वेक्टर टीके प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करने के लिए कैसे काम करते हैं?
- (a)किसी कमजोर या निष्क्रिय वायरस को शरीर में प्रवेश कराकर
- (b)शरीर में रोगजनकों पर सीधे हमला कर और उन्हें नष्ट कर
- (c)वायरस को किसी भिन्न वायरस के संशोधित संस्करण में रखकर
- (d)सीधे कोशिकाओं में प्रवेश कराकर और उन्हें स्पाइक प्रोटीन बनाने में सक्षम बनाकर
सही — C, वायरस को किसी भिन्न वायरस के संशोधित संस्करण में रखकर। विषाणु-वाहक (वायरल-वेक्टर) टीका किसी हानिरहित वाहक वायरस को उधार लेकर उसे माल पहुँचाने वाली गाड़ी की तरह काम में लेता है। लक्ष्य रोगकारक के किसी एक विशिष्ट प्रोटीन का कूट देने वाला जीन दूसरे, असंबद्ध वायरस के जीनोम में जोड़ दिया जाता है, और उस वायरस को पहले ही अपंग कर दिया गया होता है ताकि वह मनुष्यों में प्रतिकृति न बना सके; वही वाहक — वेक्टर — कुछ कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जीन सौंप देता है, और फिर पाने वाले की अपनी कोशिकाएँ लक्ष्य प्रतिजन बनाकर प्रदर्शित करती हैं। प्रतिरक्षा तंत्र उस प्रतिजन से मिलता है, उसके विरुद्ध उदासीनकारी प्रतिरक्षी बनाता है और हत्यारी T कोशिकाओं को तैयार कर देता है — और यह सब रोग पैदा करने वाले जीव से कभी सामना हुए बिना। भारत का सबसे व्यापक रूप से प्रयुक्त कोविड-19 टीका ठीक यही है: कोविशील्ड ऑक्सफ़ोर्ड–ऐस्ट्राज़ेनेका का ChAdOx1 nCoV-19 डिज़ाइन है, यानी प्रतिकृति-अक्षम चिंपैंज़ी एडिनोवायरस, जो SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन का पूर्ण-लंबाई कूट-अनुक्रम ढोता है और जिसका बड़े पैमाने पर निर्माण पुणे में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया करता है। रूस का स्पूतनिक V दो मानव एडिनोवायरस प्रयोग करता है, पहली ख़ुराक के लिए Ad26 और दूसरी के लिए Ad5; और इबोला के विरुद्ध Ervebo — एक जीवित पुनर्योगज वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस, जिसे ज़ायर इबोलावायरस का ग्लाइकोप्रोटीन बनाने के लिए अभियंत्रित किया गया — कोविड-19 के इस प्लेटफ़ॉर्म को प्रसिद्ध करने से पहले ही उसे लाइसेंसी उपयोग में ला चुका था। शब्दों के बारे में एक ईमानदार अपवाद: कड़ाई से देखें तो संशोधित वाहक वायरस के भीतर जो रखा जाता है वह लक्ष्य वायरस के किसी एक प्रतिजन का जीन होता है, स्वयं लक्ष्य वायरस नहीं। विकल्प (c) इस बिंदु पर ढीला है, पर वही अकेला विकल्प है जो किसी दूसरे, संशोधित वाहक वायरस का नाम तक लेता है, और वही वाहक इस प्लेटफ़ॉर्म की परिभाषक विशेषता है।
