निम्नलिखित में से किसके लिए प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल का उपयोग किया जाता है ?
- (a)पानी के अणु को तोड़ना
- (b)CO2 की कमी
- (c)प्रकाश को अवशोषित करना
- (d)कोई कार्य नहीं
सही — C, प्रकाश को अवशोषित करना। क्लोरोफिल एक वर्णक (पिगमेंट) है, और NCERT की वर्णक की परिभाषा ही पूरा उत्तर है: 'वर्णक वे पदार्थ हैं जिनमें विशिष्ट तरंगदैर्घ्यों पर प्रकाश अवशोषित करने की क्षमता होती है।' वहीं क्लोरोफिल a को 'प्रकाश संश्लेषण से जुड़ा प्रमुख वर्णक' बताया गया है, और इसका प्रमाण दो आलेखों का मेल है — क्लोरोफिल a का अवशोषण स्पेक्ट्रम, जिसके शिखर नीले और लाल में हैं, तथा प्रकाश संश्लेषण का क्रिया स्पेक्ट्रम, जिसके शिखर उन्हीं तरंगदैर्घ्यों पर हैं। हरा प्रकाश अधिकांशतः अवशोषित होने के बजाय परावर्तित हो जाता है, और इसीलिए पत्तियाँ हरी दिखती हैं: जो रंग आप देखते हैं वही वह प्रकाश है जिसे क्लोरोफिल ने ठुकरा दिया। क्रियाविधि की दृष्टि से ये वर्णक प्रकाशतंत्र I और प्रकाशतंत्र II के भीतर प्रकाश-संग्राहक संकुलों में बैठते हैं, जहाँ सैकड़ों वर्णक अणु प्रोटीन से बँधकर एंटीना की तरह काम करते हैं; हर संकुल के केंद्र में बैठा एक अकेला क्लोरोफिल a अणु अभिक्रिया केंद्र होता है, जो PS I में 700 nm पर अवशोषित करता है — इसीलिए P700 — और PS II में 680 nm पर, इसीलिए P680। क्लोरोफिल b, ज़ैंथोफिल और कैरोटिनॉइड सहायक वर्णक हैं, जो उपयोग योग्य तरंगदैर्घ्यों का दायरा चौड़ा करते हैं, अपनी ऊर्जा क्लोरोफिल a को सौंप देते हैं और उसे प्रकाश-ऑक्सीकरण से बचाते हैं। प्रकाश संश्लेषण का बाक़ी सब कुछ अवशोषण की इसी एक क्रिया के बाद आता है। NCERT प्रकाश-अभिक्रिया में गिनाता है 'प्रकाश का अवशोषण, जल का विदलन, ऑक्सीजन का निर्मोचन, तथा उच्च-ऊर्जा रासायनिक मध्यवर्तियों ATP और NADPH का बनना' — चार अलग घटनाएँ, जिनमें से केवल पहली वर्णक की अपनी है। जल का विदलन PS II से जुड़ा जल-विदलन संकुल करता है, और कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन बाद में, स्ट्रोमा में, कैल्विन चक्र में होता है। इसलिए यह प्रश्न यही जाँच रहा है कि आप वर्णक के अपने काम को उन अभिक्रियाओं से अलग कर पाते हैं या नहीं जिनका ख़र्च उसकी ऊर्जा उठाती है।
- (a)पानी के अणु को तोड़ना — सबसे मज़बूत ग़लत उत्तर, क्योंकि प्रकाश-अपघटन सचमुच होता है और सचमुच प्रकाशतंत्र II से जुड़ा है, जिसका क्लोरोफिल a अंग है। पर NCERT सावधान है: 'जल-विदलन संकुल PS II से संबद्ध है', और 2H2O → 4H+ + O2 + 4e− वही संकुल करता है, वर्णक नहीं। क्लोरोफिल वह उत्तेजन देता है जिसके कारण विदलन आवश्यक हो जाता है — PS II को अपने खोए हुए इलेक्ट्रॉन भरने पड़ते हैं — रसायन वह स्वयं नहीं करता।
