निम्नलिखित में से कौन-सा रक्त का तरल भाग होता है ?
- (a)प्लाज्मा
- (b)डब्ल्यू बी सी
- (c)आर बी सी
- (d)रक्त प्लेट्लेट्स
सही — A, प्लाज्मा। रक्त को तरल संयोजी ऊतक माना जाता है, और हर संयोजी ऊतक की तरह इसमें भी एक आधात्री (मैट्रिक्स) होती है जिसमें कोशिकाएँ बैठी रहती हैं। रक्त में यह आधात्री द्रव है, और वही द्रव प्लाज्मा है। किसी नमूने को अपकेंद्रित्र में घुमाइए, वह साफ़-साफ़ अलग हो जाता है : लगभग 55 प्रतिशत आयतन तिनके जैसे पीले रंग का ऊपरी द्रव, यानी प्लाज्मा होता है, और लगभग 45 प्रतिशत नीचे जमा कोशिकाओं का गहरा लाल स्तंभ, तथा दोनों की सीमा पर श्वेत कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की पतली धूसर परत। प्लाज्मा में लगभग 90 से 92 प्रतिशत जल होता है; शेष 6 से 8 प्रतिशत प्लाज्मा प्रोटीन हैं — फ़ाइब्रिनोजन, जो थक्का जमना संभव बनाता है, ग्लोब्युलिन, जो प्रतिरक्षियों को ढोते हैं, और एल्ब्युमिन, जो वह परासरणी संतुलन बनाए रखता है जिससे जल वाहिकाओं के भीतर टिका रहता है — इनके साथ घुली हुई ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, वसाएँ, सोडियम, पोटैशियम, कैल्सियम और बाइकार्बोनेट जैसे खनिज आयन, हार्मोन, घुली गैसें तथा यूरिया जैसे नाइट्रोजनी अपशिष्ट। प्रश्न में दिया शेष सब कुछ गठित तत्त्व है, यानी उस द्रव में निलंबित कोशिका या कोशिका-खंड, न कि स्वयं उसका भाग। एक पद अभी अलग कर लेने लायक है : सीरम वह प्लाज्मा है जिसमें से फ़ाइब्रिनोजन और थक्का बनाने वाले कारक निकाल दिए गए हों, और वही थक्के के ऊपर बचा हल्का द्रव होता है।
- (b)डब्ल्यू बी सी — श्वेत रक्त कोशिकाएँ, यानी श्वेताणु, सच्ची केंद्रकयुक्त कोशिकाएँ हैं — गठित तत्त्वों में सबसे कम संख्या वाली, लगभग 6,000 से 8,000 प्रति घन मिलीमीटर — और शरीर की प्रतिरक्षा-गश्त हैं। वे प्लाज्मा में निलंबित रहती हैं और उसी से ढोई जाती हैं, पर वे कोशिकाएँ हैं, द्रव नहीं।
- (c)आर बी सी — लाल रक्त कोशिकाएँ सबसे अधिक संख्या वाला गठित तत्त्व हैं, लगभग 50 से 55 लाख प्रति घन मिलीमीटर, द्विअवतल और स्तनधारियों में केंद्रकरहित, ताकि उनमें अधिक हीमोग्लोबिन भरा जा सके। रक्त का रंग इन्हीं से है और अपकेंद्रण पर नीचे यही बैठती हैं — संकुलित कोशिका आयतन, ठीक वही अंश जो प्लाज्मा नहीं है।
- (d)रक्त प्लेट्लेट्स — प्लेटलेट्स, यानी बिंबाणु, अस्थि मज्जा में मेगाकैरियोसाइट से टूटकर बने कोशिका-खंड हैं, जिनकी संख्या लगभग 1.5 से 3.5 लाख प्रति घन मिलीमीटर है, और ये थक्का जमने की शुरुआत करते हैं। पूरी कोशिका के बजाय खंड होना इन्हें 'तरल भाग' के लिए सबसे विश्वसनीय गलत विकल्प बना देता है, पर ये फिर भी प्लाज्मा में निलंबित कणिकीय पदार्थ ही हैं।
