मुस्लिम लीग ने ''प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस'' कब मनाया ?
- (a)14 अगस्त 1946
- (b)15 अगस्त 1947
- (c)16 अगस्त 1946
- (d)उपरोक्त में एक से अधिक
सही — C, 16 अगस्त 1946। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस 16 अगस्त 1946 को मनाया, और यह तिथि उसकी कार्यसमिति ने कैबिनेट मिशन योजना की अपनी स्वीकृति वापस लेने के बाद तय की थी। इस तिथि को मनमानी नहीं, याद रहने लायक बनाने वाली चीज़ घटनाओं का क्रम है। 1946 के कैबिनेट मिशन ने त्रि-स्तरीय ढाँचे और प्रांतों के अनिवार्य समूहन के साथ अखंड भारत का प्रस्ताव रखा था, और यह व्यवस्था मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में स्वायत्तता की लीग की माँग पूरी करने के लिए ही गढ़ी गई थी, तथा लीग ने उसी समझ पर उसे स्वीकार किया था। जवाहरलाल नेहरू का 10 जुलाई 1946 का यह वक्तव्य कि कांग्रेस स्वयं को समूहन वाले उपबंध से बँधा नहीं मानेगी, वही आधार हटा देता है जिस पर लीग ने स्वीकृति दी थी, और 29 जुलाई को जिन्ना ने वह स्वीकृति वापस ले ली और प्रत्यक्ष कार्यवाही का आह्वान किया। स्थिति का उनका अपना सार समझौता-रहित था: 'हमें या तो विभाजित भारत मिलेगा या नष्ट भारत।' उस दिन जो हुआ, वही इसे परीक्षा का विषय बनाता है। कलकत्ता में, जहाँ मुस्लिम लीग के हुसैन शहीद सुहरावर्दी बंगाल मंत्रिमंडल के मुखिया थे और उन्होंने 16 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था, यह आयोजन उस सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया जिसे 'महान कलकत्ता हत्याकांड' के रूप में याद किया जाता है; बहत्तर घंटों के भीतर चार हज़ार से अधिक लोग मारे गए और लगभग एक लाख बेघर हो गए। फिर हिंसा फैली — पूर्वी बंगाल के नोआखाली तक, और वहाँ से बिहार, संयुक्त प्रांत तथा पंजाब तक — और यही वह क्षण है जब विभाजन संवैधानिक बहस न रहकर ज़मीन पर एक तथ्य बन गया।
- (a)14 अगस्त 1946 — 14 अगस्त 1946 — सही दिखने के लिए गढ़ी गई तिथि, क्योंकि 14 अगस्त पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है और यहाँ का वर्ष प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस के लिए सही है। दोनों आधे जोड़ दीजिए तो वह जाना-पहचाना लगने लगता है। पर पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त 1947 है, पूरे एक वर्ष बाद, और 14 अगस्त 1946 को कुछ भी उल्लेखनीय नहीं हुआ। किसी एक घटना का सही दिन-महीना दूसरी घटना के सही वर्ष के साथ मिला देना तिथि-चारा बनाने का मानक तरीक़ा है।
- (b)15 अगस्त 1947 — 15 अगस्त 1947 — भारत का स्वतंत्रता दिवस, जो प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस के एक वर्ष एक दिन बाद पड़ता है और प्रक्रिया के भीतर के किसी क़दम का नहीं, उसके अंत का है। उस तिथि तक भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम देश को दो डोमिनियनों में बाँट चुका था। जो विकल्प पिछले वर्ष के किसी लीग-आंदोलन के प्रश्न के उत्तर में कोई प्रसिद्ध राष्ट्रीय दिवस पेश करे, उसे इसी आधार पर संदेह से देखना चाहिए।
- (d)उपरोक्त में एक से अधिक — उपरोक्त में एक से अधिक — यह तभी सही होता जब दी गई तीनों तिथियों में से कम-से-कम दो एक साथ सत्य होतीं, और एक ही दिन बुलाए गए किसी एक आयोजन की दो तिथियाँ हो ही नहीं सकतीं। फिर भी जाँच लीजिए: 14 अगस्त 1946 असत्य, 15 अगस्त 1947 असत्य, 16 अगस्त 1946 सत्य। तीन में एक सही तिथि 'एक से अधिक' नहीं होती, इसलिए यह विकल्प इतिहास से नहीं, गिनती से बाहर हो जाता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति और स्वतंत्रता के बीच के दो वर्ष संवैधानिक प्रयासों की एक शृंखला थे, जिनमें से हर एक विफल हुआ और हर विफलता ने बचे हुए विकल्प और सँकरे कर दिए। 