दुनिया के पहले पादप परागणकों, जिन्हें टिलयार्डेम्बिड्स कहा जाता है, के टिलयार्डेम्बी जीवाश्म हाल ही में किस देश में पाए गए थे?
- (a)ग्रीस
- (b)भारत
- (c)रूस
- (d)चीन
सही — C, रूस। यह खोज 1 मार्च 2023 को मॉस्को स्थित रूसी विज्ञान अकादमी के बोरिस्याक जीवाश्मविज्ञान संस्थान के ए० वी० ख्रामोव और टी० फ़ोरापोनोवा ने, कातोविच स्थित सिलेसिया विश्वविद्यालय के पी० वेंगियेरेक के साथ, Biology Letters 19: 20220523 में प्रकाशित की, और शीर्षक ही प्रश्न का उत्तर दे देता है: 'The earliest pollen-loaded insects from the Lower Permian of Russia'। जीवाश्म चेकार्दा स्थल से आए हैं, जो सिल्वा नदी के बाएँ तट पर, चेकार्दा गाँव से लगभग 800 मीटर उत्तर-पश्चिम में, सिस-यूराल के पर्म क्षेत्र में है — कोशेलेव्का शैल-समूह में, अर्थात् आरंभिक परमियन के कुंगुरियन युग के इरेनियन उप-युग को सौंपी गई परतों में, जिनकी सीमाएँ लगभग 28.3 से 27.3 करोड़ वर्ष पूर्व आँकी जाती हैं — और यहीं से व्यापक रूप से छपा आँकड़ा 'लगभग 28 करोड़ वर्ष पुराने' आता है। ये कीट टिलयार्डेम्बिड (Cnemidolestida: Tillyardembiidae) हैं, परमियन पॉलिनियोप्टेरा का एक छोटा कुल, जिनके अग्र-पंखों की शिरा-रचना स्टोनफ़्लाई जैसी है; चेकार्दा में ये लगभग पूरी तरह Tillyardembia वंश से प्रतिनिधित्व पाते हैं, जिसे जी० ज़ालेस्की ने 1937 में स्थापित किया था, और वहाँ से एकत्र हर कीट-नमूने के लगभग पाँच प्रतिशत ये ही हैं। दल ने Tillyardembia के 425 नमूने जाँचे और छह — यानी 1.4 प्रतिशत — पराग लिए हुए मिले: चार के सिर, वक्ष, टाँगों और उदर पर पराग के गुच्छे थे, एक में पराग-पिंड आंशिक रूप से पश्चांत्र से बाहर निकला हुआ था, और एक पहले से प्रतिवेदित नमूना ऐसा था जिसकी पुनर्जाँच से पता चला कि वह अपना पराग वस्तुतः बाहर की ओर ही लिए हुए था। दो कसौटियाँ पराग-भार को भोजन से अलग करती हैं। दाने मध्य-रेखा के साथ, जहाँ आँत चलती है, नहीं बल्कि मध्य-वक्ष और पश्च-वक्ष के पार्श्व किनारों के पास बैठे हैं, और वे चबाए या अर्ध-पचे नहीं, पूरी तरह अक्षत हैं। पाँच नमूनों से सत्ताईस सूक्ष्मदर्शी स्लाइडें बनाई गईं और 45 दाने इतने अक्षत निकले कि पहचाने जा सकें, जिनसे तीन पराग-वंश मिले — Cladaitina, Luberisaccites (जिसे व्यापक अर्थ में Cordaitina में रखा जा सकता है) और Striatites। Cladaitina और Luberisaccites पहले Rufloriaceae के Pechorostrobus तथा Cladostrobus पराग-अंगों से निकाले जा चुके थे; Rufloriaceae कॉर्डेटैंथेलियन अनावृतबीजियों का एक अंगारन कुल है — यानी बीज-पादप, ऐसे संसार के जिसमें फूल थे ही नहीं। तर्क का असली बल चयनशीलता में है। वे पराग-प्रकार चेकार्दा में विरल हैं — स्थल के पराग-वर्णक्रम में Luberisaccites 5 प्रतिशत