- (b)CO2 की कमी — यह विकल्प आपके हिन्दी स्तंभ में 'CO2 की कमी' छपा है, जबकि सामने के अंग्रेज़ी स्तंभ में यही विकल्प 'Reduction of CO2' है — यानी वहाँ रासायनिक अर्थ में CO2 का अपचयन कहा गया है, मात्रा में कमी नहीं। दोनों में से कोई भी पाठ लीजिए, विकल्प ग़लत ही रहता है। अपचयन वाले अर्थ में यह जैव-संश्लेषी चरण है और वह कहीं और होता है: क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में, कैल्विन चक्र में, एंज़ाइम रुबिस्को कार्बन डाइऑक्साइड को पाँच-कार्बन शर्करा राइबुलोज़ बाइफ़ॉस्फ़ेट पर स्थिर करता है, और उसमें पहले बनी ATP तथा NADPH ख़र्च होती हैं। उस चरण में कोई वर्णक भाग नहीं लेता, और जब तक ATP और NADPH हैं तब तक वह अँधेरे में भी चल सकता है। और मात्रा में कमी वाले अर्थ में भी यह क्लोरोफिल का कार्य नहीं है।
- (d)कोई कार्य नहीं — सरासर असत्य, और केवल चौथा विकल्प भरने के लिए रखा गया। क्लोरोफिल के बिना न प्रकाश-ऊर्जा का अवशोषण होगा, न उत्तेजित इलेक्ट्रॉन, न इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला, न ATP या NADPH, और इसलिए कार्बन स्थिरीकरण भी नहीं — ठीक इसीलिए जो पौधा क्लोरोफिल बनाने की क्षमता से वंचित हो जाए वह केवल रंग नहीं खोता, पीला पड़कर मर जाता है।
प्रकाश संश्लेषण एक नहीं, दो जुड़ी हुई प्रक्रियाएँ हैं, और यह जान लेना कि कोई घटना किस आधे भाग की है, इस विषय के अधिकांश प्रश्नों का उत्तर दे देता है। प्रकाश-अभिक्रिया, या प्रकाश-रासायनिक चरण, थाइलैकॉइड झिल्लियों पर होती है और उसमें प्रकाश का अवशोषण, जल का विदलन, ऑक्सीजन का निर्मोचन तथा ATP और NADPH का बनना शामिल है। जैव-संश्लेषी चरण, जिसे आज भी प्रायः अंधकार-अभिक्रिया कहा जाता है, स्ट्रोमा में होता है और उसी ATP तथा NADPH से कैल्विन चक्र के ज़रिए कार्बन डाइऑक्साइड को शर्करा में स्थिर करता है — रुबिस्को द्वारा राइबुलोज़ बाइफ़ॉस्फ़ेट का कार्बोक्सिलीकरण, फिर अपचयन, फिर ग्राही का पुनर्जनन। क्लोरोफिल पूरी तरह पहले आधे भाग का है, और उसकी चार घटनाओं में भी केवल पहली का। पत्ती के वर्णकों का वर्णलेखिकी (क्रोमैटोग्राफ़ी) से पृथक्करण एक नहीं, चार पट्टियाँ दिखाता है — क्लोरोफिल a, चमकीला या नीला-हरा; क्लोरोफिल b, पीला-हरा; ज़ैंथोफिल, पीला; और कैरोटिनॉइड, पीले से पीला-नारंगी — और इनमें केवल क्लोरोफिल a अभिक्रिया केंद्र पर बैठता है। शेष सहायक वर्णक हैं, जिनका काम उन तरंगदैर्घ्यों को पकड़ना है जो क्लोरोफिल a से छूट जाती हैं और ऊर्जा भीतर पहुँचा देना है।
ऐसे प्रश्न में तर्क करने का भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि हर विकल्प के बारे में पूछा जाए कि उसमें किस प्रकार की चीज़ का वर्णन है — कोई भौतिक घटना, कोई रासायनिक अभिक्रिया, या किसी अणु का गुण — और फिर पूछा जाए कि क्या कोई वर्णक वह कर सकता है। प्रकाश अवशोषित करना वर्णक का गुण है; शब्द की परिभाषा ही यही है। जल तोड़ना और कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन रासायनिक अभिक्रियाएँ हैं, और कोशिका में अभिक्रियाओं का उत्प्रेरण एंज़ाइम-संकुल करते हैं, वर्णक नहीं: पहला काम PS II का जल-विदलन संकुल करता है, दूसरा रुबिस्को। यही एक कसौटी (a) और (b) दोनों को हटा देती है, और किसी तरंगदैर्घ्य को याद करने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती। विकल्प (d) उस तरह का