रक्त एक संयोजी ऊतक है जिसकी बाह्यकोशिकीय आधात्री संयोग से द्रव है, और प्लाज्मा तथा गठित तत्त्वों में यह विभाजन ही पूरे विषय की संगठक धारणा है। एक वयस्क में इसका लगभग पाँच लीटर होता है। गठित तत्त्व हैं लाल रक्ताणु, श्वेताणु और बिंबाणु, और तीनों लाल अस्थि मज्जा में बनते हैं; लाल कोशिकाएँ लगभग 120 दिन जीती हैं और प्लीहा में तोड़ी जाती हैं, जिसे कभी-कभी लाल रक्त कोशिकाओं का क़ब्रिस्तान कहा जाता है, जबकि अधिकांश श्वेत कोशिकाएँ कुछ ही दिन जीती हैं। परिवहन का जो काम कोशिकाएँ नहीं कर सकतीं वह प्लाज्मा करता है : यह पचे हुए पोषक तत्त्वों को आँत से ऊतकों तक, हार्मोनों को अंतःस्रावी ग्रंथियों से उनके लक्ष्यों तक, कार्बन डाइऑक्साइड और यूरिया को फेफड़ों तथा वृक्कों तक, और ऊष्मा को पूरे शरीर में ले जाता है। इसकी प्रोटीन-मात्रा उसे थक्का जमने और तरल-आधारित प्रतिरक्षा का माध्यम भी बनाती है।
यह प्रश्न 'तरल' शब्द से तय होता है। चार में से तीन विकल्प गठित तत्त्व हैं — दो कोशिकाएँ और एक कोशिका-खंड — और केवल एक द्रव है, इसलिए जिस अभ्यर्थी के मन में प्लाज्मा बनाम गठित तत्त्वों का विभाजन है वह चूक नहीं सकता। सबसे उपयोगी मानसिक चित्र अपकेंद्रित नली का है : ऊपर तिनके जैसा पीला द्रव, नीचे लाल स्तंभ, बीच में पतली धूसर परत। यदि यह पद किसी और से गड्डमड्ड होता हो तो दो सबसे आम भ्रम नोट कर लीजिए। भौतिकी में प्लाज्मा का अर्थ आयनित गैस है, पदार्थ की चौथी अवस्था, जिसका रक्त से कोई संबंध नहीं। जीव विज्ञान में प्लाज्मा और सीरम एक नहीं हैं : प्लाज्मा में अब भी फ़ाइब्रिनोजन होता है, सीरम में नहीं, और इसीलिए प्रतिस्कंदक के बिना लिया गया रक्त सीरम देता है और प्रतिस्कंदक के साथ लिया गया रक्त प्लाज्मा।
- प्लाज्मा रक्त के आयतन का लगभग 55 प्रतिशत है; शेष 45 प्रतिशत गठित तत्त्व हैं, जिसे चिकित्सकीय रूप से हीमैटोक्रिट या संकुलित कोशिका आयतन के रूप में मापा जाता है।
- प्लाज्मा में 90-92 प्रतिशत जल है; प्लाज्मा प्रोटीन 6-8 प्रतिशत हैं और उनमें फ़ाइब्रिनोजन (थक्का), ग्लोब्युलिन (प्रतिरक्षी) तथा एल्ब्युमिन (परासरणी संतुलन) आते हैं।
- वयस्क में प्रति घन मिलीमीटर अनुमानित संख्या : लाल कोशिकाएँ 50-55 लाख, प्लेटलेट्स 1.5-3.5 लाख, श्वेत कोशिकाएँ 6,000-8,000।
- सीरम वह प्लाज्मा है जिसमें से फ़ाइब्रिनोजन और अन्य स्कंदन कारक निकल चुके हों; लाल कोशिकाएँ लगभग 120 दिन जीती हैं और प्लीहा में नष्ट होती हैं।
- एक वयस्क मनुष्य में लगभग पाँच लीटर रक्त होता है, और तीनों गठित तत्त्व लाल अस्थि मज्जा में बनते हैं।

- प्लाज्मा को सीरम से गड्डमड्ड करना — सीरम में से फ़ाइब्रिनोजन और स्कंदन कारक जा चुके होते हैं, प्लाज्मा में से नहीं
- रक्त-प्लाज्मा को भौतिकशास्त्री के प्लाज्मा, यानी पदार्थ की आयनित चौथी अवस्था, से गड्डमड्ड करना