1945 का शिमला सम्मेलन इस प्रश्न पर टूटा कि वायसराय की कार्यकारी परिषद के मुस्लिम सदस्य कौन नामित कर सकता है। फिर 1946 के कैबिनेट मिशन ने तीन स्तरों में अखंड भारत का प्रस्ताव रखा — रक्षा, विदेश और संचार सँभालने वाला कमज़ोर केंद्र, बीच में प्रांतों के समूह, और सबसे नीचे स्वयं प्रांत — जिसमें एक संविधान सभा प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुनी जानी थी। उसे व्यापक रूप से भारत को एक रखने की अंतिम गंभीर योजना माना जाता है, और ठीक इसीलिए उसका ढह जाना मायने रखता है। एक बार 29 जुलाई 1946 को लीग के हटने और 2 सितंबर को बनी अंतरिम सरकार में कांग्रेस के चले जाने के बाद बातचीत इस प्रश्न से हटकर कि संघ किस तरह का हो, इस प्रश्न पर आ गई कि संघ होगा भी या नहीं। प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस और 1946 के उत्तरार्ध तक चली हिंसा ने दोनों संगठनों के बीच बचा-खुचा भरोसा भी नष्ट कर दिया, और दस महीनों के भीतर 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना और फिर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने उस बहस को दो डोमिनियनों में बदल दिया।
चारों विकल्पों में तीन तिथियाँ हैं और एक बचाव-रास्ता, और तीनों तिथियाँ दो प्रसिद्ध वर्षगाँठों से गढ़ी गई हैं। पहले यह देखिए कि उनमें से दो, 14 और 15 अगस्त, क्रमशः पाकिस्तान और भारत के स्वतंत्रता दिवस हैं — और इनमें से कोई 1946 का नहीं है। अकेला यह प्रेक्षण विकल्प (a) और (b) को निपटा देता है, क्योंकि किसी दलीय आंदोलन के प्रश्न के उत्तर में राष्ट्रीय वर्षगाँठ पेश करने वाला परीक्षक चारा पेश कर रहा होता है। बचता है 16 अगस्त 1946, और उसकी पुष्टि दूसरे छोर से हो जाती है: लीग 29 जुलाई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना से हटी, और प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस कुछ ही सप्ताह बाद आया, इसलिए तिथि अगस्त 1946 में होनी चाहिए, 1947 में नहीं। फिर विकल्प (d) पर गिनती का नियम लगाइए: एक दिन के आयोजन की एक ही तिथि होती है, इसलिए तीनों में अधिक-से-अधिक एक ही सत्य हो सकती है। इस प्रश्न से लेने लायक व्यापक आदत यह है कि स्वतंत्रता से पहले के अंतिम दो वर्षों को ढीली तिथियों के बजाय एक क्रमबद्ध शृंखला के रूप में रखा जाए — कैबिनेट मिशन, 29 जुलाई को लीग का हटना, 16 अगस्त को प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस, 2 सितंबर को अंतरिम सरकार, 3 जून 1947 को माउंटबेटन योजना, और 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता।
- प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस 16 अगस्त 1946 को मनाया गया, जिसका आह्वान मुहम्मद अली जिन्ना ने किया था और मुस्लिम लीग की कार्यसमिति ने पूरे भारत के मुसलमानों से उस तिथि को मनाने को कहा था।
- यह लीग द्वारा 29 जुलाई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना की स्वीकृति वापस लेने के बाद आया, और वह वापसी स्वयं नेहरू के 10 जुलाई के उस वक्तव्य से हुई कि कांग्रेस योजना के अनिवार्य प्रांतीय समूहन से बँधी नहीं होगी।
- उस समय जिन्ना की चेतावनी थी: 'हमें या तो विभाजित भारत मिलेगा या नष्ट भारत।'
- कलकत्ता में यह दिन 'महान कलकत्ता हत्याकांड' बन गया: बहत्तर घंटों के भीतर 4,000 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 1,00,000 बेघर हो गए। बंगाल के मुस्लिम लीग प्रधान हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने उस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था।
