दिए गए कथन और निष्कर्ष को ध्यानपूर्वक पढ़िए। निम्नलिखित में से कौन-सा/से निष्कर्ष तार्किक रूप से कथन के अनुसार है/हैं, विचार कीजिए। कथन : किसी एकदिवसीय क्रिकेट मैच में टीम ने कुल 200 रन बनाए, जिनमें से 160 रन स्पिनरों द्वारा बनाए गए। निष्कर्ष : 1. टीम के 80% खिलाड़ी स्पिनर थे। 2. ओपनिंग बल्लेबाज स्पिनर थे। सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1 कथन का अनुसरण करता है
- (b)केवल 2 कथन का अनुसरण करता है
- (c)1 और 2 दोनों कथन का अनुसरण करते हैं
- (d)न तो 1 और न ही 2 कथन का अनुसरण करता है
सही — D, न तो 1 और न ही 2 कथन का अनुसरण करता है। इस परिवार का नियम यह है कि कोई निष्कर्ष तभी अनुसरण करता है जब कथन के सत्य रहते हुए वह असत्य हो ही न सके, और हर निष्कर्ष को यह कसौटी अलग-अलग झेलनी पड़ती है। पहले निष्कर्ष 1 लीजिए। कथन दो राशियाँ देता है, और दोनों रनों की हैं: कुल 200 और स्पिनरों द्वारा 160। 200 में से 160 सचमुच 80 प्रतिशत है — पर रनों का 80 प्रतिशत, खिलाड़ियों का नहीं। निष्कर्ष चुपचाप उस आँकड़े को किसी दूसरी आबादी पर सरका देता है। इसे हराने के लिए एक प्रति-उदाहरण काफ़ी है: सातवें और आठवें क्रम पर बल्लेबाज़ी करते दो स्पिनर मिलकर पूरे 160 रन बना सकते हैं, और ग्यारह खिलाड़ियों की टीम में दो खिलाड़ी 18 प्रतिशत होते हैं, 80 नहीं। यह निष्कर्ष शब्दशः उपलब्ध भी नहीं है, क्योंकि ग्यारह का 80 प्रतिशत 8.8 खिलाड़ी होते हैं। अब निष्कर्ष 2। कथन बल्लेबाज़ी क्रम का उल्लेख ही नहीं करता — वह यह दर्ज करता है कि रन किसने बनाए, यह नहीं कि वे कब आए। स्पिनरों का आठ से ग्यारह क्रम पर होना और मिलकर 160 रन बना लेना कथन की हर बात के पूरी तरह अनुरूप है, इसलिए कथन के सत्य रहते हुए भी यह निष्कर्ष असत्य हो सकता है। इसके विफल होने का ठीक कारण नोट कीजिए: यह नहीं कि वह वास्तविक मैच में असत्य है, बल्कि यह कि कथन मौन है, और मौन समर्थन नहीं होता। दोनों निष्कर्ष अनिवार्यता की कसौटी पर विफल हैं, इसलिए उत्तर (d) है।
- (a)केवल 1 कथन का अनुसरण करता है — यही वह जाल है जिसके इर्द-गिर्द यह मद बनी है, क्योंकि निष्कर्ष 1 का अंकगणित सचमुच सही है — 200 में से 160 वास्तव में 80 प्रतिशत है। ग़लत है आधार: प्रतिशत रनों पर निकाला जाता है और फिर खिलाड़ियों के बारे में दावा कर दिया जाता है। संख्या वही रखते हुए आधार बदल देना कथन-और-निष्कर्ष वाली मदों में सबसे अधिक बोई जाने वाली भूल है, और वह ऐसी गढ़ी जाती है कि अनुमान के बजाय गणना जैसी लगे।
- (b)केवल 2 कथन का अनुसरण करता है — इसे वे अभ्यर्थी चुनते हैं जो तर्क करते हैं कि 200 में से 160 रन बनाने का अर्थ है कि स्पिनरों ने लंबे समय तक बल्लेबाज़ी की होगी, और इसलिए उन्होंने पारी की शुरुआत की होगी। यह इस बारे में निर्णय है कि क्या संभावित है, इस बारे में नहीं कि क्या अनिवार्य है — जल्दी विकेट गिर जाने के बाद टीम के सातवें और आठवें क्रम के बल्लेबाज़ पूरी पारी खेल सकते हैं। विश्वसनीयता निष्पत्ति नहीं है, और कथन किसी के लिए कोई बल्लेबाज़ी क्रम तय नहीं करता।
