल, जो बोस की घोषणा के ठीक उलट है। यही एक शब्द वह चीज़ है जिसकी परीक्षा यह परीक्षक लेता है।
- स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार (आज़ाद हिंद की अर्ज़ी हुकूमत) की घोषणा सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्तूबर 1943 को सिंगापुर के कैथे भवन में की।
- नौ राज्यों ने उसे मान्यता दी — जापान, नात्सी जर्मनी, इतालवी सामाजिक गणराज्य, नानजिंग की वांग जिंगवेई सरकार, थाईलैंड, बर्मा राज्य, मंचूकुओ, दूसरा फ़िलीपीन गणराज्य, और नौवें के रूप में क्रोएशिया का स्वतंत्र राज्य।
- मान्यता केवल धुरी शक्तियों और उनकी आश्रित सरकारों से आई; किसी मित्र या तटस्थ राज्य ने मान्यता नहीं दी, और विशी फ़्रांस ने कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी।
- बोस ने 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में भारतीय स्वतंत्रता लीग और पुनर्जीवित आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व सँभाला था, और स्वयं कोई सैन्य पद नहीं रखा।
- नवम्बर 1943 के वृहत् पूर्वी एशिया सम्मेलन के बाद आज़ाद हिंद को अंडमान और निकोबार द्वीपों पर नाममात्र अधिकार-क्षेत्र दिया गया, और बोस ने 30 दिसम्बर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराया।

- विशी फ़्रांस को गिनकर 10 उत्तर दे देना, जिसने धुरी का साथ तो दिया पर आज़ाद हिंद को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी
- मान्यता देने वालों में इटली के राजतंत्र का नाम लेना — अक्तूबर 1943 तक इटली मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था, और मान्यता इतालवी सामाजिक गणराज्य ने दी
- अंग्रेज़ी संस्करण में 'Provisional Government' की जगह 'Provincial Government' लिख देना; 1943 में दोनों के अर्थ बिलकुल अलग हैं, और BPSC को इस चूक पर एक प्रश्न वापस लेना पड़ चुका है
BPSC इस प्रसंग को गिनती के प्रश्न में बदल देता है — कितने देश, किस महीने, किस नगर में — इसलिए अंक ठीक-ठीक अंक-संख्या पर है और आस-पास का वृत्तांत कुछ नहीं दिलाता। UPSC उसी काल को व्यक्तियों और परिणामों के रास्ते पूछता है : फ़्री इंडिया लीजन किसने खड़ी की, आज़ाद हिंद फ़ौज कहाँ बनी, शाहनवाज़ ख़ान और उनके सह-अभियुक्त कौन थे। इस विषय को तिथियों वाली कथा के रूप में तैयार कीजिए और उससे कुछ ठोस संख्याएँ जोड़ लीजिए, तो दोनों शैलियाँ सध जाती हैं।
आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) 1943 में कहाँ अस्तित्व में आई ?
- (a) जापान
- (b) बर्मा
- (c) सिंगापुर
- (d) मलाया
उत्तर(c) सिंगापुर
वही स्थान और वही वर्ष, कथा में तीन महीने पहले — बोस ने जुलाई 1943 में सिंगापुर के कैथे भवन में आज़ाद हिंद फ़ौज सँभाली और उसी नगर से उसी वर्ष अक्तूबर में अस्थायी सरकार की घोषणा की।
औपनिवेशिक भारत के संदर्भ में, शाहनवाज़ ख़ान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख़्श सिंह ढिल्लों किस रूप में याद किए जाते हैं ?
- (a) स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के नेता
- (b) 1946 की अंतरिम सरकार के सदस्य
- (c) संविधान सभा की प्रारूप समिति के सदस्य
- (d) आज़ाद हिंद फ़ौज के अधिकारी
उत्तर(d) आज़ाद हिंद फ़ौज के अधिकारी
उसी कहानी का दूसरा छोर — बोस की सेना के वे तीन अधिकारी जिन पर 1945-46 में लाल क़िले में मुक़दमा चला, और जिस मुक़दमे ने एक पराजित सैन्य अभियान को निर्णायक राजनीतिक दबाव में बदल दिया।
आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान किसने सँभाली और प्रसिद्ध युद्ध-नारा 'चलो दिल्ली' दिया ?
- (a) रासबिहारी बोस
- (b) मोहन सिंह
- (c) शाहनवाज़ ख़ान
- (d) सुभाष चंद्र बोस
उत्तर(d) सुभाष चंद्र बोस
आयोग एक वर्ष बाद बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज पर लौटा, और उसने जो भ्रामक विकल्प चुने — रासबिहारी बोस और मोहन सिंह — ठीक वही लोग हैं जिन्होंने जुलाई 1943 में बोस के सँभालने से पहले यह सेना चलाई थी, यानी अस्थायी सरकार की घोषणा से तीन महीने पहले।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सुभाष चंद्र बोस द्वारा अक्तूबर 1943 में घोषित स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार कहाँ स्थापित हुई ?
- (a)टोक्यो
- (b)रंगून
- (c)सिंगापुर
- (d)क्वालालंपुर
उत्तर(c) सिंगापुर — 21 अक्तूबर 1943 को कैथे भवन में घोषित; रंगून बाद में आज़ाद हिंद फ़ौज का अग्रिम मुख्यालय बना और टोक्यो वह जगह थी जहाँ 1943 में बोस हिदेकी तोजो से मिले।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आज़ाद हिंद फ़ौज की महिला युद्ध-इकाई का नाम किसके नाम पर रखा गया था ?
- (a)बेगम हज़रत महल
- (b)झाँसी की रानी
- (c)सरोजिनी नायडू
- (d)मातंगिनी हाज़रा
उत्तर(b) झाँसी की रानी — झाँसी की रानी रेजिमेंट, जिसकी कमान लक्ष्मी सहगल के पास थी, और साथ में गांधी, नेहरू, आज़ाद तथा सुभाष टुकड़ियाँ थीं।