- आगामी महीनों में हिंसा कलकत्ता से नोआखाली और फिर बिहार, संयुक्त प्रांत तथा पंजाब तक फैली।
- ग़लत विकल्पों की दोनों तिथियाँ कहीं और की हैं: 14 अगस्त पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है पर 1947 में, और 15 अगस्त 1947 भारत का — प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस के एक वर्ष एक दिन बाद।
यह तिथि किसी शृंखला की कड़ी के रूप में सबसे आसानी से याद रहती है। लीग 29 जुलाई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना से हटी और तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई की, जो प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस को अगस्त 1946 में रखता है और विकल्पों में दी गई 1947 की दोनों वर्षगाँठों को बाहर कर देता है।
- किसी स्वतंत्रता-वर्षगाँठ के दिन-महीने को ग़लत वर्ष से जोड़ देना। 14 अगस्त 1947 में पाकिस्तान की स्वतंत्रता का है, 1946 की किसी घटना का नहीं।
- प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस को भारत छोड़ो के आह्वान से गड्डमड्ड कर देना। दोनों अगस्त में पड़ते हैं, पर भारत छोड़ो 8 अगस्त 1942 का था और अंग्रेज़ों के विरुद्ध कांग्रेस का आंदोलन था; प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस 16 अगस्त 1946 का था और कैबिनेट मिशन योजना को लेकर मुस्लिम लीग का आंदोलन।
- तिथि वाले प्रश्न में 'उपरोक्त में एक से अधिक' को बीच का रास्ता मान लेना। एक आयोजन की एक तिथि होती है, इसलिए तीनों में अधिक-से-अधिक एक ही सही हो सकती है।
BPSC स्वतंत्रता संग्राम को सटीक तिथियों के रूप में पूछता है, और ग़लत विकल्प एक प्रसिद्ध वर्षगाँठ के दिन-महीने को दूसरी के वर्ष के साथ जोड़कर गढ़ता है, फिर सूची के अंत में 'उपरोक्त में एक से अधिक' रखकर उस अभ्यर्थी को दंडित करता है जो दो तक सिमट गया हो। UPSC प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस की तिथि लगभग कभी नहीं पूछता; वह उसके आस-पास का संवैधानिक मोड़ पूछता है — किस योजना के अस्वीकार होने से विभाजन टालने का अंतिम अवसर गया, या कैबिनेट मिशन ने वास्तव में क्या सिफ़ारिश की — इसलिए 1946 का वही पखवाड़ा एक प्रश्नपत्र के लिए कारणों की शृंखला के रूप में और दूसरे के लिए पंचांग के रूप में दोहराना पड़ता है।
भारत का विभाजन टालने का अंतिम अवसर किसके अस्वीकार होने के साथ खो गया
- (a) क्रिप्स मिशन
- (b) राजगोपालाचारी फ़ॉर्मूला
- (c) कैबिनेट मिशन
- (d) वेवेल योजना
उत्तर(c) कैबिनेट मिशन
वही निर्णय जो प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस को उसका अर्थ देता है। कैबिनेट मिशन को विभाजन टालने का अंतिम अवसर माना जाता है, और प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस वही है जिसका आह्वान मुस्लिम लीग ने उसे छोड़ते ही किया — इसलिए 70वीं के प्रश्न की तिथि वही क्षण अंकित करती है जब वह अवसर चुक गया।
कैबिनेट मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. उसने संघीय सरकार की सिफ़ारिश की। 2. उसने भारतीय न्यायालयों की शक्तियाँ बढ़ाईं। 3. उसने ICS में अधिक भारतीयों का उपबंध किया। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- (a) केवल 1
- (b) 2 और 3
- (c) 1 और 3
- (d) कोई नहीं
उत्तर(a) केवल 1
कैबिनेट मिशन ने वास्तव में क्या प्रस्तावित किया, और यही आवश्यक पृष्ठभूमि है। उसने जिस संघीय ढाँचे की सिफ़ारिश की और उसके भीतर प्रांतों का जो समूहन था, वही वे उपबंध हैं जिन्हें लीग ने स्वीकार किया और फिर 29 जुलाई 1946 को वापस ले लिया — यानी जिस दिन के बारे में यह प्रश्न है, उससे तीन सप्ताह पहले।
निम्नलिखित में से कौन कैबिनेट मिशन का सदस्य नहीं था?