- (c)1 और 2 दोनों कथन का अनुसरण करते हैं — इस विकल्प के लिए एक साथ दोनों भूलें चाहिए: प्रतिशत को रनों से खिलाड़ियों पर सरका देना, और वह बल्लेबाज़ी क्रम भीतर ले आना जो कथन कभी देता ही नहीं। यह उन अभ्यर्थियों को खींचता है जो दोनों निष्कर्षों को एक पैकेज की तरह पढ़ते हैं और पूछते हैं कि पूरा चित्र समग्र रूप से उचित लगता है या नहीं, न कि हर निष्कर्ष को अकेले कथन के विरुद्ध अलग-अलग जाँचते हैं।
कथन-और-निष्कर्ष वाली मदें निगमनात्मक अनुशासन जाँचती हैं, सामान्य ज्ञान नहीं। आपको एक छोटा गद्यांश दिया जाता है और पूछा जाता है कि सूचीबद्ध निष्कर्षों में से कौन तार्किक रूप से उससे निकलते हैं, और कसौटी अनिवार्यता है: कोई निष्कर्ष तभी निकलता है जब कथन को मान लेने पर उस निष्कर्ष का असत्य होना असंभव हो जाए। तीन काम के नियम इस परिवार को सुलझा देते हैं। पहला, केवल वही प्रयोग कीजिए जो कथन कहता है — कोई बाहरी ज्ञान नहीं, कोई मानी हुई पृष्ठभूमि नहीं, चाहे वह कितनी ही स्पष्ट क्यों न लगे। दूसरा, जो निष्कर्ष कथन से आगे जाता है वह अनुसरण नहीं करता, भले ही वह वास्तविक जगत में सत्य हो; और उलटे, 'अनुसरण नहीं करता' का अर्थ यह दावा नहीं है कि निष्कर्ष असत्य है, केवल यह कि कथन उसे सिद्ध नहीं करता। तीसरा, एक समय में एक निष्कर्ष जाँचिए, और अलग-थलग करके, क्योंकि विकल्प-सूची ठीक इसी को पुरस्कृत करने और दोनों को एक कहानी की तरह साथ पढ़ने को दंडित करने के लिए बनी है। परीक्षक जो भूलें बोते हैं वे एक छोटा समुच्चय हैं: प्रतिशत का आधार बदल देना, ऐसा ब्योरा जोड़ देना जिसे कथन छोड़ देता है, निष्पत्ति को उलट देना, और सह-संबंध को कारण बना देना।
भरोसेमंद प्रक्रिया यह है कि हर निष्कर्ष को हाँ-या-ना वाले प्रश्न में बदल दिया जाए — क्या कथन सत्य रहते हुए यह निष्कर्ष असत्य हो सकता है? — और उसका उत्तर भावना से नहीं, किसी ठोस प्रति-उदाहरण से दिया जाए। निष्कर्ष 1 के लिए प्रति-उदाहरण तुरंत है: दो स्पिनरों को सातवें और आठवें क्रम पर रखिए, उन्हें 160 जोड़ने दीजिए जबकि बाक़ी नौ 40 बनाएँ, तो कथन शब्द-दर-शब्द टिका रहता है और टीम में स्पिनर 18 प्रतिशत हैं। निष्कर्ष 2 के लिए प्रति-उदाहरण उतना ही आसान है: वही दो स्पिनर आठवें और नौवें क्रम पर आते हैं, इसलिए ओपनर स्पिनर नहीं हैं और कथन तब भी ठीक-ठीक सत्य है। दोनों प्रति-उदाहरण खड़े होते ही उत्तर तय हो जाता है। इस विशेष मद का विभेदक तथ्य यह है कि कथन की हर संख्या रनों की संख्या है, और दोनों में से कोई निष्कर्ष रनों के बारे में नहीं है — निष्कर्ष 1 टीम की बनावट के बारे में है और निष्कर्ष 2 बल्लेबाज़ी क्रम के बारे में, और कथन इनमें से कुछ भी नहीं नापता। दो अतिरिक्त सावधानियाँ साथ ले जाने योग्य हैं। यहाँ क्रिकेट का ज्ञान देनदारी है: यह जानना कि स्पिनर आम तौर पर नीचे बल्लेबाज़ी करते हैं, निष्कर्ष 2 को हराने वाली बात नहीं है, और यह जानना कि कोई टीम कभी-कभी चार स्पिनर खिलाती है, निष्कर्ष 1 को हराने वाली बात नहीं है। और चौथा विकल्प, 'न तो 1 और न ही 2', इस परिवार में वास्तविक उत्तर है, अंतिम सहारा नहीं — प्रश्न-निर्माता उसे ठीक इसलिए रखते हैं कि अभ्यर्थी यह निष्कर्ष निकालने में हिचकते हैं कि कुछ भी अनुसरण नहीं करता।
- 200 में से 160 रनों का 80 प्रतिशत है; कथन इस बारे में कोई आँकड़ा देता ही नहीं कि कितने खिलाड़ी स्पिनर थे, इसलिए इस 80 प्रतिशत का टीम-बनावट के संदर्भ में कोई अर्थ नहीं है