- प्लेटलेट्स को 'तरल' मान लेना क्योंकि वे पूरी कोशिकाओं के बजाय खंड हैं; वे फिर भी निलंबित कण ही हैं
BPSC विद्यालय-स्तर का जीव विज्ञान एक पंक्ति में पूछता है, जिसमें प्रश्न का एक ही तकनीकी शब्द सारा काम करता है — यहाँ 'तरल'। UPSC उसी पाठ्यक्रम को विभेदन की परीक्षा में बदल देता है : सामान्य रक्त के बारे में कौन-सा कथन सही है, AB व्यक्ति सर्वग्राही क्यों है, रक्त के आयतन का कितना अंश कोशिकाएँ घेरती हैं — ऐसे प्रश्न जिनके लिए केवल शब्दावली नहीं, आँकड़े चाहिए।
किसी सामान्य व्यक्ति के रक्त के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a) धमनियों की तुलना में शिराएँ कम संख्या में होती हैं और किसी भी समय शरीर का कम रक्त रखती हैं
- (b) रक्त कोशिकाएँ रक्त के कुल आयतन का लगभग 70% होती हैं
- (c) श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) केवल लसीका ग्रंथियों में बनती हैं
- (d) रक्त में WBC की तुलना में प्लेटलेट्स अधिक होते हैं
उत्तर(d) रक्त में WBC की तुलना में प्लेटलेट्स अधिक होते हैं
वही रक्त-संघटन, कथन-परीक्षा के रूप में पूछा गया — उसका विकल्प (b) ठीक इसलिए विफल होता है कि कोशिकाएँ रक्त के आयतन का लगभग 45 प्रतिशत हैं और शेष 55 प्रतिशत प्लाज्मा, और BPSC का प्रश्न इसी तथ्य पर टिका है।
'AB' रक्त समूह वाले व्यक्ति को कभी-कभी सर्वग्राही कहा जाता है, क्योंकि
- (a) उसके रक्त में प्रतिजन नहीं होते
- (b) उसके रक्त में प्रतिरक्षी नहीं होते
- (c) उसके रक्त में प्रतिजन और प्रतिरक्षी दोनों नहीं होते
- (d) उसके रक्त में प्रतिरक्षी होते हैं
उत्तर(b) उसके रक्त में प्रतिरक्षी नहीं होते
यह चिकित्सकीय संदर्भ में उसी प्लाज्मा-बनाम-कोशिका विभाजन पर टिका है : ABO प्रतिजन लाल कोशिकाओं पर बैठते हैं जबकि प्रतिरक्षी प्लाज्मा में तैरते हैं, इसलिए AB व्यक्ति के प्लाज्मा में न ऐंटी-A होता है, न ऐंटी-B।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रक्त के थक्का जमने के लिए मुख्यतः कौन-सा प्लाज्मा प्रोटीन उत्तरदायी है ?
- (a)एल्ब्युमिन
- (b)ग्लोब्युलिन
- (c)फ़ाइब्रिनोजन
- (d)हीमोग्लोबिन
उत्तर(c) फ़ाइब्रिनोजन — थक्का जमते समय यह अघुलनशील फ़ाइब्रिन में बदल जाता है; एल्ब्युमिन परासरणी संतुलन बनाए रखता है, ग्लोब्युलिन प्रतिरक्षी ढोते हैं, और हीमोग्लोबिन लाल कोशिकाओं के भीतर होता है, प्लाज्मा में नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सीरम प्लाज्मा से इस बात में भिन्न है कि सीरम में नहीं होते
- (a)जल और खनिज आयन
- (b)फ़ाइब्रिनोजन और स्कंदन कारक
- (c)ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल
- (d)हार्मोन और एंज़ाइम
उत्तर(b) फ़ाइब्रिनोजन और स्कंदन कारक — रक्त का थक्का जम जाने के बाद जो बचता है वही सीरम है, इसलिए वे प्रोटीन खप चुके होते हैं।