दिए गए विकल्पों में से लुप्त संख्या को चुनिए : 44 49 37 52 ? 41 58 35 53
- (a)56
- (b)77
- (c)66
- (d)63
सही — B, 77। पुस्तिका इन नौ संख्याओं को तीन-गुणा-तीन के खंड के रूप में छापती है, और वही बनावट ही प्रश्न है: पहली पंक्ति में 44 49 37, दूसरी में 52 ? 41, तीसरी में 58 35 53। दो पंक्तियाँ पूरी हैं, इसलिए किसी भी संभावित नियम को एक बार प्रयोग करने से पहले दो बार जाँचा जा सकता है। किसी पंक्ति की दोनों बाहरी संख्याएँ लीजिए और घटाइए, फिर 7 से गुणा कीजिए। पंक्ति 1: 44 − 37 = 7, और 7 × 7 = 49, जो छपी हुई बीच वाली प्रविष्टि है। पंक्ति 3: 58 − 53 = 5, और 5 × 7 = 35, फिर वही छपी हुई बीच वाली प्रविष्टि। वही नियम पंक्ति 2 पर लगाने पर मिलता है 52 − 41 = 11, और 11 × 7 = 77, जो विकल्प (b) है। नियम लगाने से पहले दो स्वतंत्र पुष्टियाँ — जाल वाली मद का पूरा अनुशासन यही है, और इससे एक मुफ़्त छन्नी भी मिलती है: प्रश्नपत्र जो भी बीच वाली प्रविष्टि छापता है वह 7 का गुणज है, इसलिए जो विकल्प 7 से विभाज्य न हो उसे बिना घटाव किए ही काटा जा सकता है। अकेले इसी से 66 हट जाता है। बचे तीन गुणजों — 56, 63 और 77 — में से केवल 77 पंक्ति 2 के अंतर 11 से मेल खाता है, क्योंकि 56 के लिए 8 का अंतर चाहिए और 63 के लिए 9 का, और इनमें से कोई भी पंक्ति 2 में कहीं नहीं है।
- (a)56 — 56 = 7 × 8 है, इसलिए वह सही परिवार का है और आश्वस्त करता दिखता है। यह 8 पंक्ति 2 के दोनों सिरों के बजाय बाएँ स्तंभ में नीचे की ओर घटाने से आता है, 52 − 44। पंक्ति 1 और 3 पर स्थापित नियम पंक्ति के साथ चलता है, स्तंभ में नीचे नहीं, और पंक्ति 2 में अंतर 52 − 41 = 11 है।
- (c)66 — 66, 7 का गुणज नहीं है और इसे एक सेकंड में हटाया जा सकता है, क्योंकि दोनों छपी हुई बीच की प्रविष्टियाँ — 49 और 35 — 7 के गुणज हैं। यह 6 × 11 से मिलता है: पंक्ति 2 का सही अंतर 11, पर गुणक 7 के बजाय 6 पढ़ लिया गया, और यह चूक नियम को केवल एक पंक्ति पर जाँचने से आती है।
- (d)63 — 63 = 7 × 9 है, फिर सही परिवार पर ग़लत अंतर। घटाव में एक ही लिखने की चूक — 52 − 41 को 9 पढ़ लेना — इसे पैदा कर देती है। यह वह उत्तर भी है जिस तक अभ्यर्थी तब पहुँचता है जब वह दोनों ज्ञात अंतरों, 7 और 5, का औसत निकालकर 6 पा लेता है और फिर बहक जाता है; जाल में कुछ भी पंक्तियों के बीच अंतर्वेशन का समर्थन नहीं करता, क्योंकि नियम हर पंक्ति के भीतर अलग-अलग काम करता है।
लुप्त-संख्या वाला जाल दो आयामों में मोड़ी हुई शृंखला-मद ही है। नौ या बारह संख्याएँ एक खंड में बिछा दी जाती हैं और एक कोष्ठ ख़ाली होता है; नियम पंक्तियों के साथ चल सकता है, स्तंभों में नीचे, परिधि के चारों ओर, या दोनों विकर्णों के बीच, और परीक्षक कम-से-कम दो पूरी रेखाएँ देता है ताकि नियम लगाने से पहले उसे स्थापित किया जा सके। प्रयुक्त संक्रियाएँ जानबूझकर प्रारंभिक होती हैं — जोड़, घटाव, गुणा, भाग, या किसी अचर से गुणित कोई अंतर या योग — क्योंकि मद यह जाँच रही है कि अभ्यर्थी व्यवस्थित ढंग से खोज करता है या नहीं, यह नहीं कि वह गणना कर सकता है या नहीं। इस व्यवस्थित खोज का एक तय क्रम है: पहले पंक्तियाँ आज़माइए, क्योंकि अधिकांश जाल पंक्ति-आधारित होते हैं; यदि कोई पंक्ति-नियम दोनों पूरी पंक्तियों पर न बैठे तो स्तंभ आज़माइए; उसके बाद ही विकर्णों या पूरे खंड को देखिए। कोई नियम तभी स्वीकार्य है जब वह हर पूरी रेखा को दुहरा दे, केवल पहली रेखा के बल पर कभी नहीं।