बेतुका चौथा विकल्प है जिसे देखते ही छोड़ा जा सकता है, पर यह ध्यान रखने योग्य है कि परीक्षाओं में यह सदा बेतुका नहीं होता — अवशेषी संरचनाओं के लिए 'कोई कार्य नहीं' कभी-कभी सही भी होता है, इसलिए इसे छोड़िए मत, पढ़िए। दूसरी उपयोगी जाँच स्थान की है: क्लोरोफिल और जल-विदलन संकुल थाइलैकॉइड झिल्ली पर बैठते हैं, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन स्ट्रोमा में होता है, इसलिए जो विकल्प किसी प्रक्रिया को ग़लत कक्ष में ले जाए वह अकेले इसी कारण ग़लत है।
- NCERT की परिभाषा: 'वर्णक वे पदार्थ हैं जिनमें विशिष्ट तरंगदैर्घ्यों पर प्रकाश अवशोषित करने की क्षमता होती है' — और क्लोरोफिल a 'प्रकाश संश्लेषण से जुड़ा प्रमुख वर्णक' है
- अधिकांश प्रकाश संश्लेषण स्पेक्ट्रम के नीले और लाल क्षेत्रों में होता है, जहाँ क्लोरोफिल a के अवशोषण शिखर प्रकाश संश्लेषण के क्रिया स्पेक्ट्रम से मेल खाते हैं; हरा अधिकांशतः परावर्तित हो जाता है
- अभिक्रिया-केंद्र का क्लोरोफिल a प्रकाशतंत्र I में 700 nm पर (P700) और प्रकाशतंत्र II में 680 nm पर (P680) अवशोषित करता है; सैकड़ों अन्य वर्णक अणु प्रकाश-संग्राहक एंटीना बनाते हैं
- सहायक वर्णक — क्लोरोफिल b, ज़ैंथोफिल और कैरोटिनॉइड — उपयोग योग्य तरंगदैर्घ्यों का दायरा बढ़ाते हैं, ऊर्जा क्लोरोफिल a को हस्तांतरित करते हैं, और उसे प्रकाश-ऑक्सीकरण से बचाते हैं
- जल का विदलन PS II से संबद्ध संकुल करता है: 2H2O → 4H+ + O2 + 4e−, और निर्मुक्त ऑक्सीजन का स्रोत यही है
- कार्बन डाइऑक्साइड स्ट्रोमा में रुबिस्को द्वारा कैल्विन चक्र में राइबुलोज़ बाइफ़ॉस्फ़ेट पर स्थिर होती है, और इसमें प्रकाश-अभिक्रिया से बनी ATP तथा NADPH का उपयोग होता है
उभरी हुई पंक्ति ही क्लोरोफिल का अपना काम है। बाक़ी तीन उस ऊर्जा से चुकाए गए परिणाम हैं जो क्लोरोफिल अवशोषित करता है, और हर एक को कोई अलग संकुल या एंज़ाइम करता है।
- प्रकाश-अपघटन का श्रेय क्लोरोफिल को दे देना क्योंकि वह प्रकाशतंत्र II पर होता है — जल-विदलन संकुल PS II से संबद्ध है, वर्णक उसे करता नहीं
- 'अंधकार-अभिक्रिया' को ऐसी अभिक्रिया मान लेना जिसे अँधेरा चाहिए; उसे प्रकाश-अभिक्रिया के उत्पाद चाहिए और वह दिन के उजाले में भी चलती है
- यह मान लेना कि क्लोरोफिल हरा प्रकाश अवशोषित करता है क्योंकि पत्तियाँ हरी हैं — हरा वही पट्टी है जिसे वह अधिकांशतः परावर्तित कर देता है
BPSC प्रकाश संश्लेषण को किसी एक नामित घटक से जुड़े एक चुस्त कार्य के रूप में पूछता है — क्लोरोफिल क्या करता है, रंध्र क्या करते हैं, प्रक्रिया कहाँ होती है — और ग़लत विकल्प उसी पथ के आस-पास के चरणों से उठाए जाते हैं, इसलिए भेद अलग-अलग चरण के स्तर पर करना पड़ता है। UPSC ऊर्जिकी और पारिस्थितिकी को अधिक पसंद करता है: मुक्त ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा बनती है या नहीं, कौन-सा कोशिकांग किस प्रक्रिया का घर है, और विश्व की ऑक्सीजन में प्लवक का कितना योगदान है।
निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण में सम्मिलित है?