और Cladaitina 2.2 प्रतिशत, जबकि Striatites उसमें बिलकुल अनुपस्थित — और जो प्रकार वहाँ प्रचुर तथा वायु-वाहित हैं, Protohaploxypinus 17.6 प्रतिशत और Vittatina 24.3 प्रतिशत, वे ही टिलयार्डेम्बिडों पर नहीं मिलते। किसी कीट के बाहरी तल पर चिपका पराग इस बात का सीधा प्रमाण है कि वह पादप के जनन-अंगों पर गया था, और यह अब तक ज्ञात ऐसा सबसे पुराना प्रमाण है, जो पिछले सबसे पुराने मध्य जुरासिक अभिलेख से लगभग 12 करोड़ वर्ष पहले का है। एक ईमानदार चेतावनी, जिस पर प्रश्न पर्दा डाल देता है: लेखक कहते हैं कि यह स्थापित करना असंभव है कि टिलयार्डेम्बिडों ने वास्तव में परागण किया — हो सकता है उन्होंने उन पादपों से केवल पराग लूटा हो, जैसा आज भी अनेक पुष्प-आगंतुक करते हैं — केवल इतना कहा जा सकता है कि इस प्रकार का पोषण-विशेषीकरण परागण-सहजीविता का विकासात्मक पूर्ववर्ती हो सकता है।
- (a)ग्रीस — इस कहानी में ग्रीस का कोई योगदान नहीं। उसकी जीवाश्मवैज्ञानिक प्रतिष्ठा सीनोज़ोइक कशेरुकी परतों पर टिकी है — अटिका के पिकर्मी और सामोस के उत्तर-मायोसीन स्तनपायी जीव-समुदाय इसके शास्त्रीय उदाहरण हैं — जो इन जीवाश्मों से लगभग 27 करोड़ वर्ष नए हैं और घासस्थलों तथा पुष्पी पादपों के युग के हैं, कॉर्डेटों के नहीं। ग्रीस में उस प्रकार का कोई पुराजीवी कीट Konservat-Lagerstätte नहीं है जो किसी मृदुकाय कीट को उसके वक्ष पर चिपके पराग-कणों सहित सुरक्षित रख सके।
- (b)भारत — भारतीय प्रश्नपत्र पर सहज-प्रवृत्त उत्तर, और यह निराधार भी नहीं — भारत के गोंडवाना अनुक्रमों में विश्वस्तरीय परमियन पादप-जीवाश्म हैं, सबसे बढ़कर ग्लोसोप्टेरिस वनस्पति-समुदाय, और उनसे बना कोयला भी। पर वे परतें पादपों के लिए प्रसिद्ध हैं, अपने पराग-भार सहित सुरक्षित कीटों के लिए नहीं, और यह खोज सिस-यूराल के एक नामित रूसी स्थल से जुड़ी है। यह जानना उपयोगी है कि कीट-जीवाश्म के क्षेत्र में भारत का असली दावा क्या है, क्योंकि वह बिलकुल दूसरे युग का है: गुजरात की लिग्नाइट खदानों का कैंबे अंबर, लगभग 5.4 करोड़ वर्ष पुराना और इसलिए आरंभिक इयोसीन का, जिससे काटने वाले मिज और कवक-नैट सहित समृद्ध कीट-जीव समुदाय मिला है। वह चेकार्दा से लगभग 23 करोड़ वर्ष नया है, और ऐसे संसार से आता है जिसमें पुष्पी पादप और मधुमक्खियाँ पहले से मौजूद थीं।
- (d)चीन — सबसे परिष्कृत ग़लत उत्तर, क्योंकि हाल के दशकों में चीन ने सचमुच शानदार कीट-जीवाश्म खोजों की एक धारा दी है। पर उसके प्रसिद्ध कीट-धारक निक्षेप मध्यजीवी हैं — लियाओनिंग की आरंभिक क्रिटेशस यिशियान शैल-समूह का जेहोल जैवसमुदाय सबसे जाना-पहचाना है — और शोध-पत्र की पूर्ववर्ती कार्यों की अपनी समीक्षा यही बात ठीक-ठीक कहती है: 2023 से पहले अभिलेख में जो प्राचीन पराग-वाहक