- (a)किसी कमजोर या निष्क्रिय वायरस को शरीर में प्रवेश कराकर — यह दो सबसे पुराने टीका-प्लेटफ़ॉर्मों का वर्णन है, वेक्टर प्लेटफ़ॉर्म का नहीं। जीवित-क्षीण टीका (बी० सी० जी०, मुख से दी जाने वाली पोलियो वैक्सीन, ख़सरा-रूबेला) कमज़ोर किए गए पूरे जीव का प्रयोग करता है; निष्क्रियित टीका (कोवैक्सिन/BBV152, साल्क का इंजेक्शन वाला पोलियो टीका, सिनोवैक का कोरोनावैक) उस पूरे जीव का प्रयोग करता है जिसे बीटा-प्रोपायोलैक्टोन जैसे किसी रसायन से मार दिया गया हो। दोनों में शरीर में रोगकारक स्वयं जाता है — न कोई वाहक वायरस होता है, न कोई जीन-अंतरण, और प्रश्न ठीक इसी के बारे में पूछ रहा है।
- (b)शरीर में रोगजनकों पर सीधे हमला कर और उन्हें नष्ट कर — किसी भी प्रकार का कोई टीका ऐसा नहीं करता। टीकाकरण सक्रिय प्रतिरक्षण है — वह प्रतिरक्षा तंत्र को पहले से प्रशिक्षित कर देता है और स्मृति B तथा T कोशिकाएँ पीछे छोड़ जाता है, इसलिए लड़ाई बाद में और शरीर स्वयं लड़ता है। पहले से मौजूद रोगकारक को सीधे नष्ट करना किसी प्रतिजैविक या विषाणु-रोधी औषधि का काम है, या बने-बनाए मोनोक्लोनल प्रतिरक्षियों तथा प्रतिरक्षी-सीरम से किए जाने वाले निष्क्रिय प्रतिरक्षण का। यह विकल्प जाँच रहा है कि अभ्यर्थी रोगनिरोध और चिकित्सा में अंतर कर पाता है या नहीं।
- (d)सीधे कोशिकाओं में प्रवेश कराकर और उन्हें स्पाइक प्रोटीन बनाने में सक्षम बनाकर — इस मद का सबसे अच्छा भटकाव, क्योंकि यह किसी दूसरे प्लेटफ़ॉर्म के लिए सच है और वेक्टर प्लेटफ़ॉर्म का अंतिम चरण भी उससे साझा है। यह mRNA टीका है — फ़ाइज़र-बायोएनटेक का Comirnaty, मॉडर्ना का Spikevax, भारत का GEMCOVAC-19 — जिसमें लिपिड नैनोकण में लिपटे नंगे आनुवंशिक निर्देश बिना किसी वाहक वायरस के कोशिका में चले जाते हैं। दोनों रास्ते इसी पर ख़त्म होते हैं कि कोशिका स्पाइक प्रोटीन बनाती है; विभेदक शब्द है 'सीधे'। वेक्टर टीका कोशिका तक किसी दूसरे वायरस के भीतर बैठकर पहुँचता है, और परखा जा रहा पूरा भेद यही है।
हर टीके का लक्ष्य एक ही है — प्रतिरक्षा तंत्र को किसी रोगकारक का पहचानने योग्य टुकड़ा सुरक्षित ढंग से दिखा देना, ताकि असली संक्रमण आने से पहले स्मृति कोशिकाएँ अपनी जगह पर हों — और प्लेटफ़ॉर्म केवल इसमें भिन्न हैं कि वह टुकड़ा किस तरह सामने रखा जाता है। शास्त्रीय रास्ते प्रतिजन बना-बनाया देते हैं: जीवित-क्षीण (कमज़ोर किया गया पूरा जीव), पूर्ण निष्क्रियित (मारा गया जीव), सबयूनिट या प्रोटीन (शोधित प्रतिजन, जैसा कोर्बेवैक्स तथा हेपेटाइटिस B के टीकों में) और टॉक्सॉइड (रासायनिक रूप से उदासीन किया गया जीवाणु-विष, जैसा टेटनस तथा डिप्थीरिया के लिए)। आनुवंशिक रास्ते इसके बजाय निर्देश देते हैं और प्रतिजन बनाने का काम पाने वाले की अपनी कोशिकाओं पर छोड़ देते हैं — विषाणु-वाहक टीके, DNA-प्लास्मिड टीके जैसे भारत का बिना सुई वाला ZyCoV-D, और mRNA टीके। चूँकि कोशिका के