यहाँ का तर्क दो चरणों का है, और पहला छोड़ देना ही अंक गँवाता है। पहला चरण यह पहचानना है कि ये नौ संख्याएँ जाल हैं, अनुक्रम नहीं — एक ही पंक्ति की तरह पढ़ने पर 44 49 37 52 ? 41 58 35 53 में कोई पैटर्न नहीं है, और जो अभ्यर्थी ज़बरदस्ती एक पैटर्न ढूँढ़ता रहता है उसका समय ख़त्म हो जाता है। इन्हें फिर से तीन-तीन में बाँटिए और संरचना तुरंत उभर आती है। दूसरा चरण दोनों अक्षत पंक्तियों पर नियम खोजना और ख़ाली जगह को छूने से पहले उसे दोनों पर पुष्ट करना है। अकेली पंक्ति 1 जाल है: 44 − 37 = 7 और बीच की प्रविष्टि 49 है, जो 7² भी है, इसलिए वर्ग वाला नियम पंक्ति 1 पर बिलकुल बैठ जाता है। पंक्ति 3 उसका खंडन कर देती है — 58 − 53 = 5 और 5² 25 है, छपा हुआ 35 नहीं — और दोनों पंक्तियों पर केवल 7 से गुणा वाला पाठ टिकता है। यदि वर्ग वाला नियम अपना लिया गया होता तो पंक्ति 2 से 11² = 121 निकलता, जो विकल्पों में है ही नहीं; जब आपका नियम ऐसी संख्या दे जो सूची में न हो, तो वह पंक्तियों पर लौटने का संकेत है, निकटतम विकल्प उठा लेने का नहीं। विभेदक तथ्य बस इतना है कि दोनों छपी हुई बीच की प्रविष्टियाँ अपनी-अपनी पंक्ति के बाहरी अंतर की सात गुनी हैं।
- नौ संख्याएँ 3 × 3 खंड के रूप में छपी हैं: पंक्ति 1 में 44 49 37, पंक्ति 2 में 52 ? 41, पंक्ति 3 में 58 35 53
- नियम दोनों पूरी पंक्तियों पर पुष्ट — (बाईं संख्या − दाईं संख्या) × 7 = बीच की संख्या: पंक्ति 1 देती है (44 − 37) × 7 = 49, पंक्ति 3 देती है (58 − 53) × 7 = 35
- पंक्ति 2 पर लगाने से नियम देता है (52 − 41) × 7 = 11 × 7 = 77
- हर बीच की प्रविष्टि 7 का गुणज है, इसलिए 66 कोई घटाव करने से पहले ही विभाज्यता की कसौटी पर गिर जाता है; 56 = 7 × 8 और 63 = 7 × 9 के लिए क्रमशः 8 और 9 के अंतर चाहिए, और पंक्ति 2 में इनमें से कोई नहीं है
- वर्ग वाली निकट-चूक: 49 = 7² पंक्ति 1 पर बैठ जाता है, पर तब पंक्ति 3 के लिए 5² = 25 चाहिए होता जबकि छपा है 35 — और इसीलिए किसी नियम को हर पूरी रेखा पर जाँचना अनिवार्य है
नियम उन्हीं दो पंक्तियों पर स्थापित किया जाता है जिन्हें प्रश्नपत्र पूरा करता है, और उसके बाद ही ख़ाली जगह पर लगाया जाता है। अकेली पंक्ति 1 पर 'अंतर का वर्ग' भी बैठ जाता है — उसे पंक्ति 3 ही मारती है, क्योंकि 5² = 25 है और प्रश्नपत्र 35 छापता है।
- नौ संख्याओं को फिर से 3 × 3 जाल में बाँटने के बजाय एक ही अनुक्रम की तरह पढ़ लेना
- नियम केवल पहली पूरी पंक्ति से तय कर लेना — यहाँ पंक्ति 1 पर 'अंतर का वर्ग' भी बैठ जाता है, और उसका खंडन पंक्ति 3 करती है
- पंक्ति के नियम में स्तंभ का अंतर मिला देना, और ठीक यही 56 पैदा करता है
BPSC लगातार संस्करणों में लुप्त-संख्या वाले जाल का प्रयोग करता आया है और हर बार वही वास्तुशिल्प रखता है — 3 × 3 खंड, नियम स्थापित करने के लिए दो पूरी पंक्तियाँ और एक ख़ाली कोष्ठ — बदलता केवल अंकगणितीय संक्रिया को है, 2023 में गुणित अंतर और 2025 में गुणित अनुपात। UPSC इस परिवार को सी-सैट प्रश्नपत्र II में सामान्य मानसिक योग्यता के अंतर्गत रखता है, और वहाँ यह आम तौर पर विशुद्ध संख्यात्मक नहीं, आकृति या अक्षर-आव्यूह के रूप में आता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
दिए गए विकल्पों में से लुप्त संख्या चुनिए : 30 42 23 / 41 ? 26 / 55 30 50
- (a)84
- (b)90
- (c)96
- (d)88
उत्तर(b) 90 — हर पंक्ति में (बायाँ − दायाँ) × 6 = बीच का: पंक्ति 1 देती है (30 − 23) × 6 = 42 और पंक्ति 3 देती है (55 − 50) × 6 = 30, इसलिए पंक्ति 2 देती है (41 − 26) × 6 = 90।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
नीचे दिए गए जाल में नियम हर पंक्ति के साथ चलता है। लुप्त संख्या चुनिए : 12 15 27 / 18 21 39 / 25 ? 56
- (a)29
- (b)30
- (c)31
- (d)33
उत्तर(c) 31 — हर पंक्ति की तीसरी प्रविष्टि पहले दो का योग है (12 + 15 = 27, 18 + 21 = 39), इसलिए लुप्त संख्या 56 − 25 = 31 है।