- क्रिकेट टीम ग्यारह खिलाड़ी उतारती है, इसलिए 'टीम के 80%' का अर्थ 8.8 खिलाड़ी होगा — कोई पूर्ण संख्या नहीं, जो तर्क की जाँच से पहले ही निष्कर्ष 1 को अनुपलब्ध कर देता है
- एक प्रति-उदाहरण किसी निष्कर्ष को हरा देता है: 200 में से 160 रन बनाने वाले दो स्पिनर ग्यारह खिलाड़ियों की टीम का 18 प्रतिशत हैं और कथन की किसी बात का खंडन नहीं करते
- इस परिवार की कसौटी अनिवार्यता है, विश्वसनीयता नहीं — निष्कर्ष तभी अनुसरण करता है जब कथन के सत्य रहते हुए वह असत्य हो ही न सके
- 'अनुसरण नहीं करता' और 'असत्य है' एक बात नहीं: निष्कर्ष 2 वास्तविक मैच में सत्य हो सकता है, पर वह इसलिए विफल है कि कथन बल्लेबाज़ी क्रम का उल्लेख ही नहीं करता
दोनों निष्कर्ष एक ही तरह हारते हैं — ऐसी एक स्थिति गढ़कर जिसमें कथन सत्य हो और निष्कर्ष नहीं। ध्यान दीजिए कि निष्कर्ष 2 असत्य होने के कारण नहीं, कथन के मौन रहने के कारण विफल होता है।
- किसी प्रतिशत को दूसरे आधार पर ढो ले जाना — रनों का 80 प्रतिशत खिलाड़ियों का 80 प्रतिशत पढ़ लेना
- क्रिकेट के बाहरी ज्ञान का प्रयोग करना, चाहे किसी निष्कर्ष के समर्थन में या उसे अस्वीकार करने में; गिनती केवल कथन की है
- 'संभावित' या 'संभव' को 'अनुसरण करता है' मान लेना, और 'न तो 1 और न ही 2' को वास्तविक उत्तर के बजाय कायर का विकल्प समझ लेना
BPSC इस परिवार को सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के अंत में तर्कशक्ति के छोटे खंड में रखता है, अपने सबसे सादे दो-निष्कर्ष वाले रूप में और मानक चार विकल्पों के साथ — केवल 1, केवल 2, दोनों, कोई नहीं — और जाल ऐसी संख्या से गढ़ता है जो सही तो है पर ग़लत आधार से जुड़ी है। UPSC तार्किक विवेचन और विश्लेषणात्मक क्षमता को सी-सैट प्रश्नपत्र II में रखता है, जहाँ वही अनुशासन इस दो-निष्कर्ष वाले प्रारूप के बजाय अधिक बार न्यायवाक्य या कथन-और-पूर्वधारणा की मद के रूप में आता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
कथन : किसी दुकान द्वारा पिछले महीने बेची गई 400 पुस्तकों में से 320 पाठ्यपुस्तकें थीं। निष्कर्ष : 1. दुकान के स्टॉक का 80% पाठ्यपुस्तकें हैं। 2. दुकान केवल पाठ्यपुस्तकें बेचती है। कौन-सा/से निष्कर्ष कथन का अनुसरण करता/करते है/हैं?
- (a)केवल 1 अनुसरण करता है
- (b)केवल 2 अनुसरण करता है
- (c)1 और 2 दोनों अनुसरण करते हैं
- (d)न तो 1 और न ही 2 अनुसरण करता है
उत्तर(d) न तो 1 और न ही 2 अनुसरण करता है — 400 में से 320 बेची गई पुस्तकों का 80 प्रतिशत है, रखे हुए स्टॉक का नहीं, और बेची गई शेष 80 पुस्तकें पाठ्यपुस्तकें नहीं थीं, जो निष्कर्ष 2 का सीधा खंडन करती हैं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
कथन : टीम का हर वह खिलाड़ी जिसने शतक बनाया, ओपनिंग बल्लेबाज़ था। रोहन टीम का वह खिलाड़ी है जिसने शतक बनाया। निष्कर्ष : 1. रोहन ओपनिंग बल्लेबाज़ था। 2. टीम का हर ओपनिंग बल्लेबाज़ शतक बना चुका था। कौन-सा/से निष्कर्ष कथन का अनुसरण करता/करते है/हैं?
- (a)केवल 1 अनुसरण करता है
- (b)केवल 2 अनुसरण करता है
- (c)1 और 2 दोनों अनुसरण करते हैं
- (d)न तो 1 और न ही 2 अनुसरण करता है
उत्तर(a) केवल 1 अनुसरण करता है — निष्कर्ष 1 बस नियम को एक नामित स्थिति पर लगाता है, जबकि निष्कर्ष 2 उसे उलट देता है: 'सभी शतकवीर ओपनर थे' से 'सभी ओपनरों ने शतक बनाए' नहीं निकलता।