भीतर बना प्रतिजन MHC वर्ग I अणुओं पर भी प्रदर्शित होता है, इसलिए आनुवंशिक प्लेटफ़ॉर्म प्रतिरक्षियों के साथ-साथ कोशिकाघाती T-कोशिका प्रतिक्रिया भी उभारते हैं, जो पूर्ण-निष्क्रियित टीके अपेक्षाकृत कम कर पाते हैं। वाहक हानिरहित होने और मानव प्रतिरक्षा तंत्र के लिए नया होने के आधार पर चुने जाते हैं: एडिनोवायरस इसके श्रमिक-घोड़े हैं, जिन्हें E1 जीन हटाकर प्रतिकृति-अक्षम बनाया जाता है, और वाहक का वायरस होना भी ज़रूरी नहीं — क्षीण साल्मोनेला तथा वैक्सीनिया, दोनों प्रयोग हो चुके हैं।
चारों विकल्प यों ही नहीं हैं: हर एक किसी असली टीका-प्लेटफ़ॉर्म का नाम लेता है, इसलिए यह मद क्रियाविधि के प्रश्न के भेस में प्लेटफ़ॉर्म-पहचान की परीक्षा है। सबसे पहले (b) काटिए, क्योंकि वह किसी टीके का वर्णन ही नहीं करता — टीका कभी रोगकारक पर हमला नहीं करता, वह शरीर को उसके लिए तैयार करता है। इसके बाद (a) काटिए: 'कमज़ोर या निष्क्रिय' जीवित-क्षीण तथा मारे गए प्लेटफ़ॉर्मों की पाठ्यपुस्तकीय परिभाषा है, और कोवैक्सिन वही है, जबकि कोविशील्ड नहीं। इससे (c) और (d) बचते हैं, और जाल यहाँ असली है, क्योंकि वेक्टर टीका भी इसी पर ख़त्म होता है कि कोशिका स्पाइक प्रोटीन बनाए — दोनों प्लेटफ़ॉर्म केवल इसमें भिन्न हैं कि निर्देश भीतर कैसे पहुँचते हैं। एकमात्र विभेदक शब्द विकल्प (d) का 'सीधे' है: mRNA लिपिड के बुलबुले में नंगा पहुँचता है, बिना किसी वाहक जीव के, जबकि वेक्टर टीका किसी दूसरे, संशोधित वायरस में बैठकर आता है। विकल्प (c) अकेला है जो किसी वाहक वायरस का उल्लेख करता है, और वही वाहक इस प्लेटफ़ॉर्म की परिभाषा है। बिहार या भारत में कहीं भी बैठे अभ्यर्थी के लिए स्मृति की एक उपयोगी कील: जनवरी 2021 में एक ही दिन उतारे गए दोनों टीके विपरीत प्लेटफ़ॉर्मों पर बैठे थे — कोविशील्ड चिंपैंज़ी-एडिनोवायरस वाला वेक्टर, और कोवैक्सिन पूर्ण निष्क्रियित वायरस।
- कोविशील्ड ChAdOx1 nCoV-19 (AZD1222) है — प्रतिकृति-अक्षम चिंपैंज़ी एडिनोवायरस, जो SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन का पूर्ण-लंबाई कूट-अनुक्रम ढोता है। इसे ऑक्सफ़ोर्ड में ऐस्ट्राज़ेनेका के साथ डिज़ाइन किया गया और पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने बनाया, और भारत के कोविड-19 अभियान में दी गई ख़ुराकों का अत्यधिक बड़ा हिस्सा इसी का था।
- स्पूतनिक V (Gam-COVID-Vac, गामालेया संस्थान) जान-बूझकर दो भिन्न मानव एडिनोवायरस वाहक प्रयोग करता है — पहली ख़ुराक के लिए Ad26 और दूसरी के लिए Ad5 — क्योंकि पहले वाहक के विरुद्ध बने प्रतिरक्षी दोहरी ख़ुराक को कुंद कर देते। यही 'वाहक-विरोधी प्रतिरक्षा' की समस्या वह कारण भी है जिससे ऑक्सफ़ोर्ड ने चिंपैंज़ी एडिनोवायरस चुना, जिसके प्रति लगभग किसी मनुष्य में पूर्व-प्रतिरक्षा नहीं है।