कीट थे, वे अधिकतर क्रिटेशस अंबरों से आए थे, साथ में गिनी-चुनी जुरासिक कैलिग्रामैटिड लेसविंग और आरंभिक क्रिटेशस ब्रैकीसेरन मक्खियाँ, जिनके मुखांगों के पास इक्के-दुक्के दाने मिले। पुराजीवी महाकल्प में तो वृहद् जैविक अंतर्वेशन वाले अंबर हैं ही नहीं, और इस शोध-पत्र से पहले पुराजीवी महाकल्प का एकमात्र ज्ञात संधिपाद जिसके बाहरी तल पर पराग चिपका था, एक खंडित उत्तर कार्बनीफ़ेरस Arthropleura था — गोजर का एक संबंधी — जिसकी एक टाँग के आधार पर कुछ दाने थे। ठीक इसीलिए यह कीर्तिमान पूर्वी एशिया के किसी अंबर के पास नहीं, रूस के एक परमियन संपीड़न-जीवाश्म के पास है।
कीट-परागण की कथा प्रायः फूलों से आरंभ होती है, पर जीवाश्म अभिलेख इस संबंध को बार-बार अनावृतबीजियों के युग में पीछे धकेलता जाता है — शंकुधारी, साइकैड, कॉर्डेट और उनके संबंधी, जो फूलों से नहीं बल्कि शंकुओं और नग्न बीजों से जनन करते हैं। ऐसे संबंध का सबसे प्रबल संभव प्रमाण कीट की देह पर भौतिक रूप से चिपका पराग है, क्योंकि वह दिखाता है कि जीव पादप के जनन-अंगों पर था, केवल आसपास नहीं रहता था। यह प्रमाण दुर्लभ है, और पुराजीवी महाकल्प में तो सबसे दुर्लभ। राल में फँसा कीट अपना पराग बचा लेता है, पर बड़े जैविक अंतर्वेशनों वाला अंबर मध्यजीवी महाकल्प से पहले अस्तित्व में ही नहीं है; और जो कीट दफ़्न होने से पहले जल में गिरता है, उसका पराग प्रायः धुल जाता है। इसलिए 2023 तक पुराजीवी प्रमाण अप्रत्यक्ष ही थे: ऐसे शंकु और मुखांग जो कीट-आगमन के अनुकूल दिखते हैं, और कीटों की आँत के भीतर मिले पराग या बीजाणु — जो केवल इतना दिखाते हैं कि जीव ने पराग खाया, यह नहीं कि उसने पराग ढोया। जो संपीड़न-जीवाश्म बाहरी भार को फिर भी बचा लेते हैं, वे केवल असाधारण स्थलों से आते हैं — Konservat-Lagerstätten, ऐसे निक्षेप जिनकी असामान्य रसायनिकी मृदु ऊतक और सतह का सूक्ष्म विवरण बचा लेती है, जैसे किसी टर्जाइट पर रोमों की वे पंक्तियाँ जिनमें पराग अटक सकता है। चेकार्दा उन्हीं स्थलों में एक है, और यही कारण है कि कीर्तिमान वहीं बना।
भेद करने वाला एकमात्र तथ्य भूवैज्ञानिक है, प्राणिवैज्ञानिक नहीं, और वह उस अभ्यर्थी के पास भी है जिसने Tillyardembia का नाम कभी नहीं सुना। परमियन कल्प का नाम रूस के पर्म से आया है, जहाँ रॉडरिक मर्चिसन ने 1841 में इस तंत्र को परिभाषित किया था, और पर्म के आसपास का सिस-यूराल क्षेत्र उसका प्रारूप-क्षेत्र है — इसलिए पर्म क्षेत्र में आरंभिक परमियन कीट-निक्षेप का होना संयोग नहीं, बल्कि उसके लिए अपेक्षित स्थान है। चेकार्दा विश्व के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण परमियन Lagerstätten में से एक है, जहाँ से 25 गणों और 91 कुलों में फैली 260 से अधिक कीट-जातियाँ मिल चुकी