- (a) स्थितिज ऊर्जा मुक्त होकर मुक्त ऊर्जा बनाती है
- (b) मुक्त ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित होकर संचित होती है
- (c) भोजन का ऑक्सीकरण होकर कार्बन डाइऑक्साइड और जल निकलते हैं
- (d) ऑक्सीजन ली जाती है, और कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प निकलती है
उत्तर(b) मुक्त ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित होकर संचित होती है
वही प्रक्रिया ऊर्जा के पक्ष से — क्लोरोफिल द्वारा पकड़ी गई प्रकाश-ऊर्जा ही कार्बोहाइड्रेट की रासायनिक स्थितिज ऊर्जा में बदलती है, और ठीक इसीलिए अवशोषण वर्णक की भूमिका है।
सूची I (शारीरिक प्रक्रियाएँ) को सूची II (कोशिकांग) से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची I I. प्रकाश संश्लेषण II. खनिज अवशोषण III. श्वसन IV. प्रोटीन संश्लेषण सूची II A) प्लाज़्मा झिल्ली B) क्लोरोप्लास्ट C) माइटोकॉन्ड्रिया D) राइबोसोम कूट:
- (a) I-A, II-B, III-C, IV-D
- (b) I-A, II-B, III-D, IV-C
- (c) I-B, II-A, III-C, IV-D
- (d) I-B, II-A, III-D, IV-C
उत्तर(c) I-B, II-A, III-C, IV-D
किसी कार्य को सही संरचना से जोड़ने का वही अनुशासन, एक स्तर ऊपर — यहाँ प्रक्रिया से कोशिकांग, BPSC वाले रूप में चरण से अणु; और दोनों उन उम्मीदवारों के हाथ से निकल जाते हैं जो प्रकाश संश्लेषण को एक धुँधले ढेर की तरह याद करते हैं।
पौधों में जाइलम निम्नलिखित कार्य के लिए उत्तरदायी है :
- (a) जल और घुले हुए खनिजों का परिवहन
- (b) भोजन का परिवहन
- (c) ऑक्सीजन और अन्य गैसों का परिवहन
- (d) आवश्यक अमीनो अम्लों का परिवहन
उत्तर(a) जल और घुले हुए खनिजों का परिवहन
एक संस्करण बाद BPSC ठीक यही चीज़ पूछ रहा है — पौधे के किसी एक घटक का एकमात्र कार्य बताइए, और ग़लत विकल्प वे सब असली कार्य हैं जो उसी पौधे में कोई दूसरा घटक करता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
कैल्विन चक्र क्लोरोप्लास्ट के किस भाग में होता है ?
- (a)थाइलैकॉइड झिल्ली
- (b)थाइलैकॉइड ल्यूमेन
- (c)स्ट्रोमा
- (d)बाहरी झिल्ली
उत्तर(c) स्ट्रोमा — प्रकाश-अभिक्रिया थाइलैकॉइड झिल्लियों पर होती है, जबकि रुबिस्को द्वारा कार्बन स्थिरीकरण स्ट्रोमा में, वहीं बनी ATP और NADPH का उपयोग करते हुए होता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
प्रकाशतंत्र I के अभिक्रिया-केंद्र वाले क्लोरोफिल a को कहा जाता है
- (a)P680
- (b)P700
- (c)P870
- (d)P540
उत्तर(b) P700 — PS I का अभिक्रिया केंद्र 700 nm पर अवशोषित करता है; PS II का 680 nm पर अवशोषित करता है और उसे P680 कहते हैं।