- वाहक का विषाणु होना अनिवार्य नहीं है: क्षीण साल्मोनेला जैसे जीवाणु और एडिनोवायरस तथा वैक्सीनिया जैसे विषाणु — सभी पुनर्योगज वाहक के रूप में प्रयुक्त होते हैं, और इनमें से किसी को भी बनाने के लिए आनुवंशिक अभियांत्रिकी चाहिए — ठीक वही कथन-युग्म जिसे UPSC ने 2021 में अभ्यर्थियों से परखने को कहा था।
- कोवैक्सिन (BBV152, भारत बायोटेक तथा आई० सी० एम० आर०–एन० आई० वी०) पूर्ण-विषाणुकण निष्क्रियित टीका है, जिसमें ऐलम पर इमिडाज़ोक्विनोलीन यौगिक सहायक के रूप में है — यानी वही प्लेटफ़ॉर्म जिसका वर्णन विकल्प (a) करता है — इसलिए जनवरी 2021 में भारत के दोनों टीके बिलकुल अलग प्लेटफ़ॉर्मों पर थे।
- ज़ायर इबोलावायरस के विरुद्ध Ervebo (rVSV-ZEBOV) एक जीवित पुनर्योगज वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस है, जिसे इबोला का सतही ग्लाइकोप्रोटीन बनाने के लिए अभियंत्रित किया गया; 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोपीय संघ में स्वीकृत होकर उसने कोविड-19 के टीकों के आने से पहले ही विषाणु-वाहक प्लेटफ़ॉर्म को लाइसेंसी मानव उपयोग में पहुँचा दिया था।
विकल्प (c) और (d) — दोनों इसी पर ख़त्म होते हैं कि कोशिका स्पाइक प्रोटीन बनाती है। विभेदक पहुँचाने का रास्ता है: कोई वाहक वायरस हो तो वह वेक्टर टीका है, और लिपिड के बुलबुले में नंगे निर्देश हों तो mRNA टीका।
- कोविशील्ड को mRNA टीका कह देना — वही भूल जिसे UPSC ने 2022 में जान-बूझकर बोया था; कोविशील्ड चिंपैंज़ी-एडिनोवायरस वाला वेक्टर टीका है, और भारत के व्यापक अभियान का हिस्सा कोई mRNA टीका कभी नहीं रहा
- विकल्प (c) और (d) को एक ही चीज़ मान लेना क्योंकि दोनों इसी पर ख़त्म होते हैं कि कोशिका स्पाइक प्रोटीन बनाती है; प्लेटफ़ॉर्म इससे परिभाषित होता है कि निर्देश कैसे पहुँचते हैं, इससे नहीं कि कोशिका आगे क्या बनाती है
- यह मान लेना कि 'वाहक' का वायरस होना ज़रूरी है — जीवाणु भी पुनर्योगज वाहक के रूप में प्रयुक्त होते हैं, और रोग-संचरण में 'वाहक' शब्द (जैसे मच्छर) तो बिलकुल अलग चीज़ का अर्थ रखता है
BPSC क्रियाविधि सीधी-सादी भाषा में पूछता है, हर विकल्प में एक प्लेटफ़ॉर्म और कोई उत्पाद-नाम नहीं, इसलिए अभ्यर्थी को यह जानना पड़ता है कि वेक्टर टीका भौतिक रूप से करता क्या है, न कि यह कि कौन-सा ब्रांड उसे प्रयोग करता है। UPSC उसी पाठ्यक्रम पर दूसरी ओर से आता है — असली उत्पादों को प्लेटफ़ॉर्मों से जोड़कर (2022: क्या कोविशील्ड mRNA है? क्या स्पूतनिक V वेक्टर-आधारित है? क्या कोवैक्सिन निष्क्रियित है?) या किसी कथन-युग्म के ज़रिए परिभाषा जाँचकर, जैसा 2021 की उस मद में हुआ कि पुनर्योगज वाहक टीके जीवाणुओं तथा विषाणुओं का वाहक के रूप में प्रयोग करते हैं।