हैं। उल्टी दिशा से चलना भी काम आता है: पूछिए कि विश्व के प्रसिद्ध जीवाश्म-कीट कहाँ से आते हैं, तो ईमानदार सूची है क्रिटेशस और इयोसीन के अंबर तथा मध्यजीवी झील-शेल — और इसीलिए चीन सही लगता है पर यहाँ ग़लत है, क्योंकि वे सभी निक्षेप पुराजीवी कीर्तिमान के लिए कहीं अधिक नए हैं। यह भी ध्यान दीजिए कि प्रश्न दो जगह दावे को बढ़ा-चढ़ाकर कहता है और दोनों पकड़ने योग्य हैं। टिलयार्डेम्बिडों को 'दुनिया के पहले पादप परागणक' कहना शोध-पत्र की बात से आगे जाना है — वे ज्ञात सबसे पुराने पराग-वाहक कीट हैं, और लेखक यह कहने से स्पष्ट रूप से इनकार करते हैं कि उन्होंने किसी का परागण किया। और प्रश्न के आरंभ में आया 'टिलयार्डेम्बी' वस्तुतः वंश-नाम Tillyardembia का बिगड़ा रूप है। इनमें से कोई भी त्रुटि उत्तर नहीं बदलती, और किसी को भी आपकी गति रोकने नहीं देना चाहिए: पूछा देश गया है, और शोध-पत्र का अपना शीर्षक वह दे देता है।
- 1 मार्च 2023 को Biology Letters 19: 20220523 में ए० वी० ख्रामोव, टी० फ़ोरापोनोवा और पी० वेंगियेरेक द्वारा 'The earliest pollen-loaded insects from the Lower Permian of Russia' शीर्षक से प्रकाशित; 12 नवंबर 2022 को प्राप्त और 2 फरवरी 2023 को स्वीकृत
- स्थल: चेकार्दा, सिल्वा नदी के बाएँ तट पर गाँव से 800 मीटर उत्तर-पश्चिम, रूस के सिस-यूराल के पर्म क्षेत्र में — कोशेलेव्का शैल-समूह, कुंगुरियन युग का इरेनियन उप-युग, लगभग 28.3 से 27.3 करोड़ वर्ष पुराना
- चेकार्दा से 25 गणों और 91 कुलों में 260 से अधिक कीट-जातियाँ मिल चुकी हैं, और अकेले टिलयार्डेम्बिड वहाँ एकत्र सभी कीट-नमूनों के लगभग 5 प्रतिशत हैं
- Tillyardembia के जाँचे गए 425 नमूनों में से छह (1.4 प्रतिशत) पराग लिए हुए थे; उनमें से पाँच से बनी 27 स्लाइडों में तीन वंशों के 45 पहचान-योग्य दाने मिले — Cladaitina, Luberisaccites (= व्यापक अर्थ में Cordaitina) और Striatites
- पराग एक संकीर्ण आतिथेय-परास की ओर संकेत करता है जिसमें Rufloriaceae शामिल है, कॉर्डेटैंथेलियन अनावृतबीजियों का एक अंगारन कुल, जिसके Pechorostrobus और Cladostrobus पराग-अंगों से वही दाने मिलते हैं — ऐसे बीज-पादप जो पुष्पी पादपों से पूर्णतः पहले के हैं
- कीट चयनशील थे, यूँ ही पराग से सने हुए नहीं: Luberisaccites और Cladaitina चेकार्दा के पराग-वर्णक्रम के केवल 5 प्रतिशत और 2.2 प्रतिशत हैं तथा Striatites उसमें अनुपस्थित है, जबकि स्थल के दो सर्वाधिक सामान्य वायु-वाहित प्रकार, Protohaploxypinus (17.6 प्रतिशत) और Vittatina (24.3 प्रतिशत), कीटों पर बिलकुल नहीं मिलते
- यह पराग-वाहक कीटों का सबसे पुराना अभिलेख है, जो मध्य जुरासिक के पिछले अभिलेख से लगभग 12 करोड़ वर्ष पुराना है