- (a) पी. लॉरेंस
- (b) ए. वी. अलेक्जेंडर
- (c) जे. एंड्रयू
- (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर(c) जे. एंड्रयू
69वीं ने उसी मिशन को उसकी सदस्यता की ओर से जाँचा और पूछा कि चार नामों में से कौन कैबिनेट मिशन का नहीं था। फिर 70वीं ने उस आंदोलन की तिथि पूछी जो लीग ने उसी मिशन की योजना छोड़ने के बाद शुरू किया। दोनों प्रश्नपत्रों को मिलाकर BPSC कैबिनेट मिशन को एक निकाय के रूप में भी और एक मोड़ के रूप में भी जाँच चुका है।
'बाँटो और छोड़ो' का नारा किसने दिया?
- (a) एम.ए. अंसारी
- (b) एम.ए. जिन्ना
- (c) जवाहरलाल नेहरू
- (d) मुहम्मद इक़बाल
उत्तर(b) एम.ए. जिन्ना
जिन्ना का दूसरा प्रसिद्ध आह्वान, जिसे BPSC ने अगले वर्ष पूछा। 'बाँटो और छोड़ो' उसी चरण और उसी नेता का है जिसका अगस्त 1946 का प्रत्यक्ष कार्यवाही वाला आह्वान, और दोनों प्रश्न मिलकर दिखाते हैं कि यह प्रश्नपत्र लीग के नारों और उनके कर्ताओं को कितनी नियमितता से जाँचता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन योजना की अपनी स्वीकृति मुख्यतः किस कारण वापस ली
- (a)योजना भारत के तत्काल विभाजन का उपबंध करती थी
- (b)कांग्रेस ने कहा कि वह योजना के प्रांतों के अनिवार्य समूहन से बँधी नहीं होगी
- (c)ब्रिटिश सरकार ने नए चुनाव कराने से इनकार कर दिया
- (d)योजना ने मुसलमानों को संविधान सभा से बाहर रखा
उत्तर(b) कांग्रेस ने कहा कि वह योजना के प्रांतों के अनिवार्य समूहन से बँधी नहीं होगी — नेहरू का 10 जुलाई 1946 का वक्तव्य। लीग ने 29 जुलाई को स्वीकृति वापस ली और 16 अगस्त के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
अगस्त 1946 का महान कलकत्ता हत्याकांड उस समय हुआ जब बंगाल के प्रधान थे
- (a)ए. के. फ़ज़लुल हक़
- (b)हुसैन शहीद सुहरावर्दी
- (c)ख़्वाजा नज़ीमुद्दीन
- (d)बिधान चंद्र राय
उत्तर(b) मुस्लिम लीग के हुसैन शहीद सुहरावर्दी, जिन्होंने प्रांत में 16 अगस्त 1946 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। बिधान चंद्र राय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री स्वतंत्रता के बाद ही बने।