'पुनर्योगज वाहक टीकों' (Recombinant Vector Vaccines) से जुड़े हाल के विकासों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इन टीकों के विकास में आनुवंशिक अभियांत्रिकी का प्रयोग होता है। 2. जीवाणुओं तथा विषाणुओं का प्रयोग वाहक के रूप में होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(c) 1 और 2 दोनों
वही प्लेटफ़ॉर्म, दो वर्ष पहले और अपने औपचारिक नाम से पूछा गया: UPSC इस BPSC मद द्वारा वर्णित क्रियाविधि के दोनों आधे हिस्सों की पुष्टि करता है — कि आनुवंशिक अभियांत्रिकी से कोई जीन किसी वाहक में जोड़ा जाता है, और यह कि वाहक विषाणु जितनी ही सहजता से जीवाणु भी हो सकता है।
कोविड-19 महामारी की रोकथाम हेतु निर्मित टीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने कोविशील्ड नामक कोविड-19 टीका mRNA प्लेटफ़ॉर्म से बनाया। 2. स्पूतनिक V टीका वाहक-आधारित प्लेटफ़ॉर्म से बनाया गया है। 3. कोवैक्सिन निष्क्रियित रोगकारक पर आधारित टीका है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(b) केवल 2 और 3
इसी प्रश्न का उत्पाद-पक्ष वाला रूप, और वह ठीक उसी जाल पर घूमता है जो यहाँ विकल्प (d) में बना है — ग़लत कथन वही है जो कोविशील्ड को mRNA टीका कहता है, जबकि वह चिंपैंज़ी-एडिनोवायरस वाला वेक्टर टीका है, और स्पूतनिक V को सही रूप से वाहक-आधारित बताया गया है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
भारत में प्रयुक्त निम्नलिखित कोविड-19 टीकों में से कौन-सा एक विषाणु-वाहक प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है?
- (a)कोवैक्सिन
- (b)कोविशील्ड
- (c)कोर्बेवैक्स
- (d)GEMCOVAC-19
उत्तर(b) कोविशील्ड — प्रतिकृति-अक्षम चिंपैंज़ी एडिनोवायरस, जो SARS-CoV-2 का स्पाइक जीन ढोता है। कोवैक्सिन पूर्ण-विषाणुकण निष्क्रियित है, कोर्बेवैक्स प्रोटीन सबयूनिट टीका है और GEMCOVAC-19 mRNA टीका।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
किसी विषाणु-वाहक टीके में वाहक वस्तुतः क्या चीज़ पाने वाले की कोशिकाओं तक ले जाता है?
- (a)रोग पैदा करने वाले वायरस का जीवित पर कमज़ोर किया गया रूप
- (b)रोग पैदा करने वाले वायरस के विरुद्ध बने-बनाए प्रतिरक्षी
- (c)रोग पैदा करने वाले वायरस के किसी एक प्रतिजन का कूट देने वाला जीन
- (d)रोगकारक द्वारा बनाया गया, रासायनिक रूप से निष्क्रियित विष
उत्तर(c) रोग पैदा करने वाले वायरस के किसी एक प्रतिजन का कूट देने वाला जीन — वाहक केवल पहुँचाने का साधन है, और उसके बाद वह प्रतिजन पाने वाले की अपनी कोशिकाएँ बनाती हैं। (a) जीवित-क्षीण टीके का वर्णन है, (b) निष्क्रिय प्रतिरक्षण का और (d) टॉक्सॉइड टीके का।