- लेखक परागण का दावा नहीं करते: अपरिवर्तित चर्वण मुखांगों के साथ ये पराग-लुटेरे भी हो सकते थे, और शोध-पत्र केवल इतना कहता है कि ऐसा पोषण-विशेषीकरण परागण-सहजीविता का विकासात्मक पूर्ववर्ती हो सकता है

- 'भारत' उत्तर देना क्योंकि भारतीय परमियन परतें प्रसिद्ध हैं — वे प्रसिद्ध तो हैं, पर ग्लोसोप्टेरिस पादप-समुदाय और कोयले के लिए, अपने पराग-भार सहित सुरक्षित कीटों के लिए नहीं
- वहाँ की प्रसिद्ध कीट-जीवाश्म खोजों की स्मृति से 'चीन' उत्तर देना, जिनमें अधिकतर क्रिटेशस अंबर या मध्यजीवी झील-निक्षेप हैं, पुराजीवी संपीड़न-जीवाश्म नहीं
- प्रश्न के वाक्यांश 'दुनिया के पहले पादप परागणक' को शब्दशः मान लेना — शोधकर्ता केवल सबसे पुराने पराग-वाहक कीटों का दावा करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने परागण किया या नहीं, यह स्थापित नहीं किया जा सकता
BPSC अपने विज्ञान-समसामयिकी खंड का उपयोग किसी खोज के आसपास के रिपोर्टिंग-तथ्यों के लिए करता है — कौन-सा देश, कौन-सी संस्था, कौन-सा अभियान या कौन-सा वर्ष — और बिना तर्क-शृंखला के एक शब्द का उत्तर चाहता है। UPSC उसी सुर्ख़ी के पीछे का जीवविज्ञान पूछता है: कौन-से जीव परागण-कारक हैं, कौन-सा वृक्ष किसी एक सहविकसित कीट पर निर्भर है, किसी परागणक की जनसंख्या ढह जाए तो पादप-जनन का क्या होता है। किसी विज्ञान-समाचार को एक ही बार में इन दोनों परतों के लिए पढ़ना ही दोनों परीक्षाओं को ढकता है।
निम्नलिखित प्रकार के जीवों पर विचार कीजिए: 1. चमगादड़ 2. मधुमक्खी 3. पक्षी उपर्युक्त में से कौन-सा/से परागण-कारक है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(d) 1, 2 और 3
परागण को समाचार की तरह नहीं, बुनियादी पारिस्थितिकी की तरह जाँचा गया। यह जानना कि कौन-से जीव पराग ले जाते हैं और कीट यह काम क्यों सबसे अधिक करते हैं, 28 करोड़ वर्ष पुराने पराग-लदे कीट का महत्त्व केवल चौंकाने वाला नहीं, स्पष्ट बना देता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
2023 में सबसे पुराने ज्ञात पराग-वाहक कीटों के रूप में प्रतिवेदित टिलयार्डेम्बिड जीवाश्म किस भूवैज्ञानिक कल्प के हैं?
- (a)कैंब्रियन
- (b)परमियन
- (c)जुरासिक
- (d)क्रिटेशस
उत्तर(b) परमियन — ये रूस के पर्म क्षेत्र में चेकार्दा की आरंभिक परमियन कुंगुरियन युग की परतों से आते हैं, जो लगभग 28.3 से 27.3 करोड़ वर्ष पुरानी हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
टिलयार्डेम्बिड जीवाश्मों पर चिपका मिला पराग पादपों के किस समूह से आया था?
- (a)पुष्पी पादप (आवृतबीजी)
- (b)फ़र्न
- (c)अनावृतबीजी
- (d)मॉस
उत्तर(c) अनावृतबीजी — पराग कॉर्डेटेलीज़ के Rufloriaceae की ओर संकेत करता है। परमियन में पुष्पी पादपों का विकास हुआ ही नहीं था, और ठीक इसी कारण यह खोज महत्त्वपूर्ण है।